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  • नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान

    नरसिंहपुर में 12 एकड़ सरकारी जमीन अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन का बड़ा एक्शन; जेसीबी से ढहाया कच्चा मकान


    नरसिंहपुर नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा तहसील के ग्राम टेकापार में सोमवार को प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 एकड़ शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। राजस्व विभाग, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा चलाए गए इस अभियान के दौरान लंबे समय से सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन और ट्रैक्टरों की सहायता से अतिक्रमण को हटाते हुए एक कच्चे मकान को भी ध्वस्त किया गया।

    प्रशासन की इस कार्रवाई को क्षेत्र में अतिक्रमण के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। सुबह शुरू हुआ अभियान देर शाम तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और प्रशासनिक कार्रवाई को देखते रहे।

    जानकारी के अनुसार, टेकापार गांव स्थित शासकीय भूमि पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया था। राजस्व विभाग को इसकी शिकायतें लगातार मिल रही थीं। जांच के बाद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई का निर्णय लिया और संयुक्त अभियान चलाकर कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू की। अभियान का नेतृत्व नायब तहसीलदार ने किया, जबकि राजस्व विभाग के पटवारी, पुलिस बल और अन्य अधिकारी भी मौके पर तैनात रहे।

    अतिक्रमण हटाने के लिए 4 से 5 ट्रैक्टरों के साथ एक जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने जमीन की पैमाइश कर सीमांकन के आधार पर कब्जे हटाए। इस दौरान सरकारी भूमि पर बना एक कच्चा मकान भी प्रशासन ने हटवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे।

    कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कानून-व्यवस्था बनी रहे। पुलिस बल की मौजूदगी के कारण पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। किसी भी तरह के विरोध या विवाद की स्थिति सामने नहीं आई। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों को शासकीय भूमि पर कब्जा न करने और नियमों का पालन करने की समझाइश भी दी।

    राजस्व विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिलेभर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की पहचान की जा रही है। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियों और भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा।

    टेकापार में हुई इस कार्रवाई के बाद जिले के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमणकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी जा रही है। प्रशासन के सख्त रुख से यह संदेश गया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान व्यापारी का अनोखा विरोध: कनक दंडवत कर कलेक्ट्रेट पहुंचे, आत्मदाह की चेतावनी

    श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान व्यापारी का अनोखा विरोध: कनक दंडवत कर कलेक्ट्रेट पहुंचे, आत्मदाह की चेतावनी


    मध्य प्रदेश । श्योपुर जिले के कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक व्यापारी ने अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। शहर निवासी जगदीश प्रसाद अग्रवाल कलेक्ट्रेट परिसर में कनक दंडवत करते हुए पहुंचे और अपनी लंबित राजस्व समस्या के समाधान की मांग की।

    उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दो दिन बाद आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। इस बयान से जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी भी गंभीर हो गए।

    15 साल से लंबित नामांतरण, राजस्व विभाग पर आरोप
    व्यापारी जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रानी अग्रवाल के नाम पर वर्ष 2009 में खरीदी गई भूमि का विधिवत विक्रय पत्र होने के बावजूद 15 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नामांतरण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज और कब्जा होने के बावजूद राजस्व न्यायालय में उनकी फाइल को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और वे भूमि का आगे विक्रय भी नहीं कर पा रहे हैं।

    रिश्वत लेकर अन्य मामलों में नामांतरण का आरोप
    अग्रवाल ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उसी सर्वे नंबर से जुड़े अन्य मामलों में कथित रूप से रिश्वत लेकर नामांतरण कर दिया गया है, जबकि उनके मामले में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

    उन्होंने एक अन्य भूमि रिकॉर्ड में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि किए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि पटवारी से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।

    प्रशासन से तत्काल समाधान की मां
    जनसुनवाई के दौरान व्यापारी ने अधिकारियों से मांग की कि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो वे इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार मानेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब करने की बात कही है।

  • महोबा में महाफर्जीवाड़ा: जिंदा दिव्यांग को कागजों में मृत दिखाकर 4.5 बीघा जमीन हड़पी, राजस्व विभाग पर गंभीर सवाल

    महोबा में महाफर्जीवाड़ा: जिंदा दिव्यांग को कागजों में मृत दिखाकर 4.5 बीघा जमीन हड़पी, राजस्व विभाग पर गंभीर सवाल


