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  • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप: फिलिस्तीन दौरे पर गए भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना को इजरायली क्षेत्र में 90 मिनट तक रोका

    नई दिल्ली । फिलिस्तीन और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक बेहद गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने खुलासा किया है कि फिलिस्तीन की आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्हें और उनके साथ मौजूद अन्य अमेरिकी नागरिकों को इजरायली बस्ती के हथियारबंद तत्वों द्वारा बंदूक की नोक पर करीब 90 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के दिग्गज नेता खन्ना बुधवार को दक्षिणी वेस्ट बैंक के ऐतिहासिक गांव खिरबेट जनुता के खंडहरों का निरीक्षण करने पहुंचे थे, तभी इस अप्रत्याशित संकटपूर्ण स्थिति का जन्म हुआ।

    सांसद रो खन्ना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जब वे खंडहरों का दौरा कर रहे थे, तभी अमेरिकी निर्मित एम4एस राइफलों से लैस इजरायली बस्ती के कुछ लोगों ने उन्हें और उनके पूरे प्रतिनिधिमंडल को जबरन हिरासत में ले लिया। खन्ना का आरोप है कि घटना की सूचना मिलने के बाद जब इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) के जवान मौके पर पहुंचे, तो उन्होंने हथियारबंद हमलावरों को रोकने के बजाय उल्टा उनका ही साथ दिया और अमेरिकी नागरिकों को आगे बढ़ने से रोके रखा। अमेरिकी डेलिगेशन के साथ मौजूद सुरक्षा अधिकारियों और इजरायली बलों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक अमेरिकी फोटोग्राफर भी सांसद खन्ना के साथ मौजूद थे, जिन्होंने इस तनावपूर्ण स्थिति को करीब से देखा। अमेरिकी मीडिया से बातचीत करते हुए रो खन्ना ने अपना दर्द बयां किया और कहा कि उस असाधारण परिस्थिति में उन्होंने खुद को पूरी तरह से असहाय महसूस किया। उन्होंने कहा कि उनके पास जीवन के तमाम विशेषाधिकार और उच्च सुरक्षा कवच होने के बावजूद उन्हें इस खौफनाक दौर से गुजरना पड़ा, जिससे वहां के सामान्य नागरिकों की दैनिक सुरक्षा व्यवस्था और जमीनी हकीकत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

    घटना के तुरंत बाद अमेरिकी राजनयिकों को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद वॉशिंगटन से लेकर यरूशलेम तक कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। अमेरिकी दूतावास और इजरायली पुलिस के उच्च अधिकारियों के बीच हुए कड़े कूटनीतिक हस्तक्षेप और लंबी बातचीत के बाद आखिरकार लगभग डेढ़ घंटे के बाद रो खन्ना और उनके सहयोगियों को सुरक्षित वहां से जाने की अनुमति दी गई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे अमेरिकी जनप्रतिनिधि के साथ एक अक्षम्य दुर्व्यवहार माना जा रहा है।

    इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर इजरायली बस्तियों में सक्रिय हथियारबंद गुटों की भूमिका और वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। रो खन्ना ने अपने बयान में जोर देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी संसद के किसी शक्तिशाली सदस्य को इस प्रकार 90 मिनट तक बंधक बनाकर बेबस किया जा सकता है, तो कब्जे के साये में रह रहे आम फिलिस्तीनी नागरिकों को हर दिन न जाने किस स्तर के उत्पीड़न और असुरक्षा का सामना करना पड़ता होगा। इस घटना ने पश्चिम एशिया के इस संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा और मानवाधिकारों की स्थिति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

  • ट्रंप की नीतियों पर रो खन्ना का तीखा हमला, बोले- भारत-अमेरिका साझेदारी की असली ताकत साझा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों में है

    ट्रंप की नीतियों पर रो खन्ना का तीखा हमला, बोले- भारत-अमेरिका साझेदारी की असली ताकत साझा लोकतंत्र, स्वतंत्रता और मानवीय मूल्यों में है

    नई दिल्ली। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को केवल रक्षा, व्यापार और निवेश तक सीमित रखने के बजाय साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय आदर्शों पर आधारित बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी तभी अधिक मजबूत और प्रभावी बन सकती है, जब उसका आधार लोकतंत्र, स्वतंत्रता, बहुलवाद और आत्मनिर्णय जैसे साझा सिद्धांत हों।

    अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने अमेरिकी विदेश नीति, वैश्विक सहयोग और इमिग्रेशन से जुड़े कई मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति और आव्रजन संबंधी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि एकतरफा फैसलों और व्यापारिक नीतियों ने अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता को प्रभावित किया है। उनके अनुसार, अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने सहयोगी देशों के साथ विश्वास और साझेदारी को दोबारा मजबूत करने की आवश्यकता है।

    रो खन्ना ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों की वास्तविक शक्ति केवल रणनीतिक या आर्थिक सहयोग में नहीं, बल्कि उन साझा मूल्यों में है जो दोनों लोकतंत्रों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मानव स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और वैश्विक शांति जैसे मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, साझेदारी का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका जैसे लोकतांत्रिक देशों को ऐसी विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देना चाहिए, जहां मानवाधिकारों, आत्मनिर्णय और सभ्यतागत मूल्यों का सम्मान सुनिश्चित हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी साझेदारी का उद्देश्य अंध समर्थन नहीं होना चाहिए, बल्कि उन देशों के साथ सहयोग होना चाहिए जो समान मूल्यों और सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हों।

    अपने संबोधन में रो खन्ना ने अमेरिका की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और उपनिवेशवाद से मुक्ति जैसे सिद्धांतों का समर्थन किया है। उनके अनुसार, इन्हीं आदर्शों ने दुनिया भर के लाखों प्रवासियों को अमेरिका में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया और यही मूल्य भविष्य में भी अमेरिका की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाए रख सकते हैं।

    इमिग्रेशन नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान नीतियों के कारण दुनिया की प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता प्रभावित हो रही है। उनका मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में अमेरिका को योग्य और प्रतिभाशाली पेशेवरों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाचार और अनुसंधान में वैश्विक प्रतिभा की भागीदारी किसी भी देश की तकनीकी प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

    रो खन्ना ने अमेरिकी राजनीति पर भी अपने विचार व्यक्त किए और विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में डेमोक्रेटिक पार्टी फिर से मजबूत स्थिति में लौटेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में समय-समय पर चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन देश ने हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक मूल्यों के बल पर स्वयं को मजबूत किया है। उनके अनुसार, यही क्षमता अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है।

    भारतीय मूल के सांसद ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की प्रेरणा भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय विरासत और अमेरिकी लोकतांत्रिक परंपराओं ने उनके सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक सोच को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और अमेरिका भविष्य में रक्षा, व्यापार, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी अपनी साझेदारी का केंद्रीय आधार बनाए रखेंगे।