Tag: RTO

  • एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग

    एमपी में 2440 बसों का नियम विरुद्ध पंजीयन! बस ऑपरेटर्स ने अधिकारियों पर साधा निशाना, बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। राज्य में 1 सितंबर 2025 से लागू नए नियमों के बावजूद कथित रूप से 2440 बसों का पंजीयन बिना अनिवार्य टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट के किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। इस पूरे प्रकरण में मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन ने सीधे परिवहन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

    परिवहन आयुक्त उमेश जोगा द्वारा जारी पत्र में यह उल्लेख किया गया है कि 1 सितंबर 2025 से 5 जून 2026 के बीच प्रदेश के विभिन्न आरटीओ, डीटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में कुल 2440 बसों का पंजीयन ऐसे दस्तावेजों के आधार पर किया गया जो नए नियमों के अनुरूप नहीं थे। इनमें 1487 यात्री बसें, 745 शैक्षणिक संस्थानों की बसें, 141 स्कूल बसें और 67 प्राइवेट सर्विस व्हीकल शामिल हैं।

    मध्यप्रदेश बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन ने मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि बस मालिक वाहन खरीदते हैं और पंजीयन के लिए विभाग के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। यदि वाहन नियमों के अनुरूप नहीं था तो उसका पंजीयन होना ही नहीं चाहिए था। ऐसे में जिम्मेदारी परिवहन अधिकारियों की बनती है, जिन्होंने नियमों के विपरीत पंजीयन की अनुमति दी।

    एसोसिएशन का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने नए नियमों की जानकारी होने के बावजूद पुराने और निरस्त किए जा चुके दस्तावेजों के आधार पर बसों का पंजीयन किया। संगठन ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, सेवा से बर्खास्त करने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है।

    दरअसल, केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 6 मार्च 2024 को अधिसूचना जारी कर 1 सितंबर 2025 से बस बॉडी निर्माण से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे। इसके तहत फॉर्म 22B की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी और 13 या उससे अधिक यात्री क्षमता वाली बसों के लिए मान्यता प्राप्त एजेंसी से टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बिना किसी बस का पंजीयन नहीं किया जाना था।

    परिवहन आयुक्त के पत्र के अनुसार नए नियम लागू होने के बाद भी कई कार्यालयों में पुराने फॉर्म 22B के आधार पर पंजीयन किए गए। इसी कारण अब इन पंजीयनों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    मामले का एक चिंताजनक पहलू स्कूल बसों का पंजीयन भी है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार 141 स्कूल बसों का भी कथित रूप से नियम विरुद्ध पंजीयन हुआ। इनमें सबसे अधिक 51 बसें भोपाल और 48 बसें इंदौर में दर्ज की गईं। बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इस प्रकार की अनियमितता को गंभीर माना जा रहा है।

    यदि जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक 387 बसों का पंजीयन इंदौर आरटीओ में हुआ। इसके बाद नीमच में 247, देवास में 220, उज्जैन में 192, आगर मालवा में 168 और भोपाल में 166 बसों का पंजीयन दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि मामला केवल किसी एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि प्रदेशव्यापी है।

    उधर परिवहन विभाग का कहना है कि परिवहन आयुक्त के निर्देशानुसार पूरे मामले की जांच जारी है। जिन वाहनों का पंजीयन नियमों के विपरीत पाया जाएगा, उनका पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    अब सभी की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है, क्योंकि इस मामले का असर हजारों बस संचालकों, यात्रियों और शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ सकता है।

  • खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    खाकी का खौफ खत्म! मुरैना में चेकिंग टीम पर हमला कर ट्रैक्टर सहित फरार हुए आरोपी, पुलिस ने शुरू की नाकाबंदी

    मध्य प्रदेश । मुरैना जिले में चंबल की प्रतिबंधित रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में लिप्त माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें अब कानून और प्रशासन का कोई डर नहीं रह गया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेशनल हाईवे-44 पर नहर के समीप अवैध रेत के परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने उतरी परिवहन विभाग (RTO) की संयुक्त चेकिंग टीम पर हमला करने और उन्हें वाहन से कुचलने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। इस जानलेवा हमले के दौरान मौके पर मौजूद परिवहन अधिकारी और सुरक्षाकर्मी बेहद बाल-बाल बचे।

    प्राप्त विवरण के अनुसार, परिवहन विभाग की टीम वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले संदिग्ध और ओवरलोड वाहनों की नियमित चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान टीम को अवैध उत्खनन कर लाई जा रही रेत से भरी एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली आती हुई दिखाई दी। आरटीओ के कर्मचारियों ने जब नियमानुसार उस वाहन को रुकने का इशारा किया, तो ट्रैक्टर चालक ने वाहन की रफ्तार धीमी करने के बजाय उसे सीधे चेकिंग कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की तरफ मोड़ दिया और उन्हें कुचलने का प्रयास किया।

    वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और आरटीओ अमले ने समय रहते मुस्तैदी दिखाई और सड़क किनारे कूदकर अपनी जान बचाई। शासकीय टीम को निशाना बनाने के तुरंत बाद आरोपी चालक बेहद लापरवाही और तेज गति से ट्रैक्टर-ट्रॉली को दौड़ाते हुए मौके से फरार हो गया। इस अप्रत्याशित हमले से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर क्षेत्र में सघन नाकाबंदी लागू की गई।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा घटना के संबंध में सिविल लाइन थाने में एक औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा डालने, जानलेवा हमला करने और अवैध खनिज परिवहन की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात माफियाओं के खिलाफ आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा हाईवे और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि हमलावर ट्रैक्टर और उसके चालक की सटीक पहचान की जा सके।

    मुरैना और चंबल संभाग में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और प्रशासनिक टीमों पर खनन माफियाओं द्वारा हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी इस क्षेत्र में पुलिस, वन विभाग और राजस्व टीम को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और दावा किया है कि सरकारी अमले पर हमला करने वाले तत्वों को जल्द ही गिरफ्तार कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।