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  • TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल

    TMC में बगावत और गहराई: काकोली घोष ने ऋतब्रत बनर्जी से बनाई दूरी, NDA समर्थन के दावे से बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर उभरे बागी नेताओं के बीच भी रणनीतिक मतभेद सामने आने लगे हैं। लोकसभा में बागी सांसदों के कथित गुट का नेतृत्व करने का दावा कर रहीं टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका बंगाल विधानसभा में बागी गुट का नेतृत्व कर रहे ऋतब्रत बनर्जी से कोई संबंध नहीं है।

    काकोली घोष दस्तीदार का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। हाल ही में राज्यसभा के कुछ सदस्यों के इस्तीफों और पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने राजनीतिक हलकों में नई अटकलों को जन्म दिया है। इसी बीच काकोली ने दावा किया कि लोकसभा में उनके साथ कई सांसद खड़े हैं और वे बंगाल के हितों के लिए एक अलग राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    मीडिया से बातचीत में काकोली ने कहा कि जब उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी, तब वे अकेली थीं, लेकिन अब कई सांसद उनके साथ आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं, जबकि उनका संघर्ष संसद के स्तर पर है। इस कारण दोनों की राजनीतिक रणनीति और प्राथमिकताएं अलग हैं।

    टीएमसी के भीतर जारी इस घटनाक्रम में एक बड़ा विरोधाभास भी सामने आया है। जहां ऋतब्रत बनर्जी खुद को राज्य में भाजपा के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं काकोली घोष का दावा है कि उनका गुट केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने के पक्ष में है। यही कारण है कि दोनों नेताओं के बीच दूरी और अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी है।

    काकोली घोष ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार संसद के भीतर महिलाओं के प्रति कथित व्यवहार को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई है। काकोली ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में कल्याण बनर्जी के साथ राजनीतिक रूप से नहीं जुड़ सकतीं।

    दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने काकोली के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है और वे इस तरह के विवादों में पड़ने से बचना चाहते हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों गुट फिलहाल अपने-अपने राजनीतिक रास्तों पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

    सबसे बड़ा विवाद काकोली घोष के उस दावे को लेकर है जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने अलग गुट को मान्यता दिलाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, स्पीकर कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

    इतना ही नहीं, जिन सांसदों के नाम कथित रूप से बागी गुट में शामिल बताए जा रहे हैं, उनमें से कुछ ने सार्वजनिक रूप से इन दावों का खंडन भी किया है। आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि वे पूरी तरह टीएमसी और ममता बनर्जी के साथ हैं। वहीं जयनगर से सांसद प्रतिमा मंडल ने भी ऐसी खबरों को अफवाह बताते हुए चुनौती दी कि यदि कोई पत्र मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।

    इस बीच दिल्ली में केंद्रीय मंत्री के आवास पर कथित रूप से हुई एक बैठक की चर्चाओं ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। हालांकि बैठक में शामिल नेताओं और वहां हुई चर्चाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ सांसदों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई अन्य नेता भी संपर्क में हैं।

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर बढ़ती यह हलचल आने वाले दिनों में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों पर असर डाल सकती है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना किस तरह करता है और बागी गुट अपने दावों को किस हद तक साबित कर पाता है।

  • टीएमसी में सियासी हलचल तेज, दिल्ली मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी पर उठे सवाल

    टीएमसी में सियासी हलचल तेज, दिल्ली मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और बदलते राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दिल्ली में हुई एक अचानक मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है, जिसके बाद बंगाल की सियासत में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।

    दिल्ली के पुराने बंग भवन में शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया है, लेकिन जिस तरह यह मुलाकात अचानक और सार्वजनिक स्थान पर हुई, उसने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींच लिया है।

    मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई और माहौल को पूरी तरह सौहार्दपूर्ण बताया गया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों के अनुसार, बातचीत औपचारिक थी लेकिन राजनीतिक संदर्भों में इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

    ऋतब्रत बनर्जी ने बाद में इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि उनका दिल्ली दौरा पूरी तरह प्रशासनिक और व्यक्तिगत कार्यों से जुड़ा था। उन्होंने बताया कि वह पहले राज्यसभा सांसद रह चुके हैं, जिसके चलते उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था, जिसे अब नियमों के अनुसार नियमित पासपोर्ट में बदलने की प्रक्रिया पूरी करनी थी।

    उन्होंने यह भी बताया कि विधायक बनने के बाद सरकारी आवास और उससे जुड़े किराए के निपटान जैसे औपचारिक कार्य भी पूरे करने थे। इसी सिलसिले में वह दिल्ली आए थे और पुराने बंग भवन में लंच के दौरान यह मुलाकात हो गई। उनके अनुसार, इस घटना को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह आकस्मिक थी।

    इसके बावजूद पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। राज्य में पहले से ही कुछ नेताओं के असंतोष और पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी की खबरें आती रही हैं, जिसके चलते इस मुलाकात को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी दल के भीतर नेताओं की गतिविधियां अक्सर व्यापक राजनीतिक संकेत देती हैं, खासकर तब जब राज्य में चुनावी माहौल या राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाएं चल रही हों। ऐसे में इस मुलाकात को लेकर भी अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।

    फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन दिल्ली में हुई इस बैठक ने बंगाल की राजनीति में एक नई बहस को जरूर जन्म दे दिया है।