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  • ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका

    ट्रंप के नए वीजा नियम ने बढ़ाई चिंता… भारतीय छात्रों को 54 दिन के भीतर लौटना होगा अमेरिका


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका (America) में आव्रजन नियमों (Immigration rules) में एक बड़े बदलाव के चलते भारतीय छात्रों (Indian students) समेत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लौटने की सलाह दी गई है। विश्वविद्यालयों ने सलाह दी है कि अगर वे मौजूदा आव्रजन व्यवस्था का लाभ बनाए रखना चाहते हैं तो 15 सितंबर से पहले अमेरिका लौट आएं। यह सलाह उन छात्रों के लिए है जो शैक्षणिक अवकाश के दौरान अपने देश आए हुए हैं और एफ-1 या जे-1 वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं।

    यह सलाह अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के नए “अंतिम नियम” के लागू होने से पहले दी गई है। यह नियम लंबे समय से लागू “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस यानी डी/एस व्यवस्था” की जगह लेगा।


    15 सितंबर से लागू होगा नया नियम

    नए नियम के तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका में अधिकतम चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश मिलेगा। मौजूदा व्यवस्था में एफ-1 वीजा धारक छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम की शर्तों का पालन करते रहते हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपने नोटिस में कहा, “इस अंतिम नियम को लागू करने के लिए 60 दिन का समय दिया गया है। हम सभी छात्रों को सलाह देते हैं कि वे 8 सितंबर, 2026 से शुरू होने वाली कक्षाओं से पहले न्यूयॉर्क लौट आएं।”


    क्या-क्या बदलेगा?

    – डीएचएस ने एफ-1 छात्र वीजा, जे-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी पत्रकारों के लिए आई वीजा पर अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय कर दी है।
    – नए नियम के तहत पढ़ाई पूरी होने के बाद अमेरिका में रहने की छूट 60 दिन से घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी।
    – अगर किसी छात्र को अपनी अवधि बढ़ानी होगी तो उसे अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) से फॉर्म आई-539 के माध्यम से मंजूरी लेनी होगी।


    किन छात्रों पर लागू नहीं होगा नया नियम?

    डीएचएस के अनुसार, जो छात्र 15 सितंबर को पहले से अमेरिका में “ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस” के तहत मौजूद होंगे, वे अपने फॉर्म आई-20 में दर्ज कार्यक्रम पूरा होने तक या स्वीकृत ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी/एसटीईएम ओपीटी) की अवधि तक अमेरिका में रह सकेंगे। हालांकि, यह छूट भी नए नियम के लागू होने की तारीख से अधिकतम चार वर्ष तक ही मान्य होगी और किसी भी स्थिति में 14 नवंबर, 2030 के बाद लागू नहीं रहेगी। इसमें देश छोड़ने के लिए मिलने वाली अवधि भी शामिल होगी।


    भारतीय छात्रों में बढ़ी चिंता

    नए नियम के बाद भारतीय छात्रों और पेशेवरों के बीच चिंता बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि इसका असर उनकी पढ़ाई और करियर की योजनाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है, “चार वर्ष की सीमा आधुनिक डिग्री पाठ्यक्रमों के अनुरूप नहीं है। स्नातक की डिग्री पूरी करने में औसतन 52 महीने और पीएचडी पूरी करने में लगभग 5.7 वर्ष लगते हैं। यूएससीआईएस के पास पहले से ही 1.1 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं और उनके निपटारे में करीब एक वर्ष लग रहा है।”

    विशेषज्ञों का कहना है, “छात्रों को पढ़ाई या शोध के बीच में ही अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे प्रयोगशालाओं को प्रतिभाशाली शोधकर्ताओं का नुकसान होगा और अमेरिका अपनी नवाचार क्षमता अपने प्रतिस्पर्धी देशों के हाथों सौंप देगा।” एफआईआईडीएस के अनुसार, शोध आधारित कई पाठ्यक्रम, विशेषकर पीएचडी और चिकित्सा शिक्षा, सामान्य तौर पर चार वर्ष से अधिक समय लेते हैं। वहीं, जे-1 श्रेणी के शोधकर्ता और चिकित्सकों को अपना कार्यक्रम पूरा करने में अक्सर पांच से सात वर्ष तक लग जाते हैं।

  • जिम्बाब्वे दौरे से संजू सैमसन को रखा बाहर, रिंकू-मयंक की हुई वापसी

    जिम्बाब्वे दौरे से संजू सैमसन को रखा बाहर, रिंकू-मयंक की हुई वापसी


    नई दिल्‍ली । जिम्बाब्वे के खिलाफ इसी महीने होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम की घोषणा 6 जुलाई (सोमवार) को की गई. भारतीय चयनकर्ताओं ने इस दौरे के लिए 15 सदस्यीय टीम घोषित की है, जिसकी कमान श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है. वहीं तिलक वर्मा उप-कप्तान बने रहेंगे.

