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  • संसद की दो समितियों का पुनर्गठन…. TMC को बड़ा झटका, गंवा दिए चेयरमैन के पद

    संसद की दो समितियों का पुनर्गठन…. TMC को बड़ा झटका, गंवा दिए चेयरमैन के पद


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) की विभाग संबंधी स्थायी समितियों का पुनर्गठन (Standing Committees Reconstitution) किया गया है. इसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) को दो अहम समितियों की चेयरपर्सनशिप गंवानी पड़ी है. दरअसल, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने शनिवार को समितियों का पुनर्गठन किया।

    कॉमर्स से जुड़ी संसदीय समिति के नए चेयरपर्सन बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी बनाए गए हैं. उन्होंने TMC की डोला सेन की जगह ली है. वहीं, केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स समिति की चेयरपर्सन काकोली घोष दस्तीदार बनी हैं. उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह ली है।


    TMC में टूट के बाद बदली तस्वीर

    दरअसल, संसदीय समितियों में यह बदलाव TMC में हुई टूट के बाद हुआ है. TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है. इन सांसदों का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी का दामन थामा है. साथ ही NDA को समर्थन देने की बात कही है।

    TMC ने राज्यसभा के तहत आने वाली आठ समितियों में से किसी की भी चेयरपर्सनशिप नहीं मिलने पर आपत्ति जताई है. पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे लेकर राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखा है.

    डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि राज्यसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बाद कांग्रेस और TMC का स्थान है. उन्होंने कहा कि TMC को 2024-25 और 2025-26 में समितियों की चेयरपर्सनशिप मिली थी. अब ये जिम्मेदारियां उससे ले ली गई हैं।

    ओ’ब्रायन ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. उन्होंने 2019 का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी TMC को चेयरपर्सनशिप से वंचित किया गया था. बाद में इसमें सुधार हुआ था. अब फिर वही स्थिति बन गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद को एक गहरा और अंधेरा कक्ष बनाया जा रहा है. यह सभी बातें उन्होंने अपने लेटर में लिखी हैं]

    पुनर्गठन के दौरान कई समितियों के चेयरपर्सन को बरकरार रखा गया है. DMK के तिरुचि शिवा को फिर से उद्योग समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है. कनिमोझी को खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण समिति की जिम्मेदारी मिली है।

    कांग्रेस के शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के चेयरपर्सन बने रहेंगे. कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी भी कृषि समिति के चेयरपर्सन पद पर बने रहेंगे. कांग्रेस के मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों की समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है. समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव पहले की ही तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति के चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभालेगें।


    BJP समेत सहयोगी दलों के नेताओं को भी जिम्मेदारी

    बीजेपी के राधा मोहन सिंह रक्षा समिति की कमान संभालेंगे. अनुराग ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात समिति का चेयरपर्सन फिर बनाया गया है. बीजेपी के भरतृहरि महताब वित्त समिति के प्रमुख बने रहेंगे. राधा मोहन दास अग्रवाल गृह मामलों की समिति के चेयरपर्सन बने रहेंगे. निशिकांत दुबे को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है।

    JD(U) के संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति का चेयरपर्सन फिर बनाया गया है. शिवसेना के श्रीरंग बारणे ऊर्जा समिति के प्रमुख बने रहेंगे. NCP के सुनील तटकरे को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है।

    दरअसल, संसद में विभाग संबंधी कुल 24 स्थायी समितियां हैं. इनमें आठ समितियां राज्यसभा के सभापति के तहत काम करती हैं. बाकी 16 समितियां लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशन और नियंत्रण में रहती हैं।

    इन समितियों का कार्यकाल एक साल का होता है. इसके बाद इनका दोबारा गठन किया जाता है. इस बार हुए पुनर्गठन में कई नए चेयरपर्सन बनाए गए हैं, जबकि कई पुराने चेयरपर्सन को फिर जिम्मेदारी दी गई है।

  • मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका

    मायावती का नया फैसला, आकाश और दीपिका को जिम्मेदारी नहीं; ईशान आनंद को फिर मिलेगा पार्टी में मौका


