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  • नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नेपाल में बाढ़ से 105 भारतीय समेत 300 विदेशी पर्यटक लापता, बिहार के आठ जिलों में गंडक को लेकर हाई अलर्ट जारी

    नई दिल्ली ।नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी के तेज बहाव से घरों, पुलों, वाहनों और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार, 105 भारतीय पर्यटकों समेत 300 से अधिक विदेशी नागरिकों के लापता होने की सूचना है। प्रभावित क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों के अलावा नेपाली नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं। अलग-अलग रिकॉर्ड की जांच के चलते लापता लोगों की संख्या में बदलाव संभव है।

    पर्यटन और यात्रा क्षेत्र से मिले शुरुआती आंकड़ों में प्रभावित इलाकों से कुल 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों, स्थानीय गाइड और यात्रा कंपनियों के रिकॉर्ड का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

    लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। राहत और तलाश अभियान को तेज करने के लिए 15 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। दुर्गम और प्रभावित इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।

    बाढ़ के कारण नेपाल में बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। तेज बहाव की चपेट में आने से 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई परियोजनाओं के बांध, विद्युतगृह और वहां तक पहुंचने वाले मार्गों को नुकसान पहुंचने की जानकारी है। बाजारों और सीमा क्षेत्र में खड़े कई वाहन भी पानी के बहाव में बह गए।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। रसुवा, नुवाकोट, चितवन और धादिंग की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही रोकी गई है। नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।

    नेपाल में बाढ़ की स्थिति का असर बिहार पर भी पड़ने की आशंका के चलते राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है। नेपाल सीमा से जुड़े पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

    बिहार आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब तीन मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। इसके मद्देनजर गंडक और अन्य प्रमुख नदियों के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत और बचाव व्यवस्था को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर संभावित बाढ़ की स्थिति और तैयारियों का जायजा लिया गया। बेतिया, मोतिहारी, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली समेत संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सीतामढ़ी और शिवहर में भी हालात पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

    गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से फोन पर बातचीत कर नेपाल में आई बाढ़ और बिहार में संभावित प्रभाव को लेकर तैयारियों की जानकारी ली। एनडीआरएफ की कई टीमों को छह जिलों में तैनात किया गया है। कोसी, गंडक और गंगा के आसपास के इलाकों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। फिलहाल प्रशासन का जोर संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने पर है।

  • चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान

    चमोली टनल हादसा: पानी और मलबा गले तक भरा…., नीले ड्रमों के सहारे रेस्क्यू में जुटे जवान


    चमोली।
    अलकनंदा नदी (Alaknanda River) पर निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना (Vishnugad-Pipalkoti Hydroelectric Project) की टीआरटी (टेल रेस टनल) में जिस स्थान पर मजदूर काम कर रहे थे, वहां से करीब 150 मीटर दूर हुए भूस्खलन (Landslide) के बाद पानी के साथ पत्थर और मलबा टनल के अंदर घुस गया, जिसकी चपेट में कई मजदूर आ गए।

    बताया जा रहा है कि टनल में गले तक पानी और मलबा भर गया है। रात करीब दस बजे एनडीआरएफ की टीमें तीन वाहनों से टनल में घुसी। नीले रंग के ड्रम भी टनल में ले जाए गए हैं। पानी में इन ड्रमों के सहारे आगे बढ़कर जवान रेस्क्यू अभियान में जुटे हैं। देर रात तक घायलों का रेस्क्यू अभियान जारी था।

    वहीं, टनल में अधिक पानी भरने के कारण रेस्क्यू में दिक्कतें आ रही हैं। एसपी चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि श्रीनगर गढ़वाल से राफ्ट मंगाई गई है, उससे लापता छह लोगों का रेस्क्यू किया जाएगा।

    उधर, प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हादसा है। उन्होंने बताया कि हमारी पहली प्राथमिकता सभी फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए सभी संसाधनों को पूरी तरह से लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी और घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी।

