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  • मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत

    मध्यप्रदेश सरकार ने की 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की शुरुआत


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत कर दी है। मध्यप्रदेश, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। उन्होंने बताया कि दावोस में की गई घोषणा के अनुरूप प्रदेश, 24 घंटे हरित ऊर्जा देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना के लिए, मध्यप्रदेश भवन नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित प्री-बिड मीटिंग को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। नई दिल्ली में हुई बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव तथा विभिन्न कपंनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

    मध्यप्रदेश का ट्रैक रिकॉर्ड सबसे बेहतर
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में सबसे कम सौर टैरिफ स्थापित कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। शाजापुर-नीमच सोलर पार्कों ने 2.14 रूपए प्रति यूनिट का प्रदेश में सबसे कम टैरिफ अर्जित किया। हाल ही में मुरैना की 4 घंटे की स्टोरेज प्लस परियोजना के लिए 2.70 रूपए प्रति यूनिट पर पीपीए हुआ, यह देश की सबसे प्रतिस्पर्धी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक है।

    मध्यप्रदेश है देश का सबसे निवेश मित्र राज्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतियाँ, त्वरित निर्णय और उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देश-विदेश के निवेशकों से मध्यप्रदेश की ऊर्जा क्रांति के सहभागी बनने का अनुरोध किया।

    ऊर्जा में आत्मनिर्भरता है हमारा लक्ष्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केवल परियोजनाएँ स्थापित करना नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना राज्य सरकार का उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयास से 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगी। नई दिल्ली की प्री-बिड मीटिंग में टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, टोरेंट पॉवर, जिंदल रिन्युएबल, एन.टी.पी.सी., अडानी ग्रीन्स, हिन्दुस्तान पॉवर, महिंद्रा सिस्टम आदि के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

  • पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती

    पर्यावरण से गवर्नेंस तक हर मोर्चे पर मजबूत अदाणी पोर्ट्स, ESG स्कोर बढ़ने से वैश्विक भरोसे को मिली मजबूती


    नई दिल्ली । देश की अग्रणी पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स कंपनी अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड ने पर्यावरण, सामाजिक जिम्मेदारी और कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने कंपनी का ईएसजी स्कोर बढ़ाकर 84.3 कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि कंपनी सतत विकास, पारदर्शिता और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के मामले में उद्योग की अग्रणी कंपनियों में शामिल है।

    कंपनी का यह स्कोर पिछले मूल्यांकन के 81 अंकों की तुलना में 3.3 अंक अधिक है। इस सुधार के साथ अदाणी पोर्ट्स को केयरएज की ओर से ईएसजी के क्षेत्र में लीडरशिप श्रेणी में स्थान मिला है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंपनी पर्यावरणीय जोखिमों के बेहतर प्रबंधन, सामाजिक उत्तरदायित्व और मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

    कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह नई रेटिंग वार्षिक समीक्षा के बाद जारी की गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों और सुधारों को भी शामिल किया गया। रिपोर्ट में पारदर्शिता बढ़ाने और वैश्विक ईएसजी मानकों के अनुरूप नीतियों को मजबूत करने के प्रयासों को विशेष महत्व दिया गया।

    पर्यावरण के क्षेत्र में कंपनी ने कार्बन उत्सर्जन, ऊर्जा उपयोग, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरणीय मानकों को लागू करने की दिशा में उठाए गए कदमों ने भी कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है।

    सामाजिक जिम्मेदारी के मोर्चे पर भी अदाणी पोर्ट्स ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार, शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाना, कार्यस्थल पर विविधता और समान वेतन को बढ़ावा देना तथा कर्मचारियों की भागीदारी मजबूत करना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव कंपनी की सामाजिक रेटिंग पर भी देखने को मिला।

    कॉरपोरेट गवर्नेंस के क्षेत्र में बोर्ड स्तर पर ईएसजी की नियमित निगरानी, व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम और सप्लाई चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय ने कंपनी की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया है। कंपनी का कहना है कि पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत सुधार की नीति ही उसकी दीर्घकालिक सफलता का आधार है।

    कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी मानकों के मामले में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। कंपनी पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व और सुशासन के सर्वोत्तम मानकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

