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  • विदेशी निवेश आकर्षित करने में RBI की बड़ी कामयाबी, फॉरेक्स स्वैप योजना से जुटे 40.82 अरब डॉलर

    विदेशी निवेश आकर्षित करने में RBI की बड़ी कामयाबी, फॉरेक्स स्वैप योजना से जुटे 40.82 अरब डॉलर


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने की विशेष पहल को बाजार से शानदार समर्थन मिला है। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई 2026 तक रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा के माध्यम से कुल 40.82 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा निवेश भारत में आया है। इस योजना में सबसे बड़ा योगदान फॉरेन करेंसी नॉन रेजिडेंट बैंक यानी एफसीएनआर बी जमा का रहा है जिसने कुल निवेश का बड़ा हिस्सा उपलब्ध कराया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच यह उपलब्धि भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।

    आरबीआई ने यह विशेष स्वैप सुविधा विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की थी। इसके तहत विदेशी निवेशकों और प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए बैंकों को विशेष रियायतें दी गईं ताकि वे अधिक विदेशी मुद्रा जुटा सकें। योजना 8 जून 2026 से लागू की गई थी और तब से इसमें लगातार सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    केंद्रीय बैंक के मुताबिक 31 जुलाई तक जुटाए गए कुल 40.82 अरब डॉलर में से 36.73 अरब डॉलर केवल एफसीएनआर बी जमा के माध्यम से आए हैं। यह कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का सबसे बड़ा हिस्सा है और इससे साफ संकेत मिलता है कि प्रवासी भारतीयों ने इस योजना पर भरोसा जताया है। इसके अलावा ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स यानी ओएफसीबी के जरिए 2.58 अरब डॉलर और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स यानी ईसीबी के माध्यम से 1.52 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है।

    आरबीआई ने पांच जून 2026 को इस योजना की घोषणा करते हुए कहा था कि वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए विदेशी मुद्रा भंडार को और मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से एफसीएनआर बी जमा ओएफसीबी और ईसीबी के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की विशेष व्यवस्था की गई। अब शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि यह रणनीति प्रभावी साबित हो रही है और देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह लगातार बढ़ रहा है।

    केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई एफसीएनआर बी जमा के लिए रियायती स्वैप सुविधा 30 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। वहीं ओएफसीबी और ईसीबी के तहत यह सुविधा 31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा प्रवाह का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी अर्थव्यवस्था की वित्तीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार होता है। इससे आयात भुगतान आसान होता है विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक बाजार में मुद्रा की स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है। साथ ही रुपये पर दबाव कम करने और बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने की क्षमता भी मजबूत होती है।

    वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बीच आरबीआई की यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती आने से न केवल वित्तीय स्थिरता को बल मिलेगा बल्कि निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा। यही वजह है कि फॉरेक्स स्वैप योजना को भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण और सफल कदम माना जा रहा है।

  • आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    आरबीआई का बड़ा ऐलान, केंद्र सरकार को मिलेगा रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड, आर्थिक मजबूती को मिलेगा सहारा

    नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय घटनाक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को रिकॉर्ड स्तर का डिविडेंड देने का निर्णय लिया है। यह राशि करीब 2.87 लाख करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़े सरप्लस ट्रांसफर में से एक माना जा रहा है। इस निर्णय से सरकार की राजकोषीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव कई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।

    नई दिल्ली। यह फैसला मुंबई में आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की। बैठक में देश और दुनिया की आर्थिक स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई, जिसमें संभावित जोखिमों और भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि इस वर्ष सरप्लस ट्रांसफर की स्थिति मजबूत है और इसे केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जा सकता है।

    आरबीआई के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की बैलेंस शीट का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़कर लगभग 91.97 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में बैंक की कुल आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे केंद्रीय बैंक की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है।

    डिविडेंड के इस बड़े निर्णय के पीछे बैंक की आय में वृद्धि और जोखिम प्रावधानों के बाद बची शुद्ध आय प्रमुख कारण रही है। रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम प्रावधान और अन्य वैधानिक फंड में हस्तांतरण से पहले शुद्ध आय में भी पिछले वर्ष की तुलना में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार को बड़ी राशि हस्तांतरित करना संभव हुआ।

    नई दिल्ली। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम सरकार के लिए वित्तीय रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है। इस राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे, विकास परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश और मांग दोनों को समर्थन मिलेगा।

    इसके साथ ही आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि आर्थिक पूंजी ढांचे के तहत एक सुरक्षित जोखिम बफर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित आर्थिक अनिश्चितता का सामना किया जा सके। इसी संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि पर्याप्त प्रावधानों के बाद शेष राशि को केंद्र सरकार को हस्तांतरित किया जाए।

    इस ऐतिहासिक डिविडेंड के बाद सरकार की वित्तीय स्थिति को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है, जो आगामी बजट और आर्थिक नीतियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत

    RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और कर्जदारों के लिए फरवरी का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर वित्तीय गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट और आर्थिक संकेतकों की मानें तो आगामी 6 फरवरी को केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐतिहासिक फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है तो आपके होम लोन कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी जिससे आम आदमी की मासिक बजट योजना को बड़ी मजबूती मिलेगी।

    मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।

    सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।

    अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

  • नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें

    नेपाल में अब भारत के 200 और 500 रुपये के नोट चलेंगे; जानें शर्तें


    नई दिल्ली । भारत और नेपाल के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है। नेपाल सरकार ने 200 रुपये और 500 रुपये के भारतीय नोटों पर लगे लंबे समय से चले आ रहे प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में किए गए नियमों में संशोधन के बाद लिया गया है जिससे दोनों देशों के बीच इन नोटों का आयात-निर्यात संभव हो सकेगा।

    नेपाल के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री जगदीश खरेल ने बताया कि सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि खरेल ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नए निर्णय के तहत नेपाली या भारतीय नागरिकों के लिए प्रति व्यक्ति अधिकतम 25 000 रुपये लाने और ले जाने की सीमा तय की गई है।

    यह बदलाव 2016 में भारत द्वारा की गई नोटबंदी के बाद से नेपाल में लागू प्रतिबंध को समाप्त करने का संकेत है। उस समय भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़े नोटों के आयात-निर्यात पर रोक लगाई थी जिसके कारण नेपाल में भारतीय 200 और 500 रुपये के नोट प्रचलन में नहीं थे।

    नेपाल सरकार ने अब भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए गए संशोधन का पालन करते हुए इन नोटों के आयात-निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया है। हालांकि इससे पहले 2016 के बाद जारी किए गए भारतीय नोटों को ही नेपाल में प्रचलन में लाया जा सकेगा।

    नोटबंदी के समय नेपाल में भारतीय मुद्रा के लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य के नोट बैंकिंग सिस्टम में थे जिनका अब तक विनिमय नहीं हो सका था। इस फैसले से नेपाल के व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिलेगा और नेपाल-भारत सीमा पर व्यापारिक गतिविधियां और अधिक आसान हो जाएंगी।
    यह कदम नेपाल और भारत के बीच वित्तीय सहयोग और व्यापार को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगा।