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  • जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ और बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसे की सूचना से हड़कंप मच गया। चाई गांव के पास हेलिकॉप्टर क्रैश होने की जानकारी सामने आई है। इसमें पायलट समेत कुल छह लोग सवार बताए गए हैं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सेना की टीमों को घटनास्थल के आसपास भेजा गया है। यात्रियों की स्थिति और हादसे में किसी के हताहत होने को लेकर शुरुआती जानकारी के बाद भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेलिकॉप्टर हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि जोशीमठ के निकट चाई गांव के पास दुर्घटना की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल एयरलिफ्ट करके बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर में सवार सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की कामना भी की।

    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर बद्रीनाथ से देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर जोशीमठ घाटी के नजदीक पहुंचा, जिसके बाद उसकी लोकेशन मिलनी बंद हो गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और संभावित दुर्घटनास्थल की तलाश शुरू की गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलिकॉप्टर में कैप्टन हिमांशु पायलट के रूप में मौजूद थे। उनके अलावा पांच यात्री सवार थे। यात्रियों की पहचान प्रतापा, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज के रूप में बताई गई है। हालांकि, इन सभी की वर्तमान स्थिति को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रशासन की ओर से घटनास्थल तक पहुंचने और यात्रियों के बारे में पुष्टि करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और सेना की एक टुकड़ी को संभावित घटनास्थल के आसपास रवाना किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती बनी हुई है। हेलिकॉप्टर की आखिरी लोकेशन के आधार पर तलाश की जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता विमान का सटीक स्थान पता लगाना और उसमें सवार लोगों तक पहुंचना है।

    हादसे के बाद ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने सभी हेलिकॉप्टरों की उड़ानें रोक दी हैं। कंपनी के पूरे बेड़े का संचालन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों की जानकारी मिलने तक आगे की उड़ानों को रोकना है।

    उत्तराखंड में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का पिछला रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाने वाला रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से जुलाई 2025 के बीच राज्य में सात हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई थीं। इन हादसों में कुल 21 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, वर्ष 2023 से 2025 के बीच छह हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, राज्य में अब तक कितने हेलिकॉप्टर लापता हुए हैं, इसका अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

    जोशीमठ-बद्रीनाथ मार्ग पर हुई इस घटना के बाद अब सबकी नजरें राहत एवं बचाव अभियान पर टिकी हैं। हेलिकॉप्टर में सवार छह लोगों की वास्तविक स्थिति, दुर्घटना के कारण और घटनास्थल से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    लाल सागर में 14 भारतीयों को ले जा रही नाव पर सऊदी हवाई हमले का दावा, हूतियों ने शुरू किया बचाव अभियान

    नई दिल्ली । लाल सागर में 14 भारतीय नागरिकों को ले जा रही एक नाव पर सऊदी अरब की ओर से हवाई हमला किए जाने का दावा सामने आया है। यमन के हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि जुकर द्वीप के पास एक भारतीय नौका को निशाना बनाया गया। हूती पक्ष के अनुसार, घटना की जानकारी मिलने के बाद नाव पर सवार लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया है। हालांकि, हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और नाव पर मौजूद भारतीयों की मौजूदा स्थिति को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि सऊदी अरब ने लाल सागर में जुकर द्वीप के नजदीक इस नाव पर हवाई हमला किया। उनके मुताबिक, नौका पर 14 भारतीय नागरिक सवार थे। उन्होंने कहा कि घटना की सूचना मिलने के बाद हूती बलों की बचाव टीमों को सक्रिय किया गया, जो कथित तौर पर नाव में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं या हमले में किसी को चोट पहुंची है।

    इस घटना को लेकर सऊदी अरब प्रशासन या सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन की ओर से हमले की पुष्टि अथवा खंडन किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया दावा माना जा रहा है। भारतीय नागरिकों की संख्या और उनकी स्थिति की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

    जिस इलाके में कथित हमले की बात कही गई है, वह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक माल और ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी सैन्य कार्रवाई की खबर से समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

    हूती प्रवक्ता ने कथित हमले की निंदा करते हुए सऊदी अरब पर गैर-जिम्मेदाराना सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं लाल सागर में सामान्य नौकाओं और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। हूती पक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से मामले पर ध्यान देने तथा ऐसी सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए दबाव बनाने की अपील भी की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

