Tag: Renewable

  • अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अदाणी पावर और एईएसएल में निवेश के लिए बुलिश संकेत, क्षमता विस्तार और मजबूत पीपीए की वजह

    अहमदाबाद । ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने अदाणी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों – अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड, अदाणी पावर लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड – पर बुलिश रुख अपनाया है। जेफरीज का कहना है कि इन कंपनियों में क्षमता में तेज विस्तार, मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ती मांग की वजह से निवेश के लिए आकर्षक अवसर मौजूद हैं।

    अदाणी ग्रीन एनर्जी को जेफरीज ने “बाय” रेटिंग के साथ 1,435 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज फर्म के अनुसार कंपनी वित्त वर्ष 2026 में 19.3 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता से वित्त वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट तक पहुंचने का लक्ष्य रखती है। इसमें 5 गीगावाट की पंप स्टोरेज परियोजना और बैटरी स्टोरेज सिस्टम में 10 गीगावाट से अधिक की वृद्धि शामिल है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट रिन्यूएबल ऊर्जा क्षमता का निर्माण चल रहा है, जो ग्रोथ का प्रमुख ड्राइवर है।

    अदाणी पावर पर जेफरीज ने अपनी “बाय” रेटिंग बनाए रखते हुए 255 रुपये का टारगेट प्राइस निर्धारित किया है। कंपनी वित्त वर्ष 2032 तक अपनी क्षमता 42 गीगावॉट तक बढ़ाने की योजना रखती है। इसके अलावा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों (PPA) की मजबूत पाइपलाइन से आय में सुधार की संभावना है। वर्तमान में आगामी क्षमता का लगभग 56 प्रतिशत पीपीए पहले से ही सुनिश्चित किया जा चुका है।

    अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) के लिए जेफरीज ने 1,665 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ “बाय” रेटिंग बरकरार रखी है। एईएसएल भारत की एकमात्र सूचीबद्ध प्योर प्ले ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है। कंपनी वर्तमान में 718 अरब रुपये के ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित कर रही है और स्मार्ट मीटरिंग व्यवसाय तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026 तक 11 मिलियन से अधिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं।

    जेफरीज का अनुमान है कि मध्यम अवधि में एबिटा और कर के बाद मुनाफे में मजबूत दोहरे अंकों की वृद्धि होगी। यह क्रियान्वयन की गति, डेटा सेंटर, वाणिज्यिक और औद्योगिक ऊर्जा समाधानों में बढ़ते अवसरों और स्मार्ट मीटरिंग के व्यापक विस्तार से प्रेरित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अदाणी ग्रुप की ये कंपनियां भारत में बढ़ती ऊर्जा मांग और ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से बढ़ते निवेश का लाभ उठा रही हैं। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि ग्रुप की लंबी अवधि की रणनीति और क्षमता विस्तार योजनाएं उनके पोर्टफोलियो के लिए आकर्षक साबित हो सकती हैं।

  • पीएम सूर्य घर योजना को मिली रफ्तार: देश में 25 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित

    पीएम सूर्य घर योजना को मिली रफ्तार: देश में 25 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित

    नई दिल्ली । देश में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत 5 मार्च 2026 तक देशभर में 25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस तरह यह योजना देश में सौर ऊर्जा के विस्तार और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनती जा रही है।

    राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 25,02,217 घरों में सफलतापूर्वक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि लोग इस योजना के प्रति तेजी से रुचि दिखा रहे हैं और अपने घरों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।

    सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस योजना के विस्तार पर लगातार निवेश बढ़ा रही है ताकि अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जा सके।

    दरअसल प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को वर्ष 2024 में शुरू किया गया था। यह एक डिमांड-ड्रिवन योजना है यानी इसमें वही उपभोक्ता शामिल होते हैं जो स्वयं आवेदन करते हैं। देश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता जिनके पास स्थानीय बिजली वितरण कंपनी यानी डिस्कॉम से जुड़ा बिजली कनेक्शन है वे राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना भी है।

    सरकार का अनुमान है कि यदि देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो जाते हैं तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा। इतना ही नहीं इन सोलर सिस्टम का औसत जीवनकाल करीब 25 साल माना जाता है और इस अवधि में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

    सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक इस योजना के क्रियान्वयन में गुजरात महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश केरल और राजस्थान जैसे राज्य सबसे आगे रहे हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाए हैं।

    एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है जिसमें सौर पवन जैव ऊर्जा और जल विद्युत जैसी ऊर्जा शामिल हैं। इसके अलावा 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी देश के ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रही है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को भी लागू किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन उपयोग और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है।