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  • मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध पर मैरी मिलबेन ने जोहरान ममदानी को मोदी और बीजेपी विरोधी बताया

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को लेकर न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया है। इसके बाद अमेरिकी गायिका और अभिनेत्री मैरी मिलबेन ने ममदानी और कार्यक्रम के अन्य आलोचकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    ममदानी ने कहा है कि वह भागवत के कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसे रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। उनका विरोध आरएसएस की विचारधारा और भारत को लेकर उसके दृष्टिकोण से जुड़ी चिंताओं पर आधारित है।

    भागवत का यह कार्यक्रम आरएसएस के शताब्दी वर्ष में चल रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। कार्यक्रम को यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशन के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारतीय प्रवासी समुदाय के करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने की संभावना बताई गई है।

    ममदानी ने आरएसएस की विचारधारा को लेकर कहा है कि वह ऐसी सोच के विरोध में हैं जिसे वह किसी देश के लिए बहिष्कारी दृष्टिकोण मानते हैं। उनका कहना है कि न्यूयॉर्क ऐसा शहर है जो रंग, धर्म, आस्था और मूल स्थान की परवाह किए बिना सभी लोगों के साथ समान व्यवहार की भावना में विश्वास करता है।

    ममदानी के बयान के बाद कार्यक्रम के समर्थन और विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर ममदानी और अन्य आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भागवत के कार्यक्रम का विरोध करने वाले लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के कारण ऐसा कर रहे हैं।

    मिलबेन ने अपने बयान में ममदानी और उनके साथ कार्यक्रम का विरोध करने वालों की राजनीतिक विचारधारा पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैडिसन स्क्वायर गार्डन व्यावसायिक नियमों के आधार पर काम करता है और इसलिए राजनीतिक विरोध के आधार पर कार्यक्रम को रोका नहीं जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने भी कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है। न्यूयॉर्क में कुछ नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने भागवत की मौजूदगी का विरोध किया तथा कार्यक्रम को रद्द करने की मांग उठाई है। इससे यह मुद्दा केवल भारतीय प्रवासी समुदाय तक सीमित न रहकर अमेरिकी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गया है।

    मोहन भागवत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे। उनका अमेरिका दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष से जुड़े वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। अमेरिका के बाद उनके कनाडा और ब्रिटेन जाने का कार्यक्रम भी बताया गया है।

    मैरी मिलबेन इससे पहले भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ चुकी हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी के एक कार्यक्रम से पहले भारत का राष्ट्रगान प्रस्तुत किया था। इसके कारण भारतीय समुदाय के बीच भी उनकी पहचान बनी है।

    फिलहाल भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों के रुख स्पष्ट हैं। एक ओर ममदानी और कुछ संगठन आरएसएस की विचारधारा को लेकर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं मिलबेन सहित कार्यक्रम के समर्थक इसे भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़ा आयोजन मानते हैं। 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम पर अब सभी की नजर बनी हुई है और इससे पहले राजनीतिक बहस के और तेज होने की संभावना है।

  • युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद

    युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के दो हजार से अधिक विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस यानी आईआईएमयूएन की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के सौ से अधिक शहरों से आए 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्र शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों को समझना नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा समाज से जुड़े विषयों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल के महीनों में देश में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस देखने को मिली। छात्र आंदोलनों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों के बाद युवाओं के साथ यह संवाद काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मंच पर नई पीढ़ी की अपेक्षाओं चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर खुलकर चर्चा होगी।

    मोहन भागवत इससे पहले भी कई बार युवाओं से संवाद के महत्व पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उसे आदेश देने के बजाय बातचीत के माध्यम से समझना चाहिए। उनके अनुसार बदलते समय में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके जरिए समाज और युवा एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी पर अपनी बात थोपने के बजाय विचारों का आदान प्रदान होना चाहिए ताकि सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।

    कार्यक्रम के आयोजक आईआईएमयूएन के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार यह मंच पिछले 15 वर्षों से छात्रों के बीच नेतृत्व संवाद और बहस की संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। संगठन भारत के 108 शहरों और 15 देशों में अपनी गतिविधियां संचालित करता है तथा अब तक करोड़ों छात्रों तक पहुंच बना चुका है। ऋषभ शाह ने बताया कि मोहन भागवत इससे पहले भी दो बार इस मंच पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं और इस बार का निमंत्रण कई महीने पहले भेजा गया था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

    कार्यक्रम में शामिल छात्र विभिन्न सामाजिक शैक्षणिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी रख सकते हैं। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल सुनना नहीं बल्कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। आयोजकों का कहना है कि नेतृत्व तभी विकसित होता है जब युवाओं को खुलकर सोचने और अपनी राय व्यक्त करने का मंच मिले।

    इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नेताओं ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बताया है और कहा है कि संघ लंबे समय से युवाओं के बीच संवाद और व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। वहीं आयोजन में कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई लेकिन आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्रों के लिए आयोजित एक स्वतंत्र मंच है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते दौर में युवाओं से सीधे संवाद की पहल समाज और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा तकनीक रोजगार और सामाजिक मूल्यों जैसे विषयों पर खुली बातचीत नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी सोच साझा करने का अवसर मिलता है और समाज को उनकी अपेक्षाओं को समझने का नया दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है।

  • Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत

    Gen-Z से संवाद बढ़ाएगा RSS, 100 से ज्यादा शहरों के युवाओं से बात करेंगे मोहन भागवत


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने देश की नई पीढ़ी, खासकर Gen-Z और Gen Alpha से संवाद बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत 6 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से देश के 100 से अधिक शहरों के हजारों विद्यार्थियों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 से अधिक छात्रों के शामिल होने की संभावना है।

    यह संवाद ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइटेड नेशन्स’ (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ पर आयोजित वार्षिक चैंपियनशिप कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर होगा। कार्यक्रम का आयोजन मुंबई के अंबानी सेंटर में किया जाएगा, जबकि विभिन्न शहरों के छात्र ऑनलाइन माध्यम से इसमें जुड़ेंगे।

    युवाओं से जुड़ने पर रहेगा जोर
    आरएसएस के अनुसार, वर्ष 2011 में स्थापित IIMUN का संचालन युवा स्वयं करते हैं और संगठन का दावा है कि अब तक इससे 7.5 करोड़ से अधिक युवा जुड़ चुके हैं। सम्मेलन का उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों, आकांक्षाओं और चुनौतियों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    Gen-Z और Gen Alpha पर विशेष फोकस
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से दो पीढ़ियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। Gen-Z में 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा शामिल हैं, जबकि Gen Alpha में 2010 से 2024 के बीच जन्मे बच्चों को माना जाता है।

    संवाद को बताया था बदलाव का माध्यम
    हाल के दिनों में मोहन भागवत ने कहा था कि समाज और समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है तथा युवाओं से निरंतर संवाद के जरिए ही चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। उनके अनुसार, अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है और नई पीढ़ी के विचारों को समझना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चों और युवाओं के मन की बात सुनकर ही उनके साथ प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकता है। यह कार्यक्रम युवाओं के साथ विचार-विमर्श और सामाजिक विषयों पर संवाद की इसी पहल का हिस्सा माना जा रहा है।

  • इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR

    इंस्टाग्राम पोस्ट से बढ़ा विवाद, RSS शाखा का वीडियो शेयर करने वाले छात्र पर पुलिस ने दर्ज की FIR


    इंदौर इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की शाखा का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संघ के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने एक छात्र के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि छात्र ने शाखा का वीडियो रिकॉर्ड कर इंस्टाग्राम पर साझा किया और उसके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी पोस्ट कीं, जिससे संगठन की छवि खराब करने और माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

    पुलिस के अनुसार मामला संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि वीणा नगर निवासी छात्र क्षितिज वाने ने आरएसएस की नियमित शाखा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वीडियो के साथ संगठन के खिलाफ आपत्तिजनक बातें लिखी गईं और धमकी भरे अंदाज में पोस्ट साझा किए गए।

    जानकारी के मुताबिक हीरानगर क्षेत्र के नॉर्थ एवेन्यू स्थित एक खाली मैदान में आरएसएस की शाखा प्रतिदिन संचालित होती है। यहां संघ के सदस्य मोहनलाल मालवीय, दीपक शर्मा, लोकेंद्र कोष्ठी, लालजी प्रतापत, नितिन विश्वकर्मा सहित कई स्वयंसेवक नियमित रूप से शाखा में शामिल होते हैं। शिकायत में कहा गया है कि करीब छह महीने पहले भी संबंधित छात्र शाखा स्थल पर पहुंचा था और वीडियो रिकॉर्ड करते हुए शाखा लगाए जाने पर सवाल उठाए थे। उस समय स्वयंसेवकों ने उसे समझाकर वहां से भेज दिया था।

    संघ के सदस्यों का आरोप है कि हाल ही में छात्र दोबारा शाखा का वीडियो रिकॉर्ड करने पहुंचा और बाद में उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा कर दिया। शिकायत के अनुसार उसने कथित रूप से “आरएसएस देशद्रोही” शीर्षक से पोस्ट भी साझा की, जिसे संगठन के सदस्यों ने आपत्तिजनक बताया। उनका कहना है कि इस तरह की पोस्ट से सामाजिक माहौल खराब हो सकता है और संगठन की छवि प्रभावित होती है।

