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  • ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?

    ईरान युद्ध से भड़के तेल के दाम… जानें दुनिया में कहां मिल रहा सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल?


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran war) से दुनिया भर में तेल के दाम (Oil prices) में उछाल देखने को मिल है। इस बीच पूरी दुनिया में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत कहीं 2.25 रुपये है तो कहीं 394.95 रुपये। यानी पेट्रोल की कीमत कही भारत से 44 गुना सस्ता है तो कहीं करीब चार गुना महंगा। आइए जानें दुनिया में सबसे सस्ता और महंगा पेट्रोल और डीजल (Petrol Diesel Prices) कहां मिलता है?


    सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाले देश

    सबसे पहले बात दुनिया में सबसे महंगे पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देशों की। इस लिस्ट में सबसे ऊपर हांगकांग का नाम है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 400 रुपये है। इसके बाद मलावी का नाम आता है। यहां पेट्रोल का रेट 364.27 रुपये प्रति लीटर है।

    इजरायल में पेट्रोल जहां, 269.19 रुपये लीटर है वहीं, डेनमार्क में 265.74 रुपये। नीदरलैंड में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 260.15 रुपये है। ग्रीस में 231.57 और अल्बानिया में 231.49 रुपये लीटर है। स्विट्जरलैंड में पेट्रोल की कीमत 231.12 और सिंगापुर में 230.02 रुपये लीटर है।


    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देश

    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल लीबिया में है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 2.25 रुपये है। इसके बाद ईरान का नंबर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 3.32 रुपये है। इसके बाद अंगोला में 31.08, कुवैत में 32.41, अल्जीरिया में 33.75 और तुर्कमेनिस्तान में 40.78 रुपये लीटर है।

    आठवें नंबर इजिप्ट है। यहां पेट्रोल की कीमत 42.78 रुपये है। नौवें पर कतर है, जहां पेट्रोल की कीमत 54.62 रुपये लीटर है। 10वें नंबर पर सऊदी अरब है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 59.62 रुपये है।


    किस देश में सबसे सस्ता डीजल

    सबसे सस्ता डीजल वेनेजुएला में मिलता है। यहां 1 लीटर डीजल की कीमत महज 39 पैसे है। इसके बाद ईरान में 54 पैसे और लीबिया में 2.25 रुपये लीटर। अल्जीरिया में एक लीटर डीजल की कीमत 22.26 रुपये है।

    तुर्कमेनिस्तान में डीजल 27.19 रुपये प्रति लीटर है तो कुवैत में 35.50 रुपये। इजिप्ट में डीजल का रेट 36.36 रुपये लीटर है तो अंगोला में 41.44 रुपये लीटर। सऊदी अरब में एक लीटर डीजल की कीमत 45.37 रुपये और कतर में 53.32 रुपये।


    हांगकांग में 446 रुपये लीटर है डीजल

    दुनिया में सबसे महंगा डीजल हांगकांग में 446 रुपये लीटर है। एक लीटर डीजल की कीमत मलावी में 365, सिंगापुर में 310.49, डेनमार्क में 273.16, स्विट्जरलैंड में 262.09, नीदरलैंड में 257 रुपये लीटर है। इजरायल में जहां एक लीटर डीजल 255.60 रुपये है तो फिनलैंड में 255.59 रुपये।

  • कच्चा माल महंगा होने से ऑटो इंडस्ट्रीज पर संकट… बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें

    कच्चा माल महंगा होने से ऑटो इंडस्ट्रीज पर संकट… बढ़ सकती हैं कारों की कीमतें


    नई दिल्ली।
    ऑटोमोबाइल कंपनियों (Automobile Companies) के सामने लागत का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मार्च 2026 से स्टील, मेटल और प्लास्टिक जैसे जरूरी कच्चे माल की कीमतों (Raw Materials Prices) में तेज उछाल आया है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा और गाड़ियों की मांग भी घट सकती है। यह जानकारी सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) (Society of Indian Automobile Manufacturers – SIAM) के ताजा आंकड़ों में सामने आई है।


    पश्चिम एशिया में जंग का सीधा असर

    एक खबर के मुताबिक पश्चिम एशिया में जंग के चलते स्टील के दाम बढ़े हैं। मार्च 2026 में स्टील का भाव करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 60,000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गया। वहीं, स्टेनलेस स्टील 16 प्रतिशत महंगा होकर 2 लाख रुपये प्रति टन से ऊपर निकल गया, जिससे गाड़ियों के बॉडी और दूसरे पुर्जों की लागत बढ़ गई।


