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  • उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    उत्तर प्रदेश में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 10 वरिष्ठ IAS अधिकारियों के विभाग बदले, रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश सरकार ने देर रात 10 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के विभागों में बड़ा फेरबदल किया है। प्रशासनिक बदलाव के तहत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी नए अधिकारियों को सौंपी गई है। इस फेरबदल में ऊर्जा, परिवहन, चिकित्सा, उच्च शिक्षा, कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद और वन एवं पर्यावरण जैसे विभाग शामिल हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ऊर्जा विभाग में किया गया है। डॉ. आशीष कुमार गोयल को ऊर्जा विभाग से हटाकर श्रम एवं सेवायोजन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह रणवीर प्रसाद को प्रमुख सचिव ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन, पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन, राज्य विद्युत उत्पादन निगम और यूपीएसएलडीसी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली से जुड़ी शिकायतों के बीच ऊर्जा विभाग में हुआ यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    परिवहन विभाग में भी नई जिम्मेदारी दी गई है। अमृत अभिजात को उनके मौजूदा विभागों के साथ परिवहन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उनके पास पहले से पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ कार्य विभाग की जिम्मेदारी है। अब परिवहन विभाग भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल हो गया है।

    चिकित्सा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। अमित कुमार घोष को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग से हटाकर उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

    वी हेकाली झिमोमी को चिकित्सा शिक्षा विभाग सौंपा गया है। इससे पहले उनके पास वन एवं पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी थी। इस बदलाव के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग का प्रशासनिक दायित्व भी नए अधिकारी के पास चला गया है।

    प्रशासनिक फेरबदल के तहत डॉ. एमकेएस सुंदरम को कृषि से जुड़े कई विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है।

    रविंद्र को पंचायती राज विभाग का प्रमुख सचिव बनाया गया है। वहीं अनिल कुमार को पंचायती राज विभाग से हटाकर खाद्य एवं रसद तथा उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें आयुक्त खाद्य एवं रसद का अतिरिक्त दायित्व भी सौंपा गया है।

    महेंद्र प्रसाद अग्रवाल को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही अमित गुप्ता को स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के साथ प्राविधिक शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    इस फेरबदल के साथ राज्य सरकार ने कई प्रमुख विभागों की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। खास तौर पर ऊर्जा और बिजली से जुड़े विभागों में हुए परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। नई जिम्मेदारियों के तहत अधिकारियों को संबंधित विभागों के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    ऊर्जा विभाग में बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब ग्रामीण इलाकों में बिजली आपूर्ति और उससे जुड़ी शिकायतों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है। रणवीर प्रसाद को ऊर्जा विभाग के साथ बिजली क्षेत्र की प्रमुख संस्थाओं की जिम्मेदारी मिलने से विभागीय कामकाज में उनके अधिकार क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

    वहीं परिवहन, चिकित्सा शिक्षा और उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कृषि, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा पर्यावरण से जुड़े विभागों में बदलाव के जरिए सरकार ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है।

  • BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा

    BJP : संगठन में फेरबदल के बाद मंत्रिमंडल में विस्तार की उम्मीद… सांसदों ने दिल्ली में डाला डेरा


    नई दिल्ली।
    भाजपा संगठन (BJP Organization) की टीम गठन के बाद केंद्र सरकार (Central Government) में संभावित विस्तार और फेरबदल (Reshuffle) को लेकर उम्मीद लगाए सांसदों की ऊहापोह बढ़ती जा रही है। सांसद अपने क्षेत्रों से ज्यादा दिल्ली में समय बिता रहे हैं। संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) का अभी तक सत्रावसान भी नहीं हुआ है, ऐसे में सत्र के फिर से कभी भी आहूत होने की संभावना है। दूसरी तरफ मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावना बनी हुई है।


    मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें

    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन (BJP President Nitin Navin) की टीम के गठन के बाद से ही इस बात की अटकलें रही हैं कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद का भी अब जल्द ही विस्तार किया जाएगा। सरकार में कई मंत्री पद खाली भी हैं। संगठन की टीम से बाहर हुए और उसमें जगह न पा सके नेताओं को अब सरकार के विस्तार को लेकर काफी उम्मीदें हैं। अटकलों के बाजार में कोई न कोई तारीख के आ जाने से इन सांसदों की उम्मीदें भी बढ़ जाती हैं।


    संसद का सत्र भी बुलाया जा सकता है

    संगठन और सरकार में किसका पहले विस्तार होगा, पहले इसकी चर्चा थी, तो अब संसद सत्र को फिर से बुलाने और सरकार के विस्तार में क्या पहले होगा, इसकी अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बात की संभावना बनी हुई है कि कभी भी फिर से संसद सत्र आयोजित हो सकता है। इसमें महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन विधेयक लाए जा सकते हैं। ये विधेयक पिछले बजट सत्र में सरकार पारित नहीं करा सकी थी। चूंकि, इसके लिए सरकार को अन्य दलों का भी समर्थन जरूरी है।

    2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में भी यूपी का ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल अगर पीएम मोदी को भी जोड़ लें तो उत्तर प्रदेश से 11 मंत्री हैं। लखनऊ से सांसद राजनाथ सिंह रक्षा मंत्रालय की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी उत्तर प्रदेश से ही चुनकर राज्यसभा आए हैं। इस लिस्ट में बीएल वर्मा, एसपी सिंह बघेल, अनुप्रिया पटेल, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, कमलेश पासवान और कीर्तिवर्धन सिंह का नाम है।

    पार्टी में चर्चा यही है कि जिन बड़े नेताओं को केंद्रीय कार्यकारिणी में जगह नहीं मिल पाई हैं, उन्हें मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी से लक्ष्मीकांत वाजपेयी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। कयास पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को लेकर भी थे। हालांकि अब उन्हें अडमान निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त कर दिया गया है।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • एनटीए में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 47 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए; चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति

    एनटीए में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 47 अधिकारी-कर्मचारी हटाए गए; चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) सहित विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में व्यापक प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने एजेंसी से 47 अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया है। इनमें से कुछ के खिलाफ कानूनी और आपराधिक कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

    यह कार्रवाई उच्च शिक्षा विभाग में हालिया प्रशासनिक फेरबदल के बाद की गई है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। इसके लिए एनटीए के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    चार नए जनरल मैनेजर की होगी नियुक्ति

    एनटीए में अब चार नए जनरल मैनेजर की सीधी नियुक्ति की जाएगी। ये अधिकारी एजेंसी के विभिन्न प्रमुख विभागों का संचालन संभालेंगे। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग आधारित व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति पर जोर दिया जा रहा है।

    16 यंग प्रोफेशनल्स भी होंगे शामिल

    एजेंसी की कार्यप्रणाली को आधुनिक और पेशेवर बनाने के उद्देश्य से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के प्रतिभा सेतु पोर्टल के माध्यम से 16 यंग प्रोफेशनल्स की नियुक्ति की जाएगी। इनकी तैनाती प्रारंभिक तौर पर अकादमिक, विधिक (लीगल) और वित्त (फाइनेंस) से जुड़े विभागों में की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि युवा पेशेवर परीक्षा प्रबंधन में नई तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को लागू करने में योगदान देंगे।

    समिति की सिफारिशों पर अमल

    सरकार यह पुनर्गठन प्रो. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर कर रही है। समिति ने परीक्षा प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे।

    राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं कराता है एनटीए

    एनटीए देश में नीट, जेईई, सीयूईटी सहित 15 से 20 प्रमुख राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करता है। हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के बाद परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

    सरकार ने संकेत दिए हैं कि परीक्षा संबंधी अपराधों पर रोक लगाने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों को भी लागू किया जा रहा है। इसके तहत परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।