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  • प्लास्टिक नोटों में जानवरों की चर्बी जैसी अफवाहों का बाजार गर्म… जानिए क्या है सच?

    प्लास्टिक नोटों में जानवरों की चर्बी जैसी अफवाहों का बाजार गर्म… जानिए क्या है सच?


    नई दिल्ली।
    जेब में रखा नोट (Note) कुछ ही समय में मुड़ जाता है, गंदा हो जाता है और कई बार फट भी जाता है। इसी समस्या के बीच भारत (India) में पॉलिमर यानी प्लास्टिक (Plastic Currency) आधारित नोट लाने की तैयारी हो रही है। इसे लेकर कई तरह की बातें और अफवाहें भी चल रही हैं कि क्या कागज के नोट बंद हो जाएंगे? क्या प्लास्टिक के नोट ज्यादा टिकेंगे? यह कैसे अलग है? आखिर सरकार ने क्या मंजूरी दी है? क्या इन नोटों में पशु की चर्बी से बनी सामग्री भी डाली जाएगी? ये नोट कब तक आपकी जेब में आएंगे? इससे क्या बदलेगा? आइए जानते हैं…


    क्या है पॉलिमर नोट?

    पॉलिमर नोट (Polymer note) कागज के बजाय एक खास प्लास्टिक आधारित सामग्री से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका ज्यादा टिकाऊ होना है। पॉलिमर सामग्री पानी, गंदगी और फटने के मामले में कागज की तुलना में ज्यादा मजबूत होती है। इसका फायदा खासकर उन छोटे नोटों में हो सकता है जो रोजाना बहुत ज्यादा इस्तेमाल होते हैं। ऐसे नोट जल्दी खराब होते हैं और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। पॉलिमर नोट ज्यादा समय तक चलें तो नए नोट छापने और पुराने नोट बदलने की जरूरत कम हो सकती है।


    सरकार ने अभी क्या मंजूरी दी है?

    भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के बाद सरकार को पॉलिमर नोटों के क्षेत्रीय परीक्षण का प्रस्ताव भेजा था। यह प्रस्ताव भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत भेजा गया था। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर नोट, यानी कुल दो अरब नोटों का क्षेत्रीय परीक्षण किया जाएगा। अगर परीक्षण सफल रहा तो इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों को नियमित रूप से जारी किया जा सकता है।


    क्या कागज के पुराने नोट बंद हो जाएंगे?

    नहीं। सरकार ने साफ किया है कि पॉलिमर नोट कागज के नोटों को हटाकर नहीं लाए जाएंगे। अगर परीक्षण सफल होता है और इनकी नियमित आपूर्ति शुरू होती है तो पॉलिमर नोट मौजूदा कागज के नोटों के साथ ही चलेंगे। इसलिए पॉलिमर नोट आने का मतलब यह नहीं है कि लोगों के पास मौजूद कागज के नोट अचानक बेकार हो जाएंगे।


    इन्हें लाने का मुख्य मकसद क्या है?

    आरबीआई का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक चलते हैं। विशेष रूप से छोटे मूल्यवर्ग के नोट, जिनका उपयोग सबसे अधिक होता है और जो जल्दी खराब हो जाते हैं, उनके लिए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। इससे नोटों की बार-बार छपाई और प्रतिस्थापन पर आने वाली लागत में भी कमी आने की संभावना है। पॉलिमर नोटों में उन्नत सुरक्षा तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो सहित कई आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल किए जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों की पहचान आसान होगी और जालसाजी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।


    क्या पहले भी हुई थी प्लास्टिक के नोटों को लाने की कोशिश?

    भारत में पॉलिमर नोट का विचार नया नहीं है। 2009 में इस दिशा में काम शुरू हुआ था। इसके बाद 2012 में 10 रुपये के एक अरब पॉलिमर नोटों का क्षेत्रीय परीक्षण करने की योजना बनाई गई। इसके लिए अलग-अलग भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों वाले पांच शहर चुने गए थे जिनमें कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे। उस समय भी मकसद कम मूल्यवर्ग के नोटों की उम्र बढ़ाना था।

    2012 का परीक्षण क्यों आगे नहीं बढ़ पाया?
    उस समय पॉलिमर नोटों को तेज गति से चलने वाली मशीनों में इस्तेमाल करने पर घर्षण और स्थैतिक बिजली की समस्या सामने आई। इससे नोट आपस में चिपकने लगे और मशीनों में एक साथ कई नोट जाने की परेशानी हुई। इसके अलावा उस समय पॉलिमर सामग्री का इस्तेमाल, उसकी स्याही के घिसने, अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन और मशीनों के साथ अनुकूलता जैसी चुनौतियां भी सामने आईं।


    पुरानी योजना के सामने और क्या दिक्कतें थीं?

