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  • Suzlon Energy को मिला बड़ा विंड एनर्जी ऑर्डर, शेयर में तेजी, ऑर्डर बुक और मजबूत हुई

    Suzlon Energy को मिला बड़ा विंड एनर्जी ऑर्डर, शेयर में तेजी, ऑर्डर बुक और मजबूत हुई


    नई दिल्ली। रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी एक बार फिर बाजार में चर्चा का केंद्र बन गई है। कंपनी को हाल ही में सनश्योर एनर्जी से 195 मेगावाट क्षमता वाले विंड एनर्जी उपकरणों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन का नया ऑर्डर मिला है। इस खबर के सामने आने के बाद कंपनी के शेयरों में हल्की लेकिन स्पष्ट तेजी दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी एक बार फिर इस स्टॉक की ओर बढ़ी है।

    बाजार में यह भी ध्यान देने योग्य रहा कि सुजलॉन एनर्जी का स्टॉक अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से करीब 28 प्रतिशत नीचे चल रहा था, ऐसे में इस नए ऑर्डर ने निवेशकों के बीच सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रेडिंग के दौरान शेयर ने इंट्राडे स्तर पर मजबूती दिखाते हुए लगभग 53 रुपये से ऊपर का स्तर छुआ। यह तेजी संकेत देती है कि बाजार फिलहाल कंपनी के दीर्घकालिक ऑर्डर पाइपलाइन और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में उसकी मजबूत पकड़ को लेकर आशावादी नजर आ रहा है।

    कंपनी को मिले इस नए ऑर्डर के तहत 65 विंड टर्बाइन जनरेटर की सप्लाई और इंस्टॉलेशन किया जाएगा। प्रत्येक टरबाइन की क्षमता 3 मेगावाट निर्धारित की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट को कर्नाटक के बीजापुर जिले में स्थापित किया जाएगा, जो राज्य में रिन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस ऑर्डर के जुड़ने के बाद कंपनी की 3 मेगावाट टर्बाइन प्लेटफॉर्म से कुल बिक्री लगभग 9 गीगावाट तक पहुंच चुकी है, जो कंपनी की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता को मजबूत दर्शाती है।

    सुजलॉन एनर्जी की मौजूदा ऑर्डर बुक में भी लगातार सुधार देखा जा रहा है। विशेष रूप से कर्नाटक राज्य कंपनी के लिए एक प्रमुख बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां कंपनी की कुल ऑर्डर बुक 2 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा, कंपनी कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है, जिनमें कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के लिए कुल 664 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट शामिल हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी केवल सरकारी या बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी क्षेत्र में भी उसकी पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

    कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के अनुसार, देश में विंड एनर्जी की मांग तेजी से बढ़ रही है, खासकर उन कंपनियों के बीच जो चौबीसों घंटे स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा की तलाश में हैं। बड़े औद्योगिक ग्राहक अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के बजाय रिन्यूएबल विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इस सेक्टर में ग्रोथ के नए अवसर बन रहे हैं।

    सनश्योर एनर्जी, जो इस ऑर्डर देने वाली कंपनी है, भारत में एक प्रमुख स्वतंत्र बिजली उत्पादक के रूप में काम करती है। कंपनी की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी और यह विभिन्न कॉरपोरेट ग्राहकों को लॉन्ग टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध कराती है। यह मॉडल उद्योगों को स्थिर और स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने में मदद करता है।

    कुल मिलाकर, सुजलॉन एनर्जी को मिला यह नया ऑर्डर कंपनी के लिए केवल एक व्यावसायिक उपलब्धि नहीं बल्कि बाजार में उसके भविष्य को लेकर भरोसे का संकेत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में बढ़ती मांग के बीच कंपनी की स्थिति और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

  • अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में बनाई बड़ी उपलब्धि, नवीकरणीय ऊर्जा में 5 गीगावाट से अधिक की वृद्धि

    अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में बनाई बड़ी उपलब्धि, नवीकरणीय ऊर्जा में 5 गीगावाट से अधिक की वृद्धि


    नई दिल्ली।अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने वित्त वर्ष 2025–26 में 5 गीगावाट (5,051 मेगावाट) से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़कर अपनी कुल परिचालन क्षमता 19.3 गीगावाट तक पहुंचा दी है। चीन को छोड़कर यह किसी भी कंपनी द्वारा एक साल में की गई सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड क्षमता वृद्धि मानी जा रही है।

    नई क्षमता का विवरण

    नई जोड़ी गई क्षमता में 3.4 गीगावाट सौर ऊर्जा, 0.7 गीगावाट पवन ऊर्जा और 1 गीगावाट पवन-सौर हाइब्रिड क्षमता शामिल है। कंपनी के अनुसार, यह हर साल लगभग 1 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेगी। कुल 19.3 गीगावाट क्षमता सालाना 3.6 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन ऑफसेट करने में सक्षम है।

