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  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण: मंत्री प्रहलाद पटेल..

    नर्मदा परिक्रमा पथ पर आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण: मंत्री प्रहलाद पटेल..


    नई दिल्ली। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने नर्मदा परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आश्रय स्थलों पर व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। यह निर्णय राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गयाजिसकी अध्यक्षता मंत्री श्री पटेल ने की। बैठक में जीवनदायिनी माँ नर्मदा के जल संरक्षणप्रवाह को अविरल बनाए रखने और नर्मदा से जुड़े समग्र विकास कार्यों पर विशेष चर्चा हुई।

    बैठक में सर्वश्री छोटे सिंहदिनेश जैनश्रीमती हर्षिका सिंहश्री अविप्रसाद और श्री दीपक आर्य उपस्थित रहे। मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को परिक्रमा पथ पर प्रस्तावित पुलपुलिया और ब्रिज का शीघ्र सर्वेक्षण करने और सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।इसके साथ ही बैठक में विधानसभा से संबंधित लंबित प्रकरणों की विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। मंत्री ने सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने का निर्देश दियाताकि जनहित से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान हो सके।

    मंत्री श्री पटेल ने यह भी कहा कि माँ नर्मदा के संरक्षण और विकास को जनभागीदारी से जोड़ना बेहद आवश्यक है। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा पथ के विकासपर्यावरण संरक्षण और आश्रय स्थलों पर वृक्षारोपण की गतिविधियों में स्थानीय जनता और समुदायों को सक्रिय रूप से शामिल करने पर जोर दिया।

    बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयनपर्यावरणीय संरक्षण और जल संरक्षण के उपायों पर विशेष बल दिया गया। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।इस बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास केवल भौतिक संरचना तक सीमित नहीं होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षणजल सुरक्षा और जनभागीदारी के माध्यम से इसे समग्र और सतत बनाया जाएगा