    इस उपलब्धि के साथ कंपनी को हाल ही में एक और बड़ी सफलता मिली थी, जब एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने उसकी लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया। एजेंसी ने कंपनी का स्टेबल आउटलुक भी बरकरार रखा। यह अपग्रेड मजबूत नकदी प्रवाह, स्वस्थ वित्तीय स्थिति और बड़े विस्तार कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया गया।

    इन लगातार मिल रही सकारात्मक रेटिंग्स ने अदाणी पोर्ट्स की वैश्विक विश्वसनीयता को और मजबूत किया है। साथ ही यह संकेत भी दिया है कि कंपनी भविष्य में सतत विकास, निवेशकों के भरोसे और जिम्मेदार कारोबारी संचालन के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • 2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन

    2030 तक 50 गीगावाट का लक्ष्य: स्वच्छ ऊर्जा और स्टोरेज से बदलेगा भविष्य, सागर अदाणी का बड़ा विजन


    नई दिल्ली । ऊर्जा सुरक्षा और सतत आर्थिक विकास आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं। ऐसे समय में स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक तकनीकों पर आधारित ऊर्जा व्यवस्था भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है। इसी दिशा में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सागर अदाणी ने कहा है कि तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और आर्थिक विकास को नई गति देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उनका मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा को आधुनिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के साथ जोड़कर ही चौबीसों घंटे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है।

    लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान लंदन के साइंस म्यूजियम में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में सागर अदाणी ने वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की दिशा में अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायत और पर्यावरणीय स्थिरता तीनों चुनौतियों का समाधान बड़े पैमाने पर विद्युतीकरण के जरिए संभव है। जो देश मजबूत अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहते हैं उनके लिए यह अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता बन चुका है।

    सागर अदाणी ने कहा कि केवल सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन पर्याप्त नहीं है। इन स्रोतों को बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ना बेहद जरूरी है। इससे स्वच्छ ऊर्जा को लगातार और भरोसेमंद तरीके से उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि अदाणी ग्रीन एनर्जी वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। गुजरात के खावड़ा में विकसित हो रहा विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाओं को भी शामिल किया जा रहा है।

    इस अंतरराष्ट्रीय संवाद में नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और जलवायु विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए मजबूत नीतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे और बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए देशों के बीच सहयोग और तकनीकी साझेदारी बेहद महत्वपूर्ण है।

    एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन के सह-अध्यक्ष लॉर्ड अडेयर टर्नर ने कहा कि यदि दुनिया को शून्य उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना है तो बिजली आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। उनके अनुसार सड़क परिवहन, भवनों की हीटिंग और औद्योगिक प्रक्रियाओं में विद्युतीकरण पहले से ही आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रहा है। वहीं नई तकनीकों की मदद से भारी उद्योगों में भी स्वच्छ बिजली का उपयोग तेजी से बढ़ाया जा सकता है।

    एम्बिशन लूप के सह-संस्थापक और यूके क्लाइमेट चेंज कमेटी के अध्यक्ष नाइजेल टॉपिंग ने कहा कि बिजली उत्पादन को कार्बन मुक्त बनाने के साथ-साथ उन क्षेत्रों का भी तेजी से विद्युतीकरण करना होगा जो अभी तक जीवाश्म ईंधन पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक बिजली ग्रिड और घटती तकनीकी लागत बड़े निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

    अदाणी समूह ऊर्जा परिवर्तन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जता चुका है। समूह नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, बिजली ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नई औद्योगिक तकनीकों में लगातार निवेश कर रहा है। हाल ही में समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भी विविध ऊर्जा पोर्टफोलियो विकसित करने और 10 गीगावाट तक परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की योजना की घोषणा करते हुए भरोसेमंद और कम कार्बन ऊर्जा भविष्य की दिशा में समूह की दीर्घकालिक रणनीति को दोहराया।

  • अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

    समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी।

    कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।

    वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।

    आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • जंग और वैश्विक तनाव के बीच चमके भारतीय मिडकैप स्टॉक्स, Suzlon और BHEL समेत कई कंपनियों ने दिया जोरदार रिटर्न

