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  • मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    मोहन भागवत ने विजयादशमी भाषण में स्वदेशी, OTT नियंत्रण, नशे और आंदोलनों को लेकर रखे विचार

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर संबोधन दिया। संघ के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़े इस कार्यक्रम में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता, स्वदेशी, नई पीढ़ी के सामने मौजूद चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने नागरिकों से एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने तथा व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।

    भागवत ने स्वदेशी अपनाने और अपने देश की पहचान को समझने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने संविधान में निहित ‘हम भारत के लोग’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि विविधताओं के बावजूद भारतीय समाज भावनात्मक रूप से एकजुट है। इस संबंध को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। उनके अनुसार, देश की सांस्कृतिक चेतना और नागरिकों के बीच परस्पर जुड़ाव राष्ट्रीय जीवन को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 वर्ष और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के कार्यों का भी स्मरण किया। उन्होंने इन महापुरुषों के जीवन और योगदान से प्रेरणा लेने की बात कही। इसके साथ ही बंगाल के राज नारायण बसु के जन्म के 200वें वर्ष का उल्लेख करते हुए स्वदेशी मेलों के माध्यम से आत्मबोध और सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के प्रयासों की चर्चा की।

    नेपाल में आई त्रासदी पर चिंता जताते हुए भागवत ने हिमालयी क्षेत्र में विकास के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन में हुए एकांगी विकास को क्षेत्रीय संकट के संदर्भ में रेखांकित किया। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि अपनाने की जरूरत है।

    भारत की विविधता और सांस्कृतिक परंपरा पर बात करते हुए उन्होंने सनातन संस्कृति को राष्ट्रीय एकता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि यह दृष्टि विभिन्न पंथों, जातियों और समुदायों के प्रति सम्मान का भाव रखती है। सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए उन्होंने सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्व-बोध और नागरिक अनुशासन को महत्वपूर्ण बताया।

    नई पीढ़ी पर डिजिटल माध्यमों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए भागवत ने उचित और अनुचित के बीच अंतर समझने की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विशेष रूप से ओटीटी मंचों पर नियंत्रण और अनुशासन की जरूरत का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि परिवार, विद्यालय और सामाजिक वातावरण से मिलने वाले संस्कारों की भूमिका कम होने के कारण बच्चों और युवाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने नशीली दवाओं की बढ़ती समस्या पर भी चिंता जताई और इसके समाधान के लिए शासन-प्रशासन तथा समाज को मिलकर देशव्यापी प्रयास करने की जरूरत बताई।

    भागवत ने हिंदू भाव को किसी एक पूजा पद्धति, भाषा, खानपान या रहन-सहन तक सीमित मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व से जुड़ी व्यापक दृष्टि के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने भारत और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश करने वाली विभाजनकारी ताकतों के प्रति सतर्क रहने की बात कही। उनके भाषण में विदेशी शक्तियों और उनके कथित सहयोगियों द्वारा भारत में आंतरिक मतभेद बढ़ाने की आशंका भी शामिल रही।

    आंदोलनों के संबंध में भागवत ने कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था में कमियों के कारण विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान निकालना होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संविधान, कानून और शालीन व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, राजनीतिक लाभ, वोट और लोकप्रियता की इच्छा सामाजिक सद्भाव को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

    अंत में उन्होंने नागरिकों से व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु और समृद्ध राष्ट्र बनाने का लक्ष्य प्रत्येक नागरिक के प्रयास, जिम्मेदारी और कर्तव्यपालन से ही हासिल किया जा सकता है।

  • दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते

    दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज में संघ के आयोजन पर जताई आपत्ति, सिंधिया से पूछा ग्वालियर में कार्यक्रम क्यों नहीं कराते


    मध्य प्रदेश।
    के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इंदौर के डेली कॉलेज में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रस्तावित आयोजन पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। इस मामले में उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी चर्चा की है। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से सवाल किया कि संघ का कार्यक्रम ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में क्यों नहीं कराया जाता। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखकर आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे।

    दिग्विजय सिंह इन दिनों अपनी प्रस्तावित सनातन यात्रा की तैयारियों में जुटे हैं। इसी सिलसिले में इंदौर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री ने कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात रखी। डेली कॉलेज में होने वाली आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी की बैठक को लेकर उन्होंने संस्थान के प्रबंधन के सामने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत सहित देशभर से राष्ट्रीय और प्रांत स्तर के पदाधिकारियों के शामिल होने का कार्यक्रम है। इसके अलावा 28 अक्टूबर को यहां करीब एक लाख स्वयंसेवकों के जुटने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।

    दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी डेली कॉलेज बोर्ड के चेयरमैन विक्रम पंवार और अन्य सदस्यों के साथ बैठक हुई थी। बातचीत के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि कॉलेज परिसर में राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होने चाहिए। हालांकि, उनके अनुसार बोर्ड चेयरमैन ने यह भी कहा कि इस बार संघ के आयोजन को रोकना संभव नहीं है। दिग्विजय सिंह ने इसी निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि शैक्षणिक परिसर में इस तरह के आयोजन से बचना चाहिए।

    उन्होंने बताया कि डेली कॉलेज के संरक्षक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी उन्होंने इस विषय पर बात की थी। दिग्विजय सिंह के मुताबिक, उन्होंने सिंधिया से कहा कि कॉलेज में संघ का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि इस आयोजन के लिए ग्वालियर के सिंधिया स्कूल का चयन क्यों नहीं किया जाता। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि उनके इस सवाल पर सिंधिया ने कोई जवाब नहीं दिया।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मामले में डॉ. मोहन भागवत को पत्र लिखने जा रहे हैं। पत्र के माध्यम से वह आयोजन का स्थान बदलने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब वह दस साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, तब इस दौरान डेली कॉलेज में कभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं हुआ। उन्होंने ये बातें इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के रूबरू कार्यक्रम के दौरान कहीं।

    राजनीतिक मतभेदों के बीच आपसी संबंधों पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को अपना पुराना मित्र बताया। उन्होंने कहा कि विजयवर्गीय के साथ उनकी मित्रता करीब 30 से 35 साल पुरानी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोस्ती के बावजूद राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में कोई कमी नहीं रहती। दोनों एक-दूसरे की आलोचना भी करते हैं। उनके मुताबिक, राजनीति में मतभेद होना जरूरी है, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर, विक्रम वर्मा और सुंदरलाल पटवा जैसे नेताओं के साथ भी मित्रतापूर्ण रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह विक्रम वर्मा के यहां शादी में शामिल हुए थे और सुंदरलाल पटवा के घर दाल-बाफले खाने भी जाते थे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में इस तरह के आपसी संबंधों की परंपरा बनी रहनी चाहिए और असहमति को व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।

    मध्य प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि राज्य पर करीब 5.50 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है, जबकि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ा था, तब यह लगभग 23 हजार करोड़ रुपये था। लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भी संकेतों में इस योजना को आर्थिक बोझ बता चुके हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब फिलहाल योजना के तहत 1,250 रुपये की किस्त दी जा रही है, तो इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने पर स्थिति क्या होगी। इस मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आगे की स्थिति को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव देखेंगे।

  • 20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि

    20 सितंबर को भोपाल में दिखेगा RSS का विशाल अनुशासन और संगठन: 30 हजार स्वयंसेवक करेंगे परेड-योग-दंड प्रयोग, होसबाले होंगे मुख्य अतिथि


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आगामी 20 सितंबर को ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड पर विशाल शाखा संगम आयोजित किया जाएगा जिसमें भोपाल विभाग के करीब 30 हजार स्वयंसेवकों के शामिल होने की संभावना है। बड़ी संख्या में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों की मौजूदगी के कारण इस आयोजन को संघ के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में माना जा रहा है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले मुख्य रूप से शामिल होंगे और स्वयंसेवकों को मार्गदर्शन देंगे।

    लाल परेड ग्राउंड पर यह आयोजन दोपहर बाद करीब 3 बजे शुरू होगा। शाखा संगम में भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले भोपाल प्रताप भोजपुर तात्या टोपे और विद्युत नगर संगठनात्मक जिलों के स्वयंसेवक एक साथ जुटेंगे। संघ की विभिन्न शाखाओं से जुड़े हजारों स्वयंसेवक इस कार्यक्रम में पूर्ण गणवेश में पहुंचेंगे। इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों के एकत्रीकरण के चलते आयोजन की तैयारियां भी बड़े स्तर पर की जा रही हैं।

    शाखा संगम के दौरान स्वयंसेवकों के अनुशासन और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन भी देखने को मिलेगा। हजारों स्वयंसेवक एक साथ समता यानी परेड करेंगे। इसके अलावा शारीरिक व्यायाम दंड प्रयोग और योग का सामूहिक प्रदर्शन भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगा। संघ की दृष्टि से भोपाल विभाग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख नगरों और बस्तियों की शाखाओं का यह एक बड़ा एकत्रीकरण होगा। आयोजन के माध्यम से संगठन की गतिविधियों और समाज जीवन में उसकी भूमिका को भी सामने रखा जाएगा।

    यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के आयोजन से भी जुड़ा हुआ है। संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में अलग अलग गतिविधियों और कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में मुहल्ला शाखाओं के गठन और विस्तार पर भी जोर दिया है। भोपाल में आयोजित होने वाले शाखा संगम में इन मुहल्ला शाखाओं से जुड़े स्वयंसेवकों की भी बड़ी भागीदारी रहने की संभावना है। इसे मुहल्ला स्तर पर संगठन विस्तार के बाद एक बड़े सामूहिक जुटान के रूप में देखा जा रहा है।

    कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबाले की मौजूदगी को भी विशेष माना जा रहा है। वे स्वयंसेवकों को संगठन समाज और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देंगे। युवाओं से संवाद भी कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है। हाल के समय में युवाओं और विशेष रूप से Gen-Z से जुड़े मुद्दों पर देशभर में चर्चा बढ़ी है। ऐसे में संघ भी युवाओं से संवाद और परिचर्चा के माध्यम से उनकी सोच और सामाजिक भागीदारी से जुड़े विषयों पर सक्रिय दिखाई दे रहा है।

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर इससे पहले भी संघ का बड़ा आयोजन हो चुका है। कोरोना काल के प्रतिबंध हटने के बाद 11 दिसंबर 2022 को यहां भव्य शारीरिक प्रकटोत्सव आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए थे और दत्तात्रेय होसबाले मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे थे। उस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

    अब एक बार फिर 20 सितंबर को लाल परेड ग्राउंड पर होने वाला शाखा संगम भोपाल में संघ का बड़ा संगठनात्मक आयोजन बनने जा रहा है। 30 हजार स्वयंसेवकों की भागीदारी पर केंद्रित इस कार्यक्रम में अनुशासन शारीरिक प्रदर्शन संगठनात्मक एकजुटता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश प्रमुख रूप से दिखाई देंगे। राजधानी में होने वाले इस विशाल जुटान पर राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों की भी नजर रहेगी।

  • मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया है। इसके बाद अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने ममदानी और कार्यक्रम के अन्य आलोचकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    ममदानी ने कहा है कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसे रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा और भारत को लेकर उसके दृष्टिकोण से जुड़ी चिंताओं पर आधारित है।

    भागवत का यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। कार्यक्रम को यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई है।

    ममदानी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर कहा है कि वह ऐसी सोच के विरोध में हैं जिसे वह किसी देश के लिए बहिष्कारी दृष्टिकोण मानते हैं। उनका कहना है कि न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो रंग, धर्म, आस्था और मूल स्थान की परवाह किए बिना सभी लोगों के साथ समान व्यवहार की भावना में विश्वास करता है।

    ममदानी के बयान के बाद कार्यक्रम के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर ममदानी और अन्य आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के कारण ऐसा कर रहे हैं।

    मिलबेन ने अपने बयान में ममदानी और उनके साथ कार्यक्रम का विरोध करने वालों की राजनीतिक विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन व्यावसायिक नियमों के आधार पर काम करता है और इसलिए राजनीतिक विरोध के आधार पर कार्यक्रम को रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। न्यूयॉर्क में कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भागवत की मौजूदगी का विरोध किया तथा कार्यक्रम को रद्द करने की मांग उठाई है। इससे यह मुद्दा केवल भारतीय प्रवासी समुदाय तक सीमित न रहकर अमेरिकी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।

    मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। उनका अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद उनके कनाडा और ब्रिटेन जाने का कार्यक्रम भी बताया गया है।

    मैरी मिलबेन इससे पहले भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम से पहले भारत का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया था। इसके कारण भारतीय समुदाय के बीच भी उनकी पहचान बनी है।

    फिलहाल भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट हैं। एक ओर ममदानी और कुछ संगठन आरएसएस की विचारधारा को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं मिलबेन सहित कार्यक्रम के समर्थक इसे भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ा आयोजन मानते हैं। 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर अब सभी की नजर बनी हुई है और इससे पहले राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना है।

  • युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद

    युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के दो हजार से अधिक विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस यानी आईआईएमयूएन की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के सौ से अधिक शहरों से आए 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्र शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों को समझना नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा समाज से जुड़े विषयों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल के महीनों में देश में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस देखने को मिली। छात्र आंदोलनों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों के बाद युवाओं के साथ यह संवाद काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मंच पर नई पीढ़ी की अपेक्षाओं चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर खुलकर चर्चा होगी।