    नई दिल्ली। Mahoba में एक चौंकाने वाला जमीन घोटाला सामने आया है, जहां एक जीवित दिव्यांग युवक को कागजों में मृत घोषित कर उसकी 4.5 बीघा जमीन फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़प ली गई। मामला चरखारी कोतवाली क्षेत्र के सूपा गांव का बताया जा रहा है।

    पीड़ित जहीर अहमद, जो मानसिक रूप से दिव्यांग हैं, के नाम दर्ज जमीन को कथित तौर पर राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया। आरोप है कि इसी गांव के कुछ लोगों ने समान नाम वाले एक मृत व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर यह पूरा फर्जीवाड़ा किया।

    कैसे हुआ पूरा फर्जीवाड़ा?
    जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने मृत जहीर अहमद उर्फ जहीर खान के मृत्यु प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते हुए जीवित जहीर अहमद की जमीन को अपने नाम ट्रांसफर करा लिया। इस प्रक्रिया में लेखपाल और कानूनगो की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रिकॉर्ड में पीड़ित की पत्नी और तीन बेटों का भी जिक्र कर दिया गया, जबकि वह अविवाहित हैं।

    खुलासा कैसे हुआ?
    पूरा मामला तब सामने आया जब पीड़ित के परिजन जमीन की खतौनी निकलवाने पहुंचे। दस्तावेजों में अलग नाम देखकर परिवार के होश उड़ गए। शिकायत और विरोध के बाद प्रशासन ने जल्दबाजी में रिकॉर्ड सुधार कर जमीन दोबारा जहीर अहमद के नाम दर्ज कर दी।

    जांच के आदेश
    मामले की शिकायत जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से की गई है। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित एसडीएम को जांच सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगाा। 

  • रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती

    रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती


    मध्य प्रदेश रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पटवारी ने तालाब और खाली जमीन को भी गेहूं की फसल बता दिया। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    तालाब और खाली जमीन पर दिखा दी फसल

    त्योंथर तहसील के ग्राम चन्दई में पटवारी शारदा प्रसाद तिवारी ने करीब 3000 वर्ग फीट के तालाब और खाली पड़ी जमीन को गेहूं की फसल के रूप में दर्ज कर दिया। यह गड़बड़ी तब सामने आई जब विभाग को शिकायत मिली और जांच शुरू की गई।

    मौके पर जाकर भी दी गलत रिपोर्ट

    जांच में यह बात सामने आई कि पटवारी ने मौके पर जाकर ही रिपोर्ट तैयार की थी, इसके बावजूद गलत जानकारी दर्ज की गई। इसे गंभीर लापरवाही और कदाचार माना गया। यही वजह रही कि प्रशासन ने बिना देरी किए सख्त कदम उठाया।

    दोबारा जांच में भी नहीं सुधारी गलती

    शिकायत के बाद अधिकारियों ने दोबारा सत्यापन कराया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं किया। इससे यह साफ हो गया कि गड़बड़ी जानबूझकर की गई थी।

    फायदा होने से पहले ही पकड़ा गया मामला

    प्रशासन की सतर्कता के चलते यह फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। अगर यह मामला आगे बढ़ता, तो सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ उठाया जा सकता था।

    कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

    जिले के कलेक्टर सोमवंशी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने साफ किया कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

     नियमों के तहत निलंबन

    पटवारी पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय त्योंथर तहसील रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

     प्रशासन का सख्त संदेश

    इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि अब सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की हेराफेरी पर तुरंत सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, कलेक्टर के आदेश से तहसील स्तर पर अधिकारियों के तबादले, राजस्व व्यवस्था को और मजबूत बनाने की कवायद तेज

    इंदौर। जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और तेज बनाने के उद्देश्य से राजस्व विभाग में बड़ा फेरबदल किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कई अधिकारियों को हटाकर उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में गति लाना और राजस्व प्रणाली को अधिक सुदृढ़ बनाना बताया जा रहा है।

    जिले की विभिन्न तहसीलों में तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। हालांकि महू और सांवेर तहसीलों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। कई अधिकारियों को उनकी मौजूदा शाखाओं से हटाकर अन्य विभागों में स्थानांतरित किया गया है, जबकि कुछ को राजस्व न्यायालयों से हटाकर प्रोटोकॉल और अन्य प्रशासनिक शाखाओं में जिम्मेदारी दी गई है।

