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  • हेलीकॉप्टर से लिया अभियान का जायजा, दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य

    हेलीकॉप्टर से लिया अभियान का जायजा, दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य


    शाजापुर।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण के साथ प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों की फसलों को जंगली जानवरों, विशेषकर कृष्णमृग और नीलगाय से होने वाले नुकसान से बचाने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसी उद्देश्य से शाजापुर जिले में बोमा पद्धति से वन्यजीवों के रेस्क्यू और स्थानांतरण का अभियान चलाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को शाजापुर जिले के रंथभंवर पहुंचकर हेलीकॉप्टर से प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के तहत संचालित रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति तथा व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कैमोफ्लाज्ड मचान से बोमा पद्धति के जरिए कृष्णमृग और नीलगायों को सुरक्षित पकड़ने की प्रक्रिया का भी निरीक्षण किया।

    31 अक्टूबर तक चलेगा अभियान

    मुख्यमंत्री ने बताया कि शाजापुर जिले में किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पिछले वर्ष बोमा पद्धति से कृष्णमृग और नीलगायों के रेस्क्यू की शुरुआत की गई थी। दक्षिण अफ्रीका की विशेष टीम की सहायता से वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर निर्धारित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

    प्रोजेक्ट एंटीलोप ट्रांसलोकेशन के अंतर्गत यह अभियान 9 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके दूसरे चरण में 2,000 कृष्णमृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक शाजापुर जिले से लगभग 1,236 से अधिक कृष्णमृगों और नीलगायों का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है।

    रेस्क्यू किए गए कृष्णमृगों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट सहित निर्धारित वन क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। इनके सुरक्षित परिवहन के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। साथ ही पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम भी किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रेस्क्यू अभियान के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि उन्हें पकड़ने और स्थानांतरित करने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की चोट न पहुंचे।

    दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला अभियान

    डॉ. यादव ने कहा कि हेलीकॉप्टर की सहायता से बोमा पद्धति पर आधारित वन्यजीव रेस्क्यू का यह अभियान दक्षिण एशिया में अपनी तरह का पहला प्रयास है। इससे वन्यजीवों के संरक्षण के साथ किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में भी मदद मिलेगी।

    उन्होंने अभियान में जुटे वन विभाग और प्रशासन की टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि परियोजना की सफलता से देश के अन्य राज्यों को भी इस तरह की पहल करने की प्रेरणा मिलेगी।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अभियान के संचालन, वन्यजीवों के सुरक्षित स्थानांतरण और आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने वन विभाग और प्रशासनिक टीम के सदस्यों के साथ समूह छायाचित्र भी खिंचवाया।

  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • मेडिसिन की होम डिलीवरी व्यवस्था हो सकती है बंद….. एडवाइजरी बोर्ड ने दिए समीक्षा के निर्देश

    मेडिसिन की होम डिलीवरी व्यवस्था हो सकती है बंद….. एडवाइजरी बोर्ड ने दिए समीक्षा के निर्देश


    नई दिल्ली।
    कोविड (COVID) के दौरान शुरू हुई दवाओं की होम डिलीवरी वाली व्यवस्था (Medicines Home Delivery System) पर रोक लग सकती है। दवा कारोबारियों के संगठनों की ओर से इसकी मांग उठी है। इसपर ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) (Drugs Technical Advisory Board – DTAB) ने होम डिलीवरी की व्यवस्था की दोबारा समीक्षा करने को कहा है।

    इसके लिए बनी उपसमिति को मौजूदा स्थिति के आधार पर मामले पर फिर विचार करना होगा। जरूरत पड़ने पर दवा कारोबारियों के संगठनों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, उप समिति में कई सदस्य होम डिलीवरी जारी रखने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि इससे दूर-दराज और खासतौर पर गांवों में रहने वाले लोगों को सहूलियत मिल रही है। वहीं, डीटीएबी ने ब्लड डोनेट करने वालों की पहचान भी डिजिटल करने का फैसला लिया है। रक्तदान के दौरान रक्तदाताओं की पहचान को आधार और आभा से जोड़ने की भी सिफारिश की गई है। बोर्ड के मुताबिक इससे रक्तदाताओं की पहचान और रक्तदान के बाद उनकी निगरानी में मदद मिलेगी। इसका एक उद्देश्य ऐसे दाताओं की पहचान करना भी है, जिन्हें किसी वजह से रक्तदान से रोका गया हो।

  • दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच

    दतिया हार के बाद भाजपा में समीक्षा शुरू, सीएम आवास पर हुई बड़ी बैठक, भीतरघात की होगी जांच


    भोपाल। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक समीक्षा तेज कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के भोपाल स्थित आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चुनावी नतीजों, भीतरघात की शिकायतों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने पूरे मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का भी गठन किया है।

    सोमवार को आए उपचुनाव परिणामों में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने भी बैठक में पहुंचकर कथित भीतरघात से जुड़े ऑडियो साक्ष्य संगठन के समक्ष रखे।

    भीतरघात और फर्जी प्रचार की होगी जांच
    सूत्रों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं होने के कारण कुछ स्थानीय पार्षदों और संगठन पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित भ्रामक पोस्ट और फर्जी पत्रों की भी जांच होगी। ऐसे मामलों में शामिल लोगों की सूची तैयार कर उनके राजनीतिक संबंधों की पड़ताल की जाएगी।

    उल्लेखनीय है कि पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में सक्रिय प्रचार किया था, लेकिन इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    दो सदस्यीय जांच समिति गठित
    प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने चुनावी हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के लिए प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा की दो सदस्यीय समिति बनाई है। समिति जमीनी स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपेगी।

