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  • बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर

    मध्य प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र में राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट रुख सामने रख दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके इस जवाब के बाद पिछले कुछ महीनों से जारी अटकलों और राजनीतिक बहस पर फिलहाल विराम लग गया है।

    बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उस समय चर्चा में आया था, जब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजा गया था। प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिले और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।

    विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने इस विषय पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि क्या शासन ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है तो नया नाम क्या होगा और लगभग तीन दशक से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।

    विधायक ने अपने प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया कि डॉ. बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देती है और यदि ऐसा है तो उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना किस आधार पर उचित माना जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय का नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई।

    उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। डॉ. बरकतउल्ला भोपाली से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने के लिए उसे संचालित करने वाले अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक होता है, जो विधेयक के माध्यम से किया जाता है। अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी निर्धारित अभिलेखों में उपलब्ध है।

    सरकार के इस आधिकारिक जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई सरकारी योजना नहीं है। इससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगने की संभावना है। हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विमर्श भविष्य में भी जारी रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में सरकार के स्पष्ट बयान ने इस विषय पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।

  • केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान

    केरल का नया नाम ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने दिया ऐतिहासिक मंजूरी, राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया सम्मान


    नई दिल्ली। केरल अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ के नाम से जाना जाएगा। मोदी कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को इस ऐतिहासिक फैसले पर मुहर लगा दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि केरल का नाम बदलने की मांग लंबे समय से राज्य और स्थानीय भाषा प्रेमियों के बीच उठती रही है, और अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दे दी है। इस कदम को राज्य विधानसभा में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल कर दिया जाएगा।

    केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को पारित करने का रास्ता पहले ही साफ कर दिया था। 24 जून, 2024 को विधानसभा ने आम सहमति से केंद्र सरकार को राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक प्रस्ताव में कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। इसके बाद दूसरी बार प्रस्ताव पारित किया गया और अब केंद्र ने इसे मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में राज्य के हित में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि यह नाम न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि मलयालम भाषा के महत्व को भी उजागर करेगा।

    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी राज्य का नाम बदलने का लंबे समय से समर्थन किया था। उनका कहना था कि ‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा और स्थानीय संस्कृति की गहनता को दर्शाता है और इससे राज्य की पहचान और गौरव बढ़ेगा। भाजपा के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य का आधिकारिक नाम बदलने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा कि ‘केरलम’ नाम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान व्यक्त करता है और राज्य की असली पहचान को दर्शाता है।

    नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित इस बैठक में केरल का नाम बदलने के अलावा भी कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इस कदम से राज्य में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल में भी एक नया उत्साह देखा जा रहा है। नाम परिवर्तन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह राज्यवासियों के लिए सांस्कृतिक गर्व और भाषाई सम्मान का प्रतीक है।

    केरल का यह नाम परिवर्तन देश के अन्य राज्यों में भी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। राज्य में स्थानीय भाषा, परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए यह एक मजबूत संदेश है। अब केरलम के नाम से राज्य की पहचान और भी व्यापक होगी, और यह राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

    संक्षेप में कहा जाए तो मोदी कैबिनेट द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी राज्य की भाषाई, सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला निर्णय है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए राज्य विधानसभा में विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके बाद यह नाम संविधान की आठवीं अनुसूची में भी दर्ज होगा। इस कदम से केरलम की सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और राज्यवासियों में गर्व की भावना और बढ़ेगी।