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  • पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि

    पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि


    नई दिल्ली।
    पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026)/ कमला एकादशी (Kamala Ekadashi) का व्रत अधिक मास में किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) में एकादशी तिथि होने के कारण पद्मिनी एकादशी का व्रत तीन साल में एक बार ही आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की अधिक कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में भी किया गया है।

    मान्यता है कि श्रद्धा भाव से जो कोई भी इस व्रत को करेगा उसे जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह व्यक्ति अक्षय पुण्य प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वालों को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर किन किन चीजों का दान करना चाहिए साथ ही जानें व्रत का नियम।


    पद्मिनी एकादशी व्रत के नियम

    पद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साथ ही हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ही करना शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल आदि कटवाना नहीं चाहिए।

    पद्म पुराण में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति घर पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करता है उसे एक गुना फल मिलता है। वहीं, नदी के तट पर जप करने से दो गुना, गोशाला में जाकर जप करने से सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृहं में जप करने से एक हजार गुना, भगवान शिव के मंदिर में जप करने और तुलसी के पास जप करने से लाख गुना फल मिलता है।


    पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करें

    पद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन अन्न और फल का दान करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के दौरान अधिक गर्मी के चलते जल से भरा घड़ा, मौसमी फल जैसे आम, खरबूजा, तरबूज और बाकी फलों का दान करना चाहिए। अधिक मास के दौरान गुड़ और तिल का दान करना भी सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जरुरतमंद लोगों को चप्पल, वस्त्र और छाता आदि चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।

    पुरुषोत्तम मास की यह पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है इसलिए इस दिन दान के अलावा मंदिरों में दीप दान भी करना चाहिए। मंदिर में घी के कम से कम पांच दीपक जरुर जलाने चाहिए।

  • हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें

    हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है जिन्हें संकट मोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ मंगलवार का व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करता है उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    मंगलवार व्रत की महिमा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है मानसिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है।

    मंगलवार व्रत रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले साधक को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय माना जाता है।

    पूजा के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर साधना करें। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या के समय प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है।

    व्रत के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं और दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक होता है। धूम्रपान और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

    कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है। जैसे महिलाओं को हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए और पूजा के दौरान हनुमान जी को चरणामृत से स्नान नहीं कराया जाता है। यह परंपराएं शास्त्रों में वर्णित हैं और इनका पालन करना शुभ माना जाता है।

    मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। जब व्यक्ति पूरे मन से इस व्रत का पालन करता है तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार का व्रत रखते हैं तो इन नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका व्रत पूर्ण और फलदायी बन सके।

  • चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    चारधाम में नो एंट्री पर इमाम की दो टूक: मक्का-मदीना की तरह ,गंगोत्री के भी अपने नियम मुस्लिमों का वहां क्या काम?

    नई दिल्ली । देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थलों बद्रीनाथ केदारनाथ और गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने की सुगबुगाहट ने देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर इसे लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इस संभावित फैसले का पुरजोर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। इमाम इलियासी ने इसे पूरी तरह आस्था का विषय करार देते हुए तर्क दिया है कि जिस प्रकार इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है उसी तरह हिंदू धर्मस्थलों को भी अपने नियम तय करने का पूरा अधिकार है।

    आस्था और मर्यादा की दलील इमाम उमर अहमद इलियासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर धर्मस्थल की अपनी गरिमा और मर्यादा होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एक मुसलमान का गंगोत्री या केदारनाथ जैसे पवित्र सनातनी केंद्रों में क्या काम? उनके अनुसार यदि कोई मुस्लिम ऐसी जगहों पर जाता है जहां सदियों पुरानी सनातनी परंपराएं जुड़ी हैं तो वहां वैचारिक या शारीरिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उन्होंने नसीहत दी कि मुसलमानों को दूसरे धर्मों की अत्यंत पवित्र जगहों पर जाने से परहेज करना चाहिए। इमाम ने तिरुपति बालाजी मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी इसी प्रकार के कड़े नियम लागू हैं और सभी समुदायों को एक-दूसरे के धार्मिक नियमों और सीमाओं का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक इस मुद्दे पर राजनीति करना व्यर्थ है क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है।

    मंदिर समितियों की एकजुटता वर्तमान स्थिति यह है कि गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय ले लिया है। वहीं बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने सभी संबंधित हितधारकों और तीर्थ पुरोहितों के साथ इस विषय पर आम सहमति बना ली है। अब बस बोर्ड की बैठक में इसे औपचारिक रूप दिया जाना बाकी है। हालांकि समितियों ने यह स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में सच्ची आस्था रखने वाले किसी भी व्यक्ति का स्वागत किया जाएगा चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि का हो। दूसरी ओर हरिद्वार की गंगा सभा ने भी हर की पौड़ी पर इसी तरह की पाबंदी लगाने की मांग तेज कर दी है जिससे यह अभियान पूरे उत्तराखंड में फैलता दिख रहा है।

    सियासी घमासान और विरोध के स्वर जैसे-जैसे यह मामला चर्चा में आ रहा है उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे भारतीय जनता पार्टी की सोची-समझी रणनीति बताया है। उत्तराखंड कांग्रेस का आरोप है कि सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के भावनात्मक विवाद पैदा कर रही है। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगोत्री जैसे ऊंचे और पवित्र स्थानों पर पहले से ही कोई मुसलमान नहीं जाता लेकिन वहां पहचान साबित करने जैसी अनिवार्य शर्तें लगाना समाज में नफरत का जहर घोलने जैसा है। फिलहाल उत्तराखंड सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर फूंक-फूंक कर कदम रखने का संकेत दिया है और कहा है कि सभी मंदिर समितियों का पक्ष सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा।