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  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गणतंत्र दिवस की गरिमा, अमेरिका और अन्य देशों ने जताई शुभकामनाएं

    नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका ने भारत को बधाई दी और दोनों देशों के बीच गहरे और मजबूत रिश्तों का जिक्र किया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक ऐतिहासिक और मजबूत बंधन है, जो समय के साथ और अधिक व्यापक और प्रभावशाली हुआ है।

    रुबियो ने अपने संदेश में कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों की ओर से, मैं भारत के लोगों को आपके गणतंत्र दिवस पर दिल से बधाई देता हूं।” उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभा रही है।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उभरती हुई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही क्वाड मंच के तहत भी भारत और अमेरिका की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बना रही है।

    रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए ठोस और सकारात्मक परिणाम ला रहे हैं। उन्होंने भविष्य की ओर देखते हुए कहा, “मैं आने वाले वर्ष में अपने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं।”

    पिछले दो दशकों में अमेरिका और भारत के रिश्ते रक्षा, व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़े हैं। आज यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जहां दोनों देश अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर स्थिरता, आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।

    इस बीच, भूटान के पीएम त्शेरिंग तोबगे ने संदेश जारी कर भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। और लिखा, “मैं इस खुशी के गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार और लोगों को गर्मजोशी भरी और दिल से शुभकामनाएं देने में भूटान के लोगों के साथ शामिल हूं। यह अवसर देश की समृद्ध यात्रा और उस भावना का सम्मान करता है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है, साथ ही यह हमारे दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों और गहरे संबंधों को भी दर्शाता है। जैसे ही हम इस सार्थक रास्ते पर पीछे मुड़कर देखते हैं, हमें भूटान और भारत के बीच स्थायी दोस्ती की याद आती है, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी और साझा आकांक्षाएं और मजबूत होती रहेंगी। भारत में हमारे प्यारे दोस्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।”

    रूस के दूतावास ने भी भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं, जिससे भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और मित्रता का संदेश मजबूत बताया।

    रूस के दूतावास ने अलग-अलग भाषाओं में 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। रूस के दूतावास ने कहा, “भारत एक ऐसी जगह है जहां पुरानी समझ और भविष्य के सपने साथ-साथ चलते हैं। भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विविधता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। भारत का गणतंत्र हर इंसान की गरिमा में विश्वास पर आधारित है।” रूसी दूतावास की ओर भारत की विभिन्न भाषाओं में ये शुभकामनाएं दी गई।

    बांग्लादेश के दूतावास ने भी भारत को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।

    वहीं, ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “26 जनवरी ऑस्ट्रेलिया और भारतीयों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास दिन है। गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और ऑस्ट्रेलिया-भारत की मजबूत दोस्ती के एक और साल के लिए भी शुभकामनाएं।”

  • गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान: लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

    गणतंत्र दिवस पर नई उड़ान: लद्दाख स्काउट्स भारत में आइस हॉकी को नई पहचान दिलाने को तैयार

    नई दिल्ली। देश 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ते भारत में आइस हॉकी का खेल भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके केंद्र में है इंडियन आर्मी की विशेष माउंटेन इन्फेंट्री रेजिमेंट लद्दाख स्काउट्स। बर्फ से ढके पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा करने वाली यह रेजिमेंट भारत में आइस हॉकी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है।

    इस समय 2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स के छठे संस्करण का पहला चरण लेह (लद्दाख) में खेला जा रहा है। आइस हॉकी और आइस स्केटिंग जैसे खेलों में देश के बेहतरीन एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। एक बार फिर, इन खेलों में लद्दाख स्काउट्स के प्रतिनिधि, यानी आर्मी की टीम, शानदार प्रदर्शन करते हुए अजेय नजर आ रही है। गणतंत्र दिवस के मौके पर आर्मी टीम पुरुषों के फाइनल में चंडीगढ़ से भिड़ेगी।

    लद्दाख स्काउट्स का असली योगदान सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है। आइस रिंक के बाहर उनकी सोच और कोशिशें कहीं ज्यादा अहम हैं। उनका सपना है कि आइस हॉकी को केवल लेह और लद्दाख तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे देश के मैदानों और तटीय इलाकों तक पहुंचाया जाए। वे चाहते हैं कि यह खेल पूरे भारत में पहचाना जाए और युवाओं के लिए एक नया विकल्प बने।