    नई दिल्ली ।
    बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने परिवार के सदस्यों की पार्टी में भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आकाश आनंद और उनकी बहन दीपिका आनंद को अब पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार से ईशान आनंद को सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाने की बात कही है।

    मायावती ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय अपने अनुभवों और पार्टी के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके मुताबिक राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए व्यक्ति को अपने भाई-बहनों और नजदीकी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ काम करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है। उनके अनुसार शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाकर उसके हित और कल्याण को सुनिश्चित करना उनका प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य है। इसी उद्देश्य के तहत वह जरूरत पड़ने पर अपने परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।

    आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि उनके भाई आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, शादी के बाद आकाश के रवैये और गतिविधियों को लेकर उन्होंने असहमति जताई। मायावती ने कहा कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण आकाश को कुछ समय पहले पार्टी से अलग करना पड़ा।

    मायावती ने आकाश आनंद की पार्टी में वापसी की संभावना से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें दोबारा पार्टी में जिम्मेदारी देना संगठन के हित में उचित नहीं होगा। उनके मुताबिक आकाश और उनकी बहन दीपिका को अब पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी से पूरी तरह दूर रखा जाएगा और इस फैसले में बदलाव नहीं किया जाएगा।

    दीपिका को लेकर मायावती ने कहा कि पहले उनके परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने को लेकर उनके मन में दुविधा थी। लेकिन भविष्य में पारिवारिक परिस्थितियों के कारण संगठन के सामने किसी तरह की परेशानी पैदा न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने दीपिका को भी पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है।

    इसके स्थान पर ईशान आनंद को आगे बढ़ाने की घोषणा की गई है। मायावती ने कहा कि आनंद कुमार के परिवार में से अब केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी दी जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईशान ने भविष्य में कोई गंभीर पार्टी विरोधी गतिविधि की, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    मायावती ने कहा कि ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी पार्टी में छोटी या बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय संगठन में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी समर्पित और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।

    अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने नजदीकी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से दूरी बनाए रखी थी और अपना जीवन बहुजन समाज के हित के लिए समर्पित किया।

    मायावती ने डॉ. आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 के एक पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पत्र में सार्वजनिक संपत्ति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों के मामले में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर नियम और सार्वजनिक हित को प्राथमिकता देने का संदेश मिलता है।

    मायावती ने बताया कि देश, जनहित और संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को BSP की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन के काम में पूरी मजबूती और निष्ठा के साथ जुटने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

  • भारत से कारोबार समेटने का बड़ा फैसला, अमेरिकी टेक कंपनी के कदम से सैकड़ों कर्मचारियों पर रोजगार संकट

    भारत से कारोबार समेटने का बड़ा फैसला, अमेरिकी टेक कंपनी के कदम से सैकड़ों कर्मचारियों पर रोजगार संकट


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक कारोबारी माहौल में तेजी से हो रहे बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते उपयोग के बीच एक प्रमुख अमेरिकी डिजिटल रियल एस्टेट कंपनी ने भारत में अपना संचालन बंद करने का फैसला किया है। कंपनी के इस निर्णय से सैकड़ों कर्मचारियों के रोजगार पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। यह कदम वैश्विक कंपनियों द्वारा अपने परिचालन ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने की बढ़ती प्रवृत्ति को भी दर्शाता है।

    कंपनी ने अपने कर्मचारियों को भेजे संदेश में स्पष्ट किया है कि भारत में परिचालन समाप्त करने का निर्णय किसी कर्मचारी के प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। इसके बजाय यह व्यापक कारोबारी पुनर्गठन और संचालन मॉडल में बदलाव की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी का मानना है कि उसके अधिकांश ग्राहक अमेरिका में स्थित हैं, इसलिए उनसे जुड़े परिचालन कार्यों को उसी क्षेत्र में संचालित करना अधिक प्रभावी और व्यावहारिक होगा।

    पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक कंपनियों ने लागत नियंत्रण और दक्षता बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों में बड़ी परिचालन टीमें तैयार की थीं। हालांकि अब तकनीकी विकास, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते उपयोग ने कई पारंपरिक प्रक्रियाओं को सरल बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में कर्मचारियों की आवश्यकता पहले की तुलना में कम होती जा रही है। यही कारण है कि कई कंपनियां अपने वैश्विक संचालन मॉडल की समीक्षा कर रही हैं और संसाधनों का पुनर्वितरण कर रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी क्षेत्र में यह बदलाव केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में कई संगठन अपने कार्य संचालन को अधिक केंद्रीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे एक ओर उत्पादकता और लागत नियंत्रण में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक परिचालन भूमिकाओं में कार्यरत कर्मचारियों के लिए नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

    कंपनी ने प्रभावित कर्मचारियों के लिए संक्रमण सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। इसके तहत वित्तीय सहायता, करियर मार्गदर्शन और नई नौकरी तलाशने में सहयोग जैसी व्यवस्थाएं शामिल की जा सकती हैं। कुछ कर्मचारियों को संक्रमण प्रक्रिया पूरी होने तक सीमित अवधि के लिए कार्य जारी रखने का अवसर भी दिया जा सकता है, ताकि संचालन बंद करने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके।

    रोजगार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में तकनीकी कौशल, डेटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल संचालन से जुड़ी विशेषज्ञताओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रभावित कर्मचारियों के लिए नए अवसरों की संभावनाएं भी मौजूद हैं, बशर्ते वे बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुरूप अपने कौशल का विकास करें।

    भारतीय पेशेवरों की वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान को देखते हुए उद्योग जगत का मानना है कि प्रतिभाशाली कर्मचारियों के लिए नए अवसरों की कमी नहीं होगी। हालांकि इस तरह के फैसले यह संकेत जरूर देते हैं कि भविष्य का रोजगार बाजार पारंपरिक कार्यप्रणालियों की तुलना में अधिक तकनीक आधारित और परिणाम केंद्रित होने जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में कंपनियां लागत, दक्षता और तकनीकी नवाचार के संतुलन पर अधिक ध्यान देंगी। ऐसे में वैश्विक कार्यबल को भी लगातार बदलती कारोबारी जरूरतों के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। भारत जैसे बड़े प्रतिभा केंद्र के लिए यह बदलाव चुनौती के साथ-साथ नए अवसरों का संकेत भी माना जा रहा है।

  • भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरे और खुद दिल्ली आ रहीं ममता, टीएमसी के नाराज सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी से सियासी हलचल तेज

    भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरे और खुद दिल्ली आ रहीं ममता, टीएमसी के नाराज सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी से सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक असंतोष अब राज्य की भौगोलिक सीमाओं को पार कर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। राज्य विधानसभा में 58 विधायकों की बड़ी बगावत का सामना कर रहीं मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अब देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में भी एक बड़े विद्रोह की आशंका सताने लगी है। तृणमूल कांग्रेस के कई असंतुष्ट और नाराज लोकसभा सांसदों द्वारा अचानक दिल्ली में डेरा डाल दिए जाने के बाद से कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार बेहद गर्म है।

    इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में दो-तिहाई बहुमत यानी ’19’ का एक ऐसा गणित है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा रखी है। दरअसल, वर्तमान लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 निर्वाचित सांसद हैं। देश के कड़े दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग गुट नहीं बनाते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में टीएमसी के संसदीय दल को वैधानिक रूप से तोड़ने और कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों के एक साथ आने की आवश्यकता है। सूत्रों का दावा है कि बागी गुट इसी जादुई आंकड़े को छूने की कवायद में जुटा हुआ है।

    संसदीय दल में संभावित बिखराव को रोकने और डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक और रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक आपात बैठक बुलाकर ममता बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरने के साफ संकेत मिले हैं। ममता बनर्जी ने अभिषेक के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को पार्टी का नया संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया है, जिसे सीधे तौर पर अभिषेक के अधिकारों में कटौती के रूप में देखा जा रहा है।