    एजीईएल का लक्ष्य और वैश्विक महत्व


    एजीईएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा कि 5 गीगावाट से अधिक नई क्षमता जोड़ना भारत के रिन्यूएबल ऊर्जा सेक्टर के लिए अहम मोड़ है। इससे भारत को वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा में अग्रणी देश के रूप में पहचान मिलेगी और लो-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ने में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि 2030 तक 50 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य की दिशा में मजबूत कदम है।

    खावड़ा प्रोजेक्ट: दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल ऊर्जा केंद्र


    ज्यादातर नई क्षमता गुजरात के खावड़ा में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में जोड़ी गई है। 538 वर्ग किलोमीटर में फैले इस प्रोजेक्ट में अब तक 9.4 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है और 2029 तक 30 गीगावाट का लक्ष्य है।

    बैटरी स्टोरेज और तकनीकी उन्नयन


    कंपनी ने खावड़ा में 1,376 मेगावाट-घंटे की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) क्षमता भी शुरू की है। यह दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-लोकेशन प्रोजेक्ट्स में से एक है और सिर्फ 8 महीनों में पूरा किया गया। इसके जरिए ग्रिड की स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है।

    सोलर और पवन टेक्नोलॉजी का इनोवेशन

    एडवांस बाइफेशियल सोलर मॉड्यूल्स दोनों तरफ से सूरज की रोशनी लेकर बिजली बनाते हैं।
    सोलर ट्रैकर्स से उत्पादन अधिकतम किया जाता है।
    5.2 मेगावाट के पवन टर्बाइन दुनिया के सबसे शक्तिशाली ऑनशोर टर्बाइनों में शामिल हैं।
    पानी रहित रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम से सोलर पैनल की सफाई होती है, जिससे लगभग शून्य पानी की जरूरत पड़ती है और दक्षता बढ़ती है।

     अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 2026 में 5 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा जोड़कर भारत और दुनिया में रिकॉर्ड दर्ज किया। खावड़ा प्रोजेक्ट और बीईएसएस क्षमता के साथ कंपनी स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बन रही है, जबकि सोलर और पवन टेक्नोलॉजी में नवाचार से उत्पादन और दक्षता दोनों बढ़ रही है।
  • उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..

    उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..


    नई दिल्ली: पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में शामिल कर लिया है वर्ष 2017 से पहले जहां राज्य की सौर क्षमता लगभग 400 मेगावाट तक सीमित थी वहीं आज यह बढ़कर 5000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है यह बदलाव राज्य की मजबूत नीतियों बड़े निवेश और जनभागीदारी का परिणाम है

    इस बदलाव में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इस योजना के तहत सरकार ने लोगों को अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है जिससे आम नागरिक भी स्वच्छ ऊर्जा के इस अभियान का हिस्सा बन सके हैं

    रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 4 लाख से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं इससे न केवल बिजली की लागत कम हुई है बल्कि लोगों को हर महीने हजारों रुपये की बचत भी हो रही है साथ ही नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचकर आम लोग अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं

    वर्ष 2017 के बाद लागू की गई सौर ऊर्जा नीतियों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2017 और 2022 के तहत बड़े सोलर पार्क और ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया गया जिससे राज्य में निवेश भी बढ़ा और क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई

    सरकार ने सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिसमें 22000 मेगावाट सौर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है इसके लिए सरकारी भवनों का सौरकरण बड़े प्रोजेक्ट्स और नई तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है

    इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उत्तर प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं गोरखपुर और रामपुर में पायलट प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान करेंगे यह पहल राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाती है

    सौर ऊर्जा के विस्तार से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है इसके साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं खासकर सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में

    घरेलू स्तर पर भी सौर ऊर्जा ने लोगों की जीवनशैली को बदल दिया है अब सौर ऊर्जा का उपयोग केवल लाइट और पंखे तक सीमित नहीं है बल्कि इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उपकरणों के संचालन में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है इससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है

     उत्तर प्रदेश की यह प्रगति दर्शाती है कि सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है और यह राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बना रहा महत्वपूर्ण भूमिका

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में बना रहा महत्वपूर्ण भूमिका


    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत एक अहम भूमिका निभा रहा है। देश की ऊर्जा नीति अब विद्युतीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और घरेलू विनिर्माण पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री ने यह संदेश दिया, विद्युत एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने एक आलेख साझा किया।

    व्यावसायिक उद्यम और आत्मनिर्भरता पर ज़ोर

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन, व्यावहारिक नीतिगत निर्णय और आत्मनिर्भरता की दिशा में निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा क्षमता को बढ़ाना, विद्युतीकरण को बढ़ावा देना और घरेलू बाजार को मजबूत करने के प्रयास से भारत वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में मजबूत हो रहा है।”