    माना जाता है कि लद्दाख स्काउट्स ने 1970 के दशक के आखिर में आइस हॉकी खेलना शुरू किया था। उस समय न तो सही सतह थी और न ही आधुनिक उपकरण। सैनिक बर्फ पर फिसलते हुए इस खेल का आनंद लेते थे। 1980 के दशक के अंत में उन्होंने इसे गंभीरता से लेना शुरू किया। इस खेल के लिए जरूरी संसाधन विकसित किए गए और महंगे उपकरण मंगाए गए।

    साल 2000 में जब लद्दाख स्काउट्स को एक पूर्ण इन्फेंट्री रेजिमेंट का दर्जा मिला, तब आइस हॉकी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भी बढ़ गई। आज भारत में सिर्फ दो ओलंपिक-साइज आर्टिफिशियल आइस रिंक हैं एक देहरादून में और दूसरा लेह के इनडोर नवांग दोरजे स्टोबदान स्टेडियम में।

    2026 खेलो इंडिया विंटर गेम्स में हिस्सा ले रही आर्मी टीम के कप्तान पार्थ जगताप मानते हैं कि आइस हॉकी को लोकप्रिय बनाने के लिए देशभर में और रिंक बनाने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अभी यह खेल ज्यादातर लेह तक सीमित है और अगर इसे आगे बढ़ाना है तो बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। उन्होंने खेलो इंडिया पहल की तारीफ करते हुए कहा कि मीडिया कवरेज और सरकारी सहयोग से इस खेल के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है।

    पिछले साल लद्दाख स्काउट्स की ओर से भारतीय महिला आइस हॉकी टीम को आखिरी समय में दी गई फंडिंग बेहद अहम साबित हुई। इसी मदद से भारतीय महिला टीम ने यूएई में आयोजित आईआईएचएफ महिला एशिया कप में अपना पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता।

    आइस हॉकी का खेल महंगा है। पूरे आइस हॉकी गियर की कीमत चार लाख रुपये तक हो सकती है। आइस रिंक बनाना बेहद महंगा है। एक साधारण रिंक पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। यही इस खेल की सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में इस खेल को देश में विकसित करने में कॉर्पोरेट जगत की भूमिका अहम हो जाती है।

    लद्दाख स्काउट्स ने इस दिशा में पहल करते हुए कॉर्पोरेट सहयोग का विचार भी रखा है। सैनिक सिर्फ सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि कई बार वे समाज के लिए ऐसी जिम्मेदारियां भी उठा लेते हैं, जो उनकी ड्यूटी से कहीं आगे होती हैं। आइस हॉकी इसका बेहतरीन उदाहरण है।

  • गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति का जश्न: ‘बॉर्डर’ से ‘इक्कीस’ तक, देखें भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करती ये वॉर फिल्में

    गणतंत्र दिवस पर देशभक्ति का जश्न: ‘बॉर्डर’ से ‘इक्कीस’ तक, देखें भारतीय सेना के शौर्य को सलाम करती ये वॉर फिल्में

    नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और देशभक्ति का प्रतीक है। इस दिन हम वीर सैनिकों को याद करते हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सीमाओं की रक्षा की। बॉलीवुड की फिल्मों में युद्ध के कठिन हालात, सेना के साहस और बलिदान की कहानियों को शानदार तरीके से दिखाया गया है, जो दर्शकों को रोमांचित करने के साथ-साथ भावुक भी करती है। इसी कड़ी में कई वॉर-ड्रामा फिल्में हैं, जिन्हें गणतंत्र दिवस पर अपने परिवार के साथ देखना बेहतरीन अनुभव साबित होता है।

    ‘बॉर्डर’- साल 1997 में जेपी दत्ता की फिल्म ‘बॉर्डर’ रिलीज हुई थी, जिसे बॉलीवुड में एक कल्ट क्लासिक माना जाता है। फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान राजस्थान के लोंगेवाला पोस्ट की कहानी बताती है, जहां 120 भारतीय सैनिक अपनी पोस्ट की रक्षा करते हैं। फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जैकी श्रॉफ और अक्षय खन्ना जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे। युद्ध के बीच सैनिकों की हिम्मत, दोस्ती और देशभक्ति का जज्बा बड़े ही रोमांचक अंदाज में पर्दे पर दिखाई गई। ‘बॉर्डर’ ने दर्शकों को भावुक किया और उस साल की बड़ी हिट भी रही। इस कड़ी में बीते शुक्रवार इसकी सीक्वल ‘बॉर्डर 2’ रिलीज हुई। इसमें सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी ने आर्मी, नेवी और एयरफोर्स ऑफिसर्स की भूमिका निभाई है।

