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  • 77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने आधिकारिक रूप से निर्देशन की दुनिया से खुद को अलग करने का फैसला किया है। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह भविष्य में किसी भी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण और थिएटर से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता आगे भी बनी रहेगी, लेकिन निर्देशक के रूप में वापसी की संभावना अब नहीं है। उनके इस फैसले ने फिल्म उद्योग में लंबे समय से चली आ रही उनकी रचनात्मक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण विराम लगा दिया है।

    महेश भट्ट ने अपने निर्णय के पीछे बदलते फिल्मी माहौल और रचनात्मक प्रक्रिया में आए बदलावों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आज अधिकांश फिल्मों का स्वरूप पहले से तय रहता है, जिससे निर्देशक और कलाकार के लिए अपनी कल्पनाशीलता तथा स्वतंत्र सोच को पूरी तरह अभिव्यक्त करना पहले जैसा संभव नहीं रह गया है। उनके अनुसार कला का वास्तविक स्वरूप तभी सामने आता है, जब रचनाकार को प्रयोग करने और अपने दृष्टिकोण को खुलकर प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मिले।

    उन्होंने कहा कि जब किसी फिल्म का लगभग हर पहलू पहले से निर्धारित हो और रचनात्मक निर्णयों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तब निर्देशक की भूमिका भी पहले जैसी प्रभावी नहीं रह जाती। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है और यदि वही सीमित हो जाए तो रचनात्मक संतुष्टि भी कम होने लगती है। इसी सोच ने उन्हें निर्देशन से स्थायी रूप से दूरी बनाने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

    महेश भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशन छोड़ने का अर्थ सिनेमा से पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बतौर निर्माता और थिएटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य नए विचारों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है, लेकिन कैमरे के पीछे निर्देशक की भूमिका निभाने की अब उनकी कोई इच्छा नहीं है।

    महेश भट्ट का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने ऐसी कई फिल्में बनाई, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। संवेदनशील विषयों, मानवीय रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक विशिष्ट निर्देशक के रूप में स्थापित किया।

    उनके निर्देशन में बनी कई फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज और मानवीय भावनाओं पर भी गहरी छाप छोड़ी। लेखक के रूप में भी उन्होंने कई सफल फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अलग रचनात्मक शैली विकसित की।

    निर्देशन से उनका पहला लंबा विराम वर्ष 1999 के बाद शुरू हुआ था। इसके करीब दो दशक बाद उन्होंने एक फिल्म के जरिए फिर से निर्देशन में वापसी की, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह वापसी अंतिम थी। उनके ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि हिंदी सिनेमा को अब उनकी नई निर्देशित फिल्म देखने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि फिल्म निर्माण और रचनात्मक परियोजनाओं में उनकी उपस्थिति आगे भी बनी रहेगी और उनके अनुभव का लाभ नई पीढ़ी के कलाकारों तथा फिल्मकारों को मिलता रहेगा।

  • वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल के वनडे और सीमित ओवरों के करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी भविष्यवाणी की है। वर्तमान में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के दौरान टीम संयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहवाग का यह बयान सामने आया है। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार होने के बाद यशस्वी जायसवाल को बैकअप के रूप में भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

    मुख्य रूप से शीर्ष क्रम और ओपनिंग स्लॉट में बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जायसवाल के लिए इस समय भारतीय वनडे टीम के अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें बेंच पर बैठना पड़ रहा है। इस स्थिति पर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस चल रही है कि क्या इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतिम एकादश से बाहर रखना सही है। इसी विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने जायसवाल के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और दूरदर्शी खाका खींचा है।

    वीरेंद्र सहवाग ने स्पष्ट रूप से माना कि इस समय भारतीय वनडे टीम के शीर्ष क्रम में जगह बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मौजूदा टीम समीकरण का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में शुभमन गिल टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं और रोहित शर्मा जैसा अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी भी बतौर ओपनर टीम की पहली पसंद बना हुआ है। ऐसी मजबूत और स्थापित ओपनिंग जोड़ी के रहते यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाज नहीं हैं और शीर्ष क्रम में कोई जगह खाली नहीं है।