    बताया कि प्रोजेक्ट की मैनेजमेंट टीम भी राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तरह जुटी हुई है। प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत कार्य तब तक जारी रहेगा, जब तक सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता।

    बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है और अन्य फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

  • भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    भारतीय कार्गो शिप पर समुद्र में बड़ा हमला, रेस्क्यू ऑपरेशन से बचाए गए सभी नाविक, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । यमन के तटीय क्षेत्र के पास भारतीय मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। भारतीय मालवाहक पोत ‘फैज नूरे औलिया’ अज्ञात दिशा से आए एक प्रोजेक्टाइल की चपेट में आने के बाद गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर के प्रभाव से जहाज का संतुलन बिगड़ गया और उसमें तेजी से पानी भरने लगा। कुछ ही समय बाद जहाज समुद्र में पलटकर डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी 14 चालक दल के सदस्यों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

    घटना के तुरंत बाद यमन के तटरक्षक बलों ने बड़े स्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। समुद्र में फंसे चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने के लिए कई बचाव इकाइयों को तैनात किया गया। अभियान के दौरान 13 भारतीय नागरिकों सहित सभी 14 नाविकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद उन्हें मोखा बंदरगाह पहुंचाया गया, जहां उनकी आवश्यक चिकित्सा जांच और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गईं। अधिकारियों ने बताया कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति सामान्य बनी हुई है।

    घटना की जानकारी मिलते ही भारत सरकार ने इस हमले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने इसे बिना किसी उकसावे के किया गया हमला बताया और समुद्री व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस प्रकार की घटनाएं वैश्विक व्यापार और नौवहन व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। भारत ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमलों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    सरकार की ओर से महानिदेशक समुद्री प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरे मामले की निगरानी करने, प्रभावित चालक दल को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही स्थिति पर लगातार नजर रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक उपायों पर भी जोर दिया गया है।

    भारत ने इस कठिन परिस्थिति में त्वरित बचाव अभियान चलाने वाले यमन के अधिकारियों और तटरक्षक बलों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण ही सभी नाविकों की जान बचाई जा सकी। इस बीच समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। भारत ने सुरक्षित समुद्री आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार पर भी व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना समय की आवश्यकता बन गई है।

  • मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    मदुरा द्वीप के पास यात्री फेरी में भीषण आग, पांच लोगों की मौत और 41 यात्रियों की तलाश जारी

    नई दिल्ली । इंडोनेशिया के मदुरा द्वीप के निकट समुद्र में रविवार को एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया, जब यात्रियों से भरी एक फेरी में अचानक भीषण आग लग गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 41 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापक स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। कई बचाव जहाजों और राहत दलों को मौके पर भेजा गया है, जो लापता लोगों की तलाश में लगातार जुटे हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त फेरी पूर्वी जावा प्रांत के सुराबाया शहर से दक्षिण सुलावेसी के मकासर के लिए रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान जावा के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित मदुरा द्वीप के पास अचानक जहाज में आग भड़क उठी। आग तेजी से फैलने के कारण जहाज पर सवार यात्रियों और चालक दल के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही समुद्री बचाव एजेंसियों को सक्रिय किया गया और आसपास मौजूद जहाजों को भी राहत कार्य में शामिल किया गया।

    अधिकारियों ने बताया कि फेरी में यात्रियों और चालक दल सहित कुल 271 लोग सवार थे। अब तक 225 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। बचाए गए यात्रियों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं लापता 41 लोगों की तलाश के लिए समुद्र के विस्तृत क्षेत्र में खोज अभियान चलाया जा रहा है। राहत दल समुद्री परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लगातार तलाशी अभियान संचालित कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित खोजा जा सके।

    घटना के बाद संबंधित एजेंसियों ने आसपास के समुद्री मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। बचाव कार्य में कई जहाजों के अलावा अन्य समुद्री संसाधनों का भी उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फेरी में आग कैसे लगी, इसका पता लगाने के लिए तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आग लगने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।

    इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े द्वीपीय देशों में शामिल है, जहां हजारों द्वीपों के बीच आवागमन के लिए फेरी सेवाएं प्रमुख परिवहन माध्यम हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन समुद्री मार्गों का उपयोग करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री दुर्घटना का प्रभाव व्यापक स्तर पर पड़ता है और राहत एजेंसियों के सामने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।

    देश में इससे पहले भी कई समुद्री दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। जुलाई 2025 में उत्तरी सुलावेसी प्रांत के पास एक यात्री जहाज में आग लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इससे पहले वर्ष 2021 में मोलुक्का सागर में एक अन्य फेरी में आग लगने के बाद सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया था। इन घटनाओं के बाद समुद्री सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया जाता रहा है।

    मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा है कि लापता लोगों की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता है। राहत अभियान लगातार जारी है और जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा

    पांढुर्णा में तीन दिन तक 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठा रहा युवक, SDRF और पुलिस ने सुरक्षित उतारा


    पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में पिछले तीन दिनों से चल रहा हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन बुधवार शाम सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। करीब 350 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़े एक युवक को पुलिस और SDRF की टीम ने लगभग 51 घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षित नीचे उतार लिया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस और बचाव दल लगातार मौके पर तैनात रहे।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम एक युवक हाथ में शराब की बोतल लेकर अचानक मोबाइल टावर पर चढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने उसे रोकने और नीचे आने के लिए आवाज लगाई, लेकिन उसने किसी की बात नहीं सुनी और टावर के सबसे ऊपरी व संकरे हिस्से पर जाकर बैठ गया। घटना की सूचना मिलते ही पांढुर्णा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई।

    थाना प्रभारी अमित दाणी ने बताया कि युवक अत्यधिक शराब के नशे में था। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से कई बार उसे नीचे उतरने की अपील की, लेकिन उसने किसी भी प्रयास का जवाब नहीं दिया।

    सुरक्षा के लिए किए गए विशेष इंतजाम
    संभावित हादसे को देखते हुए प्रशासन ने टावर के चारों ओर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। यदि युवक नीचे गिर जाए तो उसकी जान बचाई जा सके, इसके लिए टावर के नीचे गद्दे बिछाए गए और सुरक्षा जाल (नेट) लगाया गया। स्थानीय स्तर पर प्रयास सफल नहीं होने पर तत्काल SDRF की टीम को बुलाया गया।

    चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
    टावर की ऊंचाई और युवक की अस्थिर स्थिति के कारण बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रात के समय अंधेरा और तेज ऊंचाई के बीच युवक लगातार खतरनाक हरकतें करता रहा, जिससे उसके गिरने का खतरा बना हुआ था। पुलिस और SDRF की टीम ने लगातार धैर्य के साथ बातचीत कर उसे शांत रखने की कोशिश की और पूरी रणनीति के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा।

    बुधवार शाम सुरक्षित उतारा गया युवक
    करीब 51 घंटे तक चले अभियान के बाद बुधवार शाम लगभग 7 बजे SDRF और पुलिस की टीम ने तकनीकी कौशल और सतर्कता के साथ युवक को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया और नीचे उतार लिया। उसके सुरक्षित जमीन पर पहुंचते ही मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और बड़ी संख्या में एकत्र लोगों ने राहत की सांस ली।

    फिलहाल युवक की चिकित्सकीय जांच कराई जा रही है। पुलिस उसके पूरी तरह होश में आने का इंतजार कर रही है, ताकि उसकी पहचान और मोबाइल टावर पर चढ़ने के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

  • MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर

    MP: मैहर के इस गांव में कुएं में गिरे बैल को बचाने की कोशिश में 3 लोगों की मौत, एक गंभीर


    मैहर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर जिले (Maihar district) के अमरपाटन थाना (Amarpatan Police Station) क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। यहां के ग्राम खरामसेड़ा (Village Kharamseda) के अहिरान टोला में शुक्रवार की रात कुएं में गिरे एक बैल की जान बचाने के चक्कर में तीन घरों के चिराग हमेशा के लिए बुझ गए।