    ‘एलओसी कारगिल’—साल 2003 में जेपी दत्ता ने एक और वॉर-ड्रामा फिल्म ‘एलओसी कारगिल’ बनाई थी। यह फिल्म भारतीय सेना के ऑपरेशन विजय पर आधारित थी। इसमें संजय दत्त, अभिषेक बच्चन और अजय देवगन जैसे कलाकार शामिल थे। फिल्म ने दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया। इसमें कारगिल युद्ध की कठिनाइयों और सैनिकों की बहादुरी को बड़े ही प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया।

    ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’—2019 में आई ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ एक नई तरह की वॉर फिल्म थी। आदित्य धर ने इस फिल्म का लेखन और निर्देशन किया। यह 2016 में पाकिस्तान में आतंकियों के ठिकानों पर भारतीय सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित थी। विक्की कौशल ने मेजर विहान सिंह शेरगिल का किरदार निभाया और फिल्म ने अपने रिलीज के समय काफी चर्चा बटोरी। इसे दर्शकों ने न केवल पसंद किया, बल्कि यह साल की सबसे हिट फिल्मों में से एक बन गई।

    ‘शेरशाह’: साल 2021 में सिद्धार्थ मल्होत्रा की ‘शेरशाह’ रिलीज हुई। यह मेजर विक्रम बत्रा की बायोपिक थी, जिन्होंने कारगिल युद्ध में देश के खातिर अपनी जान दे दी थी। फिल्म के जरिए दर्शकों को उनकी बहादुरी और देशभक्ति का अनुभव कराया गया। विष्णुवर्धन द्वारा निर्देशित यह फिल्म न केवल भावनाओं को छूती है, बल्कि दर्शकों में देशभक्ति की भावना भी भर देती है।

    ‘इक्कीस’: साल 2026 की शुरुआत में आई ‘इक्कीस’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्त्य नंदा ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभाई। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल के बलिदान पर आधारित थी। यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म थी। ‘इक्कीस’ सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं बताती, बल्कि युद्ध के दर्द, सैनिकों के संघर्ष और उनके साहस को भी दर्शाती है।

  • गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक

    गणतंत्र दिवस 2026: तिरंगे के रंगों में निखारें अपना व्यक्तित्व, इन स्टाइलिंग टिप्स के साथ पाएं परफेक्ट लुक


    नई दिल्ली । 26 जनवरी का दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और अटूट देशभक्ति का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व पर स्कूल कॉलेज से लेकर ऑफिस तक के आयोजनों में हर कोई अपनी उपस्थिति को खास बनाना चाहता है। यदि आप भी इस खास मौके पर अपनी वेशभूषा के जरिए देशभक्ति का संदेश देना चाहती हैं और साथ ही सबसे ग्रेसफुल व शालीन दिखना चाहती हैं तो तिरंगे के रंगों का सही तालमेल आपकी सुंदरता में चार चांद लगा सकता है।

    इस विशेष अवसर के लिए ‘तिरंगा थीम’ अपनाते समय सबसे महत्वपूर्ण है रंगों का सही संतुलन। फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि केसरिया सफेद और हरे रंग का उपयोग इस तरह होना चाहिए कि वह भड़काऊ न लगे। उदाहरण के तौर पर यदि आप शांति और शुद्धता के प्रतीक सफेद रंग का कुर्ता या अनारकली सूट पहन रही हैं तो उसके साथ लहरिया स्टाइल का तिरंगा दुपट्टा कैरी करें। आप चाहें तो केसरिया रंग का कुर्ता और सफेद बॉटम के साथ हरा स्टोल भी ले सकती हैं। चूंकि जनवरी में ठंड का असर रहता है, इसलिए अपने आउटफिट के साथ एक स्टाइलिश नेहरू जैकेट या कंट्रास्ट रंग की ऊनी शॉल को शामिल करना एक स्मार्ट और गरिमामय विकल्प होगा।

