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  • रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान

    रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान


    नई दिल्ली।
    रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता है कि फाटक बंद होने पर धैर्य रखें और ट्रेन गुजरने तक इंतजार करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    रेलवे फाटक तभी बंद किया जाता है जब किसी ट्रेन के आने का निर्धारित समय होता है। इस दौरान फाटक के नीचे से बाइक, कार या अन्य वाहन निकालने की कोशिश न केवल अपनी जान बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कुछ सेकंड की लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि रेलवे ने इस तरह की हरकत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है।

    रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बंद फाटक के नीचे से ट्रैक पार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की वजह से फाटक पर तैनात कर्मचारी के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

    ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड या जेल ही नहीं, बल्कि वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग गंभीर मामलों में लाइसेंस को निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। सड़क सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब कई लेवल क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर नहीं पकड़ा जाता, तब भी वाहन के नंबर के आधार पर बाद में चालान जारी किया जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में रेलवे सुरक्षा बल वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मिनट बचाने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दबाजी केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी समान रूप से खतरनाक है। ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान लगाना अक्सर संभव नहीं होता, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

    रेलवे प्रशासन लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि बंद फाटक को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें। फाटक खुलने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार विकल्प है। थोड़ी सी सावधानी न केवल जीवन की रक्षा करती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानियों से भी बचाती है। रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका भी।

  • ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं

    ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं


    नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने जिस नई रणनीति को अपनाया है उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। रेलवे पटरियों के किनारे ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद न केवल ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है बल्कि पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के इस संयोजन ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।

    आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में मई तक चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज हुए थे और 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2026 की इसी अवधि में घटनाओं की संख्या घटकर 144 रह गई जबकि 138 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार गिरफ्तारियों में लगभग 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो आरपीएफ की नई रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में संवेदनशील रेलवे मार्गों पर दो ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। आदर्श नगर नरेला पानीपत रेलखंड को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जैसे ही कोई ट्रेन इस मार्ग से गुजरती है ड्रोन हवा में सक्रिय हो जाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकट मौजूद सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है जिससे आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए जाते हैं।

    हालांकि आरपीएफ का मानना है कि पत्थरबाजी की हर घटना के पीछे संगठित अपराध नहीं होता। कई मामलों में रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चे भी शरारत में पत्थर फेंक देते हैं। वर्ष 2025 में 37 बच्चों की संलिप्तता वाली 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था जबकि इस वर्ष 11 बच्चों से जुड़ी छह घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई के बजाय समझाइश और परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

    अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन के आसपास रहने वाले कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय पटरियों के पास खेलते हुए बिताते हैं। खेल खेल में वे गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आरपीएफ गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चला रही है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें रेलवे ट्रैक के पास बच्चों को न खेलने देने की सलाह दी जा रही है।

    आरपीएफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे पटरियों के किनारे बनी अनधिकृत बस्तियां असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। कई बार शराब के नशे में लोग ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा अवैध रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग ट्रेन गुजरने के दौरान इंतजार से नाराज होकर भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    ड्रोन निगरानी के साथ साथ रेलवे पटरियों के किनारे सोलर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरे भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 76 कैमरे लगाए जा चुके हैं और अब 50 नए कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक मजबूत निगरानी और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आरपीएफ को उम्मीद है कि आने वाले समय में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में और अधिक कमी आएगी तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

  • भोपाल से लापता 6 साल का मासूम मथुरा में मिला सुरक्षित, अकेले ट्रेन में पहुंचा, 100 से ज्यादा जवानों की मेहनत लाई रंग

    भोपाल से लापता 6 साल का मासूम मथुरा में मिला सुरक्षित, अकेले ट्रेन में पहुंचा, 100 से ज्यादा जवानों की मेहनत लाई रंग

    मध्य प्रदेश।  की राजधानी भोपाल से लापता हुए छह वर्षीय मासूम अंश मैना के सुरक्षित मिलने से उसके परिवार के साथ-साथ पुलिस प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। चार दिनों तक चली व्यापक तलाश और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के बाद बच्चे को उत्तर प्रदेश के मथुरा से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया कि समय पर की गई सतर्कता और समन्वित कार्रवाई किसी भी चुनौतीपूर्ण मामले में सकारात्मक परिणाम दे सकती है।

    जानकारी के अनुसार अंश अपनी मां के साथ भोपाल के रॉयल मार्केट क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल आया था। उसकी मां का उपचार चल रहा था। मंगलवार सुबह अस्पताल परिसर से बाहर निकलने के बाद बच्चा वापस नहीं लौटा, जिसके बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई। काफी तलाश के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

    शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी। अस्पताल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। जांच में बच्चा एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के साथ दिखाई दिया। पुलिस ने उस व्यक्ति तक पहुंचकर पूछताछ की तो पता चला कि दोनों कुछ दूरी तक साथ रहे थे, लेकिन बाद में अलग हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने बच्चे की गतिविधियों का क्रमवार पता लगाने के लिए शहरभर के कैमरों और स्थानीय सूचनाओं का सहारा लिया।

    जांच में सामने आया कि अंश नवबहार सब्जी मंडी क्षेत्र से अलग होने के बाद अकेले ही आगे बढ़ता रहा। वह शहर के कई व्यस्त इलाकों से गुजरते हुए करीब चार किलोमीटर तक पैदल चलता रहा। इसके बाद वह भोपाल मुख्य रेलवे स्टेशन पहुंच गया। स्टेशन के निगरानी कैमरों की फुटेज में बच्चा अकेले प्लेटफॉर्म पर घूमते और बाद में पातालकोट एक्सप्रेस में सवार होते हुए दिखाई दिया।

    जैसे ही पुलिस को यह महत्वपूर्ण सुराग मिला, रेलवे अधिकारियों और रेलवे सुरक्षा बल को तत्काल अलर्ट जारी किया गया। ट्रेन के संभावित मार्ग और स्टेशनों की जानकारी साझा की गई ताकि बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढा जा सके। विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करते हुए रेलवे नेटवर्क के माध्यम से लगातार निगरानी रखी गई।

    इसी दौरान मथुरा रेलवे स्टेशन पर तैनात रेलवे सुरक्षा बल के जवानों की नजर ट्रेन में अकेले बैठे एक बच्चे पर पड़ी। पूछताछ और प्रारंभिक सत्यापन के बाद यह पुष्टि हुई कि वह भोपाल से लापता अंश ही है। जवानों ने उसे तत्काल सुरक्षा में लिया और संबंधित अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं शुरू की गईं।

    भोपाल पुलिस की एक टीम मथुरा पहुंची और स्थानीय बाल कल्याण अधिकारियों के सहयोग से बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर वापस भोपाल लाई। अधिकारियों के अनुसार बच्चे के साथ किसी प्रकार की आपराधिक घटना या अपहरण जैसी स्थिति के संकेत नहीं मिले हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वह भटकते हुए रेलवे स्टेशन पहुंच गया था और अनजाने में ट्रेन में सवार हो गया।

    इस पूरे अभियान में शहर के कई थानों की पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल और अन्य संबंधित एजेंसियों के 100 से अधिक अधिकारियों एवं जवानों ने भाग लिया। लगातार चार दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद बच्चे का सुरक्षित मिलना न केवल परिवार के लिए राहत भरी खबर है, बल्कि यह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता तथा समन्वित कार्यप्रणाली का भी महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

  • साइबर कैफे से चल रहा था टिकटों का खेल, कालाबाजारी का भंडाफोड़

    साइबर कैफे से चल रहा था टिकटों का खेल, कालाबाजारी का भंडाफोड़


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर कैफे की आड़ में चल रहे अवैध रेल ई-टिकट कारोबार का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में एक साइबर कैफे संचालक को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से कुल 74 अवैध ई-टिकट बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए टिकटों की कुल कीमत करीब ₹1,24,549 आंकी गई है।

    गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुमित झा (35) के रूप में हुई है, जो न्यू शोभापुर कॉलोनी का निवासी बताया गया है। आरपीएफ ने उसके पास से कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनका उपयोग अवैध टिकट बुकिंग में किया जा रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, आरपीएफ पोस्ट जबलपुर को सूचना मिली थी कि रांझी क्षेत्र में स्थित एक साइबर कैफे और ऑनलाइन शॉप के जरिए अवैध रूप से ई-टिकट बेचे जा रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद एसआई योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की और आरोपी को मौके से पकड़ लिया।

    जांच में सामने आया कि आरोपी “सन साइबर कैफे” के नाम से दुकान संचालित कर रहा था और एमपीऑनलाइन के साथ-साथ छह अलग-अलग आईआरसीटीसी यूजर आईडी का उपयोग कर व्यावसायिक स्तर पर टिकट बुकिंग कर रहा था। वह यात्रियों से प्रति टिकट ₹50 से ₹100 तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा था, जिससे अवैध कमाई की जा रही थी।

    आरपीएफ की जांच में 74 ई-टिकट बरामद हुए, जिनमें 6 लाइव टिकट शामिल हैं जिनकी कीमत ₹11,152 है, जबकि 68 पुराने टिकटों की कीमत ₹1,13,397 पाई गई। इस तरह कुल जब्ती की कीमत ₹1,24,549 आंकी गई।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल वॉलेट और बैंक खातों के माध्यम से भुगतान लेता था। अब आरपीएफ संबंधित बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    पूरी कार्रवाई के बाद आरोपी को आरपीएफ पोस्ट जबलपुर लाया गया और उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बाद में वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर उसे बंध पत्र पर रिहा कर दिया गया।