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सांसदों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उपजे इस असंतोष की सबसे बड़ी वजह डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली है। बागी गुट का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का संगठन चलाने का तरीका बेहद एकाकी है और वे पुराने व वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर एक विशेष ‘सिंडिकेट’ के जरिए पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। इसी कार्यप्रणाली से नाराज होकर कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया समेत पार्टी के कुछ अन्य सांसद इस समय दिल्ली में मौजूद हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे निजी दौरा बताया जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल के दो बड़े अभिनेता-सांसदों के भी अगले कुछ दिनों में दिल्ली पहुंचने की संभावना है।

    इस राजनीतिक घमासान के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन के साथ खड़े होने का दावा किया है। सांसद सौगत रॉय ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब कुछ ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा है, जिसके तहत धनबल और केंद्रीय एजेंसियों के डर का इस्तेमाल कर क्षेत्रीय पार्टियों को तोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस चुनौती का मजबूती से सामना करेगी। वहीं दूसरी ओर, कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा और बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद ने भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की है।

    इस बीच, अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता का संदेश देने के लिए खुद ममता बनर्जी आठ जून को दिल्ली के दौरे पर आ रही हैं। वे यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होंगी, जहां उनके साथ अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन भी मौजूद रहेंगे। दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी अपने नाराज सांसदों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी शिकायतों को दूर करने का प्रयास भी कर सकती हैं, ताकि लोकसभा में किसी भी तरह के संभावित विभाजन को समय रहते टाला जा सके।

  • श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत

    श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में आगामी दौरों को लेकर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीसीसीआई शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम की घोषणा करने जा रही है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ता न केवल नए खिलाड़ियों को आजमाने के मूड में हैं, बल्कि टी20 टीम के नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर चुके हैं।

    मौजूदा टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर इस समय खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में मार्च में उनकी कप्तानी में भारत ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था, लेकिन इसके बावजूद चयनकर्ता उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का मन बना रहे हैं। उनकी जगह मध्यक्रम के अनुभवी बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया जा सकता है।

    नेतृत्व परिवर्तन का यह सिलसिला केवल कप्तानी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को भी इस जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है, और उनकी जगह युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को नया उप-कप्तान बनाया जा सकता है। चयनकर्ताओं का यह कड़ा रुख भविष्य की योजनाओं, विशेषकर 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक और उसी वर्ष होने वाले अगले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है।

    सूर्यकुमार यादव के लिए यह बदलाव दोहरा झटका साबित हो सकता है क्योंकि उन्हें न सिर्फ कप्तानी से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि खराब फॉर्म के चलते पूरी टीम से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। टी20 वर्ल्ड कप की नौ पारियों में उनका स्ट्राइक रेट तो ठीक था, लेकिन वे केवल 242 रन बना सके। इसके बाद आईपीएल 2026 के सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने 13 पारियों में सिर्फ 20.76 के औसत से 270 रन बनाए।

    दूसरी ओर, नए कप्तान के रूप में उभर रहे 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उस समय सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की मध्यक्रम में मौजूदगी के कारण अय्यर को टीम संयोजन में जगह नहीं मिल पा रही थी। इसी साल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान उन्हें चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में शामिल जरूर किया गया था, लेकिन मैच खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि प्रबंधन तब वर्ल्ड कप की कोर टीम को आजमाना चाहता था।

    भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा कप्तानों को बदलने का यह लगातार दूसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले साल 2025 में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब रोहित शर्मा ने मार्च में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जिताया था, लेकिन अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया था, हालांकि रोहित टीम में बने रहे थे।

    इस आगामी चयन में सबसे बड़ा आकर्षण 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी हो सकते हैं। आईपीएल 2026 के एक धमाकेदार सीजन में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के बाद भारत की सीनियर पुरुष टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे।

    राष्ट्रीय टीम के दौरों से ठीक पहले, सूर्यवंशी 9 से 21 जून तक श्रीलंका में होने वाली इंडिया ए की ट्राई-सीरीज का हिस्सा होंगे, जिसमें अफगानिस्तान की टीम भी शामिल है। इसके ठीक बाद सीनियर भारतीय टीम को 26 और 28 जून को बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैच खेलने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 1 से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के लंबे दौरे पर रहेगी, जहां पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज खेली जानी है।