    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने जायसवाल के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी को निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका समय जल्द ही आने वाला है। सहवाग के अनुसार, जैसे ही सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे और अपने संन्यास की घोषणा करेंगे, वैसे ही यशस्वी जायसवाल के लिए भारतीय वनडे और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाएंगे। रोहित के हटने के बाद जायसवाल को राष्ट्रीय टीम में लगातार और नियमित रूप से खेलने के मौके मिलने शुरू हो जाएंगे, जो उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    इस आगामी रेस में चुनौतियों का जिक्र करते हुए सहवाग ने यह भी जोड़ा कि यशस्वी जायसवाल को टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। गायकवाड़ भी लगातार घरेलू क्रिकेट और मिले हुए मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, सहवाग का मानना है कि यदि भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी टीम में तीन मुख्य ओपनर बल्लेबाजों का चयन करते हैं, तो यशस्वी जायसवाल निश्चित रूप से उन शीर्ष विकल्पों में शामिल होंगे।

    वर्तमान समय में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गहरी छाप छोड़ी है। सहवाग जैसे महान खिलाड़ी की इस भविष्यवाणी से साफ है कि भविष्य की भारतीय वनडे टीम के निर्माण में जायसवाल को एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। भले ही अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला में वे अंतिम एकादश का हिस्सा न बन पा रहे हों, लेकिन रोहित शर्मा के युग के बाद भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल की जोड़ी को भविष्य की सलामी जोड़ी के रूप में तैयार किया जा रहा है।

  • चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) से जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने त्रि-सेवाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर को स्वीकार किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपने सैन्य जीवन को भावनात्मक विदाई दी। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले जनरल चौहान ने 1981 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया। उनके रिटायरमेंट समारोह में सैन्य परंपराओं और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां उन्होंने वर्दीधारी जीवन को अलविदा कहते हुए इसे अपने जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

    जनरल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पांजलि अर्पित करना उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण था, क्योंकि यह उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई लेना उनके लिए गर्व का विषय है और यह उनके सैन्य जीवन की सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए सीख और प्रेरणा से भरा रहा है।

    अपने कार्यकाल को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका समय अत्यंत संतोषजनक रहा और इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संयुक्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिला, जिससे देश की रक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाए गए।

    जनरल चौहान की सेवानिवृत्ति को भारतीय सैन्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान त्रि-सेवाओं के बीच तालमेल और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। चार दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और अनेक प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त किए। उनके योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहां उन्होंने न केवल नेतृत्व किया बल्कि आधुनिक सैन्य संरचना को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
  • दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार

    दिग्विजय सिंह आज कर सकते हैं रिटायरमेंट का ऐलान: शाम 4 बजे भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, राज्यसभा से पहले ही इनकार



    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह आज अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर सकते हैं। दिग्विजय ने शाम 4 बजे भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। तीन दिन पहले उन्होंने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, “मेरा रिटायरमेंट प्लान? शायद, क्यों नहीं…”।

    वीडियो में 62 वर्षीय सिबानंद भंजा और उनकी पत्नी बसबी भंजा को दिखाया गया है, जिन्होंने बैंक की नौकरी से रिटायर होने के बाद एक कार में यात्रा कर पूरे भारत का भ्रमण शुरू किया। दंपति ने अब तक 55 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर ली है और होटल के बजाय खुद भोजन बनाकर खाते हैं। दिग्विजय ने इस वीडियो के माध्यम से अपने रिटायरमेंट के अंदाज को दर्शाया।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर भी दिग्विजय पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे राज्यसभा की सीट लेने से इनकार कर चुके हैं। जून में उनका दूसरा कार्यकाल पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाने का विकल्प छोड़कर एमपी में कांग्रेस की स्थिति पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

    इतिहास पर नजर डालें तो दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक चुनाव न लड़ने का संकल्प लिया। 2014 में वे राज्यसभा सदस्य बने और 2020 में दूसरी बार राज्यसभा सांसद चुने गए।

    आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके रिटायरमेंट और भविष्य की योजनाओं का खुलासा होने की उम्मीद है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस के रणनीतिक बदलाव पर नई बहस शुरू हो सकती है।

  • उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच

    उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड SCG में खेला जाने वाला एशेज सीरीज का टेस्ट मैच उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। इस भावुक मौके पर ख्वाजा ने न सिर्फ अपने संन्यास की घोषणा की बल्कि अपने लंबे करियर के दौरान झेले नस्लीय भेदभाव मीडिया की आलोचना और टीम मैनेजमेंट के दोहरे मानदंडों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने कहा कि उन्हें पूरे करियर में कई बार उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण अलग नजर से देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटिल होने की स्थिति में भी उनकी सच्चाई जाने बिना उन पर सवाल खड़े किए गए और उन्हें अक्सर आलसी स्वार्थी या टीम के लिए पूरी तरह समर्पित न होने वाला खिलाड़ी बताया गया।

    ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।

    ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

    इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।

  • आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच

    आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान… सिडनी टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के स्टार ओपनर (Australian Star Opener) उस्मान ख्वाजा (Usman Khawaja) ने इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट का ऐलान (Retirement Announced from International Cricket) कर दिया है। यह ऐलान उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए किया, इस दौरान उनका परिवार भी वहां मौजूद था। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड के खिलाफ सिडनी में होने वाला 5वां एशेज मुकाबला उनके करियर का आकिरी मैच होने वाला है। ख्वाजा ने शुक्रवार को ही अपने इस फैसले की जानकारी टीम के साथी खिलाड़ियों को भी दी। ख्वाजा ने रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए अपने पूरे करियर में झेले गए नस्लवाद के बारे में भी बात की। बता दें, 5 मैच की इस टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलिया अजेय बढ़त बना चुका है और वह 3-1 से आगे चल रहा है।

    उस्मान ख्वाजा ने कहा, “क्रिकेट के जरिए भगवान ने मुझे मेरी कल्पना से कहीं ज्यादा दिया है। उन्होंने मुझे ऐसी यादें दी हैं जिन्हें मैं हमेशा अपने साथ रखूंगा, ऐसी दोस्ती जो खेल से कहीं आगे है, और ऐसे सबक जिन्होंने मुझे, जो मैं आज हूं, मैदान के बाहर बनाया है। लेकिन कोई भी करियर सिर्फ एक इंसान का नहीं होता। जाहिर है, मुझे बहुत मदद मिली। मेरे माता-पिता, जो वहां बैठे हैं, आपके बलिदानों के लिए धन्यवाद, जो कभी हाइलाइट्स रील में नहीं आए।”

    उस्मान ख्वाजा ने इस दौरान एशेज में अपनी तैयारी और पीठ की दिक्कतों को लेकर अपने साथ हुए नस्लीय स्टीरियोटाइपिंग के बारे में बात की। उन्होंने कहा, “ऐसी टिप्पणियां, ‘वह टीम के प्रति कमिटेड नहीं है। ‘वह सिर्फ अपने बारे में सोच रहा था। उसने एक दिन पहले गोल्फ कॉम्पिटिशन खेला। वह स्वार्थी है। वह काफी मेहनत से ट्रेनिंग नहीं करता। उसने मैच से एक दिन पहले ट्रेनिंग नहीं की। वह आलसी है।’ ये वही स्टीरियोटाइप हैं, वही नस्लीय स्टीरियोटाइप जिनके साथ मैं पूरी जिंदगी बड़ा हुआ हूं… यही बात मुझे सबसे ज्यादा निराश करती है, क्योंकि मुझे लगा था कि हम इससे आगे निकल चुके हैं। लेकिन अभी भी थोड़ा बहुत ऐसा है, जिससे मुझे हर दिन लड़ना पड़ता है, जो मेरे लिए बहुत निराशाजनक है।”

    उस्मान ख्वाजा ने 2011 में ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट डेब्यू किया था। सिडनी में जो वह इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट खेलेंगे वह उनके करियर का 88वां मुकाबला होगा। ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया की 2023 WTC चैंपियन टीम का भी हिस्सा थे। उन्होंने मैदान के बाहर एक मजबूत विरासत छोड़ी है, वह ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने वाले पहले पाकिस्तान में जन्मे क्रिकेटर और देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले मुस्लिम क्रिकेटर हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए 49 वनडे मैच भी खेले हैं।

  • पिछले साल सभी फॉर्मेट से सन्यास का ऐलान किया था, अब बोले-फैंस के सामने खेलकर ही करूंगा विदाई

    पिछले साल सभी फॉर्मेट से सन्यास का ऐलान किया था, अब बोले-फैंस के सामने खेलकर ही करूंगा विदाई

