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  • इंदौर में संघ का बड़ा आयोजन, ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ में राष्ट्र प्रथम और सामाजिक समरसता का संदेश, 2 नवंबर से अखिल भारतीय बैठक

    इंदौर में संघ का बड़ा आयोजन, ‘चरैवेति-एकत्रीकरण’ में राष्ट्र प्रथम और सामाजिक समरसता का संदेश, 2 नवंबर से अखिल भारतीय बैठक


    इंदौर । इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर बुधवार को चरैवेति-एकत्रीकरण का आयोजन किया जा रहा है। डेली कॉलेज परिसर में शाम 4:30 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में करीब एक लाख स्वयंसेवकों के शामिल होने का अनुमान है। संघ के मालवा प्रांत के इंदौर विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में संगठन के वरिष्ठ राष्ट्रीय पदाधिकारियों की मौजूदगी भी रहेगी। आयोजन के जरिए राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान देने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया जाएगा।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इंदौर में होने वाला चरैवेति-एकत्रीकरण इसी श्रृंखला का प्रमुख समापन कार्यक्रम है। इसमें इंदौर महानगर और महू ग्रामीण क्षेत्र के सक्रिय स्वयंसेवकों के साथ समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों की सहभागिता भी रहेगी। बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए आयोजन की तैयारियां पिछले एक महीने से की जा रही थीं। स्वयंसेवक कार्यक्रम की रूपरेखा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे रहे।

    चरैवेति शब्द का भाव लगातार आगे बढ़ते रहने और अपने उद्देश्य के प्रति सक्रिय रहने से जुड़ा है। इसी विचार को केंद्र में रखकर कार्यक्रम में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और समाज को संगठित बनाने का संदेश दिया जाएगा। सामाजिक समरसता को मजबूत करने और नागरिकों में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। संघ की ओर से यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कार्यों की गतिविधियां निरंतर जारी रहनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और व्यक्तिगत स्तर पर देशहित में योगदान देने के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में स्वयंसेवक शारीरिक गतिविधियों और व्यायाम का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ योग की प्रस्तुतियां भी होंगी। आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण चरैवेति-चरैवेति सामूहिक गीत रहेगा। इसके माध्यम से निरंतर आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने का भाव व्यक्त किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान इंदौर विभाग में शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों और विभिन्न आयोजनों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

    आयोजन में बौद्धिक उद्बोधन के जरिए संघ के विचारों और सामाजिक दायित्वों पर चर्चा होगी। साथ ही राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को लेकर विचार रखे जाएंगे। इस कार्यक्रम को शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यों की समीक्षा और आगे की गतिविधियों के लिए नई ऊर्जा जुटाने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की भागीदारी के कारण यह इंदौर में संघ के प्रमुख आयोजनों में शामिल है।

    चरैवेति-एकत्रीकरण के बाद इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक भी आयोजित की जाएगी। यह बैठक 2 नवंबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। इस दौरान संगठनात्मक कार्यों और आगामी गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।

    इसी बीच मालवा प्रांत के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की तैयारी भी चर्चा में है। प्रस्तावित योजना के तहत मालवा प्रांत को इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित करने पर विचार किया जा रहा है। नई व्यवस्था 2027 से लागू किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य संगठनात्मक कामकाज को छोटे और अधिक प्रभावी क्षेत्रों में बांटना है ताकि स्थानीय स्तर पर संपर्क गतिविधियों और योजनाओं के क्रियान्वयन को गति मिल सके। हालांकि प्रस्तावित बदलाव की अंतिम रूपरेखा और लागू होने की प्रक्रिया को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण रहेगी।

    कुल मिलाकर इंदौर का यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष की गतिविधियों के समापन के साथ भविष्य के सामाजिक और संगठनात्मक कार्यों के लिए दिशा तय करने का अवसर माना जा रहा है।

  • भोपाल में आज दिखेगा संघ का विराट स्वरूप 30 हजार स्वयंसेवक होंगे एकजुट दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता

    भोपाल में आज दिखेगा संघ का विराट स्वरूप 30 हजार स्वयंसेवक होंगे एकजुट दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता


    नई दिल्ली। भोपाल में रविवार 20 सितंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के तहत बड़ा स्वयंसेवक एकत्रीकरण आयोजित किया जा रहा है। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगे। शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम संघ की नियमित शाखाओं के व्यापक स्वरूप को समाज के सामने प्रस्तुत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    संघ की ओर से आयोजित इस एकत्रीकरण में बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सहभागिता रहेगी। कार्यक्रम के माध्यम से संघ की शाखाओं में होने वाली नियमित गतिविधियों के साथ सामाजिक कार्यों और आगामी संकल्पों का संदेश भी दिया जाएगा। आयोजन को लेकर स्वयंसेवकों के बीच तैयारियां की गई हैं और भोपाल विभाग के विभिन्न जिलों से स्वयंसेवकों के पहुंचने का सिलसिला जारी है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष का औपचारिक शुभारंभ विजयादशमी 2025 से हुआ था। इसके बाद वर्षभर अलग अलग कार्यक्रमों के जरिए संघ की 100 वर्षों की यात्रा और समाज जीवन में किए गए कार्यों को लोगों के सामने रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में गृह संपर्क अभियान हिंदू सम्मेलन और प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियों जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन गतिविधियों के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संपर्क और संवाद पर जोर दिया गया है।

    शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में संघ की ओर से पंच परिवर्तन के संदेश को भी प्रमुखता दी जा रही है। इसके तहत सामाजिक समरसता कुटुंब प्रबोधन पर्यावरण संरक्षण स्वबोध और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों को समाज जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। संघ के कार्यक्रमों में इन विषयों को लेकर स्वयंसेवकों और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद किया जा रहा है।

    भोपाल में रविवार को होने वाला स्वयंसेवक एकत्रीकरण इसी शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की कड़ी है। कार्यक्रम के जरिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों की सामूहिक सहभागिता दिखाई जाएगी। आयोजन से पहले सुबह 10 बजे समाज सेवा न्यास में केंद्रीय संस्थानों के युवाओं के साथ संवाद का कार्यक्रम भी रखा गया है। यह कार्यक्रम प्रेस के लिए नहीं होगा। इसके बाद शाम को लाल परेड ग्राउंड में मुख्य स्वयंसेवक एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा।

    संघ के अनुसार इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन की शाखाओं के व्यापक स्वरूप को समाज के सामने रखना और शताब्दी वर्ष के दौरान तय किए गए सामाजिक संदेशों को आगे बढ़ाना है। भोपाल में होने वाले इस आयोजन में पांच जिलों से करीब 30 हजार स्वयंसेवकों की मौजूदगी इसे बड़े स्तर का कार्यक्रम बनाएगी। दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी में होने वाले कार्यक्रम में संघ की शताब्दी यात्रा सामाजिक कार्यों और पंच परिवर्तन से जुड़े संदेशों पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है

  • ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक

    ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरसंघचालक पद जाति भाषा राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है बल्कि कोई भी हिंदू चाहे वह ब्राह्मण हो क्षत्रिय वैश्य शूद्र या फिर एससी-एसटी वर्ग से सरसंघचालक बन सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS में पद जाति के आधार पर नहीं बल्कि काम और समर्पण के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने कहा संघ में यह नहीं देखा जाता कि कौन किस जाति से है। जो काम करेगा वही आगे बढ़ेगा। एससी-एसटी होना अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का नेतृत्व किसी जातीय पहचान से नहीं बल्कि हिंदू समाज की एकता से जुड़ा है।

    भाषा को लेकर भी संघ प्रमुख ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी कभी भी RSS की भाषा नहीं बनेगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। अंग्रेजी का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर किया जाएगा। संघ भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी को प्राथमिकता देता है और आगे भी सिर्फ भारतीय भाषाओं में ही काम करेगा।

    राजनीति को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS और BJP दो अलग-अलग संगठन हैं। संघ का राजनीति से सीधा कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ ने पहले ही तय कर लिया है कि उसका काम केवल समाज को जोड़ना है न कि सत्ता या शासन चलाना। स्वयंसेवक भले ही अलग-अलग क्षेत्रों में हों लेकिन संगठन का उद्देश्य सामाजिक एकता तक ही सीमित है।

    संघ की शुरुआत को याद करते हुए भागवत ने कहा कि प्रारंभिक दौर में संघ एक छोटी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था इसलिए उस समय पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी कारण लोगों में यह धारणा बनी कि संघ ब्राह्मणों का संगठन है। लेकिन जैसे-जैसे संघ का विस्तार हुआ यह धारणा स्वतः टूटती चली गई। आज संघ में हर जाति और वर्ग के लोग सक्रिय हैं।

    अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने सरकार से और सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पहले इस दिशा में काम नहीं हो रहा था लेकिन अब पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है। जनगणना और SIR जैसी प्रक्रियाओं से ऐसे लोग सामने आते हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने की अपील की। भागवत ने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं मिलना चाहिए जबकि देश के नागरिकों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों काम मिलना चाहिए।

    बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं। यदि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं तो पूरी दुनिया के हिंदू उनके समर्थन में खड़े होंगे। भाषा विवाद को उन्होंने स्थानीय बीमारी” बताते हुए कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए। संघ के विस्तार को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि अब संघ जाति के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक आधार पर फैलता है। हर बस्ती हर मंडल और हर गांव तक संघ का काम पहुंच रहा है। इसी कारण आज संघ में सभी जातियों और वर्गों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से देखने को मिलती है।