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  • एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    एमपी कैबिनेट का बड़ा फैसला, विकास कार्यों के लिए 10,630 करोड़ मंजूर; सड़क, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा पर जोर

    मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 25 अगस्त को हुई मध्यप्रदेश कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, साइबर सुरक्षा और भूमि संबंधी नीतियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए कुल 10 हजार 630 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।

    कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को नाबार्ड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट असिस्टेंस के माध्यम से 12 प्रमुख मार्गों के निर्माण के लिए 4,600 करोड़ रुपये का ऋण लेने की अनुमति दी। इस ऋण के लिए राज्य सरकार की ओर से गारंटी प्रदान की जाएगी। प्रस्तावित मार्गों में भोपाल-विदिशा, खलघाट-मनावर-मांगोद, मंदसौर-सीतामऊ, सीतामऊ-बसई-सुवासरा, पूर्वी भोपाल बायपास, नीमच-मनासा-रामपुरा-झालावाड़, इंदौर-देपालपुर, चापड़ा-नेवरी-देवास, दिनारा-दतिया-सेवड़ा, आगर-सारंगपुर, सोयत-माचलपुर-जीरापुर, राहतगढ़-खुरई-खिमलासा और अन्य मार्ग शामिल हैं।

    राज्य की 22 प्रमुख सड़कों का स्वामित्व नाममात्र मूल्य पर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। इसके बदले निगम राज्य सरकार के पक्ष में अपनी अंश पूंजी जारी करेगा। ऋण और ब्याज का भुगतान टोल संग्रह तथा अन्य प्राप्तियों से किए जाने का प्रावधान है। परियोजनाओं में राशि का उपयोग आवश्यकता के अनुसार जस्ट इन टाइम सिद्धांत पर किया जाएगा।

    कैबिनेट ने सिवनी-बालाघाट मार्ग के लिए भी बड़ा फैसला लिया। 91.64 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को चार लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ विकसित करने तथा अन्य जरूरी कार्यों के लिए कुल 3,960 करोड़ 9 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। इसमें निर्माण लागत, संचालन अवधि में भुगतान और भू-अर्जन सहित अन्य पूर्व निर्माण कार्य शामिल हैं। यह मार्ग सिवनी और बालाघाट को जोड़ने के साथ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों, खनिज क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों से संपर्क बेहतर करेगा। इससे लगभग 8 से 10 लाख आबादी को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की बात कही गई है।

    सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की 19 योजनाओं को वित्तीय वर्ष 2026 से 2031 तक जारी रखने के लिए 1,740 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इन योजनाओं में पेंशन, परिवार सहायता, कन्या विवाह-निकाह सहायता, दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक मदद, प्रशिक्षण, कृत्रिम अंग वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और नशा पीड़ितों से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय उज्जैन के प्रभावी संचालन के लिए कुल 244 पदों और व्यक्तियों की स्वीकृति दी गई। इनमें 154 नियमित, एक संविदा और 89 आउटसोर्स पद शामिल हैं। इससे स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा से संबंधित प्रशासनिक और अकादमिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने का उद्देश्य है।

    कैबिनेट ने राज्य कम्प्यूटर सेक्युरिटी इंसीडेंट-रेसपॉन्स ऑपरेशन सेंटर के संचालन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 80 करोड़ रुपये मंजूर किए। इसमें नए पद, तकनीकी संसाधन, साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक और इंसीडेंट रिस्पॉन्स से जुड़े कार्य शामिल हैं। इसके अलावा प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा मानव संसाधन तैयार करने के लिए इंजीनियरिंग स्नातकों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी मंजूर की गई।

    नई दिल्ली स्थित मध्यप्रदेश भवन और संबंधित कार्यालयों के संचालन तथा प्रस्तावित मध्यांचल भवन के विस्तार के लिए भी राशि स्वीकृत की गई। आपसी सहमति से भूमि क्रय नीति में संशोधन को मंजूरी देते हुए ग्रामीण कृषि भूमि के लिए पुनर्वास अनुदान संबंधी प्रावधान में बदलाव किया गया। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को भारतीय न्याय संहिता की परिवर्तित धाराओं के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत करने संबंधी अधिसूचना में संशोधन को भी मंजूरी मिली।

    इसके अलावा महिला टी-20 वर्ल्डकप क्रिकेट 2025 ब्लाइंड में स्वर्ण पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश की तीन खिलाड़ियों को कुल 75 लाख रुपये और उनके तीन प्रशिक्षकों को कुल 3 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। खिलाड़ियों सुनिता सराठे, दुर्गा येबले और सुषमा पटेल को 25-25 लाख रुपये दिए जाएंगे, जबकि तीन प्रशिक्षकों को एक-एक लाख रुपये की राशि मिलेगी।

  • उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की हालत बारिश के कारण खराब हुई है, उन्हें पहले आवागमन के योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार उनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अभी बारिश जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने बारिश के कारण नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए। आगामी पर्व और त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन को देखते हुए उन्होंने प्रमुख मार्गों पर यातायात में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण के कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां पहले उसे मोटरेबल बनाया जाए और बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद आवश्यकता के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग और रेलवे सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर खराब मार्गों को चिन्हित किया जाएगा और गड्ढामुक्ति के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभागीय प्रस्तुतिकरण के अनुसार गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के अधीन आने वाले मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के तहत करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। मौजूदा लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाना है। अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा होने की जानकारी दी गई।

    बैठक में नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा हुई। नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर में नवीनीकरण और करीब 700 किलोमीटर में विशेष मरम्मत की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से कहा कि जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी काम शुरू कराया जाए और सड़क को जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने काम की गति के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

  • लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह

    लिरुंग ग्लेशियर टूटने से त्रिशूली में आई प्रलयंकारी बाढ़, 35 मोटरेबल और 45 सस्पेंशन ब्रिज तबाह


    नई दिल्ली। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचा दी। जिन क्षेत्रों में कभी पर्यटन और आबादी की रौनक दिखाई देती थी, वहां अब बाढ़ के बाद मलबा और तबाही का मंजर नजर आ रहा है। कई घर और बस्तियां पूरी तरह बह गईं, जबकि बड़ी संख्या में मकान मलबे में तब्दील हो गए।

    तिब्बत से निकलकर नेपाल आने वाली त्रिशूली नदी में अचानक आए तेज बहाव ने इस तबाही को और भयावह बना दिया। यह नदी तेज धारा और व्हाइट वाटर राफ्टिंग के लिए जानी जाती है, लेकिन बुधवार को इसका रूप बेहद विनाशकारी हो गया। नदी में पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा आया, जिसकी चपेट में आने से कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

    बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 35 मोटरेबल ब्रिज, 45 सस्पेंशन ब्रिज और करीब 40 किलोमीटर सड़क बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेज बहाव के सामने मजबूत कंक्रीट के पुल भी टिक नहीं सके। कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।

    1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में बाढ़ के बाद हुई तबाही में कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 1,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उनकी तलाश लगातार की जा रही है।

    इस आपदा के बीच कई लोगों की जान भी बचाई गई है। हालांकि, बाढ़ और मलबे की तेज लहर ने जिन इलाकों को अपनी चपेट में लिया, वहां रहने वाले लोगों के लिए बच निकलना बेहद मुश्किल था।

    भूकंप और GLOF के बाद सामने आई नई वजह

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ की वजह को लेकर शुरुआत में कई तरह की आशंकाएं सामने आई थीं। पहले इसे भूकंप से जोड़कर देखा गया और बाद में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना भी जताई गई।

    हालांकि, बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से एक अलग तस्वीर सामने आई। जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लिरुंग ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटकर नीचे आ गिरा था। इसके बाद बड़ी मात्रा में मलबा और पानी नीचे की ओर तेजी से बढ़ा और त्रिशूली नदी में विनाशकारी बाढ़ की स्थिति बन गई।

    यानी जिस घटना ने शुरुआत में सिर्फ एक प्राकृतिक हलचल का रूप लिया था, उसने कुछ ही समय में नदी के बहाव को प्रलयंकारी बना दिया। अब नेपाल में राहत और पुनर्निर्माण के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों को फिर से जोड़ना है, जहां सड़कें, पुल और बस्तियां बाढ़ की चपेट में आकर तबाह हो गई हैं।

  • मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप

    मॉनसून की जोरदार बारिश से पानी-पानी हुई मुम्बई….. सड़कें बनी तालाब, ट्रैफिक हुआ ठप


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में मॉनसून (Monsoon) की जोरदार बारिश (Heavy Rain) ने शहर के कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया है. सड़कें तालाब बन गई हैं, ट्रैफिक ठप हो गया है. लोगों को घरों से निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अंधेरी सबवे (अंडरपास) में इतना पानी भर गया है कि उसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।

    रातभर की बारिश से अंधेरी, बांद्रा, खार, मालाड, गोरेगांव, जुहू, वर्सोवा जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखा गया है. वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर भी पानी भरने से गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई. बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के मुताबिक, अंधेरी सबवे में पानी भर गया है, जिसके बाद उसे बंद करना पड़ा।

    बता दें कि अंधेरी सबवे मुंबई का एक ऐसा रास्ता है जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ता है. हर रोज हजारों गाड़ियां और लोग यहां से गुजरते हैं. मॉनसून की बारिश में अंधेरी सबवे में जलजमाव होना पुरानी समस्या है।

    शहर के निचले इलाकों में कई जगहों पर भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आ रही हैं. जलजमाव को देखते हुए एहतियातन अंधेरी सबवे को देर रात 1:45 बजे से यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है. किसी भी अप्रिय घटना या हादसे को रोकने के लिए सबवे के बाहर पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

    एक तरफ जोरदार बारिश से मुंबईवासियों को उमस और गर्मी से तो बड़ी राहत मिली है, तो वहीं सुबह-सुबह दफ्तर और काम पर जाने वालों को परेशानी का सामना भी करना पड़ सकता है.

