Tag: Rubio

  • US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार

    US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार


    मिशिगन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित दावेदारों के नाम बताए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Foreign Minister Marco Rubio) का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में कई मजबूत नेता हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की टीम को मजबूत बताते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा।

    मिशिगन में रैली से पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी किसी एक नेता को सबसे आगे बताना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी में कई अच्छे नाम मौजूद हैं।

    ट्रंप ने कहा “मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी नजर में कौन है, लेकिन अभी थोड़ा जल्दी है।” उन्होंने जेडी वेंस और मार्को रुबियो का नाम लेते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के पास मजबूत नेताओं की कमी नहीं है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास ऐसी टीम नहीं है।


    रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल को लेकर भी बोले ट्रंप

    मिशिगन रवाना होने से पहले ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेल उद्योग को मौजूदा संघर्ष के कारण बंधक नहीं बनने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनके विचार में यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था।


    3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव पर नजर

    अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसका असर ट्रंप के विधायी एजेंडे और वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर पड़ सकता है।


    ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा

    ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चिंताओं और घटती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां भी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सितंबर में प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत तक गिर गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 से उसके सर्वे रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनाव से पहले किसी राष्ट्रपति की रेटिंग का यह सबसे निचला स्तर था।

  • मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

    राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

    विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
    इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

    मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध

    ईरान-अमेरिका बातचीत में नरमी के संकेत, लेकिन समझौता अभी अधर में; कुछ अहम मुद्दों पर जारी है गतिरोध



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में हल्की नरमी के संकेत जरूर दिख रहे हैं, लेकिन किसी अंतिम समझौते पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में प्रगति हो रही है और जल्द कुछ सकारात्मक जानकारी सामने आ सकती है।

    वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना है कि पिछले एक सप्ताह में दोनों देशों के रुख में नजदीकी आई है, लेकिन अहम मुद्दों पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ बातचीत में सुधार का मतलब यह नहीं है कि समझौता तय हो चुका है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी अपने प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी समझौते में जल्दबाज़ी न की जाए और बातचीत को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाए।

    ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि समझौता अमेरिका की पाबंदियों की वजह से अभी अटका हुआ है, जबकि दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि एक-दो मुद्दों पर अब भी गंभीर मतभेद कायम हैं।

    ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने इस बातचीत का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि किसी ऐसे समझौते पर सहमति बने जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट ढांचा तय हो।फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर माना जा रहा है।