Tag: Residential Commercial Use

  • भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग

    भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग


    भोपाल । भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब अगले चरण में पहुंच गई है। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को इसे प्रकाशित करने और लोगों से दावे आपत्तियां लेने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां तत्काल वैध हो जाएंगी या सीलिंग की कार्रवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

    22 सितंबर को हुई सुनवाई के आदेश में भोपाल का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनुमति चाहिए। अदालत ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है लेकिन अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी रहेगा। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम प्लान पर अभी अदालत की निगरानी बनी रहेगी।

    सीलिंग के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल किसी जमीन या भवन में चल रही गतिविधि की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित बिल्डिंग नियमों के आधार पर जांची जाएगी। यदि कोई क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में केवल नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में संभावित लैंडयूज बदलाव का प्रस्ताव तत्काल राहत का आधार नहीं बनेगा।

    अदालत ने उन इलाकों को अलग माना है जहां मौजूदा मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे स्थानों पर मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार किया जा सकता है लेकिन फिलहाल वहां यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अगर कोई निर्माण पूरी तरह बिना अनुमति के हुआ है तो कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

    भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले से ही कार्रवाई चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है और कई मामलों में नोटिस तथा कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतें भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थीं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

    अब कारोबारियों और रहवासियों की नजर नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सरकार को अंतिम प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ड्राफ्ट में किसी क्षेत्र के लैंडयूज में बदलाव प्रस्तावित होने मात्र से वहां चल रही मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि स्वतः वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।

  • आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस

    आवासीय इलाकों में चल रहे कारोबार पर आज बड़ा फैसला संभव 8084 प्रतिष्ठानों को मिल चुका है नोटिस


    भोपाल। भोपाल के रहवासी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। इस मामले में शहर के करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठानों को लेकर स्थिति साफ होने की उम्मीद है। इससे पहले 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई कैंसिल हो गई थी। अब मंगलवार को दोपहर में होने वाली सुनवाई पर नगर निगम के साथ रहवासी और प्रभावित कारोबारी पक्षों की भी नजर है। मामले को लेकर नगर निगम और रहवासियों ने अपनी अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

    दरअसल 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल नगर निगम ने रहवासी इलाकों में संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाकर कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में करीब 62 हजार 500 प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं। इसके बाद करीब 15 दिनों तक संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस देने की प्रक्रिया चली। इस दौरान 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए। नोटिस के बाद निगम ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए तीन दिनों में 190 प्रतिष्ठानों को बंद भी किया था।

    निगम की इस कार्रवाई के बाद शहर के व्यापारी संगठनों में नाराजगी देखने को मिली। कारोबारियों ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। विरोध बढ़ने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी। पिछले करीब 22 दिनों से इस मामले में सीलिंग या बंद करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि आगे नगर निगम को किस तरह की कार्रवाई करनी होगी और प्रभावित प्रतिष्ठानों को लेकर क्या व्यवस्था लागू होगी।

    मामले में रहवासियों की ओर से भी नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने निगम की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निगम की ओर से प्रस्तुत की गई कार्रवाई की जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनके मुताबिक कुछ ऐसे प्रतिष्ठान भी हैं जिन्हें सील किए जाने का दावा किया गया था लेकिन बाद में वे दोबारा खुल गए। रहवासी पक्ष ने इस संबंध में दस्तावेज और अन्य साक्ष्य सुप्रीम कोर्ट के सामने रखने की तैयारी की है।

    सोमवार को नगर निगम के अधिकारी दिनभर सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाने वाली रिपोर्ट तैयार करने में जुटे रहे। अधिकारियों ने अब तक की कार्रवाई और नोटिस से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित किया। दूसरी ओर रहवासी पक्ष भी अपने दस्तावेज तैयार करता रहा। बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने से संबंधित फोटो और वीडियो भी अदालत के सामने रखे जा सकते हैं।

    इस पूरे मामले का असर भोपाल के हजारों कारोबारियों और रहवासी इलाकों में रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि अदालत की सुनवाई के बाद कार्रवाई को लेकर क्या दिशा तय होती है जबकि रहवासी पक्ष यह चाहता है कि आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के संबंध में नियमों का पालन सुनिश्चित हो। अब मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के रुख से आगे की कार्रवाई की तस्वीर काफी हद तक साफ होने की उम्मीद है।