Tag: responsibilities

  • खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान

    खुद IMF से मांग रहा मदद, अब दुनिया को कर्ज संभालना सिखाएगा पाकिस्तान, बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म की मिली कमान


    नई दिल्ली। खुद अरबों डॉलर के विदेशी कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान अब दूसरे विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के गुर सिखाने और उनकी आर्थिक चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की जिम्मेदारी निभाएगा। संयुक्त राष्ट्र के समर्थन वाले ‘बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म’ यानी कर्ज लेने वाले देशों के मंच की अध्यक्षता पाकिस्तान को मिली है। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने 12 अक्टूबर को बैंकॉक में मंच की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष का पद संभाला।

    पाकिस्तान की इस नियुक्ति पर इसलिए चर्चा हो रही है, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से बाहरी वित्तीय मदद पर निर्भर है। हालांकि, इस मंच की अगुवाई करने से पाकिस्तान का अपना कर्ज कम नहीं होगा। न ही उसे कर्ज चुकाने की शर्तों में किसी तरह की विशेष राहत मिलेगी। इस मंच का उद्देश्य विकासशील देशों को कर्ज प्रबंधन के अनुभव साझा करने, आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के बेहतर विकल्प तलाशने का अवसर देना है।

    IMF से फिर मदद की उम्मीद, पहले भी मिल चुके हैं राहत पैकेज

    पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से वित्तीय सहायता मांगता रहा है। 7 अक्टूबर को पाकिस्तान और IMF के बीच एक समझौते पर सहमति बनी थी। इसके तहत पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की मदद मिल सकती है। हालांकि, इस सहायता के लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।

    इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का IMF राहत पैकेज मिला था, जिसने उसे संप्रभु डिफॉल्ट यानी कर्ज चुकाने में पूरी तरह नाकाम होने की स्थिति से बचने में मदद की। इसके बाद 2024 में देश के लिए 7 अरब डॉलर का एक और कार्यक्रम मंजूर किया गया। जलवायु से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने IMF से 1.3 अरब डॉलर का अलग ऋण भी हासिल किया।

    स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के अंत तक देश का कुल बाहरी कर्ज और देनदारियां 137.55 अरब डॉलर थीं। ऐसे में कर्ज प्रबंधन से जुड़े मंच की अध्यक्षता मिलना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अहम जिम्मेदारी है, लेकिन इससे उसकी आर्थिक चुनौतियां अपने आप दूर नहीं होंगी।

    क्या है बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म?

    बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म विकासशील देशों के लिए बनाया गया ऐसा मंच है, जहां कर्ज लेने वाले देश अपनी समस्याओं, अनुभवों और आर्थिक सुधारों से जुड़े उपायों पर चर्चा कर सकते हैं। इसका उद्देश्य कर्ज के बेहतर प्रबंधन, विकास के लिए वित्त जुटाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में कर्जदार देशों की चिंताओं को मजबूती से सामने लाने के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    इस मंच को संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD यानी व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का सचिवालय सहयोग देता है। इसका विचार जुलाई 2025 में स्पेन के सेविले में आयोजित विकास वित्त सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसके बाद 15 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

    अब तक कर्ज देने वाले देशों के बीच समन्वय के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद रही हैं, लेकिन कर्ज लेने वाले देशों के पास आपसी सहयोग के लिए ऐसा स्थायी मंच नहीं था। बॉरोअर्स प्लेटफॉर्म इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।

    UNCTAD में कर्ज और विकास से जुड़े मामलों की प्रमुख पेनेलोप हॉकिन्स ने अप्रैल में मंच की शुरुआत के दौरान कहा था कि कर्ज देने वाले देशों के समूह ‘पेरिस क्लब’ को इस तरह के समन्वय का करीब 70 साल का अनुभव है।

    पाकिस्तान पहले से रहा है मंच की तैयारी में शामिल

    पाकिस्तान इस मंच को तैयार करने की प्रक्रिया में पहले से भागीदारी कर रहा था। वह मिस्र की अगुवाई वाले कार्य समूह का उपाध्यक्ष था। इस समूह में कोलंबिया, होंडुरास, मालदीव, नेपाल और जाम्बिया भी शामिल थे। समूह ने मंच के कामकाज, सदस्यता और संचालन से जुड़े नियम तैयार करने में योगदान दिया।