    प्रशासनिक आदेशों के अनुसार कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को नई तहसीलों की कमान सौंपी गई है, वहीं कई को विशेष शाखाओं में स्थानांतरित किया गया है। इससे न केवल कार्य विभाजन में बदलाव हुआ है बल्कि प्रशासनिक ढांचे को अधिक संतुलित करने का प्रयास भी किया गया है।

    कई तहसीलों में नए अधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही पुराने अधिकारियों को अन्य महत्वपूर्ण विभागों में भेजा गया है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि जमीनी स्तर पर राजस्व कार्यों में तेजी आएगी और नागरिकों को सेवाएं अधिक प्रभावी तरीके से मिल सकेंगी।

    इसी बीच नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। भुगतान संबंधी मामलों में मस्टरकर्मियों की नाराजगी सामने आई है और लंबे समय से बकाया भुगतान को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। अदालत के आदेशों के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

    प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे बदलाव को व्यवस्था सुधार और कार्यप्रणाली को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • दिल्ली में हर जमीन को मिलेगा आधार नंबर, रेखा गुप्ता सरकार ने लॉन्च किया ULPIN सिस्टम

    दिल्ली में हर जमीन को मिलेगा आधार नंबर, रेखा गुप्ता सरकार ने लॉन्च किया ULPIN सिस्टम


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में अब हर जमीन की अपनी एक विशिष्ट डिजिटल पहचान होगी। दिल्ली सरकार ने राजधानी के प्रत्येक भूखंड को 14 अंकों का यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है ताकि भविष्य में जमीन से जुड़े लेन-देन स्वामित्व की पहचान और विवादों के निपटारे में आसानी हो सके।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को भूमि विवाद और गड़बड़ियों के खिलाफ एक मजबूत डिजिटल हथियार बताते हुए कहा कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी प्रयास है। उनके अनुसार लंबे समय से दिल्ली में एक सुव्यवस्थित भू-प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता महसूस की जा रही थी जिसे अब मिशन मोड में लागू किया जा रहा है।

    यह योजना भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय और भूमि संसाधन विभाग की पहल का हिस्सा है जिसे वर्ष 2016 में तैयार किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे लागू नहीं किया लेकिन अब दिल्ली सरकार इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू कर रही है। भू आधार के रूप में जानी जा रही इस प्रणाली को लागू करने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की आईटी शाखा को सौंपी गई है जिसे भारतीय सर्वेक्षण विभाग का तकनीकी सहयोग मिलेगा।

    सरकार के मुताबिक प्रणाली लागू होने के बाद भूमि स्वामित्व में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और जमीन की सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों में कमी आएगी। विभिन्न सरकारी विभागों के बीच भूमि डेटा का समन्वय भी आसान होगा। इससे धोखाधड़ी वाले लेन-देन एक ही जमीन के बहु-पंजीकरण और रिकॉर्ड में हेरफेर जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लग सकेगी। आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उन्हें जमीन की पहचान और सत्यापन के लिए कई दस्तावेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे बल्कि एक ही यूनिक नंबर से पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।

    इस योजना के तहत अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग से लगभग 2 टेराबाइट उच्च गुणवत्ता वाले भू-स्थानिक डेटा का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही ड्रोन के जरिए ली गई ऑर्थो-रेक्टिफाइड इमेजेज़ की मदद से जमीन की सटीक मैपिंग की जा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली के ग्रामीण इलाकों समेत उन 48 गांवों के लिए सटीक तैयार किए जाएंगे जो पहले से स्वामित्व योजना में शामिल हैं। सरकार का मानना है कि यह डिजिटल पहल राजधानी में भू-प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा देगी और भूमि विवादों के समाधान को अधिक सरल पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी।

  • 50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब

    50 साल के कब्जे, कोर्ट के स्टे और चार रजिस्ट्री के बावजूद गरजा बुलडोजर: मऊगंज में प्रशासन बनाम गरीब


