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  • एलन मस्क के फॉलो किए ऋषभ यादव कौन हैं, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर की कामयाबी से छिड़ी ब्रेन ड्रेन बहस

    एलन मस्क के फॉलो किए ऋषभ यादव कौन हैं, अमेरिका में भारतीय इंजीनियर की कामयाबी से छिड़ी ब्रेन ड्रेन बहस

    नई दिल्ली । दुनिया के प्रमुख उद्योगपतियों में शामिल एलन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जिन लोगों को फॉलो करते हैं, उनमें भारतीय मूल के इंजीनियर ऋषभ यादव का नाम भी शामिल है। ऋषभ को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उनकी पहचान, पेशेवर उपलब्धियों और अमेरिका में उनके काम को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इसके साथ ही भारत से प्रतिभाशाली युवाओं के विदेश जाने यानी ब्रेन ड्रेन के मुद्दे पर भी बहस तेज हो गई है।

    यह चर्चा तब शुरू हुई, जब सोशल मीडिया यूजर माधव ने सवाल उठाया कि एलन मस्क द्वारा फॉलो किए जाने वाले ऋषभ यादव आखिर कौन हैं। उन्होंने बताया कि मस्क एक्स पर करीब 1,418 लोगों को फॉलो करते हैं और इनमें ऋषभ का नाम भी शामिल है। माधव ने यह भी कहा कि उन्हें पहले लगा था कि ऋषभ भारतीय होंगे, लेकिन उनका सोशल मीडिया अकाउंट अमेरिकी दिखाई देता है। इसके बाद उन्होंने इस इंजीनियर की पहचान जानने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चैटबॉट ग्रोक से सवाल किया।

    ग्रोक के जवाब के अनुसार, ऋषभ यादव कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कोडिंग टूल कर्सर के संस्थापक इंजीनियर हैं। यह टूल सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को कोड लिखने और उससे जुड़े काम में सहायता देता है। ऋषभ भारतीय मूल के हैं और अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में रहते हैं। वह इससे पहले एप्पल और सिस्को जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। एप्पल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आईफोन के बैक टैप फीचर पर भी काम किया था।

    ऋषभ की पेशेवर पृष्ठभूमि और मस्क के साथ उनके जुड़ाव को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कर्सर और स्पेसएक्स के बीच हुए सौदे के बाद ऋषभ ने मस्क से जुड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनी स्पेसएक्सएआई में काम शुरू किया। इसी पेशेवर संबंध को मस्क द्वारा उन्हें फॉलो किए जाने की चर्चा से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, केवल सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को फॉलो करना अपने आप में किसी विशेष व्यक्तिगत संबंध का प्रमाण नहीं है।

    इस मामले ने भारतीय प्रतिभाओं के विदेश जाने के मुद्दे को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। माधव की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने कहा कि भारत की प्रतिभा हर साल अमेरिका चली जाती है। कुछ लोगों ने इसे देश के लिए प्रतिभा पलायन की चुनौती बताया, जबकि अन्य ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की उपलब्धियों को उनकी मेहनत और कौशल का परिणाम माना।

    बहस के दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों और भारतीय प्रबंधन संस्थानों से पढ़ाई करने वाले युवाओं का भी उल्लेख किया गया। कुछ यूजर्स का कहना था कि देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद विदेशों में काम करते हैं और वहां नई तकनीकों तथा कारोबार के विकास में योगदान देते हैं। उनके मुताबिक, इससे भारत में उपलब्ध अवसरों और प्रतिभाओं को रोकने की क्षमता पर सवाल उठते हैं।

    दूसरी ओर, कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि केवल देशभक्ति की भावना के आधार पर प्रतिभा पलायन को नहीं रोका जा सकता। इसके लिए भारत में बेहतर रोजगार, अनुसंधान, तकनीकी विकास, प्रतिस्पर्धी वेतन और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। इस दृष्टिकोण के अनुसार, यदि प्रतिभाशाली युवा देश में रहकर भारतीय कंपनियों और संस्थानों के साथ काम करें, तो उनकी विशेषज्ञता का लाभ घरेलू अर्थव्यवस्था को भी मिल सकता है।