    चयनकर्ताओं ने इस दौरे के लिए अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवाओं पर भी बड़ा दांव खेला है. भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन टी20 इंटरनेशनल मुकाबले 23, 25 और 26 जुलाई को हरारे में खेले जाएंगे. आइए जिम्बाब्वे टूर के लिए टीम सेलेक्शन से जुड़ी 5 बड़ी चीजों पर नजर डालते हैं.

    संजू सैमसन को ‘आराम’, प्रभसिमरन को मिली जगह 
    जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित भारतीय टीम में संजू सैमसन का नाम नहीं है. उनकी गैरमौजूदगी टीम चयन की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक है. माना जा रहा है कि चयनकर्ताओं ने लगातार क्रिकेट और वर्कलोड को ध्यान में रखते हुए संजू सैमसन को इस सीरीज से आराम दिया है. हालांकि संजू सैमसन सिर्फ एक ही फॉर्मेट में भारतीय टीम के लिए खेलते हैं, ऐसे में उन्हें सेलेक्ट नहीं किया जाना काफी चौंकाने वाला निर्णय है.

    संजू सैमसन की जगह प्रभसिमरन सिंह को विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर स्क्वॉड में जगह मिली है. प्रभसिमरन इससे पहले एशियन गेम्स 2023 के दौरान भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन उन्हें तब एक भी मुकाबले में खेलने का मौका नहीं मिला था. ऐसे में अगर जिम्बाब्वे दौरे पर उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है, तो वह इंटरनेशनल क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे. ईशान किशन फर्स्ट चॉइस विकेटकीपर के तौर पर स्क्वॉड में शामिल हैं.

    रिंकू सिंह का इंतजार खत्म
    विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह की भारतीय टी20 टीम में वापसी हो गई है. रिंकू आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के अलावा एशियन गेम्स 2026 के लिए भी भारतीय टीम में जगह नहीं बना पाए थे. अब चयनकर्ताओं ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है. रिंकू को टी20 क्रिकेट में भारत के सबसे बेहतरीन फिनिशर्स में गिना जाता है.

    रिंकू सिंह आखिरी ओवरों में तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं. उनकी वापसी से टीम इंडिया के मिडिल और लोअर ऑर्डर को मजबूती मिलने की उम्मीद है. जिम्बाब्वे दौरा रिंकू के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि भारतीय टी20 टीम में जगह बनाने के लिए प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में उन्हें मिले मौकों का पूरा फायदा उठाना होगा.

    मयंक यादव की लंबे समय बाद वापसी
    अपनी तूफानी रफ्तार से पहचान बनाने वाले मयंक यादव की भी भारतीय टीम में वापसी हुई है. मयंक ने अक्टूबर 2024 में भारत के लिए आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला खेला था. इसके बाद फिटनेस और चोट से जुड़ी समस्याओं के कारण वह लंबे समय तक टीम से बाहर रहे. अब चयनकर्ताओं ने जिम्बाब्वे दौरे के लिए एक बार फिर मयंक पर भरोसा जताया है. मयंक की फिटनेस पर भी सभी की नजरें रहने वाली हैं. अगर वह पूरी सीरीज में फिट रहते हुए अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो वो आने वाले समय में भारतीय टी20 टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं.

    वैभव सूर्यवंशी पर भरोसा कायम
    15 साल के वैभव सूर्यवंशी को जिम्बाब्वे दौरे के लिए भी टीम इंडिया में बरकरार रखा गया है. वैभव ने इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए दूसरे टी20I मुकाबले के जरिए अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया था. महज 15 साल और 99 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू कर इतिहास रचने वाले वैभव अपने पहले मुकाबले में सिर्फ 14 रन बनाकर आउट हुए थे. हालांकि दो छक्के जड़कर उन्होंने अपनी बेखौफ बल्लेबाजी की झलक जरूर दिखाई थी.

    वैभव सूर्यवंशी के अलावा सूर्यांश शेडगे, हर्ष दुबे और प्रिंस यादव जैसे युवा खिलाड़ियों को भी टीम में जगह मिली है. इससे साफ है कि चयनकर्ता जिम्बाब्वे दौरे को भविष्य के खिलाड़ियों को तैयार करने के मौके के रूप में देख रहे हैं. इन युवा खिलाड़ियों के लिए यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण होगा. जिम्बाब्वे के खिलाफ शानदार प्रदर्शन उन्हें भारतीय टी20 टीम की भविष्य की योजनाओं में शामिल कर सकता है.