    जंग और वैश्विक तनाव के बीच चमके भारतीय मिडकैप स्टॉक्स, Suzlon और BHEL समेत कई कंपनियों ने दिया जोरदार रिटर्न

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते युद्ध जैसे हालात और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और निवेशकों की धारणा पर पड़ा है। इसके बावजूद भारतीय बाजार में कुछ मिडकैप कंपनियों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर निवेशकों को चौंका दिया है। खासतौर पर ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मजबूत तेजी दर्ज की गई है।

    बाजार में कमजोरी और भारी बिकवाली के माहौल के बावजूद कुछ मिडकैप शेयरों ने 20 प्रतिशत से लेकर 51 प्रतिशत तक की तेजी दिखाई है। इन कंपनियों में BHEL, Suzlon Energy, Thermax, Premier Energies और Ola Electric Mobility जैसी कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि निवेशक फिलहाल उन सेक्टरों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिनका सीधा संबंध ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से है।

    भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी BHEL इस रैली में सबसे आगे दिखाई दी है। कंपनी के शेयरों में पिछले कुछ महीनों के दौरान जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया और इसने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बढ़ते निवेश तथा सरकारी परियोजनाओं से कंपनी को मजबूत समर्थन मिल रहा है।

    वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की चर्चित कंपनी Suzlon Energy ने भी बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। पवन ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की सक्रियता और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। हाल के महीनों में कंपनी के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली है, हालांकि लंबे समय के उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक अब भी सतर्क नजर आ रहे हैं।

    Thermax और Premier Energies जैसी कंपनियों को भी बढ़ती ऊर्जा मांग और वैकल्पिक ऊर्जा समाधानों पर बढ़ते फोकस का फायदा मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेजी ने निवेशकों का ध्यान रिन्यूएबल और ऊर्जा दक्षता आधारित कंपनियों की ओर मोड़ दिया है। इसी कारण इन कंपनियों के शेयरों में भी लगातार मजबूती बनी हुई है।

    इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से जुड़ी Ola Electric Mobility ने भी इस दौरान तेज रिकवरी दिखाई है। हालांकि कंपनी के शेयर पहले दबाव में थे, लेकिन बाजार में सुधार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के प्रति बढ़ते भरोसे ने इसमें तेजी वापस ला दी।

    विशेषज्ञों का मानना है that वैश्विक तनाव के दौर में निवेशक ऐसे सेक्टरों में अवसर तलाशते हैं जो भविष्य की जरूरतों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े हों। यही वजह है कि रिन्यूएबल एनर्जी, स्मार्ट पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    कुल मिलाकर, बाजार में अस्थिरता और वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय मिडकैप सेक्टर के कुछ चुनिंदा शेयरों ने यह साबित किया है कि मजबूत बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं वाली कंपनियां कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    सोलर सेक्टर की इस कंपनी ने मचाई हलचल, तिमाही नतीजों में रिकॉर्ड कमाई से निवेशक उत्साहित

    नई दिल्ली ।  रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की तेजी से उभरती कंपनी Solex Energy ने अपने ताजा तिमाही नतीजों से बाजार में हलचल पैदा कर दी है। कंपनी ने चौथी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए मुनाफे में 305 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हासिल की है। इसके साथ ही कंपनी का रेवेन्यू भी कई गुना बढ़ा है, जिसने निवेशकों का ध्यान एक बार फिर अपनी ओर खींच लिया है।

    कंपनी के मुताबिक, चौथी तिमाही के दौरान उसका शुद्ध मुनाफा बढ़कर 57.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा केवल 14.3 करोड़ रुपये था। इसी तरह कंपनी की कुल आय में भी बड़ी छलांग देखने को मिली। इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 885.5 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक साल पहले 254.4 करोड़ रुपये था। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि कंपनी ने बेहद तेज रफ्तार से कारोबार का विस्तार किया है।

    कंपनी के ऑपरेटिंग प्रदर्शन में भी मजबूत सुधार देखने को मिला। EBITDA यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट 251 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 98.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 28 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन भी हल्के सुधार के साथ 11.1 प्रतिशत पर पहुंच गया, जो कंपनी की परिचालन क्षमता को मजबूत दर्शाता है।

    पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। इस दौरान कंपनी की कुल आय 1,621 करोड़ रुपये से अधिक रही, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 144 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं EBITDA 186 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया और कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स भी 132 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 98 करोड़ रुपये के पार निकल गया। इन आंकड़ों ने यह साबित किया है कि कंपनी केवल रेवेन्यू ग्रोथ ही नहीं बल्कि मुनाफे के स्तर पर भी मजबूत पकड़ बना रही है।

    कंपनी प्रबंधन का कहना है कि बीता वित्त वर्ष उसके लिए बदलाव और विस्तार का दौर रहा। Solex Energy अब केवल एक मैन्युफैक्चरिंग आधारित कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह खुद को एक इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी बिजनेस के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी आने वाले समय में वैश्विक बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।

    शेयर बाजार में भी कंपनी का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में इस स्टॉक ने निवेशकों को लगभग 3900 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। यही वजह है कि यह स्टॉक लंबे समय से निवेशकों की पसंद बना हुआ है। पिछले तीन वर्षों में भी कंपनी के शेयरों में करीब 300 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जबकि एक साल के भीतर भी स्टॉक ने मजबूत रिटर्न दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को मिल रहे सरकारी समर्थन और बढ़ती मांग का सीधा फायदा ऐसी कंपनियों को मिल रहा है, जो सोलर और क्लीन एनर्जी क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। आने वाले वर्षों में यह सेक्टर और अधिक मजबूत हो सकता है, जिससे इस तरह की कंपनियों के कारोबार में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    Solex Energy के ताजा नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी केवल तेजी से बढ़ ही नहीं रही, बल्कि निवेशकों के भरोसे पर भी लगातार खरी उतर रही है।

  • सोलर एनर्जी सेक्टर में बड़ा अपडेट: कंपनी को मिला ₹162 करोड़ का ऑर्डर, बाजार में बढ़ी दिलचस्पी

    सोलर एनर्जी सेक्टर में बड़ा अपडेट: कंपनी को मिला ₹162 करोड़ का ऑर्डर, बाजार में बढ़ी दिलचस्पी

    नई दिल्ली । सोलर एनर्जी सेक्टर में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली है, जहां सोलर पंप निर्माण से जुड़ी एक कंपनी को महाराष्ट्र की सरकारी बिजली वितरण कंपनी से ₹162 करोड़ से अधिक का महत्वपूर्ण ऑर्डर प्राप्त हुआ है। यह ऑर्डर किसानों के लिए सोलर आधारित सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है और इसके बाद कंपनी के शेयर को लेकर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ गई है।

    यह ऑर्डर प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत दिया गया है, जिसका उद्देश्य देश के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में डीजल और पारंपरिक बिजली से चलने वाले पंपों को हटाकर सोलर एनर्जी आधारित पंपों को बढ़ावा देना है। इस परियोजना के तहत कंपनी को हजारों सोलर वाटर पंपों की आपूर्ति और स्थापना का कार्य सौंपा गया है, जिसमें विभिन्न क्षमता वाले पंप शामिल होंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट केवल उपकरण आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसी सभी तकनीकी जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।

    कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि लगाए गए सभी सिस्टम्स पर पांच वर्षों तक वारंटी और मेंटेनेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके अलावा डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से प्रत्येक पंप की निगरानी भी की जाएगी, जिससे तकनीकी खराबी और संचालन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के बड़े सरकारी ऑर्डर किसी भी कंपनी के लिए रेवेन्यू ग्रोथ और बिजनेस स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यही कारण है कि इस खबर के बाद संबंधित शेयर में निवेशकों की सक्रियता बढ़ी है। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है, लेकिन पिछले कुछ समय में इस स्टॉक ने मजबूत प्रदर्शन भी दिखाया है।