    खंडेलवाल ने स्पष्ट कहा कि भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और संगठन के नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी कार्यकर्ता या पदाधिकारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी के भीतर भी उठे सवाल
    चुनाव परिणाम के बाद भाजपा के भीतर से भी आत्ममंथन की आवाजें सामने आई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया पर “आत्ममंथन का समय…” लिखकर संगठन को संकेत दिया, जबकि टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी प्रभावी होने लगते हैं तो चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं।

    जनादेश स्वीकार, भविष्य की तैयारी
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपनी कमियों का आकलन करेगी और भविष्य में अधिक मजबूती के साथ जनता के बीच जाएगी।

    दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 (42.39%) और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 60,741 (38.57%) मत मिले। हार के बाद भाजपा ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी रणनीति की समीक्षा का अभियान शुरू कर दिया है।

  • दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करने और हार के कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने समीक्षा समिति के गठन की घोषणा की है। समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि समिति उपचुनाव के दौरान संगठन की भूमिका, चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी।

    भाजपा के अनुसार समिति यह भी आकलन करेगी कि चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं हो सका और किन कारणों से पार्टी सीट जीतने में असफल रही। समीक्षा रिपोर्ट में संगठनात्मक सुधार, चुनावी रणनीति और भविष्य की तैयारियों से जुड़े सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी कार्ययोजना में आवश्यक बदलाव कर सकती है।

    दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। इसके बाद रिक्त हुई सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ। कांग्रेस ने एक बार फिर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने इस बार पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी को नए चेहरे से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया।

    चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने भी पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में व्यापक प्रचार किया था। इसके बावजूद भाजपा सीट अपने नाम नहीं कर सकी। इस नतीजे के बाद पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवार बदलने के फैसले को लेकर हो रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। उपचुनाव में भाजपा ने नया उम्मीदवार उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। अब इस निर्णय को भी समीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल माना जा रहा है।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद बूथवार मतदान के आंकड़ों ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर 121 पर भी भाजपा कांग्रेस से पीछे रही। इस बूथ पर कांग्रेस को भाजपा से अधिक मत मिले, जिससे स्थानीय संगठन की सक्रियता और परंपरागत वोट बैंक को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। इसके बाद पार्टी के भीतर समन्वय और संभावित भीतरघात को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं।

    भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार की निष्पक्ष समीक्षा से भविष्य में संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दतिया उपचुनाव में हार के पीछे कौन-कौन से प्रमुख कारण रहे और पार्टी आगे किन सुधारों पर जोर देगी।

  • ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

    ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के सितारों से सजी इंडिया ‘ए’ ने दांबुला के मैदान पर मेजबान श्रीलंका ‘ए’ को 8 विकेट के बड़े अंतर से मात देकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस एकतरफा जीत के बाद भी टीम मैनेजमेंट और सेलेक्टर्स के चेहरे पर पूरी तरह से संतुष्टि के भाव नजर नहीं आ रहे हैं। इस मुकाबले में मिली शानदार कामयाबी के बावजूद कुछ ऐसी तकनीकी और रणनीतिक कमियां उजागर हुई हैं, जिसके कारण इस जीत के मायने क्रिकेट पंडितों को थोड़े अधूरे और चिंताजनक लग रहे हैं। टीम का शीर्ष क्रम और मध्यक्रम आगामी बड़े दौरों के लिहाज से अभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आ रहा है।

    मैच के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर अपनी क्लास और बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण के सामने सूझबूझ और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन बनाते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी और दमदार बल्लेबाजी की। ऋतुराज की इस कप्तानी पारी के दम पर ही भारत ने मेजबान टीम द्वारा दिए गए लक्ष्य को बेहद आसानी से महज दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। ऋतुराज का यह प्रदर्शन उन्हें मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खटखटाने के लिए एक बार फिर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश करता है।

    हालांकि, इस चमकीली पारी के दूसरी तरफ युवा और होनहार सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का फ्लॉप होना टीम के लिए एक बड़ा झटका रहा। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर इंडिया ‘ए’ की जर्सी पहनने वाले वैभव इस महत्वपूर्ण मुकाबले में पूरी तरह से असहज नजर आए और बिना कोई बड़ा योगदान दिए बेहद सस्ते में पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने के कारण पावरप्ले में टीम को जो आक्रामक शुरुआत मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी। वैभव की इस असफलता ने आगामी मैचों के लिए ओपनिंग स्लॉट की स्थिरता पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है।

    जीत के रास्ते में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा की बल्लेबाजी शैली रही। टी20 और आधुनिक सीमित ओवरों के क्रिकेट के इस दौर में जहां बल्लेबाज पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करने की कोशिश करते हैं, वहीं तिलक वर्मा ने मैदान पर कछुआ गति से बल्लेबाजी की। उनके बल्ले से रनों की गति इतनी धीमी थी कि एक समय पर मजबूत स्थिति में दिख रही भारतीय टीम पर भी अनावश्यक दबाव बनता हुआ दिखने लगा था। तिलक की इस अत्यधिक रक्षात्मक और धीमी अप्रोच को देखकर कमेंटेटर्स और क्रिकेट विश्लेषक भी हैरान रह गए, क्योंकि वे अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं।

    यही कारण है कि दांबुला में मिली इस 8 विकेट की बड़ी जीत के बाद भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और जानकारों को यह सफलता पूरी तरह से संपूर्ण नहीं लग रही है। आगामी समय में होने वाली मुख्य अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं और टीम इंडिया के कड़े शेड्यूल को देखते हुए ‘ए’ टीम के खिलाड़ियों से केवल मैच जीतने की ही नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के मापदंडों के अनुरूप प्रभावी खेल दिखाने की उम्मीद की जाती है। यदि वैभव सूर्यवंशी की निरंतरता और तिलक वर्मा के स्ट्राइक रेट की समस्या का जल्द समाधान नहीं तलाशा गया, तो आने वाले मैचों में टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।