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  • आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

    नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।

    आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

    डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।

    नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।

    इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

    इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत

    RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और कर्जदारों के लिए फरवरी का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर वित्तीय गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट और आर्थिक संकेतकों की मानें तो आगामी 6 फरवरी को केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐतिहासिक फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है तो आपके होम लोन कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी जिससे आम आदमी की मासिक बजट योजना को बड़ी मजबूती मिलेगी।

    मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।

    सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।

    अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

  • नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें

    नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें


    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। नेपाल सरकार ने 200 रुपये और 500 रुपये के भारतीय नोटों पर लगे लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में किए गए नियमों में संशोधन के बाद लिया गया है जिससे दोनों देशों के बीच इन नोटों का आयात-निर्यात संभव हो सकेगा।

    नेपाल के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री जगदीश खरेल ने बताया कि सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि खरेल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नए निर्णय के तहत नेपाली या भारतीय नागरिकों के लिए प्रति व्यक्ति अधिकतम 25 000 रुपये लाने और ले जाने की सीमा तय की गई है।

    यह बदलाव 2016 में भारत द्वारा की गई नोटबंदी के बाद से नेपाल में लागू प्रतिबंध को समाप्त करने का संकेत है। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़े नोटों के आयात-निर्यात पर रोक लगाई थी जिसके कारण नेपाल में भारतीय 200 और 500 रुपये के नोट प्रचलन में नहीं थे।

    नेपाल सरकार ने अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए संशोधन का पालन करते हुए इन नोटों के आयात-निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है। हालांकि इससे पहले 2016 के बाद जारी किए गए भारतीय नोटों को ही नेपाल में प्रचलन में लाया जा सकेगा।

    नोटबंदी के समय नेपाल में भारतीय मुद्रा के लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य के नोट बैंकिंग सिस्टम में थे जिनका अब तक विनिमय नहीं हो सका था। इस फैसले से नेपाल के व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और नेपाल-भारत सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां और अधिक आसान हो जाएंगी।
    यह कदम नेपाल और भारत के बीच वित्तीय सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।