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  • भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा के भविष्य पर संशय एंटरटेनमेंट डेब्यू की चर्चाओं के बीच संन्यास की खबरें तेज

    भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा के भविष्य पर संशय एंटरटेनमेंट डेब्यू की चर्चाओं के बीच संन्यास की खबरें तेज


    नई दिल्ली ।
    भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के अंतरराष्ट्रीय करियर को लेकर खेल जगत में एक बार फिर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। आगामी एकदिवसीय विश्व कप से पूर्व उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

    हालिया रिपोर्टों के अनुसार रोहित शर्मा के एक मनोरंजन कार्यक्रम से जुड़ने की खबरों के बाद उनके खेल करियर को लेकर संशय गहरा गया है। मीडिया में यह दावा किया जा रहा है कि गैर-क्रिकेट गतिविधियों में व्यस्तता के कारण वे आगामी दौरों से दूरी बना सकते हैं।

    हालांकि इस प्रकार की अटकलें पहले भी सामने आ चुकी हैं जिन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों द्वारा खारिज किया जा चुका है। इंग्लैंड के खिलाफ हालिया श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने अपने फॉर्म और प्रतिबद्धता का प्रमाण भी प्रस्तुत किया था।

    विश्व कप 2027 में खेलने की इच्छा जता चुके रोहित शर्मा को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के क्रिकेट प्रशंसकों के बीच उनके इस संभावित कदम को लेकर उत्सुकता और चिंता दोनों देखी जा रही है।

    आगामी घरेलू एकदिवसीय श्रृंखलाओं को देखते हुए उनके चयन और भविष्य की योजनाओं पर चयनकर्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं। आधिकारिक तौर पर अभी तक न तो बोर्ड और न ही खिलाड़ी की ओर से किसी प्रकार के संन्यास की घोषणा की गई है।

    खेल विश्लेषकों का मानना है कि व्यस्त कार्यक्रम और एक ही प्रारूप में खेलने की चुनौतियों के बावजूद रोहित शर्मा के अनुभव की टीम को आवश्यकता बनी हुई है। आने वाले दिनों में ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा

    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का किया ऐलान, चुनावी राजनीति से संन्यास की घोषणा


    नई दिल्ली । 
    कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी और कहा कि बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियां तथा राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय बने रहेंगे।

    सिद्धारमैया ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। उनके अनुसार, आज राजनीति में ईमानदारी और सिद्धांतों के साथ काम करना पहले से अधिक कठिन हो गया है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया में धनबल का प्रभाव बढ़ा है और अब चुनाव लड़ने के लिए परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि इसी बदलते माहौल को देखते हुए उन्होंने भविष्य में किसी भी चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनने का फैसला किया है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है और वर्तमान सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक उनकी आयु 81 से 82 वर्ष के बीच होगी। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। पहले जैसी ऊर्जा और निरंतर सक्रियता बनाए रखना अब संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने समय रहते चुनावी राजनीति से अलग होने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सार्वजनिक यात्रा वर्ष 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। पिछले लगभग पांच दशकों में उन्होंने जीत और हार दोनों का अनुभव किया, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया और यही उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

    सिद्धारमैया ने यह भी बताया कि उनके निर्वाचन क्षेत्र वरुणा के लोग लगातार उनसे अगला चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपना निर्णय नहीं बदलने की बात कही। उनका कहना है कि वह जनता की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन अब चुनावी राजनीति से पीछे हटना ही उचित मानते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनता की समस्याओं और सामाजिक मुद्दों को उठाने का उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा।

    उन्होंने अपने संदेश में राजनीति में बढ़ते आर्थिक प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि पहले चुनाव जनता के सहयोग और जनसमर्थन के बल पर लड़े जाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए पारदर्शिता, नैतिकता और जनविश्वास आवश्यक हैं तथा इन मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता है।

    सिद्धारमैया के इस ऐलान को कर्नाटक की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इस वरिष्ठ नेता के फैसले के बाद भविष्य में कांग्रेस की चुनावी रणनीति और नेतृत्व को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह संगठन और जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।

  • '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह

    '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'… प्रो. डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के सम्मान में सजा यादगार समारोह


    उत्तरप्रदेश । उत्तर प्रदेश के बांदा शहर में शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति पर आयोजित अभिनंदन समारोह भावनाओं, सम्मान और प्रेरणा का अनूठा संगम बन गया। तिंदवारी रोड स्थित होटल रॉयल ऑर्बिट में “46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ” शीर्षक से आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. शुक्ल की गौरवपूर्ण सेवाओं को नमन किया।