    विद्युतीकरण और स्वच्छ ऊर्जा: भारत की देशभक्ति

    मोदी ने आगे कहा कि विद्युतीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और विनिर्माण पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ भारत वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में चौथा अध्याय लिखा जा रहा है। उन्होंने इस बदलाव से देश की विकास यात्रा और आत्मनिर्भर भारत की रणनीति के बारे में बताया।

    लेख के माध्यम से जनता को सुझाव देना

    प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल रेखा द्वारा लिखित एक लेख भी साझा किया और पाठकों से अनुरोध किया कि वे इसे पढ़ें। इसके अलावा वैयक्तिक लोगों को भारत के ऊर्जा साझीदारों और उनके शानदार सामानों की जानकारी मिली। पीएम मोदी ने कहा, “मनोहर लाल इस बात पर विचार रख रहे हैं कि भारत किस प्रकार एक मजबूत ऊर्जा इको-सिस्टम को शक्ति प्रदान कर रहा है और भविष्य की स्थिरता के लिए एक प्रतिष्ठित पर्यावरणीय तैयारी कर रहा है।”

    घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को स्थान

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा रणनीति में घरेलू उत्पादन को मजबूत करना अहम है। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा और विद्युतीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश के आर्थिक विकास और संकट में भी मदद मिलेगी।

    वैश्विक ऊर्जा पर भारत की बहुसंख्यक भूमिका

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत लगातार प्रयास कर रहा है कि वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक खिलाड़ी बने। स्वच्छ ऊर्जा और विद्युतीकरण में बढ़त के साथ, भारत वैश्विक किशोरी और प्रौद्योगिकी नवाचार में प्रमुख भूमिका निभा रही है। यह केवल देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को मजबूत करना है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में भी भारत की भागीदारी हासिल करना है।

  • स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी

    स्वच्छ ऊर्जा बनेगी भारतीय कंपनियों की नई ताकत, दुनिया के बाजारों में मिलेगा मौका: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का जोरदार बचाव किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर यह कदम अभी नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में ईरान को रोक पाना लगभग असंभव हो जाता। उनके मुताबिक यह हमला महज जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिहाज से एक रणनीतिक और समयबद्ध निर्णय था।

    ‘नागरिकों को निशाना बनाता है तेहरान’
    फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई आतंकवादियों और सैन्य ढांचों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यही तेहरान और हमारे बीच मूल अंतर है। वे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, हम आतंकियों को।”

    प्रधानमंत्री ने हालिया बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी मिसाइलें “टीएनटी से भरी बस की तरह होती हैं, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती हैं।” उनके अनुसार, एक हमले में नौ लोगों की मौत हुई। उन्होंने इसे ‘सामूहिक हत्या’ करार दिया और कहा कि दुनिया को ऐसे खतरों से बचाना जरूरी है।

    परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम बना कारण
    नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने पहले भी ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर प्रहार किया था, लेकिन इसके बावजूद तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को और आगे बढ़ाया। “हमें लगा था कि वे सबक सीखेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वे सुधार से परे हैं और अमेरिका को नष्ट करने के लक्ष्य को लेकर कट्टर हैं,” उन्होंने कहा।

    उन्होंने दावा किया कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की किसी भी सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था। यदि ये ठिकाने पूरी तरह तैयार हो जाते, तो इजरायल या अमेरिका के लिए उन्हें निष्क्रिय करना बेहद कठिन हो जाता।

    ‘देरी का मतलब होता रणनीतिक हार’
    नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि “अगर अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में कोई कदम उठाना संभव नहीं होता।” उनके अनुसार, ईरान न केवल इजरायल बल्कि अमेरिका और अन्य देशों को भी निशाना बना सकता था, उन्हें ब्लैकमेल कर सकता था और क्षेत्रीय संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ सकता था।

    उन्होंने कहा कि यह सिर्फ इजरायल की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक स्थिरता का मुद्दा है। “हमें अपनी दुनिया को इन लोगों से बचाना होगा,” उन्होंने दोहराया।

    ट्रंप की सराहना, गठबंधन पर भरोसा
    इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी निर्णायक कार्रवाई के लिए “पक्के इरादे वाले राष्ट्रपति” की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, “हम उनके बहुत मजबूत और काबिल साझेदार हैं। हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है।”

    नेतन्याहू के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक तालमेल ने इस कार्रवाई को संभव बनाया। उन्होंने संकेत दिया कि यह कदम लंबे समय से मिल रही खुफिया जानकारियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर उठाया गया।

    बढ़ता तनाव, दुनिया की नजरें
    ईरान पर हमले और उसके बाद की जवाबी कार्रवाइयों से पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि यह टकराव सीमित दायरे में रहेगा या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

    नेतन्याहू ने हालांकि साफ कर दिया है कि उनके मुताबिक यह कार्रवाई टाली नहीं जा सकती थी। “हमें अभी करना था और हमने किया। वरना ईरान की सरकार भविष्य की किसी भी कार्रवाई से सुरक्षित हो जाती,” उन्होंने कहा।