    कोकिंग कोल से लेकर कीमती धातु तक, सब हुआ महंगा

    स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की कीमत में 31 प्रतिशत का उछाल देखा गया। एल्युमीनियम (27 प्रतिशत) और कॉपर (28 प्रतिशत) के दाम लगभग एक-तिहाई बढ़ चुके हैं। गाड़ियों के इंटीरियर और पुर्जों में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के दाम और भी तेजी से बढ़े हैं। पॉलीप्रोपाइलीन जैसे थर्मोप्लास्टिक 34 प्रतिशत महंगा होकर 136.2 रुपये प्रति किलो (पिछले साल 102 रुपये था) हो गया है, जबकि पॉलीकार्बोनेट 9 प्रतिशत बढ़कर 227 रुपये प्रति किलो पहुंच गया।


    एमिशन कंट्रोल पर भारी पड़ेगी कीमती धातुओं की महंगाई

    गाड़ियों में प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली में उपयोग होने वाली कीमती धातुओं के दामों में भी उछाल आया है। प्लैटिनम 124 प्रतिशत बढ़कर 6,196 रुपये प्रति ग्राम, रोडियम 121 प्रतिशत बढ़कर 33,000 रुपये प्रति ग्राम से अधिक और पैलेडियम 74 प्रतिशत बढ़कर 4,712 रुपये प्रति ग्राम हो गया है। इससे कारों में लगने वाले एमिशन कंट्रोल डिवाइस की लागत काफी बढ़ गई है।


    रुपये की कमजोरी से और बढ़ेगी मुश्किल

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल इस कीमत बढ़ोतरी का तुरंत असर मांग पर नहीं दिखेगा, लेकिन अगर यह दबाव लंबा चला तो लोग गाड़ी खरीदने में देरी कर सकते हैं। एसएंडपी ग्लोबल मोबिलिटी के गौरव बांगर ने बताया कि धातुओं, पॉलिमर और कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें कार निर्माताओं के मुनाफे को निचोड़ रही हैं। कमजोर रुपये ने समस्या और बढ़ा दी है, जिससे कंपनियों को अपने मार्जिन बचाने के लिए गाड़ियों के दाम बढ़ाने होंगे।


    कुल इनपुट लागत का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा स्टील का

    उद्योग के जानकारों का कहना है कि वैल्यू चेन पर इसका असर साफ दिख रहा है। अकेले स्टील ही गाड़ी की कुल इनपुट लागत का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा होता है। टीओआई को एक कारोबारी ने बताया, “यह दबाव बिल्कुल असली है और कंपनियां इसकी मार झेल रही हैं।”

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट के बीच स्वर्ण भंडार में तेज उछाल से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि इससे पिछले हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले इस वर्ष 13 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 725.72 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

    आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.12 अरब डॉलर हो गईं। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

  • सकल जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये

    सकल जीएसटी संग्रह जनवरी में 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्‍ली।
    अर्थव्‍यस्‍था (Economy) के मोर्चे पर अच्‍छी खबर है। सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्‍व संग्रह (Gross Goods and Services Tax (GST) Revenue Collection) जनवरी महीने में आयात से प्राप्त राजस्व में वृद्धि के दम पर 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

    जीएसटी महानिदेशालय ने रविवार को जारी आंकड़ों में बताया कि जनवरी में शुद्ध माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह में 7.6 फीसदी की वृद्धि हुई और यह करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि, कुल ‘रिफंड’ में 3.1 फीसदी की गिरावट आई, यह 22,665 करोड़ रुपये रहा।

    आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में घरेलू लेन-देन से सकल कर संग्रह 4.8 फीसदी बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात राजस्व 10.1 फीसदी बढ़कर 52,253 करोड़ रुपये रहा। वहीं, इस दौरान तंबाकू उत्पादों से उपकर संग्रह जनवरी में 5,768 करोड़ रुपये रहा। जनवरी, 2025 में यह 13,009 करोड़ रुपये रहा था, जब कार तथा तंबाकू उत्पादों जैसे विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर उपकर लगाया जाता था।

    उल्‍लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने 22 सितंबर, 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें कम कर दी थीं, जिससे सामान सस्ता हो गया। साथ ही, पहले की तरह विलासिता, हानिकारक एवं अहितकर वस्तुओं पर लगने वाले उपकर के बजाय अब केवल तंबाकू तथा संबंधित उत्पादों पर ही क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है। जीएसटी दरों में कमी से राजस्व संग्रह पर असर पड़ा है।