    डॉ. शुक्ल के सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस समारोह में उनके जीवन के विभिन्न आयामों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति किसी कर्मयोगी के जीवन का अंत नहीं, बल्कि नए अध्याय की शुरुआत होती है। शिक्षा, साहित्य और सामाजिक सरोकारों के प्रति डॉ. शुक्ल का समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय और पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। प्रोफेसर उपाध्याय ने अपने संबोधन में डॉ. शुक्ल की साहित्यिक प्रतिभा, भाषा पर असाधारण पकड़, संपादन कौशल और शिक्षण शैली की सराहना करते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, अनुशासित व्यक्तित्व और संवेदनशील साहित्यकार बताया।

    समारोह की अध्यक्षता बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने ज्ञान, अनुभव और सामाजिक दृष्टि से शिक्षा जगत को समृद्ध किया है। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके रचनात्मक व्यक्तित्व की सराहना की।

    कार्यक्रम का सबसे भावुक और आकर्षक क्षण वह रहा जब डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित लगभग 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई। उनके अभिन्न मित्र और सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी द्वारा तैयार इस वृत्तचित्र में भारतीय वायुसेना से लेकर उच्च शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री के दौरान कई अतिथि भावुक भी नजर आए।

    समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोज कुमार ‘मृदुल’ ने प्रभावी ढंग से किया। वक्ताओं ने बताया कि डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की आयु में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर राष्ट्रसेवा का दायित्व निभाया। लगभग 17 वर्ष 7 माह तक सैन्य सेवा देने के बाद उन्होंने शिक्षा और साहित्य को अपना जीवन समर्पित कर दिया और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।

    समारोह में भारतीय वायुसेना के उनके पूर्व साथी, शिक्षाविद, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, साहित्यकार और विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक बड़ी संख्या में मौजूद रहे। अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और आकांक्षा दीक्षित ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। प्रीतिभोज के साथ संपन्न हुआ यह समारोह केवल एक विदाई कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसे कर्मयोगी के सम्मान का उत्सव बन गया, जिसने अपने 46 वर्षों के सफर से समाज, शिक्षा और साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

  • हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    हिटमैन' के एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की खबरों को बीसीसीआई ने किया खारिज; सचिव देवजीत सैकिया ने भविष्य की योजनाओं पर दी बड़ी प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की सोशल मीडिया और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही अटकलों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। बीसीसीआई के संयुक्त सचिव देवजीत सैकिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर इंग्लैंड के विरुद्ध होने वाला सीरीज का निर्णायक मुकाबला रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंतिम मैच कतई नहीं होगा। बोर्ड की इस त्वरित प्रतिक्रिया के बाद स्टार बल्लेबाज के भविष्य को लेकर लगाई जा रही तमाम तरह की मनगढ़ंत कयासबाजियों पर पूरी तरह से रोक लग गई है।

    क्रिकेट जगत में यह प्रशासनिक स्पष्टीकरण उस समय आया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि उनतालीस वर्षीय पूर्व कप्तान इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम एकदिवसीय मैच के बाद इस प्रारूप को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि चयन समिति या बोर्ड के भीतर रोहित शर्मा के अंतिम मैच को लेकर ऐसी कोई भी आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह भारतीय एकदिवसीय टीम के एक नियमित और अत्यंत महत्वपूर्ण सदस्य हैं और जब तक वह खेल के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तब तक देश का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे।

    इस प्रकार के विवादों और अफवाहों की शुरुआत मुख्य रूप से तब हुई जब खेल गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि राष्ट्रीय चयन समिति और मुख्य कोच गौतम गंभीर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर टीम में एक बड़े बदलाव की योजना बना रहे हैं। इसके तहत सीमित ओवरों के क्रिकेट में युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देकर एक दीर्घकालिक ‘ट्रांजिशन फेज’ की शुरुआत करने की बात कही जा रही थी। इसी रणनीतिक बदलाव की खबरों के बीच रोहित शर्मा के संन्यास की खबरों को जोड़कर देखा जाने लगा, जिसे अब बोर्ड ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