    UNCTAD के अनुसार, मंच के सदस्य हर साल अपना अध्यक्ष चुनते हैं। इसकी गवर्निंग काउंसिल में वित्त मंत्री, केंद्रीय बैंक के गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं, जो मंच की प्राथमिकताएं तय करते हैं। वहीं, संचालन समिति तकनीकी और व्यावहारिक कामकाज संभालती है।

    कर्ज प्रबंधन और आर्थिक सुधारों पर रहेगा जोर

    पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि उनका देश कर्ज प्रबंधन को बेहतर बनाने, आर्थिक सुधारों के अनुभव साझा करने और विकास के लिए वित्त जुटाने के नए तरीके तलाशने पर ध्यान देगा। उन्होंने योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

    हालांकि, अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान को दूसरे देशों के कर्ज की शर्तों पर बातचीत करने या अपने लिए भुगतान में राहत हासिल करने का अधिकार नहीं मिलेगा। UNCTAD के मुताबिक, यह मंच अपने सदस्यों की ओर से कर्ज की शर्तों या भुगतान को लेकर बातचीत नहीं करेगा। इसके बजाय यह कर्ज से जुड़ी मौजूदा व्यवस्थाओं के साथ मिलकर काम करेगा।

    कुल मिलाकर, पाकिस्तान की भूमिका कर्ज से परेशान विकासशील देशों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने, उनके अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाने और उनकी समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की होगी। मंच की अध्यक्षता से उसे कूटनीतिक भूमिका निभाने का अवसर जरूर मिलेगा, लेकिन अपने विदेशी कर्ज और उसे चुकाने की जिम्मेदारी से उसे कोई छूट नहीं मिलेगी।

  • भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी

    भाजपा में बड़े संगठनात्मक बदलाव की तैयारी, नितिन नवीन की टीम में अनुभवी नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी


    नई दिल्ली। भाजपा संगठन में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकता है। पार्टी नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम को युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं के संतुलन से तैयार करने की कवायद में जुटा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

    भाजपा का फोकस आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को और मजबूत करने पर है। अगले छह महीने में पार्टी को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का सामना करना है, जिनमें चार राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। ऐसे में नेतृत्व संगठनात्मक ढांचे को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रहा है। पार्टी की रणनीति नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने के साथ-साथ अनुभवी नेताओं के मार्गदर्शन में उन्हें तैयार करने की है। इसी दिशा में राज्यों में संगठनात्मक बदलाव के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर नई टीम के गठन की प्रक्रिया चल रही है।

    नितिन नवीन के साथ अनुभवी चेहरों को मिलेगी जगह
    भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन राष्ट्रीय राजनीति में अपेक्षाकृत नए हैं, इसलिए पार्टी उनके साथ संगठन का अनुभव रखने वाले नेताओं को जोड़ना चाहती है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व में संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके कई सांसदों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जा सकता है। मौजूदा संगठन में काम कर रहे करीब 4 से 5 नेताओं को पदोन्नति देकर नई जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। वहीं, लगभग आधा दर्जन ऐसे सांसदों पर भी विचार चल रहा है, जिनका संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

    प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं की नजर
    नई टीम को लेकर पार्टी के शीर्ष स्तर पर मंथन जारी है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं। चूंकि आने वाले समय में सरकार में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है, इसलिए कुछ प्रमुख नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपने की रणनीति पर भी विचार किया जा रहा है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
    भाजपा के नए संगठन में केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ-साथ राज्यों के प्रभारी, मोर्चों के अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी गठन किया जाना है। इसी वजह से नामों को अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कम से कम 25 प्रतिशत नए सदस्यों को शामिल करना होता है। हालांकि पार्टी इससे अधिक नए चेहरों को भी मौका दे सकती है।

    महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी पार्टी विशेष ध्यान दे रही है। भाजपा संविधान के अनुसार केंद्रीय पदाधिकारियों में 33 प्रतिशत महिलाओं की हिस्सेदारी का प्रावधान है। हालांकि यदि यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है, तब भी इस बार पहले की तुलना में अधिक महिलाओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना है। अनुमान है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी 20 से 25 प्रतिशत तक हो सकती है।

    नई टीम के गठन के जरिए भाजपा एक तरफ अनुभवी नेताओं का सहारा लेना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की रणनीति पर भी काम कर रही है।