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  • ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज

    ₹17 करोड़ खर्च फिर भी सड़क में भेदभाव का आरोप, HIG-MIG में सीमेंटेड और EWS-LIG में डामर रोड पर रहवासी नाराज


    भोपाल । भोपाल के बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी में 17 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सड़क को लेकर गुरुवार सुबह रहवासियों ने प्रदर्शन किया। कॉलोनी में सड़क निर्माण के दौरान कहीं सीमेंटेड तो कहीं डामर की सड़क बनाए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है। रहवासियों का कहना है कि जब पूरी कॉलोनी के लिए सड़क निर्माण का बड़ा टेंडर हुआ है तो अलग अलग हिस्सों में सड़क की गुणवत्ता और निर्माण का तरीका अलग क्यों रखा जा रहा है। लोगों ने मांग की है कि पूरी कॉलोनी में सीमेंटेड सड़क बनाई जाए ताकि सड़क लंबे समय तक टिकाऊ रहे और बार बार उखड़ने की समस्या न हो।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रहवासी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर सड़क पर पहुंचे और नारेबाजी की। बाग मुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी विकास समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी के मुताबिक करीब 85 एकड़ में फैली इस कॉलोनी में 1206 से अधिक मकान हैं। कॉलोनी में सड़क निर्माण के लिए 29 अप्रैल 2026 को करीब 17 करोड़ रुपए का टेंडर हुआ था। रहवासियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि इस राशि से कॉलोनी की सड़क व्यवस्था बेहतर होगी लेकिन निर्माण शुरू होने के बाद सड़क के अलग अलग हिस्सों में अलग तरीके से काम होता दिखाई दे रहा है।

    रहवासियों के अनुसार कॉलोनी के HIG और MIG आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है। लोगों का आरोप है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के आवासों के सामने भी सीमेंटेड सड़क का निर्माण किया गया है। इसके बाद जब EWS और LIG आवासों वाले हिस्से में सड़क निर्माण शुरू हुआ तो वहां डामर की सड़क बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।

    मामले की जानकारी क्षेत्रवासियों ने मंत्री कृष्णा गौड़ और PWD अधिकारियों तक भी पहुंचाई। रहवासियों ने मांग की कि EWS और LIG क्षेत्र में भी सीमेंटेड सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि छोटे मकानों वाले हिस्से में रहने वाले लोगों को भी उतनी ही मजबूत और टिकाऊ सड़क मिलनी चाहिए जितनी कॉलोनी के अन्य हिस्सों में बनाई जा रही है।

    वहीं PWD अधिकारियों की ओर से रहवासियों को बताया गया कि टेंडर में सीमेंटेड और डामर दोनों तरह की सड़कों का प्रावधान रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक EWS और LIG क्षेत्र में डामर की सड़क ही बनाई जाएगी। उनका कहना है कि यदि रहवासी सीमेंटेड सड़क की मांग पर जोर देते हैं तो इसके लिए अतिरिक्त फंड उपलब्ध नहीं है और ऐसी स्थिति में काम रोकना पड़ सकता है।

    रहवासियों का सवाल इसी बात को लेकर है कि यदि एक ही कॉलोनी में दोनों तरह की सड़क बनाने का प्रावधान था तो निर्माण का आधार क्या तय किया गया है। लोगों का कहना है कि अधिकारियों के आवासों वाले हिस्से में सीमेंटेड सड़क और छोटे आवासों वाले हिस्से में डामर सड़क होने से उन्हें असमानता महसूस हो रही है। उनका यह भी कहना है कि कुछ हिस्सों में छोटे आवासों को छोड़कर करीब 300 मीटर आगे फिर अधिकारियों के आवासों के सामने सीमेंटेड सड़क बनाई जा रही है।

    EWS और LIG-1 तथा LIG-2 क्षेत्र में डामर सड़क का काम शुरू होने के बाद गुरुवार सुबह रहवासी मौके पर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया। लोगों ने निर्माण कार्य को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए अधिकारियों से सड़क निर्माण की व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की मांग की। रहवासियों ने कहा कि वे सीमेंटेड सड़क की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे। इसी क्रम में शनिवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित करने की भी बात कही गई है। अब देखना होगा कि PWD और प्रशासन रहवासियों की मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और सड़क निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।

  • 100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क

    100 से ज्यादा ग्रामीण रोज बना रहे अपनी सड़क 40 साल पहले उजड़े गांव में अब भी नहीं पहुंची पक्की सड़क