    नई दिल्ली  बांग्लादेश के स्टार ऑलराउंडर शाकिब अल हसन ने अपने रिटायरमेंट पर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा है कि उन्होंने अभी तक तीनों फॉर्मेट-टेस्ट वनडे और टी20 इंटरनेशनल-से आधिकारिक तौर पर संन्यास नहीं लिया है। मोईन अली के पॉडकास्ट ‘बियर्ड बिफोर विकेट में उन्होंने पहली बार इस विषय पर खुलकर बात की और बताया कि उनका प्लान है कि वे बांग्लादेश लौटकर एक पूरी घरेलू सीरीज खेलें और उसके बाद तीनों फॉर्मेट को एकसाथ अलविदा कह दें। शाकिब ने कहा मैं अभी रिटायर नहीं हुआ हूं। मेरा सपना है कि एक पूरी घरेलू सीरीज खेलकर फैंस को धन्यवाद दूं। सीरीज टेस्ट से शुरू हो या टी20 से-इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं बस मैदान पर आखिरी बार अपने देश के लोगों के सामने उतरना चाहता हूं।

    मई 2024 से देश से बाहर राजनीतिक परिस्थितियों के कारण लौटना हुआ मुश्किल

    शाकिब मई 2024 से बांग्लादेश नहीं लौटे हैं। 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए थे। वे आवामी लीग से सांसद थे और उसी दौरान एक कथित हत्या के मामले में उनका नाम सामने आया जबकि वे उस समय देश में मौजूद भी नहीं थे। इसके बावजूद शाकिब ने पाकिस्तान और भारत दौरे पर टेस्ट सीरीज खेली। भारत के खिलाफ कानपुर टेस्ट सितंबर 2024 उनकी आखिरी इंटरनेशनल मैच है। वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर लौटूंगा। इसी उम्मीद में अलग-अलग T20 लीग खेल रहा हूं। घरेलू सीरीज में मेरे लिए प्रदर्शन नहीं बल्कि उन फैंस को विदाई देना अहम है जिन्होंने मेरा साथ सालों तक दिया।

    2024 में किया था रिटायरमेंट का ऐलान लेकिन अब बदल गया फैसला

    2024 में भारत दौरे के दौरान शाकिब ने टेस्ट और टी20 फॉर्मेट से रिटायरमेंट की घोषणा की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि T20 वर्ल्ड कप में खेला गया मैच उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय टी20 माना जाए। वनडे से संन्यास को लेकर उनकी योजना थी कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 उनकी अंतिम वनडे सीरीज होगी। लेकिन शाकिब को गेंदबाजी एक्शन में गड़बड़ी पाए जाने के कारण टीम में शामिल नहीं किया गया। इसके चलते 2023 वनडे वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ दिल्ली में खेला गया मैच ही उनके करियर का अंतिम वनडे माना गया।

    जानबूझकर अवैध एक्शन किया मैं बहुत थक गया था 

    शाकिब ने अपने गेंदबाजी एक्शन विवाद पर भी चर्चा की। 2024 में इंग्लैंड में सरे काउंटी से खेलते समय उनका एक्शन रिपोर्ट हुआ और ECB ने उन्हें गेंदबाजी से रोक दिया। उन्होंने कहा मैं मानता हूं कि मैंने जानबूझकर थोड़ा गलत एक्शन किया था। मैं पाकिस्तान में दो टेस्ट खेलकर सीधे टॉन्टन टेस्ट में पहुंचा था और बेहद थका हुआ था। उस चार दिवसीय मैच में मैंने 70 से ज्यादा ओवर फेंके। पूरे करियर में मैंने किसी टेस्ट में इतने ओवर नहीं डाले। मुझे लगा था कि अंपायर चेतावनी देंगे लेकिन वे नियम के अनुसार सही थे। इसके बाद शाकिब ने वीडियो देखकर अपनी गलती समझी और कुछ हफ्तों की प्रैक्टिस के बाद एक्शन ठीक कर लिया। उन्होंने सरे क्लब को पूरी मदद के लिए धन्यवाद दिया।

    फैंस को घरेलू मैदान पर देना चाहते हैं विदाई

    शाकिब ने कहा कि बांग्लादेश क्रिकेट में उनका सफर लंबा रहा है और वे अपने समर्थकों को सही तरीके से अलविदा कहना चाहते हैं। उन्होंने कहा एक खिलाड़ी को अपने वादों पर कायम रहना चाहिए। मैं अच्छा खेलूं या नहीं उससे फर्क नहीं पड़ता। मेरा लक्ष्य सिर्फ इतना है कि अपने लोगों के सामने आखिरी बार खेलकर कुछ वापस दे सकूं। उनके इस बयान के बाद अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और फैंस को इस बात का इंतजार है कि शाकिब कब देश लौटते हैं और कौन-सी सीरीज उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंतिम अध्याय बनती है।