    ऋषभ यादव की चर्चा इस तरह एक इंजीनियर की पेशेवर पहचान से आगे बढ़कर भारतीय प्रतिभाओं के वैश्विक योगदान और देश में उपलब्ध अवसरों के सवाल तक पहुंच गई है। विदेशों में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की सफलता जहां उनकी क्षमता को दर्शाती है, वहीं यह बहस भी महत्वपूर्ण बनी हुई है कि भारत किस तरह अपने युवाओं को देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध करा सकता है।

  • मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने बताया राष्ट्रपति के ADC पद से रिटायरमेंट का कारण, परिवार को बताया सबसे बड़ी प्राथमिकता

    नई दिल्ली । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एड-डी-कैंप मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने 30 साल की उम्र में सेना से समय से पहले रिटायरमेंट लेने के फैसले के बारे में खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय किसी निजी असंतुष्टि की वजह से नहीं, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया था। सेना की वर्दी पहनना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि लंबे समय से देखा गया सपना था।

    मेजर ऋषभ ने बताया कि उन्होंने कभी सेना छोड़ने के बारे में नहीं सोचा था। उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय इस सपने को पूरा करने और सैन्य जीवन को जीने में बिताया। इसके बावजूद एक समय ऐसा आया जब उन्हें अपने व्यक्तिगत करियर और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारियों के बीच किसी एक को चुनना पड़ा।

    उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं के बजाय माता-पिता के साथ रहने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनकी कुछ जिम्मेदारियां और वादे हैं, जिन्हें उन्हें पूरा करना है। उनके सामने खुद को चुनने या माता-पिता को प्राथमिकता देने का विकल्प था और वह ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते थे, जिसके बारे में बाद में उन्हें पछतावा हो।

    मेजर ऋषभ ने स्पष्ट किया कि सेना छोड़ने का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया। उन्होंने परिवार के साथ बातचीत करने के बाद यह फैसला किया। उनके लिए यह कदम भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन उन्होंने इसे जरूरी त्याग माना। सैन्य करियर उम्मीद से पहले खत्म होने के बावजूद उन्हें देश की सेवा में बिताए हर पल पर गर्व है।

    राष्ट्रपति के ADC के तौर पर अपनी भूमिका को लेकर भी उन्होंने कई बातें बताईं। उनके अनुसार इस पद पर रहते हुए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता है और इसका असर निजी जीवन पर भी पड़ता है। ADC के कार्यकाल के दौरान शादी करने की अनुमति नहीं होने की बात भी उन्होंने बताई।

    मेजर ऋषभ ने अपनी शादी को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्होंने शादी नहीं की है और फिलहाल शादी करने की उनकी कोई योजना भी नहीं है। इस तरह उन्होंने उन अटकलों को खारिज किया, जिनमें उनकी रिटायरमेंट को शादी की योजना से जोड़कर देखा जा रहा था।

    उन्होंने यह भी बताया कि ADC के तौर पर जिम्मेदारियों के कारण निजी जीवन काफी सीमित हो जाता है। परिवार से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है और निजी जिंदगी के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। सार्वजनिक जिम्मेदारियों की लगातार मांग के कारण उन्हें कई ऐसे सामान्य अनुभवों का त्याग करना पड़ा, जिन्हें आम जीवन का हिस्सा माना जाता है।

    मेजर ऋषभ ने इस अनुभव को केवल कठिनाइयों के तौर पर नहीं देखा। उनके मुताबिक, सीमित निजी जीवन और लगातार जिम्मेदारियों के बीच यह समय आत्मचिंतन का अवसर भी रहा। उन्होंने अपने फैसले को परिवार के प्रति जिम्मेदारी और जरूरी त्याग के रूप में प्रस्तुत किया।

    सेना छोड़ने के बावजूद उनके बयान में सैन्य सेवा के प्रति सम्मान साफ नजर आया। उन्होंने देश की सेवा में बिताए समय को गर्व के साथ याद किया और बताया कि परिवार से बातचीत के बाद लिया गया यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्हें लगा कि इस समय माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देना जरूरी है।