    जबलपुर । ज्जबलपुर जिले के दुर्गानगर गांव में सड़क की समस्या ने ग्रामीणों को इस कदर परेशान कर दिया कि अब उन्होंने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर खुद सड़क सुधारने का फैसला किया है। करीब 40 साल पहले बरगी बांध परियोजना के लिए अपना घर बार छोड़कर यहां बसे ग्रामीण आज अपने गांव की करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए गैंती फावड़ा और तसला उठा रहे हैं। गांव के 100 से ज्यादा महिला पुरुष बच्चे और दिव्यांग रोज सुबह श्रमदान कर सड़क को बारिश में चलने लायक बनाने में जुटे हैं। ग्रामीण अपने स्तर पर मुरम और पत्थर की व्यवस्था कर रास्ते में डाल रहे हैं।

    जबलपुर मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर शहपुरा जनपद के दुर्गानगर में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव की मुख्य सड़क बारिश शुरू होते ही कीचड़ में बदल जाती है। कई बार रास्ता इतना खराब हो जाता है कि गांव का संपर्क आसपास के इलाकों से प्रभावित हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में जरूरी काम के लिए गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

    सड़क की बदहाली का गंभीर असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खराब रास्ते के कारण कई बार एंबुलेंस और 108 वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। प्रसव के नजदीक पहुंचने पर गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव में जाकर रहने की मजबूरी होती है ताकि जरूरत पड़ने पर समय पर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने जाने की परेशानी नहीं बल्कि उनके लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है।

    दुर्गानगर के ग्रामीण बताते हैं कि वे लंबे समय से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार आवेदन देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिला पंचायत की बैठकों में भी सड़क का मुद्दा कई बार उठाया गया। जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव देने की बात भी ग्रामीणों ने कही है। इसके बावजूद सड़क का काम शुरू नहीं होने पर लोगों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने खुद रास्ता सुधारने का निर्णय लिया।

    ग्रामीण भीमा बाई के मुताबिक सड़क की जरूरत इतनी ज्यादा है कि अब गांव के लोगों को इसे खुद ही बनाने के लिए आगे आना पड़ा। गांव के कई लोग मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। इसके बावजूद वे रोज सुबह मजदूरी पर जाने से पहले करीब दो से तीन घंटे सड़क सुधारने में लगा रहे हैं। पहले सड़क पर काम किया जाता है और इसके बाद लोग रोजी रोटी कमाने के लिए निकलते हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में स्थानीय विधायक से लेकर जिला पंचायत सीईओ और कलेक्टर तक सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिए गए। जनसुनवाई में भी समस्या रखी गई लेकिन हर बार निरीक्षण और जल्द कार्रवाई का आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है क्योंकि खराब रास्ते के कारण उनका स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।

    मामला सामने आने के बाद बरगी विधायक नीरज सिंह ने ग्रामीणों की परेशानी को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान कराने की बात कही है। जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने भी मामले की जानकारी होने की बात कही और ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए जल्द सड़क बनाने का प्रयास करने की बात कही है।

    फिलहाल दुर्गानगर के ग्रामीण अपने श्रम और संसाधनों से रास्ता सुधार रहे हैं। जिन लोगों ने चार दशक पहले विकास परियोजना के लिए अपना घर गांव और जमीन छोड़ी थी वे आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की मेहनत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जरूरी सुविधाओं के लिए आखिर उन्हें कितने वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव आज हटा में महिला सम्मेलन में शामिल, करोड़ों के विकास कार्यों का करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण

    सीएम डॉ. मोहन यादव आज हटा में महिला सम्मेलन में शामिल, करोड़ों के विकास कार्यों का करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण


    दमोह । दमोह जिले की हटा विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंच रहे हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में शामिल होंगे। सम्मेलन में स्व सहायता समूह और लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहेंगी। मुख्यमंत्री सबसे पहले दूल्हा देव शिव मंदिर में दर्शन करेंगे और उसके बाद सभा स्थल पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लेंगे।

    कलेक्टरसुधीर कुमार कोचरने बताया कि इस मौके पर हटा विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी किया जाएगा। प्रमुख विकास कार्यों में मड़ियादो से रजपुरा मार्ग का निर्माण 48.89 करोड़ रुपए मड़ियादो से बर्धा किशनगढ़ मार्ग 74.44 करोड़ रुपए और एनडीबी योजना के तहत हटा से गैसाबाद सिमरिया मार्ग एसएच 55 के शोल्डर उन्नयन एवं चौड़ीकरण का कार्य 231.97 करोड़ रुपए शामिल हैं।

    इसके अतिरिक्त हटा से पटेरा कुम्हारी मार्ग के शहरी हिस्से में 4 लेन चौड़ीकरण 5.11 करोड़ रुपए हटा शहर में रेस्ट हाउस के पास दुधिया नाले पर पुल निर्माण 8.44 करोड़ रुपए हटा ब्लॉक अंतर्गत हिनौता मुराछ पाली मार्ग पर सुनार नदी पर पुल निर्माण 13.26 करोड़ रुपए और जिरौध सिमरी मार्ग में व्यारमा नदी पर पुल निर्माण 6.87 करोड़ रुपए का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा।