    मोहन भागवत इससे पहले भी कई बार युवाओं से संवाद के महत्व पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उसे आदेश देने के बजाय बातचीत के माध्यम से समझना चाहिए। उनके अनुसार बदलते समय में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके जरिए समाज और युवा एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी पर अपनी बात थोपने के बजाय विचारों का आदान प्रदान होना चाहिए ताकि सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।

    कार्यक्रम के आयोजक आईआईएमयूएन के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार यह मंच पिछले 15 वर्षों से छात्रों के बीच नेतृत्व संवाद और बहस की संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। संगठन भारत के 108 शहरों और 15 देशों में अपनी गतिविधियां संचालित करता है तथा अब तक करोड़ों छात्रों तक पहुंच बना चुका है। ऋषभ शाह ने बताया कि मोहन भागवत इससे पहले भी दो बार इस मंच पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं और इस बार का निमंत्रण कई महीने पहले भेजा गया था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

    कार्यक्रम में शामिल छात्र विभिन्न सामाजिक शैक्षणिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी रख सकते हैं। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल सुनना नहीं बल्कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। आयोजकों का कहना है कि नेतृत्व तभी विकसित होता है जब युवाओं को खुलकर सोचने और अपनी राय व्यक्त करने का मंच मिले।

    इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नेताओं ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बताया है और कहा है कि संघ लंबे समय से युवाओं के बीच संवाद और व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। वहीं आयोजन में कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई लेकिन आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्रों के लिए आयोजित एक स्वतंत्र मंच है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते दौर में युवाओं से सीधे संवाद की पहल समाज और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा तकनीक रोजगार और सामाजिक मूल्यों जैसे विषयों पर खुली बातचीत नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी सोच साझा करने का अवसर मिलता है और समाज को उनकी अपेक्षाओं को समझने का नया दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है।

  • Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत

    Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देश की नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z और Gen Alpha से संवाद बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के 100 से अधिक शहरों के हजारों विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 से अधिक छात्रों के शामिल होने की संभावना है।

    यह संवाद ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशन्स’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर होगा। कार्यक्रम का आयोजन मुंबई के अंबानी सेंटर में किया जाएगा, जबकि विभिन्न शहरों के छात्र ऑनलाइन माध्यम से इसमें जुड़ेंगे।

    युवाओं से जुड़ने पर रहेगा जोर
    आरएसएस के अनुसार, वर्ष 2011 में स्थापित IIMUN का संचालन युवा स्वयं करते हैं और संगठन का दावा है कि अब तक इससे 7.5 करोड़ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। सम्मेलन का उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों, आकांक्षाओं और चुनौतियों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    Gen-Z और Gen Alpha पर विशेष फोकस
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से दो पीढ़ियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। Gen-Z में 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा शामिल हैं, जबकि Gen Alpha में 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को माना जाता है।

    संवाद को बताया था बदलाव का माध्यम
    हाल के दिनों में मोहन भागवत ने कहा था कि समाज और समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है तथा युवाओं से निरंतर संवाद के जरिए ही चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। उनके अनुसार, अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है और नई पीढ़ी के विचारों को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चों और युवाओं के मन की बात सुनकर ही उनके साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकता है। यह कार्यक्रम युवाओं के साथ विचार-विमर्श और सामाजिक विषयों पर संवाद की इसी पहल का हिस्सा माना जा रहा है।

  • इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR

    इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR


    इंदौर । इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने एक छात्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि छात्र ने शाखा का वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम पर साझा किया और उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी पोस्ट कीं, जिससे संगठन की छवि खराब करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

    पुलिस के अनुसार मामला संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि वीणा नगर निवासी छात्र क्षितिज वाने ने आरएसएस की नियमित शाखा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो के साथ संगठन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और धमकी भरे अंदाज में पोस्ट साझा किए गए।

    जानकारी के मुताबिक हीरानगर क्षेत्र के नॉर्थ एवेन्यू स्थित एक खाली मैदान में आरएसएस की शाखा प्रतिदिन संचालित होती है। यहां संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय, दीपक शर्मा, लोकेंद्र कोष्ठी, लालजी प्रतापत, नितिन विश्वकर्मा सहित कई स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखा में शामिल होते हैं। शिकायत में कहा गया है कि करीब छह महीने पहले भी संबंधित छात्र शाखा स्थल पर पहुंचा था और वीडियो रिकॉर्ड करते हुए शाखा लगाए जाने पर सवाल उठाए थे। उस समय स्वयंसेवकों ने उसे समझाकर वहां से भेज दिया था।