    लाल सागर और यमन के आसपास का समुद्री क्षेत्र लंबे समय से क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। यहां किसी भी संभावित हमले का असर केवल स्थानीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन और व्यापार पर भी पड़ सकता है। जुकर द्वीप के पास भारतीय नागरिकों को ले जा रही नाव पर हमले का दावा इसी कारण चिंता का विषय बन गया है।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल नाव पर सवार बताए जा रहे 14 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बचाव अभियान चलाए जाने का दावा किया गया है, लेकिन उसके नतीजों का विवरण सामने नहीं आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से मामले की पुष्टि, नागरिकों की पहचान और उनकी स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने तक घटना से जुड़े दावों को सावधानी से देखना जरूरी है।

  • छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान

    छतरपुर में मिला 8 फीट लंबा दुर्लभ सफेद अजगर, पहली बार ऐसा सांप देखकर सर्प विशेषज्ञ भी रह गए हैरान


    मध्य प्रदेश:  के छतरपुर जिले में एक दुर्लभ सफेद अजगर दिखाई देने से इलाके में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के अंतिम दिन सामने आए इस नजारे ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। करीब 8 फीट लंबे इस सफेद अजगर को देखकर लोग हैरान रह गए। इसकी असामान्य रंगत के कारण इसे अल्बिनो अजगर बताया जा रहा है। सांप को देखने के बाद स्थानीय लोगों ने सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने काफी मशक्कत करते हुए उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया।

    रथयात्रा के समापन से जुड़े आयोजनों के बीच इस दुर्लभ सांप का दिखाई देना लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। सफेद रंग और लगभग 8 फीट लंबाई वाले इस अजगर को देखकर मौके पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। सूचना मिलने के बाद सर्प रेस्क्यू टीम ने स्थिति को संभाला और भीड़ के बीच सावधानीपूर्वक अजगर को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की।

    कड़ी मशक्कत के बाद किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
    स्थानीय लोगों ने विशालकाय सफेद अजगर को देखने के बाद तुरंत सर्प पकड़ने वाले विशेषज्ञों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। अजगर की लंबाई और आसपास मौजूद लोगों की भीड़ को देखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए सावधानी बरती गई। काफी मशक्कत के बाद टीम ने करीब 8 फीट लंबे अजगर का रेस्क्यू कर लिया।इस दौरान अजगर के असामान्य सफेद रंग ने लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। रेस्क्यू करने वाले विशेषज्ञ ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस तरह का पूरी तरह सफेद अजगर देखा है। उनके लिए भी यह अनुभव असामान्य था। घटना के बाद इलाके में इस दुर्लभ सांप को लेकर चर्चा होने लगी।

    क्या होता है अल्बिनो जीव?

    अल्बिनो ऐसे जीवों को कहा जाता है, जिनके शरीर में मेलेनिन नामक रंगद्रव्य की प्राकृतिक रूप से कमी होती है। मेलेनिन त्वचा, बालों और कई जीवों के शरीर के बाहरी हिस्सों में रंग निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसकी मात्रा बहुत कम होती है, तो त्वचा या शरीर का रंग सामान्य से काफी हल्का दिखाई दे सकता है।सांपों में भी रंगद्रव्य की कमी के कारण उनका रंग सामान्य प्रजाति के दूसरे सांपों से अलग नजर आ सकता है। ऐसे जीवों का रंग सफेद या बहुत हल्का दिखाई दे सकता है। हालांकि, केवल रंग के आधार पर किसी जीव को निश्चित रूप से अल्बिनो घोषित नहीं किया जा सकता। छतरपुर में मिले अजगर के अल्बिनो होने की आधिकारिक पुष्टि के लिए वन्यजीव विशेषज्ञों की जांच जरूरी है। फिलहाल इसे असामान्य सफेद रंग वाला दुर्लभ अजगर बताया जा रहा है।

    सांप दिखाई देने पर क्या करें?
    इस घटना के बाद लोगों से वन्यजीवों के प्रति सावधानी बरतने की अपील की गई है। जंगल, खेत या रिहायशी इलाके के आसपास सांप दिखाई देने पर घबराकर उसके पास जाने या उसे पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांप को छेड़ने, नुकसान पहुंचाने या उसके साथ किसी तरह का प्रयोग करने से इंसानों और वन्यजीवों दोनों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।ऐसी स्थिति में वन विभाग या प्रशिक्षित सर्प रेस्क्यू टीम को सूचना देना उचित है। विशेषज्ञ आवश्यक सावधानियों के साथ सांप को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाते हैं। छतरपुर में मिले सफेद अजगर की घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के संरक्षण और उनके साथ सुरक्षित व्यवहार के महत्व को सामने रखा है।

  • पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पेशावर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 20 बच्चों की मौत होने की खबर है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कई बच्चे और स्कूल के कर्मचारी छत के मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

    दुर्घटना के बाद बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। टीमों ने घटनास्थल पर तलाश अभियान चलाया, ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचा जा सके। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में घायल 20 बच्चों को लेडी रीडिंग अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआती जानकारी में 17 शव अस्पताल लाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद एक महिला शिक्षक का शव भी अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में हताहत हुए लोगों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर राहत अभियान के दौरान जानकारी सामने आती रही। हादसे की गंभीरता को देखते हुए बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को तलाशने में लगा रहा।

    पेशावर में हुए इस हादसे के बाद घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने अस्पतालों में भर्ती लोगों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत टीमों को भी तेजी से काम करने और मलबे के नीचे फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालने के लिए कहा गया।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों के लिए प्रार्थना की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हादसे में घायल लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बचाव दल को अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

    खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर के सूचना एवं जनसंपर्क सलाहकार समर हारून बिलौर ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घायल बच्चों को हर संभव सहायता देने को कहा। इस बीच, पेशावर के पुलिस अधिकारी डॉ. मियां सईद ने बताया कि हादसे में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    स्कूल की छत गिरने के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य का मुख्य उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है। हादसे में बच्चों की मौत से इलाके में दुख का माहौल है।

  • सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    मध्य प्रदेश: के सतना जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। इसी बीच जैतवारा थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। तुर्री नदी का उफनता पुल पार करने की कोशिश में मोटरसाइकिल सवार चाचा-भतीजे तेज बहाव में बह गए। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए भतीजे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन 50 वर्षीय रामचेरे वर्मा पानी के तेज बहाव में लापता हो गए। उनकी तलाश के लिए रविवार सुबह से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक, सतना जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते क्षेत्र की नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई स्थानों पर पानी तेज गति से बह रहा है। इसी दौरान शनिवार शाम करीब छह बजे रामचेरे वर्मा अपने भतीजे के साथ मोटरसाइकिल से नयागांव-सभापुर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें तुर्री नदी का पुल पार करना था, जहां पानी पुल के काफी ऊपर से बह रहा था।

    पुल के पास मौजूद ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने चाचा-भतीजे को उफनती नदी पार करने से रोकने की कोशिश की। लोगों ने उन्हें तेज बहाव और पानी के बढ़े हुए स्तर को देखते हुए आगे नहीं बढ़ने की सलाह दी। इसके बावजूद दोनों मोटरसाइकिल लेकर पुल पार करने के लिए नदी में उतर गए।

    बताया जा रहा है कि जैसे ही वे आगे बढ़े, पानी के तेज बहाव के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद मोटरसाइकिल समेत दोनों नदी के बहाव में बहने लगे। घटना को देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मदद के लिए आगे आए। लोगों ने दोनों को बचाने का प्रयास किया और इस दौरान भतीजे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। हालांकि, रामचेरे वर्मा तेज बहाव की चपेट में आकर दूर तक बह गए और लापता हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही जैतवारा थाना प्रभारी पंकज शुक्ला पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने लापता व्यक्ति की तलाश के प्रयास किए, लेकिन शनिवार रात खराब मौसम और अत्यधिक अंधेरा होने के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। नदी में पानी का बहाव तेज होने के चलते रात के समय तलाशी अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण था।

    रविवार सुबह राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम ने नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। बचाव दल बोट और गोताखोरों की मदद से रामचेरे वर्मा की तलाश कर रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और बहाव भी तेज है, इसलिए टीम पूरी सावधानी के साथ अभियान चला रही है।

    घटनास्थल पर एसडीएम लोकेश कुमार जांगड़े, पुलिस प्रशासन की टीम, लापता व्यक्ति के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं। सभी की नजरें बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। फिलहाल रामचेरे वर्मा का पता नहीं चल पाया है और उनकी तलाश जारी है।

    लगातार बारिश के कारण सतना जिले में नदियों के उफान पर होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। तुर्री नदी की इस घटना ने तेज बहाव के बीच पुल पार करने के जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन और बचाव दल लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं।

  • प्रयागराज से तिरुचानूर के बीच चलेगी नई स्पेशल ट्रेन, जबलपुर समेत कई शहरों को सीधी कनेक्टिविटी

    प्रयागराज से तिरुचानूर के बीच चलेगी नई स्पेशल ट्रेन, जबलपुर समेत कई शहरों को सीधी कनेक्टिविटी