    अशोक शर्मा-यश ठाकुर की सरप्राइज एंट्री
    चयनकर्ताओं ने तेज गेंदबाजों अशोक शर्मा और यश ठाकुर को पहली बार भारतीय टीम में शामिल किया है. दोनों खिलाड़ियों के लिए यह करियर का बड़ा मौका होगा. वहीं संजू सैमसन के अलावा अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा, प्रसिद्ध कृष्णा और अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ियों को भी स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है. माना जा रहा है कि व्यस्त कार्यक्रम और वर्कलोड मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हुए इनमें से कई खिलाड़ियों को आराम दिया गया है.

    जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारत का फुल स्क्वॉड: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन (विकेटकीपर), शिवम दुबे, सूर्यांश शेडगे, रिंकू सिंह, हर्ष दुबे, वरुण चक्रवर्ती, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, अशोक शर्मा, मयंक यादव और प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर).

    भारत के जिम्बाब्वे दौरे का शेड्यूल
    पहला टी20- 23 जुलाई, हरारे, शाम 4.30 बजे
    दूसरा टी20- 25 जुलाई, हरारे, शाम 4.30 बजे
    तीसरा टी20- 26 जुलाई, हरारे, शाम 4.30 बजे

  • MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज

    MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज


    बालाघाट।
    मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के वन्यजीव इतिहास (Wildlife History) में 28 अप्रैल का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. ‘टाइगर’ और ‘चीता’ स्टेट के बाद अब मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh) अपनी धरती पर ‘जंगली भैंसों’ को दोबारा बसाने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का आगाज करेंगे.

    तकरीबन 100 साल पहले मध्यप्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने के लिए असम सरकार के साथ एक खास समझौता हुआ है.

    इसके तहत पहले चरण में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से 4 भैंसों (3 मादा, 1 नर) का दल कान्हा पहुंच रहा है. ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में कुल 50 जंगली भैंसों को लाने का लक्ष्य है, जिनमें से इस सीजन में 8 भैंसें लाई जाएंगी. काजीरंगा और कान्हा के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम इस पूरे ‘ट्रांसलोकेशन’ की निगरानी कर रही है।


    MP-असम के बीच वाइल्ड लाइफ एक्सचेंज

    मुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा के बीच हुए समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान होगा।


    कान्हा ही क्यों बना पहली पसंद?

    भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के अध्ययन के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व का सूपखार और टोपला क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां के बड़े घास के मैदान (Grasslands) और प्रचुर जल स्रोत इस प्रजाति के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हैं.


    विलुप्ति की कगार से वापसी

    मध्यप्रदेश में आखिरी बार 1979 में सूपखार क्षेत्र में एक जंगली भैंसा देखा गया था. शिकार और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां खत्म हो गई थी. वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी केवल असम में है. इस पहल से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति बचेगी, बल्कि कान्हा का इकोसिस्टम भी सशक्त होगा.

  • शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द

    शांति वार्ता फिर विफल…! ईरानी विदेश मंत्री बिना बातचीत लौटे…. US डेलिगेट्स का दौरा भी रद्द


    इस्लामाबाद।
    ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच जंग और तनाव के बीच शनिवार को नई उम्मीद की किरण दिखी थी. लेकिन अब वह उम्मीद टूट गई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi) अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) में थे. पाकिस्तान (Pakistan) दोनों देशों के बीच बिचौलिया यानी मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था. लेकिन, ईरान का डेलिगेशन बिना अमेरिकी प्रतिनिधित्व के इस्लामाबाद में आए हुए ही पाकिस्तान से चले गए. अब अमेरिकी प्रतिनिधित्व ने भी पाकिस्तान का दौरा रद्द करने का ऐलान किया है।

    ईरान सीधे अमेरिका से बात करने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान दोनों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा. अमेरिका से भी स्पेशल दूत इस्लामाबाद आने वाले थे. लेकिन ईरानी प्रतिनिधित्व चले गए हैं तो उन्होंने भी अपने दौरे को रद्द कर दिया है. ये ऐलान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है।

    अराघची और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मुलाकात हुई. इस मीटिंग में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद थे. इस मुलाकात के बाद तेहरान के प्रतिनिधत्व पाकिस्तान से ओमान चले गए.

    अराघची इस्लामाबाद के बाद मस्कट यानी ओमान पहुंचे हैं. इसके बाद वह मॉस्को यानी रूस भी जाएंगे. यानी ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क करके रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।


    ईरान ने सीधी बात से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी. ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताएं अमेरिका तक पहुंचाएगा. उन्होंने अमेरिका के इस पूरे कदम को ‘अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध’ बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश में जुटा है.


    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने क्या कहा?

    ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पाकिस्तान दौरे के बाद बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनका पाकिस्तान दौरा ‘काफी फलदायी’ रहा. यानी बातचीत अच्छी रही और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक फ्रेमवर्क पेश किया है. यानी ऐसा प्लान दिया गया है, जिससे स्थायी तौर पर संघर्ष खत्म किया जा सके. लेकिन साथ ही उन्होंने एक बड़ी बात भी कही. अभी तक यह साफ नहीं है कि अमेरिका सच में बातचीत को लेकर गंभीर है या नहीं.

    ईरान के फैसले पर डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका-ईरान बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 18 घंटे की लंबी यात्रा करके बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है. उनके मुताबिक, फोन पर भी बातचीत उतनी ही अच्छी तरह हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो वह खुद फोन कर सकता है. अमेरिका सिर्फ बैठकर बेकार की बातचीत के लिए यात्रा नहीं करेगा.

    जब उनसे पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि अमेरिका फिर से युद्ध शुरू करने जा रहा है, तो ट्रंप ने साफ किया कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका मजबूत स्थिति में है. उनके शब्दों में, ‘हमारे पास सारे पत्ते हैं’ यानी अमेरिका के पास बातचीत में बढ़त है. उन्होंने कहा कि वे बेकार की चर्चा में समय नहीं गंवाना चाहते.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और उनके प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया है. उन्होंने कहा कि यह मुलाकात काफी अच्छी और पॉजिटिव रही. दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा हुई. साथ ही, पाकिस्तान और ईरान के आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई. यानी सिर्फ मौजूदा तनाव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

  • देश में बिगड़ी LPG की सप्लाई हुई नार्मल….वापस लौटे पुराने दिन, बुकिंग में गिरावट.

    देश में बिगड़ी LPG की सप्लाई हुई नार्मल….वापस लौटे पुराने दिन, बुकिंग में गिरावट.


    नई दिल्ली।
    एलपीजी बुकिंग (LPG Booking) को लेकर अबतक की सबसे अच्छी खबर आई है। जब से युद्ध शुरू हुआ है उसके बाद से ही एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। लेकिन सरकार के नए आकंड़े राहत दे रहे हैं। सरकार की तरफ से दी जानकारी में बताया गया है कि एलपीजी की बुकिंग में गिरावट आई है। वहीं, सप्लाई नॉर्मल हो गई है। इसके अलावा एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स की तरफ से एक बार फिर से गावों में होम डिलीवरी शुरू कर दी गई है। जोकि ग्राहकों के लिए बड़ी राहत है।

    सरकार ने एलपीजी बुकिंग पर क्या कुछ बताया? (LPG booking Status)
    शुक्रवार को मिनिस्ट्री ऑफ पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस की ज्वाइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग एंड ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने बताया कि एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग में गिरावट देखने को मिली है। उन्होंने बताया है कि एलपीजी बुकिंग गिरकर 46 लाख से 50 लाख के बीच आ गया है। इसके पहले 50 लाख से अधिक एलपीजी बुकिंग हो रही थी। सुजाता शर्मा का कहना है कि इस गर्मियों के सीजन में डिमांड मध्यम स्तर पर रह सकता है।


    पर्याप्त मात्रा में एलपीजी सिलेंडर

    सुजाता शर्मा ने दी जानकारी में कहा है कि डिस्ट्रीब्यूटर्स स्तर पर एलपीजी सिलेंडर की कमी कोई खबर नहीं आई है। डिलीवरी पूरी तरह से सामान्य है। उन्होंने कहा, “हमारा एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की तरफ से सामान्य है। कहीं से भी कमी की कोई खबर नहीं आई है।”


    किन राज्यों में एलपीजी की बिक्री में हुआ इजाफा (LPG demand in States)

    सुजाता शर्मा ने कहा कि फरवरी के महीने में प्रतिदिन कंपनियां 177 टन एलपीजी बेचती थी। जोकि अप्रैल के महीने में 296 टन प्रति दिन पहुंच गया है। कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में एलपीजी की बिक्री बढ़ी है।

    एलपीजी सिलेंडर बुकिंग नियम क्या हैं? (LPG Cylinder booking new rule)
    सरकार ने एलपीजी बुकिंग के लिए नियम लगा दिए हैं। शहरों में एलपीजी बुकिंग 25 दिन में ही की जा सकती है। वहीं, गावों में एलपीजी की बुकिंग कम से कम 45 दिन में ही की जा सकती है।

    ओटीपी के जरिए ही होगी एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग (LPG cylinder Booking OTP Rule)
    सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए ओटीपी आधारित नियम लगाया है। ग्राहक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के जरिए गैस सिलेंडर की बुकिंग कर पाएंगे। इसके बाद उनके मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा। उसी आधार पर उन्हें गैस सिलेंडर मिलेगा। सरकार इस महीने अबतक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई इजाफा नहीं किया है।