    स्टाइलिंग की बात हो तो मेकअप और हेयरस्टाइल पर ध्यान देना अनिवार्य है। इस दिन के लिए लेस इज मोर कम ही ज्यादा है का मंत्र सबसे सटीक बैठता है। भारी-भरकम मेकअप के बजाय एक लाइट बेस या बीबी क्रीम का उपयोग करें। अपनी आंखों को थोड़ा पॉप-अप लुक देने के लिए आप तिरंगे के रंगों वाला आईलाइनर लगा सकती हैं या नाखूनों पर सूक्ष्म ‘ट्राई-कलर नेल आर्ट’ करवाकर अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित कर सकती हैं। बालों को बहुत ज्यादा उलझाने के बजाय एक साफ-सुथरी नीट पोनीटेल, सलीके से बना लो-बन या पारंपरिक चोटी आपके व्यक्तित्व को एक परिपक्व और गंभीर लुक देगी।

    गणतंत्र दिवस पर आपका पहनावा न केवल आपकी स्टाइल को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र के प्रति आपके सम्मान को भी प्रकट करता है। याद रखें, सादगी और शालीनता ही वह कुंजी है जो आपको भीड़ में सबसे अलग और आकर्षक बनाएगी। तो इस 26 जनवरी, आत्मविश्वास के साथ तिरंगे के रंगों को ओढ़ें और गणतंत्र का उत्सव मनाएं।

  • लोकतंत्र के पर्व पर सौगात: 25 जनवरी से आम जनता के लिए खुलेगा 'लोकभवन', जानिए समय और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया

    लोकतंत्र के पर्व पर सौगात: 25 जनवरी से आम जनता के लिए खुलेगा 'लोकभवन', जानिए समय और प्रवेश की पूरी प्रक्रिया


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लोकतंत्र के महापर्व गणतंत्र दिवस को खास बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार ऐतिहासिक ‘लोकभवन’ के द्वार आगामी 25 जनवरी से आम नागरिकों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य जनता को प्रदेश की लोकतांत्रिक और प्रशासनिक विरासत से रूबरू कराना है। नागरिक 25 जनवरी से लेकर 27 जनवरी 2026 तक निर्धारित समयावधि में भवन परिसर का भ्रमण कर सकेंगे और इसकी भव्यता का अवलोकन कर सकेंगे।

    भ्रमण का समय और प्रवेश व्यवस्था राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि आम जनता की सुविधा के लिए अलग-अलग समय तय किए गए हैं। 25 जनवरी और 27 जनवरी 2026 को लोकभवन दोपहर 2:00 बजे से शाम 8:00 बजे तक खुला रहेगा। वहीं 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के मुख्य पर्व पर भ्रमण का समय सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक रखा गया है।भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रवेश और निकास के लिए स्पष्ट मार्ग निर्धारित किए गए हैं। आगंतुकों के लिए प्रवेश गेट क्रमांक-1 से होगा जबकि भ्रमण के पश्चात निकास गेट क्रमांक-4 से सुनिश्चित किया गया है। वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था कुशाभाऊ ठाकरे सभागार मिंटो हॉल परिसर में की गई है ताकि यातायात बाधित न हो।

    आकर्षण का केंद्र: विशेष प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकभवन का यह भ्रमण केवल भवन देखने तक सीमित नहीं होगा बल्कि यहाँ आने वाले लोगों को ज्ञानवर्धक और मनोरंजक अनुभव भी मिलेगा। इस अवसर पर केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा “वीबी-जी रामजी योजना तथा वंदे भारत थीम” पर आधारित एक बेहद आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही तीनों दिन केंद्रीय संचार ब्यूरो के सांस्कृतिक दलों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी जो देशभक्ति के रंग में सराबोर होंगी।

    जनसंपर्क विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा भी एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है जिसका विषय “राजभवन से लोकभवन” रखा गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से लोकभवन की ऐतिहासिकता इसकी लोकतांत्रिक महत्ता और प्रशासनिक यात्रा को बेहद रोचक ढंग से चित्रों और दस्तावेजों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा। इतना ही नहीं आगंतुकों के लिए लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा जो प्रदेश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालेंगी।राज्यपाल सचिवालय ने प्रदेश के नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपनी ऐतिहासिक विरासत को करीब से देखें। पूरे रूट पर सुरक्षा और जनसुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि नागरिक सुगमता से अवलोकन कर सकें।