    मध्य प्रदेश : के मंदसौर जिले में शनिवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में महिला और छह साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। दुर्घटना दलौदा थाना क्षेत्र के लखमा खेड़ी गांव के पास फोरलेन हाईवे पर हुई, जहां मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। वाहन में सवार मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार सभी मजदूर रतलाम जिले के रावटी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। ये मजदूर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण से जुड़े काम में मजदूरी करने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से उज्जैन लौट रहे थे। इसी दौरान लखमा खेड़ी गांव के पास पीछे से आए ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी।

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही दलौदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

    हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान बसंती बाई के रूप में हुई है, जबकि मृत बच्ची छह वर्षीय प्रियंका थी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।

    दुर्घटना में कुल 19 लोग घायल हुए हैं। इनमें छह घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई गई है। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे में घायल लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। एडीएम एकता जायसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और चिकित्सकों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ट्रक की रफ्तार, चालक की लापरवाही और टक्कर के कारणों सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर काम पूरा करने के बाद वापस लौट रहे थे। अचानक पीछे से हुई टक्कर के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना देने के साथ राहत कार्य में भी मदद की।

    फिलहाल घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। छह लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उनके इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और दुर्घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

  • मंदसौर में मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने मारी टक्कर, महिला और छह साल की बच्ची की मौत

    मंदसौर में मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को ट्रक ने मारी टक्कर, महिला और छह साल की बच्ची की मौत

    मध्य प्रदेश : के मंदसौर जिले में शनिवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में महिला और छह साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि 19 लोग घायल हो गए। दुर्घटना दलौदा थाना क्षेत्र के लखमा खेड़ी गांव के पास फोरलेन हाईवे पर हुई, जहां मजदूरों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी।

    टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गई। वाहन में सवार मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और हाईवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार सभी मजदूर रतलाम जिले के रावटी क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं। ये मजदूर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण से जुड़े काम में मजदूरी करने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से उज्जैन लौट रहे थे। इसी दौरान लखमा खेड़ी गांव के पास पीछे से आए ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी।

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही दलौदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ट्रैक्टर-ट्रॉली के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला गया और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

    हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान बसंती बाई के रूप में हुई है, जबकि मृत बच्ची छह वर्षीय प्रियंका थी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया।

    दुर्घटना में कुल 19 लोग घायल हुए हैं। इनमें छह घायलों की हालत बेहद नाजुक बताई गई है। सभी घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे में घायल लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। एडीएम एकता जायसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और चिकित्सकों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस ट्रक की रफ्तार, चालक की लापरवाही और टक्कर के कारणों सहित अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

    यह हादसा उस समय हुआ जब मजदूर काम पूरा करने के बाद वापस लौट रहे थे। अचानक पीछे से हुई टक्कर के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना देने के साथ राहत कार्य में भी मदद की।

    फिलहाल घायलों का जिला अस्पताल में उपचार जारी है। छह लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उनके इलाज पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और दुर्घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है।

  • मिर्जापुर में गंगा में कूदी महिला 14 घंटे बाद 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट पर मछुआरों को जीवित मिली

    मिर्जापुर में गंगा में कूदी महिला 14 घंटे बाद 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट पर मछुआरों को जीवित मिली

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा में कूदी एक महिला को करीब 14 घंटे बाद जीवित बरामद कर लिया गया। महिला मंगलवार शाम शास्त्री पुल से गंगा में कूदी थी। पूरी रात तेज धारा में बहने के बाद वह शास्त्री पुल से करीब 35 किलोमीटर दूर चुनार घाट के पास पहुंच गई। बुधवार सुबह गंगा में मछली पकड़ रहे मछुआरों की नजर महिला पर पड़ी। उन्होंने उसे पानी से बाहर निकाला और पुलिस को सूचना दी। महिला की हालत खराब होने पर चिकित्सकीय उपचार कराया गया। बाद में पुलिस ने उसका बयान दर्ज करने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया।

    पुलिस के अनुसार कछवां के बरैनी गांव निवासी 38 वर्षीय सुनीता साहनी की शादी करीब 18 वर्ष पहले कटरा के छोटी बसही मोहल्ला निवासी सूर्यबली से हुई थी। सूर्यबली गुजरात के जामनगर में काम करता है। बताया गया कि सुनीता किसी बात को लेकर नाराज थी और मंगलवार शाम उसने शास्त्री पुल से गंगा में छलांग लगा दी। घटना की जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश की गई, लेकिन तत्काल उसका पता नहीं चल सका।