    कंपनी की एक और खास बात इसकी प्रमोटर होल्डिंग है, जो 75 प्रतिशत से अधिक है। यह संकेत देता है कि कंपनी के प्रमोटर्स अपने व्यवसाय को लेकर काफी आत्मविश्वास में हैं और लंबे समय तक इसकी ग्रोथ संभावनाओं को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। इसके अलावा कंपनी के वित्तीय संकेतक जैसे रिटर्न ऑन इक्विटी और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड भी मजबूत स्थिति को दर्शाते हैं, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर माना जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में सोलर एनर्जी और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से विकास देखा गया है, जिसका मुख्य कारण सरकार की नीतियां और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाएं हैं। इसी वजह से इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लिए आने वाले समय में बड़े अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में सोलर पंपों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे इस तरह की कंपनियों के ऑर्डर बुक और बिजनेस ग्रोथ को मजबूती मिल रही है।

    हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिडकैप और छोटे शेयरों में जोखिम और उतार-चढ़ाव अधिक होता है। इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के प्रदर्शन, ऑर्डर निष्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना आवश्यक है। कुल मिलाकर यह ऑर्डर कंपनी के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले तिमाही नतीजों और प्रोजेक्ट के सफल क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

  • PM सूर्य घर योजना से घटेगा बिजली बिल, सस्ती ब्याज दर पर मिल रहा सोलर लोन

    PM सूर्य घर योजना से घटेगा बिजली बिल, सस्ती ब्याज दर पर मिल रहा सोलर लोन


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए अब आम लोगों को बिजली बिल से राहत दिलाने की बड़ी पहल तेज हो गई है। बिहार के नालंदा जिले में लोगों को इस योजना से जोड़ने और जागरूक करने के लिए बिहारशरीफ विद्युत डिवीजन कार्यालय परिसर में सोलर लोन मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और सोलर यूनिट लगवाने के लिए आवेदन किए।

    मेले का उद्घाटन जिलाधिकारी कुंदन कुमार, डीडीसी शुभम कुमार और विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता मनीषकांत ने संयुक्त रूप से किया। अधिकारियों ने लोगों को बताया कि अब बेहद कम ब्याज दर पर बैंक लोन लेकर घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाना आसान हो गया है। इससे बिजली बिल में भारी कमी आएगी और लोग ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

    डीएम कुंदन कुमार ने कहा कि सोलर ऊर्जा अपनाना केवल बिजली बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और देश सेवा से भी जुड़ा हुआ कदम है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशी ईंधन पर निर्भर होकर पूरा करता है। ऐसे में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ाना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम साबित होगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि एक सोलर यूनिट लगाने से पर्यावरण को उतना लाभ मिलता है, जितना करीब 100 पेड़ लगाने से मिलता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों में सोलर यूनिट लगाकर हर दिन सूर्य ऊर्जा का लाभ उठाएं।

    विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता मनीषकांत ने जानकारी दी कि योजना के तहत तीन किलोवाट तक के सोलर पैनल पर 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। एक किलोवाट पर 30 हजार और दो किलोवाट पर 60 हजार रुपए की सहायता मिलेगी। प्रति किलोवाट सोलर यूनिट लगाने में लगभग 60 हजार रुपए का खर्च आता है।

    अगर किसी उपभोक्ता के पास पर्याप्त राशि नहीं है तो बैंक 5 से 6 प्रतिशत की कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध करा रहे हैं। दो लाख रुपए तक के लोन के लिए केवल सामान्य दस्तावेज जैसे पहचान पत्र, फोटो, बिजली बिल और घर की रसीद की जरूरत होगी।

    कार्यपालक अभियंता विकास कुमार ने बताया कि मेले में 88 लोगों के लोन स्वीकृत किए गए, जबकि 100 से अधिक नए उपभोक्ताओं ने योजना के लिए पंजीकरण कराया। आने वाले दिनों में हजारों घरों में सोलर यूनिट लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। बीपीएल परिवारों के लिए राज्य सरकार मुफ्त सोलर प्लेट भी उपलब्ध कराएगी।

    बैंक अधिकारियों और उपभोक्ताओं ने भी इस योजना को आर्थिक बचत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। लोगों का कहना है कि सोलर यूनिट लगने के बाद उनका बिजली बिल लगभग शून्य हो जाएगा।

  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

    पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल 29 हजार 273 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इन्हें 228 करोड़ से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

    गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। तब से लेकर आज दिनांक तक हजारों बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। योजना में शामिल होने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।