  • गणतंत्र दिवस 2026: लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा, 26 जनवरी को विशेष भ्रमण का मौका

    गणतंत्र दिवस 2026: लोकभवन 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खुलेगा, 26 जनवरी को विशेष भ्रमण का मौका


    भोपाल । गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर मध्य प्रदेश के नागरिकों के लिए एक खास मौका तैयार किया गया है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के निर्देशानुसार लोकभवन को 25 से 27 जनवरी तक आमजन के लिए खोला जा रहा है। इस तीन दिवसीय अवसर पर नागरिक न केवल राज्यपाल कार्यालय का अवलोकन कर सकेंगेबल्कि उन्हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों और लघु फिल्मों का भी आनंद लेने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही लोकभवन में चित्र प्रदर्शनी भी लगाई जाएगीजो राज्य की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को दर्शाएगी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य आमजन को लोकतांत्रिक संस्थाओं से जोड़ना और गणतंत्र दिवस के महत्व को और अधिक प्रभावी ढंग से समझाना है। उन्होंने कहा कि लोकभवन का यह खुलापन नागरिकों को राज्यपाल के कार्यालय की कार्यप्रणालीइतिहास और समकालीन गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगा।

    लोकभवन में आमजन का भ्रमण तीन दिनों के लिए निर्धारित किया गया है। 25 और 27 जनवरी को लोकभवन अपरान्ह 2 बजे से सायं 8 बजे तक खुलेगाजबकि 26 जनवरीगणतंत्र दिवस के दिन विशेष तौर पर प्रातः 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ही आमजन भ्रमण कर पाएंगे। इस दिन लोकभवन का दौरा गणतंत्र दिवस समारोह से जुड़े उत्सव और कार्यक्रमों के साथ विशेष रूप से आयोजित किया जाएगा। लोकभवन में प्रवेश और निकास की सुविधा गेट क्रमांक-1 के माध्यम से सुनिश्चित की गई है। प्रशासन ने बताया कि इस दौरान नागरिकों के आराम और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। भ्रमण के दौरान आगंतुकों को लोकभवन की ऐतिहासिक संरचनाचित्रकला और राज्य के प्रशासनिक दृष्टिकोण की झलक देखने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा नागरिकों को छोटे वीडियो और लघु फिल्मों के माध्यम से गणतंत्र दिवस की महत्ताभारतीय संविधान और लोकतंत्र की मूलभूत अवधारणाओं की जानकारी भी दी जाएगी।

    इस अवसर से आमजन न केवल राज्यपाल के दफ्तर का दौरा कर पाएंगेबल्कि उन्हें राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसारइस तरह की पहल नागरिकों में लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और भागीदारी बढ़ाने में सहायक होती है। लोकभवन में लगे चित्र और प्रदर्शनीसांस्कृतिक कार्यक्रम और लघु फिल्में सभी आयु वर्ग के नागरिकों के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक अनुभव प्रदान करेंगी। इस तरह, गणतंत्र दिवस 2026 के दौरान 25 से 27 जनवरी तक आयोजित यह विशेष आयोजन न केवल राज्यपाल कार्यालय को आमजन के करीब लाएगाबल्कि नागरिकों को लोकतंत्रसंस्कृति और प्रशासनिक प्रणाली के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाएगा। नागरिक इस अवसर का लाभ उठाकर लोकभवन के सुंदर और ऐतिहासिक वातावरण में सजीव अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

  • सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू

    सीमा पर मंडराता खतरा: LoC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर फिर दिखे पाकिस्तानी ड्रोन, सेना का 'सर्च ऑपरेशन' शुरू


    नई दिल्ली । श्रीनगर/जम्मू: गणतंत्र दिवस से पूर्व जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी ड्रोनों की बढ़ती सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। पिछले पांच दिनों के भीतर संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की यह तीसरी बड़ी घटना है, जिसके बाद सांबा और पुंछ जिलों में सेना ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। सीमा पार से होने वाली इन संदिग्ध गतिविधियों को देखते हुए भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह मुस्तैद हैं।

    ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।

    इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।

    इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध  बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।