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  • 27 जुलाई से शनि होंगे वक्री, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए बढ़ेगी सतर्कता; जानिए क्या कहती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं

    27 जुलाई से शनि होंगे वक्री, कर्क, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए बढ़ेगी सतर्कता; जानिए क्या कहती हैं ज्योतिषीय मान्यताएं

    नई दिल्ली ।वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय, कर्म, अनुशासन और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 27 जुलाई 2026 से शनि मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं और 11 दिसंबर 2026 तक लगभग 138 दिनों तक इसी अवस्था में रहेंगे। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल को आत्ममंथन, जिम्मेदारियों के पुनर्मूल्यांकन और कर्मों की समीक्षा का समय माना जाता है। इस अवधि का प्रभाव सभी राशियों पर समान नहीं माना जाता, बल्कि यह व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और वर्तमान दशा पर भी निर्भर करता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि वास्तव में अपनी दिशा नहीं बदलते, बल्कि पृथ्वी और शनि की गति के अंतर के कारण पृथ्वी से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि वे पीछे की ओर चल रहे हैं। इसी खगोलीय स्थिति को वक्री गति कहा जाता है। ज्योतिष में इस समय को धैर्य, अनुशासन और अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों से बचना और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना अधिक लाभकारी हो सकता है।

    मान्यताओं के अनुसार कर्क राशि के जातकों को इस अवधि में कार्यस्थल पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने और परिवार के साथ संतुलन बनाए रखने से परिस्थितियों को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है। किसी भी महत्वपूर्ण निवेश या आर्थिक निर्णय से पहले पूरी जानकारी लेना उपयोगी माना गया है।

    वृश्चिक राशि के लोगों के लिए भी यह समय धैर्य की परीक्षा लेने वाला माना गया है। करियर, साझेदारी और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विवादों से दूरी बनाए रखना और भावनाओं में बहकर निर्णय न लेना इस अवधि में लाभदायक माना गया है। अधूरे कार्यों को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने और कार्यस्थल पर संयम बनाए रखने से सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना बताई गई है।

    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि माने जाते हैं, इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से इस राशि पर शनि की वक्री चाल का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान स्वास्थ्य, आर्थिक प्रबंधन और करियर से जुड़े मामलों में लापरवाही से बचने की सलाह दी जाती है। योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना, अनावश्यक जोखिम से दूर रहना और अपने लक्ष्यों की समीक्षा करना इस अवधि में उपयोगी माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री अवधि में शनिवार को शनि देव की श्रद्धापूर्वक पूजा करना, “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना तथा जरूरतमंद लोगों की सहायता करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान अपनी परंपरा और श्रद्धा के अनुसार किया जा सकता है। ईमानदारी, अनुशासन और परिश्रम के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने तथा क्रोध, छल और अन्याय से दूर रहने को भी इस अवधि में विशेष महत्व दिया जाता है।

    ज्योतिष विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल राशि के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति पर शनि के वास्तविक प्रभाव का आकलन उसकी जन्म कुंडली, ग्रह दशा और अन्य ज्योतिषीय योगों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही किया जा सकता है। इसलिए इस प्रकार की भविष्यवाणियों को धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

  • अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    अंक ज्योतिष का दावा, गुप्त नवरात्रि में मूलांक 2, 7 और 9 के जातक विशेष पूजा और मंत्रों से पा सकते हैं सकारात्मक परिणाम

    नई दिल्ली । आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि को सनातन परंपरा में साधना, उपासना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। इसी अवधि को लेकर अंक ज्योतिष में भी कुछ विशेष मान्यताएं प्रचलित हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस समय मूलांक 2, 7 और 9 वाले लोगों के लिए कुछ विशेष उपाय लाभकारी माने जाते हैं। कहा जाता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विधि-विधान से करने पर आर्थिक चुनौतियों में राहत, मानसिक शांति तथा कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    अंक ज्योतिष में व्यक्ति की जन्मतिथि के अंकों के योग से प्राप्त एकल अंक को मूलांक कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है तो उसका मूलांक 2 माना जाता है। इसी प्रकार 7, 16 या 25 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 7 तथा 9, 18 या 27 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 9 होता है। प्रत्येक मूलांक का संबंध किसी विशेष ग्रह से माना जाता है और उसी आधार पर अलग-अलग उपाय बताए जाते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मूलांक 2 का संबंध चंद्रमा से माना जाता है। ऐसे लोगों को गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शाम के समय घी का दीपक जलाकर माता को मखाने और चिरौंजी से बनी सफेद खीर का भोग लगाने तथा सफेद पुष्प अर्पित करने से मानसिक तनाव कम होने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने का भाव प्रबल होता है। पूजा के दौरान “ॐ दुं दुर्गायै नमः” अथवा “ॐ चमं चन्द्रमसे नमः” मंत्र का जाप भी शुभ माना गया है।

    मूलांक 7 का संबंध केतु ग्रह से जोड़ा जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार इस मूलांक के लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि की रात्रि में कपूर और दो साबुत लौंग का विशेष उपाय करने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता है कि इसे श्रद्धा के साथ करते हुए माता दुर्गा से आर्थिक स्थिरता और कर्ज से मुक्ति की प्रार्थना की जाए। साथ ही “ॐ कें केतवे नमः” मंत्र का मानसिक जाप भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे नकारात्मक प्रभावों में कमी और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल सकते हैं।