    इसके साथ ही, जारी द्विपक्षीय सीरीज के शुरुआती मुकाबलों में रोहित शर्मा के बल्ले से बड़ी पारियां न निकलने के कारण भी आलोचकों ने उनके स्थान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। हालांकि, बीसीसीआई ने संन्यास की खबरों का खंडन करके खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास किया है, लेकिन रणनीतिक रूप से बोर्ड अधिकारी भी वर्ष 2027 के आगामी विश्व कप में उनकी निश्चित भागीदारी को लेकर कोई भी पक्का आश्वासन देने से बचते नजर आए। इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि बोर्ड वर्तमान प्रदर्शन के आधार पर ही भविष्य की योजनाओं को आकार देगा।

    वर्तमान में भारत और इंग्लैंड के मध्य खेली जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां दोनों टीमें बराबरी पर हैं। रविवार को लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले इस अत्यंत महत्वपूर्ण और खिताबी मुकाबले में रोहित शर्मा भारतीय टीम के लिए पारी की शुरुआत करने मैदान पर उतरेंगे। क्रिकेट प्रशंसकों के लिए यह राहत की बात है कि टीम इंडिया के सबसे आक्रामक बल्लेबाजों में से एक ‘हिटमैन’ बिना किसी मानसिक दबाव के मैदान पर अपनी स्वाभाविक खेल शैली का प्रदर्शन कर सकेंगे, क्योंकि बोर्ड ने उनके भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

  • आखिरी मैच में शतक लगा दो यार…', रोहित शर्मा के संभावित संन्यास पर भावुक हुए आकाश चोपड़ा, लॉर्ड्स में यादगार विदाई की जताई उम्मीद

    आखिरी मैच में शतक लगा दो यार…', रोहित शर्मा के संभावित संन्यास पर भावुक हुए आकाश चोपड़ा, लॉर्ड्स में यादगार विदाई की जताई उम्मीद

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के संभावित वनडे संन्यास को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा वनडे श्रृंखला के बीच यह अटकलें सामने आई हैं कि तीसरे मुकाबले के बाद रोहित इस प्रारूप को भी अलविदा कह सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन क्रिकेट जगत में इस विषय पर लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में पूर्व भारतीय क्रिकेटर और क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने रोहित शर्मा को लेकर भावुक टिप्पणी की है।

    आकाश चोपड़ा ने कहा कि यदि इंग्लैंड के खिलाफ होने वाला मुकाबला वास्तव में रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंतिम मैच साबित होता है, तो वह चाहेंगे कि भारतीय बल्लेबाज अपने करियर का समापन एक यादगार पारी के साथ करें। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा कि रोहित को अपने अंतिम मुकाबले में शतक बनाकर उसी अंदाज में विदाई लेनी चाहिए, जिस अंदाज में उन्होंने वर्षों तक वनडे क्रिकेट पर अपनी छाप छोड़ी है।

    पूर्व क्रिकेटर ने हाल के मैचों में रोहित शर्मा की बल्लेबाजी शैली में आए बदलाव की भी चर्चा की। उनके अनुसार पहले रोहित पावरप्ले के शुरुआती ओवरों में आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए तेजी से रन बनाते थे, लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ हालिया मुकाबलों में उनका दृष्टिकोण अलग दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि दूसरे वनडे में रोहित ने अपेक्षाकृत धीमी बल्लेबाजी की और यह उनकी सामान्य शैली से अलग नजर आया।

    आकाश चोपड़ा का मानना है कि कप्तानी छोड़ने के बाद रोहित शर्मा के खेल में बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पहले रोहित शुरुआत से ही विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब वह अधिक संयमित बल्लेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यह बदलाव चर्चा का विषय है और क्रिकेट प्रेमियों ने भी इसे महसूस किया है।

    उन्होंने चयन प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी। आकाश चोपड़ा का कहना था कि यदि टीम प्रबंधन भविष्य की योजना बना रहा है, तब भी अनुभवी खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार अगले बड़े वैश्विक टूर्नामेंट में अभी समय बाकी है और ऐसे में रोहित जैसे अनुभवी खिलाड़ी को कुछ और मौके दिए जाने पर भी विचार किया जा सकता था। उनका मानना है कि अनुभव और निरंतर प्रदर्शन किसी भी टीम के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

    रोहित शर्मा पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। ऐसे में यदि वह वनडे क्रिकेट से भी विदाई लेते हैं तो भारतीय क्रिकेट का एक सफल अध्याय समाप्त होगा। अपने लंबे करियर में रोहित ने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और सीमित ओवरों के क्रिकेट में अनेक रिकॉर्ड अपने नाम किए। उनकी कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ने भारतीय टीम को कई महत्वपूर्ण सफलताएं दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

