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  • ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा

    ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा


    ग्वालियर। ग्वालियर में बदहाल सड़कों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर के प्रमुख मार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण करने के लिए 108 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुल 28 सड़कों को विकसित करने की तैयारी है। हालांकि शहर में सड़क सुधार की नई योजना के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कुछ स्थानों पर निर्माण के बाद सड़कें दोबारा धंसने की शिकायतें सामने आई हैं। सड़क सुधार का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
    नगर निगम की प्रस्तावित योजना में शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक का मार्ग होटल सनबीम से मानसिंह चौराहे तक की सड़क टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका लधेड़ी से जलालपुर तथा कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक की सड़क का भी विकास किया जाना है। सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना का उद्देश्य शहर में आवागमन को बेहतर बनाना और लोगों को खराब सड़कों से राहत दिलाना है।
    शहर में सड़क निर्माण की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोले का मंदिर चेतकपुरी शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर जैसे इलाकों में लोग लंबे समय से सड़क संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है वहीं वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती है। सिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्र की सड़कें भी इन समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके धंसने की शिकायतें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच सड़कों की जिम्मेदारी को लेकर भी खींचतान की स्थिति सामने आती रही है।
    ग्वालियर में इससे पहले भी धूल से राहत दिलाने के लिए डस्ट फ्री रोड योजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत करीब 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को धूल मुक्त बनाने के साथ पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इस योजना के परिणामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नई सड़क विकास योजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वहीं फूलबाग से गिरवाई तक प्रस्तावित 926 करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना के निर्माण से भी शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं।
    अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई सड़कें बनाना नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। सड़क निर्माण में मानकों का पालन समय पर मरम्मत और काम की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि 108 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से आवागमन सुगम होगा और गड्ढों तथा धूल की समस्या कम होगी। अब देखना होगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और ग्वालियर की सड़कों की स्थिति में वास्तव में कितना सुधार आता है।