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  • आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक सोमवार से, रेपो रेट यथावत रहने की संभावना

    आरबीआई की मौद्रिक समीक्षा बैठक सोमवार से, रेपो रेट यथावत रहने की संभावना


    नई दिल्ली।
    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की द्विमासिक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक 3 अगस्त से शुरू होकर पांच अगस्त तक चलेगी। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के निर्णय की जानकारी संजय मल्होत्रा 5 अगस्त को देंगे।

    आर्थिक मामलों के जानकारों ने रविवार को बताया कि आरबीआई पश्चिम एशिया संकट और महंगाई के जोखिमों को देखते हुए इस बार भी अपने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और उसे 5.25 फीसदी पर यथावत (अपरिवर्तित) रख सकता है।

    केंद्रीय बैंक ने वृद्धि दर को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल नीतिगत ब्याज दर रेपो रेट को 1.25 फीसदी की कटौती की थी। आरबीआई वर्तमान रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा है।

  • रेपो रेट स्थिर, अर्थव्यवस्था को मिला भरोसा; विकास की रफ्तार पर सकारात्मक असर

    रेपो रेट स्थिर, अर्थव्यवस्था को मिला भरोसा; विकास की रफ्तार पर सकारात्मक असर


    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (भारतीय रिजर्व बैंक) द्वारा नीतिगत रेपो दर को यथावत रखने के फैसले को अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत ने संतुलित और दूरदर्शी कदम बताया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करेगा।

    वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत
    विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत घरेलू मांग के कारण स्थिर बनी हुई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने कहा कि मौजूदा नीति एक संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिससे मध्यम और दीर्घकालिक विकास के लिए अनुकूल माहौल बना रहेगा।

    मुद्रास्फीति और ब्याज दरों पर नजर
    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि मुद्रास्फीति बढ़कर 5.9 प्रतिशत के करीब पहुंचती है, तो आने वाले समय में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। हालांकि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और आरबीआई का रुख स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित है।

    विदेशी निवेश और मुद्रा बाजार को समर्थन
    अर्थशास्त्रियों ने यह भी कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, बाहरी वाणिज्यिक उधारी और एनआरआई जमा जैसे उपायों से विदेशी मुद्रा प्रवाह को मजबूती मिल रही है। इससे रुपये की स्थिरता को भी समर्थन मिला है और बाजार में सकारात्मक संकेत देखे जा रहे हैं।

    रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर को राहत
    बैंकिंग और हाउसिंग सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिर ब्याज दरों से ऋण प्रवाह बेहतर होगा और रियल एस्टेट सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। इससे आवास की मांग में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर विशेषज्ञों की राय है कि RBI का यह कदम फिलहाल स्थिरता और भरोसा बनाए रखने वाला है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूती देता है और भविष्य में विकास की राह को सुरक्षित बनाता है।