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  • इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर, अरब सागर में रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच शुरू

    इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हुआ अमेरिकी सैन्य हेलीकॉप्टर, अरब सागर में रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच शुरू

    नई दिल्ली। अरब सागर में अमेरिकी नौसेना का एक MH-60S सी हॉक हेलीकॉप्टर इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के समय हेलीकॉप्टर में चार क्रू सदस्य सवार थे। इनमें से तीन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि एक सदस्य अब भी लापता है। घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापक खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है तथा दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    अमेरिकी नौसेना के अनुसार यह हादसा नियमित सैन्य अभियान के दौरान हुआ। हेलीकॉप्टर को तकनीकी या परिचालन संबंधी कारणों से आपात स्थिति में समुद्र में उतरना पड़ा, लेकिन लैंडिंग प्रक्रिया के दौरान वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस घटना का किसी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई या बाहरी हमले से कोई संबंध नहीं है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब तक मिले तथ्यों के आधार पर इसे परिचालन दुर्घटना के रूप में देखा जा रहा है।

    हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद नौसैनिक संसाधनों और बचाव दलों को सक्रिय किया गया। बचाव अभियान के दौरान तीन घायल क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकालकर प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई। चौथे सदस्य की तलाश के लिए समुद्र और आसपास के क्षेत्र में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। खोज अभियान में नौसैनिक जहाजों, हेलीकॉप्टरों और विशेष बचाव टीमों को लगाया गया है, ताकि लापता सदस्य का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

    दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत पर तैनात था और नियमित परिचालन जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा था। नौसेना ने घटना की जांच के आदेश देते हुए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की है, जो तकनीकी रिकॉर्ड, उड़ान संबंधी आंकड़ों और परिचालन परिस्थितियों का विश्लेषण करेगी। जांच का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि इमरजेंसी लैंडिंग की आवश्यकता क्यों पड़ी और दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई।

    MH-60S सी हॉक अमेरिकी नौसेना के बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टरों में शामिल है। इसका उपयोग समुद्री खोज एवं बचाव अभियान, विशेष सैन्य अभियानों, रसद आपूर्ति, कार्गो परिवहन, चिकित्सा निकासी तथा विभिन्न नौसैनिक परिचालन कार्यों में किया जाता है। दो इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर को कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी प्रभावी संचालन के लिए विकसित किया गया है और यह लंबे समय से अमेरिकी नौसेना की परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

    इस घटना के बीच अमेरिका अपनी विमानन तकनीक के आधुनिकीकरण की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। देश में सुपरसोनिक विमानों के संचालन से जुड़े नियमों में बदलाव की प्रक्रिया जारी है और नई तकनीकों के अनुरूप नियामकीय ढांचा तैयार करने पर काम किया जा रहा है। हालांकि अरब सागर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे का इस पहल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है, लेकिन यह घटना सैन्य विमानन सुरक्षा, परिचालन जोखिम और तकनीकी विश्वसनीयता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करती है। फिलहाल सभी की निगाहें लापता क्रू सदस्य की तलाश और दुर्घटना जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

  • कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक गोदाम के भीतर काम कर रहे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    हादसा तारातला स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर ब्रेस ब्रिज के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया। छत गिरते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया। शुरुआती चरण में कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों के अभी भी फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है। सेना के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान की कमान संभाली है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा इकाइयों और पुलिस की विशेष टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी लोहे के ढांचे और बीम हटाने के लिए क्रेन तथा अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि ढहे हुए हिस्से में बड़ी मात्रा में लोहे और निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ है। ऐसे में फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए सावधानी बरती जा रही है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया और राहत एजेंसियों के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन संरचना की छत अचानक क्यों गिरी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है।

    फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के नीचे अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए राहत कार्य देर रात तक जारी रह सकता है। इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • प्रेम विवाह की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम, प्रशासन की समझाइश के बाद उतरा नीचे

    प्रेम विवाह की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम, प्रशासन की समझाइश के बाद उतरा नीचे

    नई दिल्ली । झारखंड के गढ़वा जिले में रविवार को एक असामान्य घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी। प्रेम विवाह की मांग को लेकर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया और घंटों तक नीचे उतरने से इनकार करता रहा। घटना के कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को विशेष प्रयास करने पड़े।

    जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के खरौंधी थाना क्षेत्र स्थित बाजार इलाके में रहने वाला एक युवक अचानक एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उसने नीचे उतरने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक लगातार अपनी कथित प्रेमिका को मौके पर बुलाने और उससे विवाह कराने की मांग कर रहा था। उसकी इस हरकत से बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां जुटने लगे।

    स्थानीय लोगों ने प्रारंभिक स्तर पर युवक को समझाने का प्रयास किया। लोगों ने उसे सुरक्षित नीचे उतरने और बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखने की सलाह दी। हालांकि युवक अपनी मांगों पर अड़ा रहा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उसने कथित तौर पर टावर से कूदकर जान देने की चेतावनी दी। इसके बाद मामले की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दी गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने युवक से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने संयम बरतते हुए उसे लगातार समझाया कि किसी भी प्रकार का आत्मघाती कदम समस्या का समाधान नहीं हो सकता। प्रशासन की प्राथमिकता युवक की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसे बिना किसी नुकसान के नीचे उतारना थी।

    घटना के दौरान बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए बचाव प्रक्रिया को प्रभावित न होने देने की कोशिश की। कई घंटों तक चली बातचीत और समझाइश के बावजूद युवक तुरंत नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुआ।

    बताया गया कि युवक अपनी कथित प्रेमिका की उपस्थिति की मांग कर रहा था। बाद में प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से युवती को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद युवक के साथ दोबारा बातचीत की गई और उसे शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए राजी किया गया। लंबे प्रयासों के बाद युवक सुरक्षित रूप से टावर से नीचे उतर आया, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।

    घटना के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक क्षति या अप्रिय हादसे की सूचना सामने नहीं आई। पुलिस ने युवक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर आवश्यक पूछताछ की और पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और धैर्य के साथ कार्रवाई करना आवश्यक होता है, ताकि किसी भी व्यक्ति की जान को खतरा न पहुंचे।

    यह घटना एक बार फिर सामाजिक और व्यक्तिगत विवादों के सार्वजनिक रूप लेने की प्रवृत्ति को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनात्मक परिस्थितियों में लोगों को संयम बनाए रखने और कानूनी व सामाजिक माध्यमों से समाधान तलाशने की आवश्यकता होती है। समय रहते पुलिस, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की सक्रियता ने इस मामले में संभावित दुर्घटना को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    नई दिल्ली । बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बीच एक 95 वर्षीय महिला की सूझबूझ और साहस की कहानी सामने आई है, जिसने इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जगा दी। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती राधा देवी ने समय रहते आग और धुएं की जानकारी नर्सिंग स्टाफ को देकर कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि उन्हें अब इस हादसे की ‘मसीहा’ के रूप में देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में देर रात आग लग गई थी। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में धुआं फैलने लगा, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा। इस हादसे में पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

    इसी आईसीयू में छपरा मेघ क्षेत्र की निवासी 95 वर्षीय राधा देवी भी भर्ती थीं। उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने सबसे पहले स्थिति की गंभीरता को समझा। परिजनों के अनुसार, धुआं फैलते ही उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाया और स्वयं बाहर निकलकर नर्स को आग लगने की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    राधा देवी ने स्थानीय बज्जिका बोली में घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अचानक धुआं फैलने लगा और आसपास अंधेरा सा महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन धुआं देखते ही वह बाहर निकलीं और तुरंत नर्स को इसकी सूचना दी। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति की जांच की और राहत कार्य शुरू किए।

    परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राधा देवी समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। रात करीब साढ़े तीन बजे आग लगने की बात सामने आई, जबकि कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के साथ-साथ अस्पताल में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव दल ने करीब 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि धुएं और आग की चपेट में आने से कई मरीज गंभीर रूप से प्रभावित हुए, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है।

    घटना के बाद अस्पताल के आईसीयू की तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है। आग में बेड, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन बुरी तरह जल गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

    इस दर्दनाक हादसे के बीच राधा देवी की सतर्कता और साहस ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में जागरूकता और त्वरित निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकते हैं। उनकी भूमिका को स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार एक असाधारण मानवीय उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बड़े हादसे को और भयावह होने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • सैदुलाजब बिल्डिंग हादसे में एक की मौत, दिल्ली सीएम ने मौके पर पहुंचकर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया

    सैदुलाजब बिल्डिंग हादसे में एक की मौत, दिल्ली सीएम ने मौके पर पहुंचकर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया

    नई दिल्ली । दक्षिण दिल्ली के सैदुलाजब इलाके में हुए दर्दनाक निर्माणाधीन इमारत हादसे के बाद राजधानी में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है। घटना के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू करते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार यह हादसा शनिवार शाम उस समय हुआ जब चार मंजिला निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के गिरने से आसपास का इलाका भी प्रभावित हुआ, क्योंकि मलबा पास स्थित एक टीन शेड कैंटीन पर आ गिरा, जहां उस समय लोग मौजूद थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का कार्य शुरू किया।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आसपास की जर्जर और खतरनाक इमारतों की तत्काल जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।

    प्रशासनिक स्तर पर जानकारी दी गई है कि घटना के बाद महरौली पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए जा रहे हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और किन परिस्थितियों में इमारत अचानक गिर गई।

    अधिकारियों के अनुसार अब तक मलबे से कुल नौ लोगों को निकाला गया है, जिनमें से कुछ को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया, जबकि अन्य को बचाव दलों ने सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रख रही है।

    घटना के बाद मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा और बचाव टीमें तैनात हैं और मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।

  • मालदीव में बड़ा डाइविंग हादसा, इटली के 5 गोताखोरों की मौत; गहरी समुद्री गुफाओं की खोज के दौरान लापता, अब तक सिर्फ एक शव बरामद

    मालदीव में बड़ा डाइविंग हादसा, इटली के 5 गोताखोरों की मौत; गहरी समुद्री गुफाओं की खोज के दौरान लापता, अब तक सिर्फ एक शव बरामद

    नई दिल्ली। मालदीव के वावू एटोल में एक दर्दनाक डाइविंग हादसे में इटली के 5 अनुभवी गोताखोरों की मौत हो गई। सभी गोताखोर समुद्र के करीब 50 मीटर गहराई में मौजूद अंडरवॉटर गुफाओं की खोज के लिए उतरे थे, लेकिन इसके बाद वे वापस नहीं लौट सके।

    स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को मालदीव के इतिहास का सबसे बड़ा डाइविंग हादसा बताया है। अब तक सिर्फ एक गोताखोर का शव बरामद किया गया है, जबकि बाकी चार के गुफा प्रणाली के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

    मृतकों की पहचान मोनिका मोंटेफाल्कोने, जॉर्जिया सोमाकाल, फेडेरिको गुआल्तिएरी, म्यूरियल ओडेनिनो और जियानलुका बेनेडेट्टी के रूप में की गई है। ये सभी ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ नाम की बोट से समुद्र में डाइविंग के लिए गए थे।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार गोताखोर यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े हुए थे, जबकि एक बोट ऑपरेशंस मैनेजर था। इनमें वैज्ञानिक, मरीन बायोलॉजिस्ट और स्कूबा डाइविंग इंस्ट्रक्टर भी शामिल थे।

    रेस्क्यू टीम को खराब मौसम और तेज हवाओं (25 से 30 मील प्रति घंटे) के कारण ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्र के अंदर कम विजिबिलिटी और गुफा प्रणाली की जटिल संरचना भी बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रही है।

    अधिकारियों के अनुसार, जिस गुफा में डाइवर्स गए थे, उसमें तीन बड़े चैम्बर्स हैं जो संकरी सुरंगों से जुड़े हैं। टीम अब तक दो चैम्बर्स की तलाशी ले चुकी है, लेकिन बाकी हिस्सों में अब भी तलाशी जारी है।

    इटली सरकार और डाइविंग विशेषज्ञ संगठन मिलकर शवों को वापस लाने और हादसे की जांच में जुटे हैं। शुरुआती जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि खराब मौसम के कारण डाइवर्स रास्ता भटक गए होंगे या किसी एक डाइवर को बचाने के प्रयास में बाकी लोग भी फंस गए होंगे।

    डाइविंग विशेषज्ञ ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी जैसी संभावनाओं की भी जांच कर रहे हैं, जिसमें गहराई में गैस मिश्रण असंतुलित होने पर ऑक्सीजन जहरीली हो सकती है।

    फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन मौसम साफ होने के बाद फिर से शुरू किए जाने की तैयारी है, लेकिन गुफा के अंदर शेष चार गोताखोरों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है