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  • "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी

    "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी


    गुजरात । गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘स्वधर्मानयन’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन अवसर पर 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में गंगाजल ग्रहण कर भगवान श्रीराम का मंत्र लिया और स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। शारदापीठ की ओर से बताया गया कि हमारे लिए यह धार्मिक अनुष्ठान अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने का अभियान है।

    उल्‍लेखनीय है कि 11 जुलाई 2026 को गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। आदिवासी एवं वनवासी समाज के बीच स्थापित यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बनेगा।


    शारदापीठ का कहना है कि इस आश्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों तक सनातन धर्म की शिक्षाएं, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराएं तथा नैतिक जीवन मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय समाज में संस्कार, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। आश्रम के उद्घाटन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने सार्वजनिक रूप से गंगाजल ग्रहण किया तथा शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती से भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण कर सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा भी की कि वे अपने जीवन में सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई और इसमें शामिल सभी लोगों ने स्वयं अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया।


    ‘स्वधर्मानयन’ को स्थायी आधार देगा नया आश्रम

    अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के जनजाति एवं वनवासी क्षेत्रों में ‘स्वधर्मानयन यात्रा’ के माध्यम से लगातार जनजागरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वासणा ग्राम में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना इस अभियान को नई दिशा और स्थायी आधार प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब यह आश्रम धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्‍त गांव-गांव तक पहुंचने वाले जागरण अभियान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अधिक व्यापक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से परिचित कराएंगे।


    शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, “किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से होती है। यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाता है तो उसकी सांस्कृतिक पहचान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है, इसलिए अपनी परंपराओं का संरक्षण और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।”

    गांव-गांव तक पहुंच रहा है ‘स्वधर्मानयन’ का संदेश

    द्वारका शारदापीठ के अनुसार ‘स्वधर्मानयन’ अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार भी प्रकार के विवाद में न पड़ते हुए उन लोगों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से पुनः जोड़ना है, जोकि विभिन्न कारणों से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी अंचलों में नियमित रूप से ग्राम सभाएं, धार्मिक प्रवचन, सत्संग, संस्कार शिविर, यज्ञ तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जीवन पद्धति के विषय में जानकारी दी जाती है।


    शारदापीठ का मानना है कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आवश्‍यक यह भी है कि निरंतर संवाद, शिक्षा और सेवा कार्यों को भी माध्यम बनाया जाए। इसी कारण “स्वधर्मानयन अभियान” को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरण के साथ जोड़ा गया है।

    पहले भी अनेक स्थानों पर हुए हैं घर वापसी के कार्यक्रम

    द्वारका शारदापीठ और उसके शंकराचार्यों द्वारा घर वापसी अथवा ‘स्वधर्मानयन’ का अभियान पिछले कई वर्षों से निरंतर चलाया जा रहा है। विशेष रूप से गुजरात, झारखण्‍ड, छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश समेत कई राज्‍यों के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन परंपरा अपनाने की घोषणा की।

    यहां गुजरात के संदर्भ में ज्ञात हो कि शारदापीठ से जुड़े संतों ने वर्षों से दक्षिण गुजरात, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान गांव-गांव जाकर धार्मिक सभाएं आयोजित की गईं, लोगों से संवाद स्थापित किया गया तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विषय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


    इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्कार शिविरों, रामकथा, गीता प्रवचन, गौ-सेवा, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से भी स्थानीय समाज के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। शारदापीठ का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक परिवार अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ पुनः जुड़े हैं।

    नवस्थापित आनंद वर्धन आश्रम में भी भविष्य में संस्कृत शिक्षा, धार्मिक अध्ययन, बच्चों के संस्कार वर्ग, महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रम, योग, आध्यात्मिक प्रशिक्षण तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों के संचालन की योजना बताई गई है। आश्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी प्रेरित किया जाएगा।

    शंकराचार्य का आह्वान- ‘अपने धर्म और संस्कृति को जानिए’

    अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा, “समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझेगी, तभी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकेगी।”

    उन्होंने कहा है- “आने वाले समय में स्वधर्मानयन यात्रा को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गुजरात के दूरस्थ आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार प्रवास, धार्मिक संवाद और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आनंद वर्धन आश्रम इस पूरे अभियान का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां से सेवा, संस्कार तथा सांस्कृतिक जागरण की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास जगाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के साथ शारदापीठ आने वाले वर्षों में अपने स्वधर्मानयन अभियान को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।

  • मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत

    मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच अब तक स्वदेश लौटे 2.44 लाख भारतीय, 5 नागरिकों की हुई मौत


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते संघर्ष के बीच केंद्र सरकार (Central Government) ने मंगलवार को कहा कि 28 फरवरी से अब तक लगभग 2.44 लाख लोग क्षेत्र से भारत लौट (Return to India) चुके हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति पर विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने बताया कि इस संघर्ष में अब तक पांच भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जबकि एक व्यक्ति लापता है। उन्होंने कहा कि हाल में ओमान के सोहार शहर में हुई एक घटना में मारे गए दो भारतीयों के पार्थिव शरीर मंगलवार को भारत लाए गए और ये जयपुर में उनके परिजनों को सौंप दिए गए।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कल मैंने बताया था कि छात्रों समेत लगभग 650 भारतीय नागरिक ईरान से आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे थे, ताकि वहां से स्वदेश लौट सकें। अब लगभग 50 और भारतीय आर्मेनिया पहुंचे हैं तथा कुछ अन्य अजरबैजान गए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान गए 284 तीर्थयात्री भी सफलतापूर्वक आर्मेनिया पहुंच गए हैं। इनमें से 130 तीर्थयात्री आज दिल्ली पहुंचेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसका नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय है और भारतीय नागरिकों की सहायता कर रहा है।

    जायसवाल ने बताया कि फोन और ईमेल की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। ‘ब्रिक्स’ के रुख पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह समूह आम सहमति के आधार पर काम करता है। ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया का एक प्रभावशाली समूह है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में भारत अध्यक्ष है। इस संघर्ष में ब्रिक्स के कई सदस्य देश सीधे तौर पर जुड़े हैं, इसलिए विभिन्न देशों के रुख में अंतर को पाटना चुनौतीपूर्ण रहा है। फिर भी हम सभी पक्षों के संपर्क में हैं।’

    अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला शुरू किया था तथा जवाब में ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले कुछ खाड़ी देशों पर हमले किए और अमेरिका व इजरायल पर दबाव बनाने के लिए रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया। यूरोपीय संघ की विदेश और सुरक्षा नीति प्रमुख काजा कालास के निमंत्रण पर विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा के बारे में जायसवाल ने कहा कि उन्होंने यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की।

    जायसवाल ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत से ही भारत का रुख रहा है कि संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाए। हमने सभी देशों से संयम बरतने तथा संघर्ष को और न बढ़ाने की अपील की है। वहीं, महाजन ने कहा कि विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है तथा वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय किया जा रहा है तथा क्षेत्र में भारतीय मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। महाजन ने बताया कि 16 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से भारत के लिए लगभग 65 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि मंगलवार को करीब 70 उड़ानों के संचालन की उम्मीद है। ओमान से भी भारत के विभिन्न गंतव्यों के लिए उड़ानें जारी हैं।