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  • विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भोपाल में जागरूकता अभियान, आरएनटीयू के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाए एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल के खतरे

    विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर भोपाल में जागरूकता अभियान, आरएनटीयू के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक से समझाए एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल के खतरे

    मध्य प्रदेश। की राजधानी भोपाल के चिकलोद गांव में एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की ओर से विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 और राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से ग्रामीणों को दवाओं के जिम्मेदार उपयोग की जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान स्टेशनरी सामग्री का वितरण भी किया गया।

    कार्यक्रम का आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी की प्राचार्य डॉ. दुर्गा पांडेय के मार्गदर्शन में हुआ। इसका समन्वय राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गब्बर सिंह और डॉ. रेखा गुप्ता ने किया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल के प्रति जागरूक करना और संक्रमणों के उपचार में सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जानकारी देना था।

    विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 की थीम ‘स्वस्थ भविष्य के लिए फार्मासिस्टों को सशक्त बनाना’ रखी गई है। इसी उद्देश्य के अनुरूप कार्यक्रम में दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में फार्मासिस्टों की भूमिका पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को समझाया कि दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना जरूरी है और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना नुकसानदायक हो सकता है।

    नुक्कड़ नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी रोगाणुरोधी प्रतिरोध के कारणों और संभावित दुष्परिणामों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल, बिना चिकित्सकीय परामर्श के इनका सेवन और उपचार संबंधी निर्देशों की अनदेखी इस समस्या को बढ़ा सकती है। ऐसी स्थिति में संक्रमणों का उपचार अधिक कठिन हो सकता है। कार्यक्रम में लोगों को इस चुनौती से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई।

    विद्यार्थियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाएं न लें और चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही उनका उपयोग करें। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। दवाओं के इस्तेमाल में सावधानी बरतकर इस समस्या को नियंत्रित करने के प्रयासों में सहयोग किया जा सकता है।

    स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता के साथ कार्यक्रम में सामाजिक उत्तरदायित्व को भी महत्व दिया गया। विद्यार्थियों ने ग्रामीणों को स्टेशनरी सामग्री वितरित की। इस गतिविधि के माध्यम से सामुदायिक सहयोग, सामाजिक संवेदनशीलता और जनसेवा के महत्व को सामने रखा गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी का उद्देश्य उन्हें सामाजिक जरूरतों से जोड़ना और जनहित से जुड़े कार्यों के प्रति प्रोत्साहित करना भी था।

    विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर.पी. दुबे ने कहा कि जनस्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी शिक्षा के महत्वपूर्ण अंग हैं। उनके अनुसार, इस तरह की पहल विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक चुनौतियों से जोड़ती है और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करती है।

    विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी ने भी दवाओं के उचित उपयोग और एंटीबायोटिक के प्रति जागरूकता को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं और उन्हें जनहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।

    यह कार्यक्रम फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया और मध्य प्रदेश राज्य फार्मेसी परिषद के जनस्वास्थ्य जागरूकता तथा फार्मासिस्टों की सामाजिक भूमिका से जुड़े उद्देश्यों के अनुरूप आयोजित किया गया। इसके माध्यम से जिम्मेदार दवा उपयोग, संक्रमणों की रोकथाम और समुदाय की सहभागिता का संदेश दिया गया।

  • सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    सेंसेक्स और निफ्टी के लिए अगले सप्ताह अहम रहेंगे ये स्तर, जानिए सपोर्ट रेजिस्टेंस और बाजार की संभावित दिशा

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह उतार चढ़ाव वाला और सतर्क कारोबार का रह सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू राजनीतिक तनाव, वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों पर रहेगी।

    पिछले सप्ताह घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन दोनों प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए बढ़त दर्ज की। शुक्रवार को सेंसेक्स 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,515.43 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत बढ़कर 23,897.70 के स्तर पर पहुंचा। कारोबार के दौरान निफ्टी ने 24,000 का स्तर पार किया, लेकिन अंतिम चरण में इसकी ज्यादातर बढ़त कम हो गई।

    तकनीकी संकेतों के लिहाज से सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,500 का क्षेत्र शुरुआती रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर 77,700 से 78,000 का दायरा महत्वपूर्ण बाधा बन सकता है। यदि सूचकांक 78,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में कामयाब रहता है तो बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में सेंसेक्स 78,500 से 78,800 की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर सकता है।

    हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में सेंसेक्स अभी सुधार और समेकन के दौर में दिखाई दे रहा है। यदि ऊपरी स्तरों पर खरीदारी का समर्थन कमजोर रहता है तो मुनाफावसूली बढ़ सकती है। इससे सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है और निवेशकों को हर तेजी के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    निफ्टी के लिए 23,800 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इस स्तर के ऊपर टिके रहना बाजार की मजबूती के लिए अहम होगा। यदि निफ्टी लगातार 23,800 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और सूचकांक 23,600 के आसपास पहुंच सकता है। इसके विपरीत ऊपर की ओर 24,000 से 24,200 का क्षेत्र प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा।

    विशेषज्ञों के मुताबिक जब तक निफ्टी 24,000 से 24,200 के दायरे को निर्णायक रूप से पार नहीं करता, तब तक बाजार में पूरी तरह मजबूत तेजी की पुष्टि नहीं मानी जा सकती। इस दौरान निवेशक ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली कर सकते हैं और कारोबार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    बाजार की धारणा पर कच्चे तेल की कीमतों का असर भी महत्वपूर्ण रहेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका तथा ईरान के बीच जारी टकराव से ऊर्जा बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर किसी भी तरह की बाधा की आशंका कच्चे तेल की कीमतों को और प्रभावित कर सकती है। ऊंची तेल कीमतें भारत के लिए महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी घरेलू बाजार के लिए चुनौती बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही है और बड़ी गिरावट को सीमित करने में मदद कर रही है। आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल, अमेरिकी ब्याज दरों के संकेत और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर भी रहेगी।

    यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार आता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी होती है तो भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत नकारात्मक वैश्विक संकेतों से निफ्टी के 23,800 और सेंसेक्स के 76,000 के आसपास के स्तरों की मजबूती की परीक्षा हो सकती है। ऐसे में अगले सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में तकनीकी स्तरों के साथ वैश्विक घटनाक्रम की भूमिका अहम रहने की संभावना है।