    इसके बाद गंगा की तेज धारा महिला को बहाकर चुनार की ओर ले गई। बुधवार सुबह करीब सात बजे चुनार घाट पर गणेश साहनी, रामबाबू साहनी और रंजीत साहनी गंगा में मछली पकड़ रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पानी में एक महिला को बहते हुए देखा। मछुआरों ने उसे बाहर निकाला और पुलिस को घटना की सूचना दी।

    नदी से निकाले जाने के बाद महिला की हालत खराब थी। उसकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टर को बुलाकर उपचार कराया गया। उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ। होश में आने पर महिला ने पुलिस को घटना के संबंध में जानकारी दी और बताया कि वह पति की एक बात से आहत होकर घर से निकली थी।

    महिला के अनुसार मंगलवार शाम करीब चार बजे उसने अपने पति को फोन कर दवा खरीदने के लिए पैसे भेजने को कहा था। उसके मुताबिक पति ने पैसे भेजने से इनकार कर दिया और उससे कहा, “मेरा तुमसे कोई मतलब नहीं, जाकर मर जाओ।” महिला ने बताया कि पति की इस बात से आहत होकर वह घर से निकल गई और शास्त्री पुल पर पहुंचकर गंगा में छलांग लगा दी।

    पुलिस की पूछताछ में महिला का अपनी सास के साथ विवाद होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार महिला ने अपने बयान में पति की बात से आहत होकर गंगा में छलांग लगाने की जानकारी दी है। महिला के जीवित मिलने के बाद पुलिस और उसके परिजनों ने राहत की सांस ली।

    चुनार कोतवाल विजयशंकर सिंह के अनुसार मंगलवार शाम एक महिला के शास्त्री पुल से गंगा में कूदने की सूचना मिली थी। महिला अगले दिन चुनार घाट के पास मिली। उपचार के बाद उसकी हालत ठीक बताई गई और उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। महिला के शास्त्री पुल से चुनार तक पहुंचने की दूरी करीब 35 किलोमीटर बताई गई है। गंगा की तेज धारा में कई घंटे बहने के बाद महिला का जीवित मिलना इस घटना का प्रमुख पहलू रहा।

  • SRCC समारोह में पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, 2013 के दौर को याद कर महंगाई और घोटालों का किया जिक्र

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    नई दिल्ली । दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इमारत के मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों ने तत्काल अभियान शुरू कर दिया। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

    सत्य निकेतन राजधानी दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और अन्य लोग रहते हैं। शुरुआती रिपोर्टों में इमारत में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई है, जिसके कारण बचाव अभियान को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौके पर मौजूद टीमें प्राथमिकता के आधार पर उन स्थानों की पहचान कर रही हैं जहां से किसी व्यक्ति के फंसे होने की संभावना अधिक है।

    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

  • दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में इमारत गिरने से मचा हड़कंप, दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं, मलबे में दबे लोगों की तलाश तेज

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    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना दोपहर करीब 1:30 बजे के आसपास हुई। इमारत के अचानक गिरने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को अलर्ट किया गया। इसके बाद दमकल की कई टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हुईं और मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे की जांच कर रहे हैं, ताकि अंदर मौजूद लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके।

    हादसे की गंभीरता को देखते हुए मौके पर राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। मलबे के नीचे कितने लोग फंसे हैं, इसकी सटीक संख्या फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और आपातकालीन टीमें स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जाएगा, अंदर फंसे लोगों की स्थिति और हादसे में हुए नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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    बचाव कार्य के दौरान स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। हालांकि, मलबे को हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि किसी भी तरह की जल्दबाजी से फंसे लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। आपातकालीन दल घटनास्थल पर लगातार काम कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    हादसे के कारणों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इमारत की संरचनात्मक स्थिति, निर्माण कार्य या अन्य संभावित वजहों की जांच के बाद ही दुर्घटना का वास्तविक कारण सामने आएगा। लगातार बारिश के बीच दिल्ली में भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है, हालांकि इस हादसे के लिए बारिश को जिम्मेदार मानना अभी जल्दबाजी होगी।

    प्रशासन की ओर से आसपास के क्षेत्र में भी सुरक्षा का जायजा लिया जा रहा है। बचाव अभियान पूरा होने के बाद इमारत के ढहने से हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों की ओर से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। दमकल और अन्य राहत दल लगातार अभियान में जुटे हैं। अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और कितने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।