    फिलहाल सभी की निगाहें इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले अगले मुकाबले पर टिकी हैं। यदि संन्यास की चर्चाएं सही साबित होती हैं तो क्रिकेट प्रेमी रोहित शर्मा को एक यादगार पारी खेलते हुए देखना चाहेंगे। वहीं यदि ऐसा नहीं होता है, तो भी उनके भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार रहेगा। क्रिकेट जगत में आकाश चोपड़ा की भावुक प्रतिक्रिया ने इन चर्चाओं को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।

  • महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    महिला क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग का अंत: इंग्लैंड की विश्व विजेता कप्तान हीदर नाइट ने किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत से एक बेहद भावुक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ इंग्लैंड की महान और दिग्गज क्रिकेटर हीदर नाइट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। भारत के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर खेला जा रहा महिला टेस्ट मैच उनके 16 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला साबित होने जा रहा है। उनके साथ ही इंग्लैंड की एक और अनुभवी खिलाड़ी टैमी ब्यूमोंट भी इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच की समाप्ति के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह देंगी। इस तरह इंग्लैंड महिला क्रिकेट के एक बेहद सफल और स्वर्णिम युग का समापन हो रहा है।

    हीदर नाइट ने साल 2010 में इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए पदार्पण किया था और तब से लेकर अब तक वे टीम के मध्यक्रम की सबसे मजबूत रीढ़ बनी रहीं। उन्होंने अपने करियर में तीनों प्रारूपों को मिलाकर कुल 320 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 7,994 रन बनाए। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 6 शानदार शतक और 42 अर्धशतक दर्ज हैं, जबकि अपनी उपयोगी गेंदबाजी के दम पर उन्होंने 84 विकेट भी चटकाए हैं। वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला क्रिकेटर हैं। साल 2020 में उन्होंने टी20 विश्व कप में शतक जड़कर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में शतक लगाने वाली इंग्लैंड की पहली महिला खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

    नाइट के पूरे क्रिकेटिंग सफर का सबसे ऐतिहासिक और यादगार पल साल 2017 में आया था। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए महिला वनडे विश्व कप के बेहद रोमांचक फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का सपना तोड़ते हुए विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। उन्होंने साल 2016 में दिग्गज खिलाड़ी चार्लोट एडवर्ड्स के बाद टीम की कमान संभाली थी और साल 2025 तक कुल 199 मैचों में इंग्लैंड का नेतृत्व किया, जिसमें से टीम ने 134 मुकाबलों में जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली एशेज सीरीज में पराजय के बाद उन्होंने कप्तानी छोड़ दी थी।

    अपने संन्यास की घोषणा करते हुए हीदर नाइट बेहद भावुक नजर आईं और उन्होंने कहा कि पिछले 16 वर्षों की यह यात्रा उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं रही है। उन्होंने इस सफर में मिले अनुभवों, यादों और ड्रेसिंग रूम के साथियों का आभार व्यक्त किया। पिछले कुछ वर्षों में नाइट को गंभीर चोटों का भी सामना करना पड़ा, जिसमें साल 2024 के टी20 विश्व कप के दौरान पिंडली की चोट और साल 2025 में हैमस्ट्रिंग टेंडन की गंभीर चोट शामिल थी। इन बाधाओं के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और हालिया टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 58 रनों की जुझारू पारी खेलकर अपनी टीम को संकट से निकाला था।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्लेयर कॉनर और चेयरमैन रिचर्ड थॉम्पसन ने हीदर नाइट के योगदान को असाधारण बताते हुए उनकी प्रतिबद्धता और नेतृत्व क्षमता की जमकर सराहना की है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद हीदर नाइट अब खेल प्रशासनिक भूमिका में कदम रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्हें द हंड्रेड टूर्नामेंट की प्रसिद्ध टीम ‘लंदन स्पिरिट’ का नया जनरल मैनेजर नियुक्त किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी वे जुलाई के अंत में शुरू होने वाले नए सीजन से संभालेंगी।

  • 77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    77 की उम्र में महेश भट्ट ने निर्देशन को कहा अंतिम अलविदा, रचनात्मक स्वतंत्रता में कमी को बताया फैसले की सबसे बड़ी वजह