    कलेक्टर कोचर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यक्रम की तैयारियों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें संभागीय प्रबंधक एमपीआरडीसी सागर कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग सागर अधीक्षण यंत्री मध्यप्रदेश विद्युत कंपनी दमोह कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग दमोह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी हटा शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन स्थानीय जनता और हितग्राही महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे हटा विधानसभा क्षेत्र में सड़क पुल और शहरी बुनियादी ढांचे का कायाकल्प होगा और महिला सशक्तिकरण को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

  • उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात

    उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाई-वे से किसानों और क्षेत्र का समग्र विकास, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बड़ी सौगात


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई वे परियोजना को जिले के किसानों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष मंजूरी मिलने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न सिर्फ क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी बल्कि स्थानीय क्षेत्र के समग्र विकास की नई पहचान भी बनेगी। करीब 5017 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह हाई वे किसानों व्यापारियों और आम जनता के जीवन स्तर को सीधे लाभान्वित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास की दिशा में प्रदेश में सभी एकजुट हैं और जीवाईएएन पहल को आगे बढ़ाकर प्रदेश को देश के विकसित प्रदेशों में शामिल करने का लक्ष्य है।

    किसानों की बेहतरी और कृषि उत्पादों को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए यह हाई वे एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने किसान प्रतिनिधि मंडल को संबोधित करते हुए बताया कि उज्जैन जावरा हाई वे परियोजना के अलावा प्रदेश में सड़कों और राजमार्गों का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है जिससे किसानों की पहुंच सुगम होगी। इस अवसर पर घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया और उन्हें विकास पुरूष बताया।

    डॉ. यादव ने किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी कई योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मकालीन उड़द पर हर किसान को 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा। इसके साथ ही सरसों चना मसूर तुअर और अन्य दलहन व तिलहन की फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना और उत्पादन बढ़ाने के ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रदेश के दुग्ध उत्पादन को देश के कुल उत्पादन का 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं। आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा जिससे उत्पादन और पोषण दोनों में वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और उद्यमी बनाने की दिशा में भी कार्यरत योजनाओं का जिक्र किया। अगले तीन वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे जिससे सिंचाई और अतिरिक्त बिजली उत्पादन का विकल्प मिलेगा। कृषि आधारित उद्योगों और फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर मिलेगा।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गरीब युवा किसान और महिला कल्याण के लिए मिशन मोड में कार्य जारी है। उज्जैन मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र में शामिल होने से नागदा खाचरौद और रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। किसान प्रतिनिधिमंडल में मौजूद समाजसेवी और स्थानीय किसानों ने इस पहल का स्वागत किया।

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।

  • इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी

    इंदौर में बीआरटीएस हटाने में अधिकारी दिखा रहे हैं बहाने, हाई कोर्ट ने दी सख्त चेतावनी


    इंदौर। इंदौर में बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम बीआरटीएस को हटाने के मामले में अधिकारियों की बहानेबाजी पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यह कहते हुए सख्त चेतावनी दी कि आदेशों को हल्के में मत लीजिए, हमें सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर मत करिए। इस मामले में अब हाई कोर्ट सतत निगरानी करेगा और अधिकारियों के कामकाजी तरीकों पर पैनी नजर रखेगा।

    क्या है मामला

    सोमवार को कोर्ट की सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि बीआरटीएस हटाने के बाद डिवाइडर की जगह एलिवेटेड ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए पीडब्ल्यूडी लोक निर्माण विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जिस ब्रिज के नाम पर डिवाइडर का काम रोका जा रहा है उसका कार्य केवल कागजों पर चल रहा है और सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं और यह मामला लगातार लटका हुआ है। कोर्ट ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारियों का रवैया बिल्कुल असंतोषजनक है और वह कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने इस पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी दी, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

    कोर्ट की प्रतिक्रिया

    कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि वह अब मामले की निगरानी करेगा और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगा। अदालत ने अधिकारियों से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने को कहा और कहा कि यदि इस प्रक्रिया में और देरी होती है तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। कोर्ट का यह आदेश अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे न हटें और काम को जल्द पूरा करें। यह मामला बीआरटीएस को हटाने और उसके स्थान पर डिवाइडर और अन्य संरचनाओं के निर्माण से जुड़ा है जो शहर के यातायात सुधार के लिए अहम है। हालांकि प्रशासन द्वारा किए गए विलंब से नगरवासियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।