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दर्शकों की बदलती पसंद: कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का नया संगम रच रहा सिनेमा
नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों की पसंद में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां दर्शक सिर्फ मनोरंजन के लिए कॉमेडी या एक्शन फिल्में देखते थे, वहीं अब वे ऐसी कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो दिल को छू जाएं और लंबे समय तक याद रहें। अब फिल्मों में इमोशन, गहराई और सच्चाई की मांग बढ़ गई है। यही कारण है कि फिल्म इंडस्ट्री भी अब कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां कहानी और प्रस्तुति को प्राथमिकता दी जा रही है।माइथोलॉजी और लोककथाएं भारतीय समाज का अहम हिस्सा रही हैं। इन कहानियों में हमारी संस्कृति, परंपराएं और आस्था की झलक मिलती है। जब इन्हें आधुनिक अंदाज में फिल्मों या वेब सीरीज के जरिए पेश किया जाता है, तो दर्शकों के साथ एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनता है। यही वजह है कि आजकल फिल्ममेकर्स इन विषयों को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।इस ट्रेंड को मजबूत करने में Kantara का बड़ा योगदान रहा है। Rishab Shetty की इस फिल्म ने दिखाया कि जड़ों से जुड़ी सच्ची कहानी भाषा की सीमाओं को पार कर सकती है। फिल्म में लोकदेवता, परंपरा और प्रकृति के रिश्ते को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिसे पूरे देश के दर्शकों ने सराहा। इसकी सफलता ने फिल्म इंडस्ट्री का नजरिया बदल दिया और कंटेंट की ताकत को फिर साबित किया।इसी सफलता के बाद फिल्ममेकर्स का भरोसा मजबूत हुआ है और अब वे बड़े सितारों के बजाय दमदार कहानियों पर ध्यान दे रहे हैं। पौराणिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित कई नई फिल्में और वेब सीरीज बन रही हैं, जिनमें सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि इंसानी रिश्तों और समाज की सच्चाई को भी दिखाया जा रहा है। दर्शकों को यही ईमानदारी पसंद आ रही है।इसी कड़ी में Ramayana जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर भी तेजी से काम चल रहा है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। इसे भव्य सेट्स, आधुनिक वीएफएक्स और नई तकनीक के साथ पेश करने की तैयारी है, ताकि हर वर्ग के दर्शकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिल सके।आज के दौर में फिल्मों की भव्यता भी दर्शकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा रही है। इंटरनेशनल स्तर के विजुअल्स, शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक और दमदार प्रेजेंटेशन से फिल्म का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, केवल भव्यता ही काफी नहीं होतीकहानी में भावनात्मक गहराई और सच्चाई भी उतनी ही जरूरी है, तभी फिल्म दिलों में जगह बना पाती है।अब माइथोलॉजी फिल्मों का क्रेज युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। पहले जहां इन्हें सिर्फ बड़े उम्र के लोगों तक सीमित माना जाता था, वहीं अब युवा भी इन कहानियों को पसंद कर रहे हैं। नए अंदाज, तेज रफ्तार कहानी और हाई-क्वालिटी विजुअल्स के कारण उन्हें इसमें एक्शन, ड्रामा और इमोशन का बेहतरीन मिश्रण मिलता है।इस बदलाव में OTT platforms का भी बड़ा योगदान है। ओटीटी ने फिल्ममेकर्स को ज्यादा स्वतंत्रता दी है, जिससे वे अपनी कहानियों को विस्तार से दिखा पा रहे हैं। खासकर पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां वेब सीरीज के रूप में दर्शकों तक बेहतर तरीके से पहुंच रही हैं। धीरे-धीरे आगे बढ़ने वाली इन कहानियों से दर्शकों का जुड़ाव भी मजबूत होता है।कुल मिलाकर, दर्शकों की बदलती पसंद ने फिल्म इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी है, जहां कंटेंट, संस्कृति और भव्यता का संतुलन बनाकर ऐसी कहानियां पेश की जा रही हैं, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक यादगार अनुभव बन जाती हैं। -

संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत
नई दिल्ली:फिल्म इंडस्ट्री में सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष से होकर गुजरती हैं और ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कन्नड़ सिनेमा के स्टार ऋषभ शेट्टी की जिन्होंने बेहद साधारण शुरुआत से अपने करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज वह ना सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं बल्कि निर्देशक और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी खास पहचान बना चुके हैं लेकिन उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है।बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में पहचान बनाने से पहले ऋषभ शेट्टी ने एक प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था। इतना ही नहीं उन्होंने एक प्रोड्यूसर के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2008 में मुंबई के अंधेरी इलाके में वह वड़ा पाव खाते हुए सपने देखते थे लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन वह इतने बड़े स्टार बन जाएंगे।
उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने साल 2012 में फिल्म तुगलक से अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया लेकिन इसके बावजूद फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम से दर्शकों का दिल जीतते गए।
उनके करियर में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने फिल्म लूसिया में काम किया जो उनकी पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके बाद बेल बॉटम जैसी फिल्मों ने उन्हें और मजबूत बनाया। साल 2016 में उन्होंने फिल्म रिक्की के साथ बतौर निर्देशक भी कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की।
हालांकि जिस फिल्म ने ऋषभ शेट्टी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में पहचान दिलाई वह थी कंतारा। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद उनकी फिल्म कंतारा चैप्टर 1 ने भी शानदार प्रदर्शन किया और इसे दर्शकों से भरपूर प्यार मिला।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड करीब 850 करोड़ रुपये की कमाई की और साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही। खास बात यह रही कि इस फिल्म ने कई बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया जिनमें रजनीकांत की फिल्म कुली और आमिर खान की फिल्म सितारे जमीन पर जैसी बड़ी फिल्में शामिल थीं।
आज ऋषभ शेट्टी की कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण घबराते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि अगर मेहनत और जुनून हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।