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  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर ग्वालियर की बाजारों में, किराना, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर ग्वालियर की बाजारों में, किराना, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़े


    ग्वालियर। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान संघर्ष का असर अब ग्वालियर के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। शहर में धीरे-धीरे महंगाई बढ़ रही है, जिससे आम लोगों के घर का बजट प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो रोजमर्रा की चीजों के दाम और तेजी से बढ़ सकते हैं।
    शहर में एलपीजी गैस की स्थिति भी प्रभावित हुई है। एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। इसके कारण घरेलू गैस की मांग अचानक बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि कुछ लोग सिलेंडर स्टॉक कर रहे हैं, जिसके चलते जरूरतमंदों को समय पर गैस नहीं मिल पा रही है।

    किराना बाजार में भी महंगाई का असर साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारियों के अनुसार कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में 5 से 10 रुपए तक की बढ़ोतरी होने लगी है। उनका कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    किराना व्यापारी गोकुल बंसल के मुताबिक खाने के तेल की कीमत में लगभग 10 रुपए प्रति किलो और एक कनस्तर पर करीब 100 रुपए तक का फर्क आ चुका है। इसके अलावा दाल और चावल के दाम भी धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार में एक वस्तु की कीमत बढ़ने का असर दूसरी चीजों पर भी पड़ता है, इसलिए हालात सामान्य होना जरूरी है।

    ड्राई फ्रूट्स के बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है। ग्वालियर में अधिकांश ड्राई फ्रूट्स बाहरी राज्यों और विदेशों से आते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है। ड्राई फ्रूट्स व्यापारी मानस गोयल के अनुसार पिस्ता की कीमत में करीब 300 से 400 रुपए प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि डोडी के दाम भी लगभग 100 रुपए प्रति किलो बढ़े हैं।

    उन्होंने बताया कि ईरान से आने वाले कई उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। काली किशमिश और अन्य रेजिन आइटम्स में 100 से 200 रुपए तक का अंतर देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि यदि यह स्थिति दो सप्ताह और बनी रही, तो आम लोगों के लिए ड्राई फ्रूट्स खरीदना मुश्किल हो सकता है।

    इधर गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण लकड़ी की मांग भी बढ़ने लगी है। लकड़ी और कोयला व्यापारियों के मुताबिक लकड़ी की मांग में करीब 10 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। लकड़ी व्यवसायी नेहा गुप्ता ने बताया कि कोयले की मांग फिलहाल स्थिर है, लेकिन गैस की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण होटल, कैटरर्स और मैरिज हॉल में लकड़ी की सप्लाई बढ़ने लगी है।

  • अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल

    अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दागी नई बैलिस्टिक मिसाइल


    वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने नई सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है।
    ‘खैबर’ नाम की इस चौथी पीढ़ी की मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 2000 किलोमीटर बताई जा रही है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल का प्रक्षेपण एक गोपनीय स्थान से किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्रीय सुरक्षा हालात संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की खबरें भी सामने आती रही हैं।

    परमाणु वार्ता का तीसरा दौर शुरू

    इसी बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता का तीसरा दौर जेनेवा में शुरू हुआ। यह बातचीत ओमान की मध्यस्थता में हो रही है। वार्ता का उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम को लेकर लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को कम करना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है।

    ईरान ने परमाणु हथियार बनाने से किया इनकार

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि उनका देश परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में काम नहीं कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही परमाणु हथियारों के विकास पर प्रतिबंध लगा चुके हैं।

    पेजेशकियन के अनुसार, “जब सर्वोच्च नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाए जाएंगे, तो ईरान उसी नीति पर कायम है।”

    पुराना विवाद, नई कोशिश

    गौरतलब है कि 2000 के दशक की शुरुआत में खामेनेई ने एक धार्मिक आदेश (फतवा) जारी कर परमाणु हथियारों के निर्माण को प्रतिबंधित बताया था। इसके बावजूद अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु क्षमता हासिल करने की कोशिश करने का आरोप लगाता रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, एक ओर जहां मिसाइल परीक्षण शक्ति प्रदर्शन का संकेत है, वहीं दूसरी ओर जारी कूटनीतिक वार्ता इस बात का संकेत देती है कि दोनों देश टकराव से बचते हुए समाधान की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।