    दरअसल बैल को बाहर निकालने की कोशिश में चार ग्रामीण एक-एक कर कुएं की गहराई में उतरे, लेकिन भीतर मौजूद जहरीली गैस और ऑक्सीजन की भारी कमी के चलते चारों अचेत हो गए। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद चारों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि एक की हालत नाजुक बनी हुई है।

    इस हादसे की शुरुआत शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे उस वक्त हुई, जब गांव के रामनिवास कुशवाहा के घर के पास बने करीब 35 फीट गहरे कुएं में अचानक एक बैल गिर गया। बैल को कुएं में तड़पता देख गांव के दो युवक उसे सुरक्षित बाहर निकालने की नीयत से रस्सी के सहारे गहराई में उतरे और कुएं की तली में पहुंचते ही ऑक्सीजन ना मिल पाने के कारण दोनों का दम घुटने लगा और कुछ ही देर में ऊपर खड़े लोगों को उनकी आवाज आना बंद हो गई। उन्हें अचेत होते देख, बाहर खड़े दो अन्य ग्रामीण भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्हें बचाने के लिए फौरन कुएं में कूद गए, लेकिन अफसोस वे भी उसी जहरीली हवा की चपेट में आकर वहीं निढाल हो गए।


    रस्सियों और कांटों के सहारे ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू

    चार लोगों के नीचे उतरने के बाद भी जब काफी देर तक जब कुएं के भीतर से कोई हलचल नहीं हुई और किसी की आवाज बाहर नहीं आई, तो कुएं के मुहाने पर खड़े ग्रामीणों के होश उड़ गए और किसी अनहोनी की आशंका से वहां चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए खुद ही बचाव अभियान शुरू किया। रस्सियों, हुक और कांटों के सहारे चारों अचेत लोगों को भारी मशक्कत के बाद एक-एक कर कुएं से बाहर निकाला गया। इसी बीच डायल-112 पुलिस को भी सूचना दी गई। रात करीब 9 बजे सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चारों को तत्काल सिविल अस्पताल अमरपाटन ले जाया गया।


    अस्पताल पहुंचते ही तीन को मृत घोषित किया

    अमरपाटन सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद तीन ग्रामीणों को मृत घोषित कर दिया, जिससे अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों में कोहराम मच गया। मृतकों की पहचान कृष्ण कुमार यादव (28 वर्ष) पिता रामदास यादव, वीरेंद्र यादव (47 वर्ष) पिता जगदीश यादव और राहुल यादव (34 वर्ष) पिता मोतीलाल यादव के रूप में हुई है। ये तीनों मृतक अहिरान टोला, खरमसेड़ा के ही रहने वाले थे। वहीं, चौथे ग्रामीण रामचंद्र यादव की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका डॉक्टरों की देखरेख में आईसीयू में इलाज जारी है।


    कुएं में भरा था घुटनों तक पानी, पीएम रिपोर्ट का इंतजार

    बताया जा रहा है कि कुआं लगभग 35 फीट गहरा है, जिसमें घुटनों तक पानी भरा हुआ था। लेकिन लंबे समय से बंद रहने या हवा का प्रवाह न होने के कारण कुएं के निचले हिस्से में जानलेवा कार्बन मोनोऑक्साइड या अन्य जहरीली गैसें जमा हो गई थीं। अमरपाटन एसडीओपी ख्याति मिश्रा ने बताया कि ‘रामनिवास कुशवाहा के कुएं में एक बैल गिर गया था, जिसे बचाने के लिए चार लोग नीचे उतरे थे। समय पर वापस नहीं आने पर ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया, जहां तीन लोगों की मौत हो चुकी है और एक का इलाज जारी है। प्रथम दृष्टया मामला दम घुटने का लग रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम (पीएम) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।’

  • जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला

    जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला


    सीधी । मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मंगलवार का दिन उस समय दहशत में बदल गया जब रामपुर नैकिन क्षेत्र के शिकारगंज स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर लपटों से घिर गया और हर तरफ धुआं और अफरा तफरी का माहौल बन गया लेकिन इसी बीच एक महिला की सूझबूझ और साहस ने सात मासूम बच्चों की जिंदगी बचा ली।

    घटना सुबह करीब 11 बजे की है जब आंगनवाड़ी केंद्र में सात छोटे बच्चे मौजूद थे और उनकी देखरेख कर रही थीं कार्यकर्ता उर्मिला द्विवेदी। अचानक पास के क्षेत्र से आग उठती नजर आई जो तेजी से फैलते हुए केंद्र के आसपास पहुंचने लगी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उर्मिला द्विवेदी ने बिना किसी घबराहट के तुरंत निर्णय लिया और एक एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने न केवल बच्चों को आग से दूर पहुंचाया बल्कि उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाकर राहत की सांस ली।

    कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आंगनवाड़ी भवन के तीनों ओर ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के लोग भी सहम गए लेकिन जैसे ही घटना की जानकारी फैली ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालांकि आग लगातार फैलती जा रही थी और उस पर काबू पाना आसान नहीं था।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आग पास के जंगल की ओर बढ़ने लगी जिससे बड़े क्षेत्र में नुकसान की आशंका पैदा हो गई। तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन टीम को मौके तक पहुंचने में कुछ समय लगा। करीब आधे घंटे बाद दमकल दल घटनास्थल पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इसके साथ ही डायल 112 और 108 की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं।

    ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने मिलकर लगातार प्रयास किए लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लपटें शांत नहीं हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई।

    रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत मौके पर भेजा गया था और प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह पूरी घटना एक बड़ी चेतावनी भी है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी साबित करती है कि मुश्किल हालात में सही समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है। उर्मिला द्विवेदी की सतर्कता और साहस ने आज सात परिवारों को एक बड़ी विपत्ति से बचा लिया।

  • खंडवा में बेकाबू ट्रक हादसा: शिक्षक की मौत, घंटों की कोशिश के बाद निकाला शव

    खंडवा में बेकाबू ट्रक हादसा: शिक्षक की मौत, घंटों की कोशिश के बाद निकाला शव


    खंडवा । पिपलोद खास बस स्टैंड के पास मंगलवार तड़के करीब 3 बजे एक भयानक सड़क हादसा हुआ जिसमें शिक्षक सोहन सिंह चौहान की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार ट्रक बस स्टैंड के टर्न पर पहुंचा तो ड्राइवर का स्टेयरिंग नियंत्रण से बाहर हो गया। ट्रक सीधे रोड से उतरते हुए वहां बनी तीन दुकानों और एक पेड़ को तोड़ता हुआ आगे बढ़ा।

    हादसे के समय ट्रक में रखी कपास की गठानें सड़क और फुटपाथ पर बिखर गईं। ट्रक के नीचे दबे शिक्षक का शव कई घंटे की मेहनत के बाद रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला। पुलिस के अनुसार ट्रक डेढ़ तलाई से इंदौर की ओर जा रहा था। हादसे में ट्रक ड्राइवर और क्लीनर को मामूली चोटें आई हैं।

    शिक्षक सोहन सिंह चौहान अपने स्कूल के काम से इंदौर जाने के लिए घर से तड़के 3 बजे निकले थे। बस स्टैंड के मोड़ पर वह एक दुकान के नीचे खड़े होकर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।

    रेस्क्यू टीम ने ट्रक के नीचे फंसे शव को सुरक्षित बाहर निकाला और आसपास बिखरी कपास की गठानें हटाई। हादसे ने इलाके में सन्नाटा और शोक की लहर दौड़ा दी है। अधिकारियों ने कहा कि आगे ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सड़क सुरक्षा और वाहन की गति पर कड़ी नजर रखी जाएगी।