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  • इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन

    इंदौर में संघ का शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि शताब्दी वर्ष का बड़ा आयोजन, 345 बस्तियों और महू के 65 मंडलों में निकले पथ संचलन


    इंदौर । इंदौर और महू क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन आयोजित किए जा रहे हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रम की तैयारियों के बीच स्वयंसेवक अलग-अलग बस्तियों और मंडलों में कदमताल करते नजर आ रहे हैं। इंदौर के नंदा नगर से निकले पथ संचलन में मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय भी शामिल हुए। इस आयोजन के तहत इंदौर विभाग के चार महानगरीय जिलों के 34 नगरों की करीब 345 बस्तियों में पथ संचलन निकाले जा रहे हैं। वहीं महू ग्रामीण क्षेत्र के छह खंडों के 65 मंडलों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

    संघ की ओर से इन आयोजनों की तैयारी पिछले एक महीने से की जा रही थी। शाखाओं में स्वयंसेवकों ने पथ संचलन से पहले समता का अभ्यास किया। इन कार्यक्रमों के जरिए स्वयंसेवक अनुशासन और सामूहिक सहभागिता के साथ निर्धारित मार्गों पर संचलन कर रहे हैं। इंदौर और महू में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों को संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से पहले की महत्वपूर्ण गतिविधि माना जा रहा है।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर 28 अक्टूबर को इंदौर विभाग का वृहत एकत्रीकरण आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम डेली कॉलेज परिसर में शाम 4 बजकर 30 मिनट से होगा। इसमें इंदौर विभाग के पांचों जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। पथ संचलन को इस बड़े आयोजन की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके माध्यम से स्वयंसेवक आगामी एकत्रीकरण के लिए जुट रहे हैं।

    इस एकत्रीकरण का ध्येय वाक्य चरैवेति-चरैवेति रखा गया है। इस संस्कृत वाक्य का आशय निरंतर आगे बढ़ते रहने से है। संघ के अनुसार इसका संदेश है कि स्वयंसेवक राष्ट्रकार्य को लगातार और समर्पण के साथ आगे बढ़ाते रहें। शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद भी समाज और राष्ट्र के लिए कार्य जारी रखने का संकल्प इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

    संघ की विचारधारा के मुताबिक राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माण और व्यक्ति परिवर्तन के माध्यम से समाज परिवर्तन पर जोर दिया जाता है। एकत्रीकरण में इसी विचार को आगे बढ़ाने और स्वयंसेवकों को भविष्य के कार्यों के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जाएगा। संघ का कहना है कि भारत को परम वैभव पर प्रतिष्ठित करने के लक्ष्य के साथ स्वयंसेवक ऊर्जा और समर्पण से कार्य करते रहेंगे।

    इंदौर और महू क्षेत्र में हो रहे पथ संचलन के साथ अब 28 अक्टूबर को होने वाले वृहत एकत्रीकरण पर भी ध्यान केंद्रित है। पांच जिलों के सक्रिय स्वयंसेवकों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम के जरिए संघ अपने शताब्दी वर्ष के समापन को चिह्नित करेगा। फिलहाल विभिन्न बस्तियों और मंडलों में संचलन के आयोजन जारी हैं और स्वयंसेवक निर्धारित कार्यक्रमों के अनुसार इसमें भाग ले रहे हैं।

  • उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन

    उज्जैन में विजयादशमी पर संघ का पथ संचलन, बैंड और लाठी के साथ कदमताल करते निकले स्वयंसेवक, 25 अक्टूबर तक होंगे आयोजन


    उज्जैन। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS का पथ संचलन निकाला गया। शहर की 65 बस्तियों से स्वयंसेवक पारंपरिक वेशभूषा में अनुशासित तरीके से कदमताल करते हुए विभिन्न मार्गों से गुजरे। इस दौरान शहर में कई जगह उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय रहवासियों ने रंगोली बनाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों ने फूल बरसाए और सड़क के दोनों ओर खड़े होकर संचलन में शामिल स्वयंसेवकों का अभिवादन किया। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में अनुशासन और सामूहिक सहभागिता प्रमुख रूप से दिखाई दी।

    पथ संचलन की शुरुआत से पहले संबंधित बस्तियों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें संघ के गीत अमृत वचन बौद्धिक और प्रार्थना शामिल रहे। इन कार्यक्रमों के बाद स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर संचलन के लिए निकले। सभी स्वयंसेवक एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़े। उनके साथ बैंड भी शामिल रहा और कई स्वयंसेवक हाथों में लाठी लेकर चलते दिखाई दिए। संचलन के दौरान स्वयंसेवकों ने अनुशासन बनाए रखा और निर्धारित मार्ग से होते हुए कार्यक्रम पूरा किया। इसके बाद सभी अपने अपने क्षेत्रों की बस्तियों में लौट गए।

    उज्जैन में दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से अलग-अलग बस्तियों में पथ संचलन निकालने की परंपरा रही है। इस आयोजन के माध्यम से स्वयंसेवक एकजुट होकर निर्धारित कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इस बार भी शहर की 65 बस्तियों में विजयादशमी के दिन संचलन आयोजित किए गए। मार्गों पर स्थानीय लोगों की मौजूदगी और स्वागत की तैयारियों ने आयोजन को खास बनाया। कई स्थानों पर रंगोली के जरिए रास्तों को सजाया गया। लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके गुजरने के दौरान अभिवादन किया।

    संघ की ओर से पथ संचलन के आयोजन केवल विजयादशमी तक सीमित नहीं रहेंगे। जानकारी के अनुसार 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक शहर की अलग-अलग बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के तहत संबंधित क्षेत्रों में स्वयंसेवक एकत्र होंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार संचलन निकालेंगे। आयोजन की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की जा रही है। इससे शहर की विभिन्न बस्तियों में अलग-अलग दिनों पर संघ के कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

    विजयादशमी पर निकले पथ संचलन के दौरान पारंपरिक वेशभूषा बैंड की धुन और एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। स्वागत के लिए बनाई गई रंगोलियों और फूलों की वर्षा से कई मार्गों पर उत्सवी माहौल दिखाई दिया। अब 25 अक्टूबर तक उज्जैन की अन्य बस्तियों में भी पथ संचलन और संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन आयोजनों के जरिए संघ की स्थानीय इकाइयां अपने तय कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।