    घटना के बाद संघ के पदाधिकारियों ने पहले आपस में चर्चा की और फिर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद शनिवार देर रात संघ के सदस्य हीरानगर थाने पहुंचे और कथित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट तथा अन्य डिजिटल सामग्री पुलिस को सौंपते हुए शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर छात्र के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    हीरानगर थाना पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। संबंधित इंस्टाग्राम अकाउंट, पोस्ट की सामग्री और वीडियो की सत्यता का परीक्षण किया जाएगा। जांच के दौरान सभी पक्षों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो के पीछे क्या उद्देश्य था तथा कानून के तहत कौन-कौन सी धाराएं लागू होती हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील विषय से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया पर साझा करते समय जिम्मेदारी और कानून का पूरा ध्यान रखें, ताकि अनावश्यक विवाद और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा न हो।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष जांच की मांग, मनीष तिवारी बोले- करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है पूरा मामला

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा गबन मामले, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि सहित कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है, क्योंकि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

    राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान के बाद प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और धार्मिक संस्थाओं की गरिमा पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे।

    उन्होंने कहा कि अयोध्या स्थित रामलला का मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकार के किसी भी विवाद का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है। उनका कहना था कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके और तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आएं।

    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की दिशा में ड्राफ्टिंग कमेटी गठित किए जाने के निर्णय पर भी मनीष तिवारी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में यूनिफॉर्म सिविल कोड का उल्लेख किया गया है, न कि कॉमन सिविल कोड का। उनके अनुसार दोनों अवधारणाओं को एक समान मानना उचित नहीं है और इस विषय पर संवैधानिक प्रावधानों को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

    तिवारी ने यह भी कहा कि पहले जब इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब यह स्पष्ट किया गया था कि कुछ विशेष समुदायों और अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने का विचार सामने आया था। उनका तर्क था कि यदि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक और प्रथागत कानूनों को अलग रखा जाता है तो फिर इसे वास्तविक अर्थों में समान नागरिक संहिता कहना कठिन होगा। उन्होंने इस विषय पर व्यापक संवाद और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    सिंधु जल संधि और पाकिस्तान के साथ संबंधों पर पूछे गए प्रश्न के जवाब में कांग्रेस सांसद ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर देश की नीति लंबे समय से स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति मौजूद है और इस दिशा में सरकार को प्रभावी ढंग से अपनी नीति लागू करनी चाहिए।

    तिवारी ने कहा कि आतंकवाद और सामान्य संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते। उनके अनुसार भारत की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं तथा सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के विरुद्ध सख्त रुख बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर देश के भीतर व्यापक सहमति बनी हुई है और सरकार को उसी भावना के अनुरूप आगे बढ़ना चाहिए।

    राम मंदिर विवाद, यूनिफॉर्म सिविल कोड और सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर दिए गए मनीष तिवारी के बयान ऐसे समय सामने आए हैं जब ये तीनों विषय राष्ट्रीय राजनीति और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। उनके बयान को विपक्ष के दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जबकि इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश: में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बयान में उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों के स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक ढांचे में किसी संगठन विशेष से जुड़ाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता से जोड़ते हुए कहा कि संविधान हर अधिकारी से अपेक्षा करता है कि वह किसी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के बजाय केवल संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहे।

    कांग्रेस की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि इस बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए और संवैधानिक संस्थाओं को इसकी जांच करनी चाहिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का वैचारिक प्रभाव तो नहीं बढ़ रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैचारिक प्रभाव की चर्चा पहले से होती रही है। उन्होंने इसे सरकार और संगठन के लंबे समय से जुड़े रहने का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि कई बार अवसरवादी तत्व व्यवस्था में जगह बना लेते हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है।

    बीजेपी की ओर से इस विवाद पर अलग रुख अपनाया गया है। पार्टी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही वैचारिक ढांचे के साथ सरकार चलने पर कुछ लोग अवसरवादी तरीके से व्यवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संगठनात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि बयान का आशय किसी संस्था पर सीधा आरोप नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक संतुलन की आवश्यकता की ओर संकेत था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवैधानिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    लखनऊ पहुंचे RSS प्रमुख मोहन भागवत, तीन दिवसीय दौरे में संगठन और सरकार के कामकाज की होगी समीक्षा

    नई दिल्ली। मोहन भागवत रविवार को तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंचे, जहां वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कई अहम बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान संघ के संगठनात्मक कामकाज, अभियान और आगामी रणनीति पर विस्तृत मंथन किया जाएगा।

    सूत्रों के मुताबिक, भागवत का यह दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वे आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संघ की तैयारियों की समीक्षा करेंगे और जमीनी स्तर पर काम कर रहे प्रचारकों से सीधा फीडबैक लेंगे।

    लखनऊ प्रवास के दौरान संघ प्रमुख विभिन्न आयामों से जुड़े पदाधिकारियों और प्रचारकों के साथ अलग-अलग बैठकें करेंगे। इन बैठकों में संगठन के विस्तार, सामाजिक अभियानों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर चर्चा होगी। साथ ही प्रदेश में चल रही गतिविधियों और उनके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार, इस दौरे में सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है। संघ नेतृत्व प्रदेश सरकार के कामकाज और संगठन की सक्रियता को लेकर फीडबैक जुटाएगा, ताकि आगे की रणनीति को और मजबूत बनाया जा सके।

