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  • रोग पंचक 2026: 13 मई से शुरू होगा ‘अशुभ काल’, 5 दिन रहें विशेष सावधान

    रोग पंचक 2026: 13 मई से शुरू होगा ‘अशुभ काल’, 5 दिन रहें विशेष सावधान


    नई दिल्ली। रोग पंचक 2026 को लेकर 13 मई से शुरू होने वाली यह अवधि ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में पांच विशेष नक्षत्रों से होकर गुजरता है तब पंचक की स्थिति बनती है और इन्हीं में से एक रोग पंचक माना जाता है जिसे परंपरागत रूप से स्वास्थ्य और मानसिक तनाव से जुड़ा संवेदनशील समय कहा जाता है वर्ष 2026 में यह रोग पंचक 13 मई से शुरू होकर लगभग पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा इस दौरान ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार व्यक्ति को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि यह समय शारीरिक कमजोरी मानसिक अशांति और दुर्घटनाओं की संभावना से जोड़ा जाता है हालांकि यह पूरी तरह परंपरा और ज्योतिष पर आधारित है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है

    इस अवधि में कई कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है जैसे कि नए निर्माण कार्य की शुरुआत लकड़ी से जुड़े बड़े काम जैसे फर्नीचर या छत निर्माण विवाह या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य और लंबी अनावश्यक यात्राएं इसके साथ ही जोखिम वाले कार्यों में भी अतिरिक्त सावधानी रखने की बात कही जाती है परंपरागत मान्यताओं में इस समय दक्षिण दिशा की यात्रा को विशेष रूप से अशुभ माना गया है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे दुर्घटना या बाधाओं की संभावना बढ़ सकती है

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि रोग पंचक को डर के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे एक सावधानीपूर्ण परंपरा के रूप में समझना चाहिए सामान्य जीवन में संयम सतर्कता और सोच समझकर निर्णय लेना हमेशा लाभकारी होता है चाहे कोई भी समय हो इस अवधि में स्वास्थ्य का ध्यान रखना सकारात्मक सोच बनाए रखना अनावश्यक यात्राओं से बचना और ध्यान पूजा या मानसिक शांति से जुड़े कार्य करना बेहतर माना जाता है

    कहा जाए तो 13 मई 2026 से शुरू होने वाला रोग पंचक एक ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित संवेदनशील काल है जिसे लेकर लोगों में सावधानी बरतने की परंपरा रही है इसे अंधविश्वास की तरह देखने के बजाय एक सतर्कता के संकेत के रूप में अपनाया जाए तो यह अवधि सामान्य रूप से सुरक्षित और संतुलित तरीके से बिताई जा सकती है

  • रोग पंचक 2026: मौसम बदलते ही बढ़ी चिंता! 14 मई तक सेहत पर मंडरा सकता है खतरा, जानें क्या करें और क्या नहीं

    रोग पंचक 2026: मौसम बदलते ही बढ़ी चिंता! 14 मई तक सेहत पर मंडरा सकता है खतरा, जानें क्या करें और क्या नहीं


    नई दिल्ली। Rog Panchak 2026: मई की तेज गर्मी के बीच मौसम लगातार करवट बदल रहा है। कहीं बारिश तो कहीं उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। इसी बीच 10 मई 2026 से रोग पंचक की शुरुआत ने धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं को मानने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। ज्योतिष शास्त्र में रोग पंचक को स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील समय माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान संक्रमण, मौसमी बीमारियां और शारीरिक कमजोरी तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में बदलते मौसम और रोग पंचक का यह संयोग लोगों को विशेष सावधानी बरतने का संकेत दे रहा है।

    ज्योतिष गणना के अनुसार रोग पंचक 10 मई 2026 को दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 मई 2026 की रात 10 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पंचक तब बनता है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से गुजरता है। वहीं रविवार के दिन शुरू होने वाले पंचक को रोग पंचक कहा जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक काल को ऊर्जा परिवर्तन का समय माना गया है। इस दौरान शरीर और मन दोनों को संतुलित रखना बेहद जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि इस समय लापरवाही करने पर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर जब मौसम तेजी से बदल रहा हो, तब सर्दी, वायरल, बुखार, एलर्जी और संक्रमण जैसी समस्याएं लोगों को अधिक परेशान कर सकती हैं।

    मौसम विभाग की ओर से कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी भी जारी की गई है। दिन में तेज गर्मी और शाम को अचानक मौसम बदलने से लोगों की इम्यूनिटी पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि रोग पंचक के दौरान स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

    ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार रोग पंचक के समय बाहर का बासी और तला-भुना भोजन खाने से बचना चाहिए। नियमित रूप से हल्दी, तुलसी और गुनगुने पानी का सेवन लाभकारी माना गया है। साथ ही पूजा-पाठ, ध्यान और महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, दक्षिण दिशा की यात्रा और घर निर्माण जैसे शुभ कार्यों से भी बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी माना जाता है।