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार महेश भट्ट ने आधिकारिक रूप से निर्देशन की दुनिया से खुद को अलग करने का फैसला किया है। 77 वर्ष की आयु में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह भविष्य में किसी भी फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म निर्माण और थिएटर से जुड़े रचनात्मक कार्यों में उनकी सक्रियता आगे भी बनी रहेगी, लेकिन निर्देशक के रूप में वापसी की संभावना अब नहीं है। उनके इस फैसले ने फिल्म उद्योग में लंबे समय से चली आ रही उनकी रचनात्मक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण विराम लगा दिया है।

    महेश भट्ट ने अपने निर्णय के पीछे बदलते फिल्मी माहौल और रचनात्मक प्रक्रिया में आए बदलावों को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आज अधिकांश फिल्मों का स्वरूप पहले से तय रहता है, जिससे निर्देशक और कलाकार के लिए अपनी कल्पनाशीलता तथा स्वतंत्र सोच को पूरी तरह अभिव्यक्त करना पहले जैसा संभव नहीं रह गया है। उनके अनुसार कला का वास्तविक स्वरूप तभी सामने आता है, जब रचनाकार को प्रयोग करने और अपने दृष्टिकोण को खुलकर प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मिले।

    उन्होंने कहा कि जब किसी फिल्म का लगभग हर पहलू पहले से निर्धारित हो और रचनात्मक निर्णयों की गुंजाइश सीमित हो जाए, तब निर्देशक की भूमिका भी पहले जैसी प्रभावी नहीं रह जाती। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति होती है और यदि वही सीमित हो जाए तो रचनात्मक संतुष्टि भी कम होने लगती है। इसी सोच ने उन्हें निर्देशन से स्थायी रूप से दूरी बनाने का निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।

    महेश भट्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्देशन छोड़ने का अर्थ सिनेमा से पूरी तरह अलग होना नहीं है। उन्होंने कहा कि वह बतौर निर्माता और थिएटर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में अपनी भागीदारी जारी रखेंगे। उनका उद्देश्य नए विचारों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है, लेकिन कैमरे के पीछे निर्देशक की भूमिका निभाने की अब उनकी कोई इच्छा नहीं है।

    महेश भट्ट का फिल्मी सफर चार दशकों से भी अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1974 में की थी। शुरुआती दौर में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने ऐसी कई फिल्में बनाई, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। संवेदनशील विषयों, मानवीय रिश्तों और सामाजिक मुद्दों पर आधारित उनकी फिल्मों ने उन्हें एक विशिष्ट निर्देशक के रूप में स्थापित किया।

    उनके निर्देशन में बनी कई फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। उन्होंने ऐसी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा, जिन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ समाज और मानवीय भावनाओं पर भी गहरी छाप छोड़ी। लेखक के रूप में भी उन्होंने कई सफल फिल्मों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अपनी अलग रचनात्मक शैली विकसित की।

    निर्देशन से उनका पहला लंबा विराम वर्ष 1999 के बाद शुरू हुआ था। इसके करीब दो दशक बाद उन्होंने एक फिल्म के जरिए फिर से निर्देशन में वापसी की, लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह वापसी अंतिम थी। उनके ताजा बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि हिंदी सिनेमा को अब उनकी नई निर्देशित फिल्म देखने का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि फिल्म निर्माण और रचनात्मक परियोजनाओं में उनकी उपस्थिति आगे भी बनी रहेगी और उनके अनुभव का लाभ नई पीढ़ी के कलाकारों तथा फिल्मकारों को मिलता रहेगा।

  • वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    वीरेंद्र सहवाग की बड़ी भविष्यवाणी: रोहित शर्मा के वनडे संन्यास के बाद यशस्वी जायसवाल बनेंगे टीम इंडिया के नियमित ओपनर

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल के वनडे और सीमित ओवरों के करियर को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी भविष्यवाणी की है। वर्तमान में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे श्रृंखला के दौरान टीम संयोजन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सहवाग का यह बयान सामने आया है। आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले के दौरान स्टार बल्लेबाज विराट कोहली के हैमस्ट्रिंग की चोट का शिकार होने के बाद यशस्वी जायसवाल को बैकअप के रूप में भारतीय टीम में शामिल किया गया है।

    मुख्य रूप से शीर्ष क्रम और ओपनिंग स्लॉट में बल्लेबाजी करने वाले यशस्वी जायसवाल के लिए इस समय भारतीय वनडे टीम के अंतिम ग्यारह खिलाड़ियों में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें बेंच पर बैठना पड़ रहा है। इस स्थिति पर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच लगातार बहस चल रही है कि क्या इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अंतिम एकादश से बाहर रखना सही है। इसी विषय पर अपनी बेबाक राय रखते हुए पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने जायसवाल के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और दूरदर्शी खाका खींचा है।