    संघ के सदस्यों का आरोप है कि हाल ही में छात्र दोबारा शाखा का वीडियो रिकॉर्ड करने पहुंचा और बाद में उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा कर दिया। शिकायत के अनुसार उसने कथित रूप से “आरएसएस देशद्रोही” शीर्षक से पोस्ट भी साझा की, जिसे संगठन के सदस्यों ने आपत्तिजनक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की पोस्ट से सामाजिक माहौल खराब हो सकता है और संगठन की छवि प्रभावित होती है।

    घटना के बाद संघ के पदाधिकारियों ने पहले आपस में चर्चा की और फिर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद शनिवार देर रात संघ के सदस्य हीरानगर थाने पहुंचे और कथित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट तथा अन्य डिजिटल सामग्री पुलिस को सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    हीरानगर थाना पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट, पोस्ट की सामग्री और वीडियो की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के पीछे क्या उद्देश्य था तथा कानून के तहत कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील विषय से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करते समय जिम्मेदारी और कानून का पूरा ध्यान रखें, ताकि अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

    उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकार के किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है। उनका कहना था कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएं।

    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी गठित किए जाने के निर्णय पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है, न कि कॉमन सिविल कोड का। उनके अनुसार दोनों अवधारणाओं को एक समान मानना उचित नहीं है और इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

    तिवारी ने यह भी कहा कि पहले जब इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब यह स्पष्ट किया गया था कि कुछ विशेष समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का विचार सामने आया था। उनका तर्क था कि यदि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को अलग रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता कहना कठिन होगा। उन्होंने इस विषय पर व्यापक संवाद और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर देश की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति मौजूद है और इस दिशा में सरकार को प्रभावी ढंग से अपनी नीति लागू करनी चाहिए।

    तिवारी ने कहा कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उनके अनुसार भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर देश के भीतर व्यापक सहमति बनी हुई है और सरकार को उसी भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।

    राम मंदिर विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर दिए गए मनीष तिवारी के बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब ये तीनों विषय राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। उनके बयान को विपक्ष के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश: में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बयान में उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों के स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक ढांचे में किसी संगठन विशेष से जुड़ाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता से जोड़ते हुए कहा कि संविधान हर अधिकारी से अपेक्षा करता है कि वह किसी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के बजाय केवल संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहे।

    कांग्रेस की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि इस बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए और संवैधानिक संस्थाओं को इसकी जांच करनी चाहिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का वैचारिक प्रभाव तो नहीं बढ़ रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैचारिक प्रभाव की चर्चा पहले से होती रही है। उन्होंने इसे सरकार और संगठन के लंबे समय से जुड़े रहने का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि कई बार अवसरवादी तत्व व्यवस्था में जगह बना लेते हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है।

    बीजेपी की ओर से इस विवाद पर अलग रुख अपनाया गया है। पार्टी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही वैचारिक ढांचे के साथ सरकार चलने पर कुछ लोग अवसरवादी तरीके से व्यवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संगठनात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि बयान का आशय किसी संस्था पर सीधा आरोप नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक संतुलन की आवश्यकता की ओर संकेत था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवैधानिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    नई दिल्ली। मोहन भागवत रविवार को तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे, जहां वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान संघ के संगठनात्मक कामकाज, अभियान और आगामी रणनीति पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक, भागवत का यह दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संघ की तैयारियों की समीक्षा करेंगे और जमीनी स्तर पर काम कर रहे प्रचारकों से सीधा फीडबैक लेंगे।

    लखनऊ प्रवास के दौरान संघ प्रमुख विभिन्न आयामों से जुड़े पदाधिकारियों और प्रचारकों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, सामाजिक अभियानों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर चर्चा होगी। साथ ही प्रदेश में चल रही गतिविधियों और उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार, इस दौरे में सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है। संघ नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज और संगठन की सक्रियता को लेकर फीडबैक जुटाएगा, ताकि आगे की रणनीति को और मजबूत बनाया जा सके।

    संघ के प्रचारकों से मिलने वाले सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। संगठन की कोशिश जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और प्रभाव को और मजबूत करने की है।

    गौरतलब है कि मोहन भागवत इससे पहले फरवरी में भी लखनऊ आए थे। उस दौरान भी उन्होंने कई संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लिया था। मौजूदा दौरे को उसी सिलसिले का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें संघ लगातार अपने नेटवर्क और रणनीति की समीक्षा कर रहा है।