    वहीं मूलांक 9 का स्वामी ग्रह मंगल माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस मूलांक के लोग गुप्त नवरात्रि में घी का दीपक जलाकर नौ बताशों पर दो-दो साबुत लौंग रखकर माता दुर्गा को अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ लाल गुड़हल या लाल गुलाब का फूल चढ़ाने की भी परंपरा बताई गई है। पूजा के दौरान “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” अथवा “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यों में आने वाली बाधाएं कम हो सकती हैं।

    धार्मिक परंपराओं में गुप्त नवरात्रि को साधना और आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना जाता है। अंक ज्योतिष के इन उपायों का उद्देश्य व्यक्ति में सकारात्मक सोच, श्रद्धा और आत्मविश्वास का संचार करना माना जाता है। हालांकि इन उपायों के परिणाम व्यक्ति की आस्था और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं तथा इन्हें किसी वैज्ञानिक या प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। श्रद्धा, सकारात्मक प्रयास और निरंतर कर्म ही जीवन में स्थायी सफलता और आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार माने जाते हैं।

  • बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, शिक्षा, व्यापार और संचार का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। मान्यता है कि व्यक्ति के जीवन में निर्णय लेने की क्षमता, संवाद कौशल, स्मरण शक्ति और व्यावसायिक सफलता पर बुध ग्रह का विशेष प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि कुंडली में बुध की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब बुध ग्रह शुभ और मजबूत स्थिति में होता है, तब व्यक्ति को शिक्षा, करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं इसके कमजोर होने पर कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

    ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। लेखन, पत्रकारिता, बैंकिंग, अकाउंटिंग, मार्केटिंग, मीडिया और व्यापार जैसे क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुध की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को तार्किक सोच, प्रभावी अभिव्यक्ति और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसके विपरीत अशुभ बुध कई बार भ्रम, एकाग्रता की कमी, पढ़ाई में बाधा, संवाद संबंधी समस्याएं और व्यापारिक नुकसान जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर बुध ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। माना जाता है कि हरे रंग का बुध ग्रह से विशेष संबंध है, इसलिए बुधवार को हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह उपाय मानसिक संतुलन और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। बुधवार की सुबह स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक “ॐ बुधाय नमः” अथवा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से मानसिक एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सूर्योदय के बाद शांत वातावरण में किए गए जाप को विशेष फलदायी माना जाता है।

    दान को भी बुध ग्रह को प्रसन्न करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। बुधवार के दिन हरी मूंग, हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, फल अथवा कांस्य के बर्तनों का दान जरूरतमंद लोगों को करने की परंपरा बताई गई है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ कार्यों में शामिल माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में भगवान गणेश और बुध ग्रह का विशेष संबंध बताया गया है। इसलिए बुधवार को भगवान गणेश की पूजा, दुर्वा अर्पित करना तथा गणेश मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति की आराधना से बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

    बुध ग्रह के रत्न के रूप में पन्ना का विशेष महत्व बताया गया है। इसे धारण करने से बुद्धि, संवाद कौशल और निर्णय क्षमता में सुधार होने की मान्यता है। हालांकि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना आवश्यक माना जाता है ताकि व्यक्ति की कुंडली के अनुसार उचित निर्णय लिया जा सके।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए मधुर वाणी का प्रयोग, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान, सेवा कार्यों में भागीदारी तथा सकारात्मक सोच बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे उपाय व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ करियर और आर्थिक उन्नति के मार्ग को भी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं।

  • सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत

    सोशल मीडिया पर लिया वजन घटाने का उपाय, खाते ही तड़प-तड़प कर हो गई छात्रा की मौत


    मदुरै । लोग इंटरनेट या सोशल मीडिया पर अक्सर वजन घटाने के लिए उपायों की तलाश करते रहते हैं। हाल ही में यह एक छात्रा की दर्दनाक मौत का कारण बन गया। जानकारी के मुताबिक वजन घटाने के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो में बताए गए तरीके के अनुसार ‘वेंकारम’ यानी बोरेक्स का सेवन करने के बाद स्नातक की प्रथम वर्ष की एक कॉलेज छात्रा की मौत हो गई है।

    पुलिस ने मंगलवार बताया कि 19 वर्षीय कलैयारसी दिहाड़ी मजदूर वेल मुरुगन (51) और विजयलक्ष्मी की पुत्री थी और नरिमेडु स्थित एक निजी महिला कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी। वह सेलूर के मीनाम्बलपुरम इलाके की कामराज क्रॉस स्ट्रीट में रहती थी।

    पुलिस ने बताया कि वजन कुछ ज्यादा होने के कारण कलैयारसी अक्सर वजन घटाने से जुड़े उपाय तलाशती रहती थी।

    पिछले सप्ताह उसने ‘वजन घटाने और छरहरी काया के लिए वेंकारम’ शीर्षक वाला एक यूट्यूब वीडियो देखा था और 16 जनवरी को कीझामासी स्ट्रीट के थर्मुट्टी इलाके के पास स्थित दवा की एक दुकान से यह पदार्थ खरीदा।

    पुलिस ने बताया कि कलैयारसी ने 17 जनवरी को वीडियो में बताए गए तरीके से इसका सेवन किया, जिसके बाद उसे उल्टी और दस्त होने लगे। उसकी मां उसे मुनिसलाई स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उपचार के बाद उसे घर भेज दिया गया। हालांकि उसी शाम लक्षण दोबारा उभरे और पास के एक अन्य अस्पताल में इलाज के बाद घर लौटने पर उसने तेज पेट दर्द और मल में खून आने की शिकायत की।

    पुलिस के अनुसार रात करीब 11 बजे उल्टी और दस्त की स्थिति गंभीर हो गई जिसके बाद पड़ोसियों की मदद से उसे सरकारी राजाजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फिलहाल शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। सेलूर पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।