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  • कच्चे तेल की कीमतों में 2027 तक बड़ी गिरावट की संभावना, ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान

    कच्चे तेल की कीमतों में 2027 तक बड़ी गिरावट की संभावना, ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच आने वाले समय में बड़ी गिरावट की संभावना जताई गई है। मौजूदा समय में ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जबकि अगले महीने डिलीवरी के लिए निर्धारित डेटेड ब्रेंट की कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बताई गई है। हालांकि, अनुमान है कि वर्ष 2027 में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और ब्रेंट क्रूड का औसत भाव घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यह अनुमान पश्चिम एशिया में तेल की आपूर्ति में संभावित सुधार और वैश्विक बाजार में मांग तथा आपूर्ति के बीच बदलते अंतर पर आधारित है।

    तेल बाजार के विशेषज्ञ डान स्ट्रुवेन और उनकी टीम के आकलन के मुताबिक, दिसंबर 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। यह उनके पहले के 85 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से अधिक है। इसके बावजूद, वर्ष 2027 के लिए औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति पर पड़ा असर धीरे-धीरे कम हो सकता है। यदि आपूर्ति सामान्य होती है और बाजार में पर्याप्त तेल उपलब्ध रहता है, तो कीमतों पर दबाव घट सकता है।

    तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की एक प्रमुख वजह फारस की खाड़ी से निर्यात में हुआ सुधार बताया गया है। आकलन के अनुसार, सितंबर के अंत से इस क्षेत्र का तेल निर्यात वर्ष 2025 के औसत स्तर के आसपास बना हुआ है। इसमें प्रतिदिन लगभग 40 लाख बैरल ऐसे तेल का अनुमानित निर्यात भी शामिल है, जिसे ऐसे टैंकरों के जरिए ले जाया जाता है जिनके ट्रांसपोंडर बंद होने के कारण उनकी आवाजाही का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इस तरह निर्यात में सुधार से वैश्विक बाजार में उपलब्ध तेल की मात्रा बढ़ने की संभावना है।

    वैश्विक तेल बाजार में मांग और आपूर्ति के अंतर में कमी भी कीमतों के अनुमान को प्रभावित कर रही है। आकलन के मुताबिक, मार्च में तेल की मांग आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग 72 लाख बैरल अधिक थी, जबकि सितंबर में यह अंतर घटकर करीब तीन लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में बढ़ोतरी और कमजोर मांग ने इस अंतर को कम करने में योगदान दिया। अनुमान है कि वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल बाजार अधिशेष की स्थिति में आ सकता है। वर्ष 2027 में भी यह स्थिति बनी रहने की संभावना है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है।

    पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति में आई बाधाओं ने बाजार को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संकट से जुड़ी मांग में आई भारी कमी वर्ष 2027 की चौथी तिमाही तक काफी हद तक दूर हो सकती है। हालांकि, कीमतों में दोबारा तेजी आने का जोखिम बना हुआ है। यदि क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ता है या आपूर्ति में नई बाधाएं पैदा होती हैं, तो कच्चे तेल के दाम अनुमान से अधिक समय तक ऊंचे रह सकते हैं।

    इसलिए 80 डॉलर प्रति बैरल का स्तर फिलहाल भविष्य के बाजार का अनुमान है, निश्चित कीमत नहीं। आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, तेल निर्यात की रफ्तार, उत्पादन और वैश्विक मांग यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि कीमतें वास्तव में कितनी नीचे आती हैं।

  • दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान

    दिल्ली का सबसे महंगा रिटेल बाजार: खान मार्केट ने कायम रखा शीर्ष स्थान


    नई दिल्‍ली । दिल्ली में रिटेल मार्केट के मामले में खान मार्केट की रौनक बरकरार है। यदि आप सोच रहे हैं कि कनॉट प्लेस में दुकान खोलना सबसे महंगा है, तो आप गलत हैं। राजधानी के लुटियंस जोन में स्थित खान मार्केट आज भी देश का सबसे महंगा शॉपिंग हब बना हुआ है। सीमित जगह और बड़े बड़े ब्रांड्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने यहां किराए को लगातार ऊंचाई पर बनाए रखा है। अंतरराष्ट्रीय और प्रीमियम ब्रांड्स की मौजूदगी इसे हाई-एंड ग्राहकों के लिए खास बनाती है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, खान मार्केट में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में दुकानों का मासिक किराया 1,700 से 1,800 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां की मांग अब स्टेटस सिंबल बन चुकी है। सीमित रिटेल स्पेस और बड़े ब्रांड्स की भारी भीड़ के कारण नई जगह पाना लगभग असंभव हो गया है। यही वजह है कि खान मार्केट लगातार देश के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित शॉपिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

    कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में भी किराए में करीब 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब दुकानदारों को 1,150 से 1,250 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह किराया देना पड़ रहा है। वहीं, गुरुग्राम का गैलेरिया मार्केट सबसे अधिक 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अब कनॉट प्लेस के बराबर किराया दर्ज कर रहा है।

    उत्तर दिल्ली के छात्र और युवा केंद्रित बाजार कमला नगर में किराए में 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब यहां किराया 480 से 510 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गया है। नोएडा के सेक्टर-18 में भी किराया 8 प्रतिशत बढ़कर 200 से 220 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया है। दक्षिणी दिल्ली के प्रमुख बाजार साउथ एक्सटेंशन और लाजपत नगर  में 3 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। करोल बाग  में दुकानों का मासिक किराया बढ़कर 395 से 415 रुपये प्रति वर्ग फुट के बीच पहुंच गया है।

    कुशमैन एंड वेकफील्ड के कार्यकारी प्रबंध निदेशक गौतम सराफ का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के रिटेल बाजारों में यह उछाल प्राइम लोकेशंस पर जगह की कमी और लगातार बढ़ती मांग का संकेत है। 2025 में दिल्ली-एनसीआर में करीब 22.5 लाख वर्ग फुट रिटेल स्पेस किराए पर लिया गया, जो 2019 के बाद का सबसे उच्च स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रीमियम लोकेशंस पर बढ़ती मांग के कारण आने वाले समय में भी किराए में बढ़ोतरी का रुझान जारी रह सकता है।