  • उज्जैन रेलवे ट्रैक पर बड़ी वारदात वंदे भारत ट्रेन पर पथराव से मचा हड़कंप

    उज्जैन रेलवे ट्रैक पर बड़ी वारदात वंदे भारत ट्रेन पर पथराव से मचा हड़कंप


    उज्जैन । उज्जैन में सोमवार शाम उस समय हड़कंप मच गया जब तेज रफ्तार वंदे भारत सुपरफास्ट ट्रेन पर अज्ञात बदमाशों ने पथराव कर दिया। यह घटना उज्जैन रेलवे स्टेशन से करीब 200 मीटर दूर गदा पुलिया और नीलगंगा रेलवे ट्रैक के बीच हुई, जिसमें ट्रेन के पांच से अधिक कोचों के शीशे क्षतिग्रस्त हो गए।

    जानकारी के अनुसार घटना शाम लगभग 7:30 बजे की है, जब वंदे भारत ट्रेन अपने निर्धारित रफ्तार से गुजर रही थी। इसी दौरान ट्रैक किनारे मौजूद कुछ युवकों ने अचानक ट्रेन पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पथराव इतना तेज था कि कोच C/6, C/7, C/8, C/9, E/1 और E/2 के विंडो ग्लास और पिलर ग्लास टूट गए। अचानक हुए हमले से ट्रेन में बैठे यात्रियों के बीच अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया।

    हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री को चोट नहीं आई। इसके बावजूद अचानक कांच टूटने की आवाजों से कई यात्री घबरा गए और कुछ देर के लिए कोचों में भय का माहौल बना रहा। यात्रियों ने तुरंत रेलवे हेल्पलाइन और अधिकारियों को घटना की सूचना दी। ट्रेन को रोकने की आवश्यकता नहीं पड़ी और यह अपने तय समय पर आगे रवाना हो गई।

    घटना के बाद रेलवे सुरक्षा बल RPF मौके पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। उप निरीक्षक जयवीर सिंह के नेतृत्व में टीम ने प्रभावित कोचों की जांच की और यात्रियों के बयान दर्ज किए। इसके साथ ही आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके।

    सामने आए CCTV फुटेज में कुछ संदिग्ध युवक ट्रेन के आने से पहले ट्रैक के आसपास घूमते दिखाई दे रहे हैं। जैसे ही ट्रेन पास आई, वे पथराव कर मौके से फरार हो गए। प्रारंभिक जांच में इसे अचानक किया गया हमला माना जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी संभावित एंगल से जांच कर रही है।

    इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के आसपास सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है, क्योंकि पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि दोषियों की जल्द पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और ट्रैक के आसपास निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जाएगा।

  • चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप

    चंदौली में ‘मौत की ट्रेन’ का खौफ: 24 घंटे में दूसरी गोलीकांड से रेलवे में मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के चंदौली में रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज 24 घंटे के भीतर दूसरी ट्रेन में हत्या की वारदात सामने आने से यात्रियों में दहशत फैल गई है। ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में युवक की हत्या के बाद अब कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस में एक यात्री को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। लगातार दो घटनाओं ने जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

    जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस डीडीयू जंक्शन से लखनऊ की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन जैसे ही सिकटिया इलाके के पास पहुंची, तभी अज्ञात हमलावर ने बाथरूम के पास बैठे एक युवक के सिर में गोली मार दी। गोली चलते ही कोच में अफरा-तफरी मच गई और यात्री डर के मारे सहम गए। घटना की सूचना मिलते ही जीआरपी और आरपीएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    इससे पहले ताड़ीघाट पैसेंजर ट्रेन में भी एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव को ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था। लगातार दूसरी वारदात के बाद रेलवे रूट पर सक्रिय आपराधिक गिरोहों और शराब तस्करी नेटवर्क की भूमिका को लेकर भी जांच तेज हो गई है। हालांकि पुलिस ने अभी आधिकारिक तौर पर किसी एंगल की पुष्टि नहीं की है।

    एसपी जीआरपी प्रयागराज प्रशांत कुमार वर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम को एक्टिव कर दिया गया था और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। संदिग्धों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और यात्रियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों मामलों का जल्द खुलासा किया जाएगा।

    लगातार हो रही इन घटनाओं ने रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर रात में लंबी दूरी की ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों में पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा जांच नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई 311 कछुए बरामद आरपीएफ वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई के बाद STF ने शुरू की जांच

    भोपाल /मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कछुए तस्करी का मामला पकड़ा है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान 311 कछुए बरामद किए गए और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

    भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ ने बैग चेकिंग के दौरान दो बैगों में कुल 311 कछुए पकड़े। आरोपी अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि ढाई हजार रुपए की लालच में वह कछुओं को देवास और इंदौर भेजने के लिए ले जा रहा था।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग को जानकारी दी गई। तुरंत स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा और आरोपी को हिरासत में लिया। आरपीएफ की पूछताछ में यह सामने आया कि रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ने ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए तस्करी कराई।

    फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। STF मामले की जांच में जुटी है और आरोपी से विस्तार से पूछताछ की जा रही है। आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।यह मामला वन्यजीव तस्करी और रेलवे सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है

  • बैतूल में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आया अज्ञात व्यक्ति, सिर ट्रेन में फंसने से दर्दनाक मौत

    बैतूल में राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में आया अज्ञात व्यक्ति, सिर ट्रेन में फंसने से दर्दनाक मौत

    बैतूल।मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार को एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। आमला रेलवे स्टेशन के अंतर्गत परसोडा रेलवे ट्रैक पर राजधानी एक्सप्रेस की चपेट में एक अज्ञात व्यक्ति आ गया। हादसे में मृतक का सिर इंजन में फंस गया और वह लगभग चार किलोमीटर तक ट्रेन के साथ आमला स्टेशन तक चला गया, जबकि उसका धड़ घटनास्थल पर ही ट्रैक पर पड़ा मिला।

    रेलवे सुरक्षा बल ने पहुंचकर किया निकासी का प्रयास
    हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल RPF मौके पर पहुंच गया। हालांकि, राजकीय रेल पुलिस और सिविल पुलिस करीब दो घंटे बाद ही घटना स्थल पर पहुँची, जिससे रेल व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए।रेलवे कर्मचारियों की मदद से इंजन में फंसे मृतक के सिर को बाहर निकाला गया। इस दर्दनाक घटना से आमला और आसपास के लोगों में शोक और चिंता व्याप्त है।

    घटना की जांच शुरू
    मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। रेलवे और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, यह हादसा ट्रेन के रफ्तार और व्यक्ति की अनदेखी का नतीजा माना जा रहा है।रेल यात्रियों और स्थानीय लोगों को इस ट्रैक के पास सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

  • तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर

    तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर


    नई दिल्ली ।लखनऊ /उत्तर प्रदेश में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। लखनऊ-कानपुर रेल रूट पर उन्नाव जिले के मगरवारा रेलवे स्टेशन के पास तेजस एक्सप्रेस को पलटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। डाउन ट्रैक पर एक सीमेंटेड स्लीपर रखे जाने से हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि समय रहते स्थिति को भांप लिया गया और बड़ा हादसा टल गया।यह घटना बुधवार रात करीब पौने नौ बजे की हैजब स्थानीय लोगों ने मगरवारा स्टेशन के पास डाउन लाइन की एक पटरी पर सीमेंटेड स्लीपर रखा हुआ देखा। लोगों ने तुरंत स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दीजिसके बाद रेलवे कंट्रोल रूम को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल RPF-राजकीय रेलवे पुलिस GRP- और अन्य रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

    इसी दौरान नई दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को एहतियातन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन करीब 27 मिनट तक वहां खड़ी रही। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कई अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया गयाजिससे कुछ समय के लिए इस रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ।रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक की जांच की और सीमेंटेड स्लीपर को हटवाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 9:19 बजे ट्रैक को पूरी तरह क्लियर कर दिया गयाजिसके बाद तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को रवाना किया गया।

    आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा ने बताया कि मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का कार्य चल रहा है। संभव है कि ट्रेनों की तेज धमक के कारण सीमेंटेड स्लीपर ट्रैक पर आ गया हो। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह किसी अराजक तत्व की शरारत हो। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।वहीं मगरवारा स्टेशन मास्टर शिव बहादुर ने बताया कि डाउन लाइन पर स्लीपर पड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य के दौरान अपनी जगह से खिसक सकता हैलेकिन साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूआई स्थायी मार्ग निरीक्षक- की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्लीपर हटाया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया।

    इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे अब आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।उधरप्रदेश के कई हिस्सों में घने कोहरे का असर भी रेल यातायात पर साफ दिखाई दिया। मुरादाबाद मंडल समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही और कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। दृश्यता कम होने के चलते लोको पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    बुधवार को 20505 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे की देरी से मुरादाबाद पहुंची। वहीं जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेसदुर्गियाना एक्सप्रेसअमरनाथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं। ट्रेनों के विलंब से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जंक्शनों पर वेटिंग हॉल यात्रियों से भरे नजर आए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। साथ ही ट्रैक की सुरक्षा को लेकर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैंताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।