    मऊगंज । कहते हैं कानून अंधा होता है लेकिन मऊगंज का राजस्व अमला इस कहावत से भी एक कदम आगे नजर आ रहा है यहां कानून न सिर्फ अंधा बल्कि बहरा भी दिखाई दे रहा है। देवतालाब उप-तहसील के नौडिया गांव में प्रशासन ने जिस तरह भारी पुलिस बल के साथ गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी की उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। यह कार्रवाई उस जमीन पर की जा रही है जिस पर लोग पिछले करीब 50 वर्षों से काबिज हैं और जहां सिविल कोर्ट का स्पष्ट स्थगन आदेश स्टे भी लागू है।

    पूरा विवाद 1988 में की गई एक रजिस्ट्री से शुरू होता है। आरोप है कि भगवानदीन पटेल नाम के एक रसूखदार पटवारी ने जमीन की रजिस्ट्री करवाई नामांतरण भी हुआ लेकिन इसके बाद खेल शुरू हुआ। पटवारी के भाई ने अपील दायर कर खरीदारों का नाम रिकॉर्ड से कटवा दिया और जमीन दोबारा अपने नाम दर्ज करा ली। हैरानी की बात यह है कि जिस अपील के आधार पर मालिकाना हक बदला गया उसका कोई रिकॉर्ड आज राजस्व विभाग के पास मौजूद नहीं है।

    यहीं से जमीन की जालसाजी का सिलसिला तेज हो गया। आरोप है कि एक ही जमीन की चार बार रजिस्ट्री की गई। 1988 के बाद वर्षों तक लोग उसी जमीन पर मकान बनाकर रहते रहे फिर 2022 में दोबारा खरीद-फरोख्त हुई। एक ही खसरे की जमीन अलग-अलग लोगों को बेची जाती रही और प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। अब जब विवाद कोर्ट में है और मामला विचाराधीन है तो अचानक प्रशासन को यह जमीन “सरकारी” नजर आने लगी।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सिविल कोर्ट का स्टे ऑर्डर प्रभावशील है तो प्रशासन किस कानून के तहत अतिक्रमण हटाने पहुंचा? क्या मऊगंज का राजस्व अमला खुद को माननीय न्यायालय से ऊपर समझता है? कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ लोगों ने आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश क किसी ने हाथ की नस काट ली तो किसी ने खुद को घर में बंद कर लिया।

    विडंबना यह भी है कि जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है उससे जुड़े पुख्ता दस्तावेज प्रशासन के पास नहीं हैं। न यह स्पष्ट है कि जमीन कब और कैसे सरकारी घोषित हुई। इसके बावजूद कार्रवाई के दौरान जब लोगों ने विरोध किया तो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया भले ही रोक दी गई लेकिन वर्तमान पटवारी ने पीड़ितों पर ही “कानूनी हंटर” चला दिया। नौ लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा और गाली-गलौज जैसी धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया।

    आज नौडिया गांव के लोग अपनी ही जमीन पर खुद को बेगाना महसूस कर रहे हैं। सवाल यह है कि जिसने 27 डिसमिल हिस्से में 40 डिसमिल जमीन बेच दी उस पूर्व पटवारी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ गरीबों के घर गिराना है या उस सिस्टम को दुरुस्त करना भी है जो भ्रष्टाचार को संरक्षण देता है?

  • पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?

    पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?


    नई दिल्‍ली । कभी-कभी ऐसे मामले सामने आते हैं जो लोगों के होश उड़ा देते हैं. गुजरात (Gujarat)के बनासकांठा (Banaskantha)जिले के पडालिया गांव(Padalia village) से भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां पर दोपहर करीब 500 लोगों की भीड़ ने पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट(Revenue Department) के कम से कम 47 अधिकारियों पर हमला कर दिया. इसमें करीब 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. जानिए आखिर भीड़ कैसे उग्र हो गई?

    क्या है मामला
    मामले को लेकर बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू अधिकारियों की एक जॉइंट टीम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सर्वे नंबर 9 एरिया में नर्सरी और प्लांटेशन का काम कर रही थी. उन्होंने बताया कि अचानक करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, पत्थर फेंके और तीर-कमान का इस्तेमाल किया. इस हमले की वजह से कई अधिकारी घायल हो गए हैं हालांकि उनकी हालत स्थिर है.

    घायल हुए 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि 11 को आगे के इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हमला किस वजह से हुआ. यह जगह दांता तालुका में है, जो अंबाजी तीर्थस्थल से 14 km दूर है. इस वारदात के बाद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है.