    संघ के प्रचारकों से मिलने वाले सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। संगठन की कोशिश जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ और प्रभाव को और मजबूत करने की है।

    गौरतलब है कि मोहन भागवत इससे पहले फरवरी में भी लखनऊ आए थे। उस दौरान भी उन्होंने कई संगठनात्मक बैठकों में हिस्सा लिया था। मौजूदा दौरे को उसी सिलसिले का विस्तार माना जा रहा है, जिसमें संघ लगातार अपने नेटवर्क और रणनीति की समीक्षा कर रहा है।

  • रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    रायबरेली में राहुल गांधी का तीखा हमला, संविधान को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

    नई दिल्ली। रायबरेली के लोधवारी में आयोजित बहुजन स्वाभिमान सभा और अन्य कार्यक्रमों में Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार, Bharatiya Janata Party और Rashtriya Swayamsevak Sangh पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने संविधान को देश की आत्मा बताते हुए आरोप लगाया कि इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है। राहुल गांधी ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर कहा कि यह केवल किताब नहीं बल्कि देश के महान नेताओं के त्याग और बलिदान का प्रतीक है।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में आर्थिक संकट गहराने वाला है और आने वाले समय में आम जनता पर महंगाई का भारी असर पड़ेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर देश के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीतियों के कारण किसानों और गरीबों की स्थिति प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाओं में राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ रहा है और विश्वविद्यालयों तक में प्रभाव देखा जा रहा है।

    सभा के दौरान राहुल गांधी ने सामाजिक न्याय और पिछड़ों के अधिकारों की बात करते हुए वीरा पासी जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश की ताकत संविधान है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। अपने संबोधन में उन्होंने उद्योगपतियों का जिक्र करते हुए किसानों की समस्याओं पर सरकार की अनदेखी का आरोप लगाया।

    एक अन्य कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस के दिवंगत नेता योगेंद्र मिश्र के परिजनों से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की और पार्टी की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार हर परिस्थिति में अपने साथियों और उनके परिवारों के साथ खड़ी है।

     राहुल गांधी ने अमेठी से अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए कार्यकर्ताओं का आभार भी व्यक्त किया और भविष्य में फिर आने की बात कही।

  • RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक

    RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक


    नई दिल्ली।
    आरएसएस द्वारा पाकिस्तान से संवाद की वकालत किए जाने को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह के रुख से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए इसे “RSS और पाकिस्तान की जुगलबंदी” बताया और आरोप लगाया कि यह बीजेपी के “अमन की आशा” वाले दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    यह विवाद तब और बढ़ा जब आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया और संवाद को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके इस रुख का पाकिस्तान ने भी स्वागत किया और कहा कि शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत जरूरी है।

    इस मुद्दे पर पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी आरएसएस नेता के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत का मतलब सुरक्षा विकल्पों को छोड़ना नहीं है।

    इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने भी बातचीत के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान नीति को लेकर अलग-अलग विचारधाराओं को सामने ला दिया है। एक तरफ जहां कुछ नेता बातचीत को समाधान मानते हैं, वहीं दूसरी ओर इसे आतंकवाद के पीड़ितों के साथ न्याय से जोड़कर विरोध भी किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह मुद्दा अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की घरेलू राजनीति में भी तीखी बहस का कारण बन गया है, जहां संवाद बनाम सख्त रुख की लड़ाई साफ दिखाई दे रही है।

  • बाबा बागेश्वर की हिन्दुओं से अपील… बोले- चार बच्चे पैदा करो…. एक RSS को समर्पित करो

    बाबा बागेश्वर की हिन्दुओं से अपील… बोले- चार बच्चे पैदा करो…. एक RSS को समर्पित करो

    नागपुर। महाराष्ट्र (Maharashtra) के नागपुर (Nagpur) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम (Bageshwar Dham) के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Pandit Dhirendra Shastri) ने एक बड़ा बयान दिया है, जो चर्चा का विषय बन गया है. भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वो चार बच्चे पैदा करें और उनमें से एक को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के लिए समर्पित करें.

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जमकर तारीफ भी की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बच्चे चार पैदा करो, जिस में एक स्वयंसेवक संघ को दो. उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

    इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत खुद मौजूद थे. इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी कार्यक्रम में शामिल हुए. कार्यक्रम में कई साधु संतों की भी मौजूदगी रही।


    बयान के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं

    भारत दुर्गा मंदिर के शिलान्यास के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. बागेश्वर बाबा के बयान के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है. फिलहाल उनके इस बयान को लेकर अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।