    वीरेंद्र सहवाग ने स्पष्ट रूप से माना कि इस समय भारतीय वनडे टीम के शीर्ष क्रम में जगह बनाना किसी भी नए खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने मौजूदा टीम समीकरण का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान में शुभमन गिल टीम के कप्तान की भूमिका निभा रहे हैं और रोहित शर्मा जैसा अनुभवी और दिग्गज खिलाड़ी भी बतौर ओपनर टीम की पहली पसंद बना हुआ है। ऐसी मजबूत और स्थापित ओपनिंग जोड़ी के रहते यशस्वी जायसवाल को प्लेइंग इलेवन में शामिल करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं है, क्योंकि वे मध्यक्रम के बल्लेबाज नहीं हैं और शीर्ष क्रम में कोई जगह खाली नहीं है।

    पूर्व सलामी बल्लेबाज ने जायसवाल के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा कि युवा खिलाड़ी को निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्योंकि उनका समय जल्द ही आने वाला है। सहवाग के अनुसार, जैसे ही सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट को अलविदा कहेंगे और अपने संन्यास की घोषणा करेंगे, वैसे ही यशस्वी जायसवाल के लिए भारतीय वनडे और व्हाइट-बॉल क्रिकेट के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाएंगे। रोहित के हटने के बाद जायसवाल को राष्ट्रीय टीम में लगातार और नियमित रूप से खेलने के मौके मिलने शुरू हो जाएंगे, जो उनके करियर को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    इस आगामी रेस में चुनौतियों का जिक्र करते हुए सहवाग ने यह भी जोड़ा कि यशस्वी जायसवाल को टीम में अपनी जगह पक्की करने के लिए ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। गायकवाड़ भी लगातार घरेलू क्रिकेट और मिले हुए मौकों पर शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। हालांकि, सहवाग का मानना है कि यदि भारतीय चयनकर्ता और टीम प्रबंधन भविष्य के बड़े टूर्नामेंटों के लिए अपनी टीम में तीन मुख्य ओपनर बल्लेबाजों का चयन करते हैं, तो यशस्वी जायसवाल निश्चित रूप से उन शीर्ष विकल्पों में शामिल होंगे।

    वर्तमान समय में यशस्वी जायसवाल ने टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से गहरी छाप छोड़ी है। सहवाग जैसे महान खिलाड़ी की इस भविष्यवाणी से साफ है कि भविष्य की भारतीय वनडे टीम के निर्माण में जायसवाल को एक मुख्य स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है। भले ही अफगानिस्तान के खिलाफ श्रृंखला में वे अंतिम एकादश का हिस्सा न बन पा रहे हों, लेकिन रोहित शर्मा के युग के बाद भारतीय क्रिकेट के सीमित ओवरों के प्रारूप में यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल की जोड़ी को भविष्य की सलामी जोड़ी के रूप में तैयार किया जा रहा है।

  • चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) से जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने त्रि-सेवाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर को स्वीकार किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपने सैन्य जीवन को भावनात्मक विदाई दी। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले जनरल चौहान ने 1981 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया। उनके रिटायरमेंट समारोह में सैन्य परंपराओं और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां उन्होंने वर्दीधारी जीवन को अलविदा कहते हुए इसे अपने जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

    जनरल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पांजलि अर्पित करना उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण था, क्योंकि यह उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई लेना उनके लिए गर्व का विषय है और यह उनके सैन्य जीवन की सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए सीख और प्रेरणा से भरा रहा है।

    अपने कार्यकाल को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका समय अत्यंत संतोषजनक रहा और इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संयुक्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिला, जिससे देश की रक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाए गए।

    जनरल चौहान की सेवानिवृत्ति को भारतीय सैन्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान त्रि-सेवाओं के बीच तालमेल और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। चार दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और अनेक प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त किए। उनके योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहां उन्होंने न केवल नेतृत्व किया बल्कि आधुनिक सैन्य संरचना को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

  • बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

    नई दिल्ली ।   बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था.
    डेविड धवन क्यों हुए इमोशनल
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.

    डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?

    बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’
    डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडी
    फेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं।
    कई बड़े कलाकारों संग किया काम
    डेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.