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  • पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संग प्रम्बानन मंदिर में किए दर्शन, संरक्षण परियोजना का भी हुआ शुभारंभ

    पीएम मोदी ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संग प्रम्बानन मंदिर में किए दर्शन, संरक्षण परियोजना का भी हुआ शुभारंभ


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के सांस्कृतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का दर्शन किया। यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू स्थापत्य कला का एक प्रमुख प्रतीक माना जाता है। दोनों नेताओं की यह संयुक्त यात्रा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि साझा विरासत और द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय का भी प्रतीक बनी।

    प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की विदेश यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया पहुंचे थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें सांस्कृतिक सहयोग, विरासत संरक्षण और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसी क्रम में प्रम्बानन मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनरुद्धार से जुड़ी परियोजना का औपचारिक शुभारंभ भी किया गया, जिसमें भारत तकनीकी और विशेषज्ञ सहयोग प्रदान करेगा।

    प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर परिसर माना जाता है। यह योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है और इसका निर्माण दसवीं शताब्दी में हुआ था। मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जबकि परिसर में भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के भी भव्य मंदिर मौजूद हैं। मंदिर की दीवारों पर रामायण महाकाव्य के प्रसंगों को दर्शाने वाली उत्कृष्ट नक्काशी इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सुबियांतो ने मंदिर परिसर का अवलोकन करते हुए इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी ली। दोनों नेताओं ने इस विरासत को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी पहचान सुरक्षित पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। भारत और इंडोनेशिया के बीच मंदिर संरक्षण परियोजना इसी साझा दृष्टिकोण का परिणाम मानी जा रही है।

    यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर भी प्रम्बानन मंदिर की तस्वीरें साझा करते हुए इसे भव्य और ऐतिहासिक धरोहर बताया। उन्होंने राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ मंदिर की यात्रा को दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों का महत्वपूर्ण क्षण बताया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता भी देखने को मिली, जिसने द्विपक्षीय रिश्तों की मजबूती का संदेश दिया।

    भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल रणनीतिक और आर्थिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संपर्क भी मौजूद हैं। इंडोनेशिया में आज भी रामायण और महाभारत से जुड़ी परंपराएं, कला और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां व्यापक रूप से दिखाई देती हैं। ऐसे में प्रम्बानन मंदिर संरक्षण परियोजना दोनों देशों की साझा विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सांस्कृतिक साझेदारी न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि पर्यटन, शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को भी नई गति देगी। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने और इंडोनेशिया के साथ दीर्घकालिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

  • कांचीपुरम में पुस्तक विमोचन और पुडुचेरी में ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी निर्मला सीतारमण

    कांचीपुरम में पुस्तक विमोचन और पुडुचेरी में ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी निर्मला सीतारमण

    नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तमिलनाडु और पुडुचेरी का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के पुनरोद्धार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण चर्चा में है। इस यात्रा के दौरान वह कई ऐसी परियोजनाओं का शुभारंभ और उद्घाटन करेंगी, जिनका उद्देश्य स्थानीय इतिहास, परंपरा और सामाजिक विकास को नई दिशा प्रदान करना है।

    वित्त मंत्री बुधवार शाम नई दिल्ली से चेन्नई पहुंचीं, जहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। दौरे की शुरुआत तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले से होगी, जहां वह महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेंगी। कांचीपुरम स्थित एसएसकेवी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस फॉर विमेन में वह ‘डॉटर्स ऑफ कांची – द एसएसकेवी स्टोरी’ नामक पुस्तक का विमोचन करेंगी।

    यह पुस्तक संस्थान के इतिहास, उपलब्धियों और समाज में उसके योगदान को रेखांकित करती है। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका और उसके प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। माना जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से संवाद भी करेंगी तथा शिक्षा के महत्व और महिलाओं की भागीदारी पर अपने विचार साझा करेंगी।

    कांचीपुरम लंबे समय से अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र वित्त मंत्री के लिए भी विशेष महत्व रखता है। वह विभिन्न अवसरों पर कांचीपुरम की प्रसिद्ध बुनाई परंपरा और यहां के शिल्पकारों के योगदान का उल्लेख करती रही हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।

    दौरे के दूसरे चरण में वित्त मंत्री पुडुचेरी पहुंचेंगी, जहां वह ऐतिहासिक महत्व रखने वाले पुनर्निर्मित लाइटहाउस का उद्घाटन करेंगी। यह कार्यक्रम सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कमिश्नरेट परिसर में आयोजित होगा। लंबे समय से संरक्षण और मरम्मत की प्रक्रिया से गुजर रहे इस लाइटहाउस को अब नई पहचान के साथ आम लोगों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।

    इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक ऐतिहासिक संरचना का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय इतिहास के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ाते हैं। औपनिवेशिक काल की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    अपने दौरे के अंतिम दिन वित्त मंत्री पुडुचेरी के एक सरकारी मध्य विद्यालय परिसर में स्थित लगभग 400 वर्ष पुराने ‘मुझियांकुलम’ के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन करेंगी। यह परियोजना ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण और सामुदायिक सुविधाओं के विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले ये कार्यक्रम केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाते हैं, जिसमें शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक विकास को समान महत्व दिया जा रहा है। वित्त मंत्री का यह दौरा स्थानीय स्तर पर चल रही विकास और संरक्षण परियोजनाओं को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।