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई और आसपास के इलाकों के लिए आज भी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है. बता दें कि मॉनसून इस बार 13 दिन देरी से मुंबई पहुंचा था।

  • PoK में सस्ते आटा-चावल के लिए सड़क पर उतरे लोग…. Pak सेना ने की फायरिंग, 16 की मौत

    PoK में सस्ते आटा-चावल के लिए सड़क पर उतरे लोग…. Pak सेना ने की फायरिंग, 16 की मौत


    रावलकोट ।
    पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) (Pakistan-occupied Kashmir (PoK) में सस्ता आटा-चावल, किफायती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आम लोगों को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) का कहर झेलना पड़ा। रावलकोट के ईदगाह मैदान में गुरुवार को उस समय भयानक मंजर नजर आया जब सैनिकों ने बिना चेतावनी गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें कम से कम 16 निहत्थे प्रदर्शनकारी मारे गए और 37 अन्य घायल हो गए।

    रावलकोट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे करीब 60 से 70 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें पुरुष, महिलाएं और युवा सभी शामिल हैं। ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलियों की बरसात से अचानक हर तरफ भगदड़ मच गई। थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में मंजर एकदम दिल दहला देने वाला था। खून से सनी सड़कों और खेतों में अपनों को ढूंढ़ते दुखी परिवार हक की आवाज उठाने की मानवीय कीमत चुकाने की निशानी बन गए हैं। पीओके में शुक्रवार से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की दमनकारी कार्रवाई में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना यहां जितनी दमनकारी कार्रवाई कर रही है, सड़कों पर उतरे लोगों का हौसला उससे कहीं ज्यादा बुलंद है। इस खूनी कहर के बावजूद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी अब भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


    आर-पार के मूड में जनता

    गोलीबारी के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए आंदोलन के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि संघर्ष अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गया है और संकल्प लिया कि जान-माल के नुकसान के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा। सड़कों पर मौजूद लोग कोई हथियार नहीं लिए हैं। वे बस सस्ते भोजन, सस्ती बिजली और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं। फिर भी, उन्हें जवाब में गोलियां मिली हैं।

  • MP: ग्वालियर में दोपहर बाद जमकर गिरे ओले…सड़कों पर बिछी सफेद चादर… कारों के शीशे टूटे

    MP: ग्वालियर में दोपहर बाद जमकर गिरे ओले…सड़कों पर बिछी सफेद चादर… कारों के शीशे टूटे


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में शनिवार का सूरज तीखे तेवर लेकर निकला था, लेकिन दोपहर होते-होते कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया. अचानक आए घने बादलों के बाद ऐसी भयानक ओलावृष्टि (Terrible Hailstorm) हुई कि शहर के पॉश इलाके सिटी सेंटर की सड़कें सफेद चादर (Roads Covered White sheets) से ढक गईं. यह नजारा देखने में जितना सुंदर था, शहर के लिए उतना ही नुकसानदेह साबित हुआ.

    ओलों का आकार इतना बड़ा था कि ग्वालियर की शान महाराजा बाड़ा स्थित म्यूजियम के ऊपर लगी ऐतिहासिक घड़ी ओलों की चोट से टूट गई है. शहर के एक निजी अस्पताल की बाउंड्री वॉल गिरने से उसके नीचे खड़ी कई कारें दब गईं. यही नहीं, ओलों के सीधे प्रहार से सड़कों के किनारे और पार्किंग में खड़े बाइक और कारों के शीशे तक चकनाचूर हो गए।

    हालात कुछ ऐसे हो गए कि शहर के मुरार, आनंद नगर, बहोड़ापुर, विनय नगर समेत सिटी सेंटर इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि वहां सफेद चादर पसर गई. कश्मीर जैसा मंजर दिखाई देने लगा। एक तरफ शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी तरफ अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं. खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी, जिसे इस ओलावृष्टि ने जमीन पर बिछा दिया है. फसल खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।


    सटीक निकली IMD की चेतावनी

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को ही पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी थी. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठी इन हवाओं ने जेट स्ट्रीम के सहारे भारत पहुंचकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर दिखाना शुरू कर दिया है। विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 7 अप्रैल तक गरज-चमक और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रह सकता है. इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।