    उस समय पॉलिमर नोट बनाने की सामग्री चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों से आयात की जाती थी। आयात से जुड़ी प्रक्रियाएं और सामग्री की कीमत भी चुनौती थीं। इसके अलावा कई वाणिज्यिक बैंकों ने अपने मौजूदा ढांचे को पॉलिमर नोटों के अनुरूप बदलने के लिए होने वाली अतिरिक्त पूंजीगत लागत को लेकर चिंता जताई थी।

    2016 की नोटबंदी के बाद इस योजना की रफ्तार और प्रभावित हुई। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2016-17 में मुद्रा छपाई की लागत 7,965 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। इसके बाद पॉलिमर नोट से जुड़े प्रयोग आगे नहीं बढ़ सके।


    इस बार पिछली समस्या से कैसे निपटा जा रहा है?

    इस बार पॉलिमर सामग्री में एंटी-स्टैटिक कोटिंग का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य स्थैतिक बिजली की समस्या को कम करना है, ताकि नोट आपस में चिपकें नहीं और मशीनों में एक साथ कई नोट जाने या मशीन के अटकने जैसी समस्या कम हो। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी टेंडर के अनुसार, ऐसी सामग्री मांगी गई है जिस पर आवश्यक अपारदर्शी परत के साथ एंटी-स्टैटिक कोटिंग हो और जो छपाई व स्याही के चिपकने के लिए उपयुक्त हो।


    नोट में सुरक्षा के लिए क्या?

    पॉलिमर सामग्री में सुरक्षा विशेषताओं को शामिल करने की क्षमता मांगी गई है। इसमें पारदर्शी खिड़की में चित्र, धातु जैसा अंक, चुंबकीय सुरक्षा धागा, छाया चित्र और चमक बदलने वाला पैटर्न जैसी विशेषताएं शामिल हैं। इस तरह सुरक्षा संबंधी कुछ विशेषताओं को पॉलिमर सामग्री में ही शामिल किया जा सकता है।


    नोटों में पशु चर्बी की अफवाह में कितना दम है?

    इस तरह की बातें सिर्फ कोरी अफवाह हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी टेंडर में पॉलिमर सामग्री को लेकर एक खास शर्त रखी गई है। इसमें पशु वसा यानी एनिमल टैलो या पशु का डीएनए नहीं होना चाहिए। इसके लिए कंपनी को इसका प्रमाण पत्र देना होगा। केवल प्रमाण पत्र ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि कंपनियों की ओर से दिए गए पॉलिमर नमूनों की प्रयोगशाला में जांच भी की जाएगी।


    आरबीआई की नोट छापने वाली कंपनी ने क्या प्रक्रिया शुरू की?

    भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड यानी बीआरबीएनएमपीएल ने 17 जुलाई 2026 को पॉलिमर सब्सट्रेट की आपूर्ति के लिए वैश्विक रुचि आमंत्रण जारी किया है। इसमें ऐसी योग्य कंपनियों से रुचि मांगी गई है, जो भारतीय बैंक नोटों की छपाई के लिए सुरक्षा विशेषताओं वाली अपारदर्शी पॉलिमर सब्सट्रेट शीट बना और उपलब्ध करा सकें। यह अभी अंतिम खरीद निविदा नहीं है। इस प्रक्रिया में योग्य कंपनियों की पहचान की जाएगी और आगे मुख्य निविदा की प्रक्रिया हो सकती है।

  • अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    अभिनेता ऋतिक रोशन और सबा आजाद के रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुईं कई तरह की अटकलें

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन और अभिनेत्री व संगीतकार सबा आजाद के व्यक्तिगत संबंधों को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और अटकलें तेजी से फैल रही हैं। पिछले कुछ समय से दोनों कलाकारों के रिश्ते में बदलाव को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन चर्चाओं की मुख्य वजह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई कुछ कथित तस्वीरें और प्रोफाइल बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर एक नेटवर्किंग ऐप से जुड़े प्रोफाइल की तस्वीरें प्रसारित हो रही हैं, जिसमें अभिनेता ऋतिक रोशन की तस्वीर और उनके पेशे का विवरण दर्ज है। इन वायरल तस्वीरों के आधार पर कई लोग यह अनुमान लगा रहे हैं कि अभिनेता और सबा आजाद के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, प्रसारित की जा रही इन जानकारियों और तस्वीरों की सत्यता तथा प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

    ऑनलाइन मंचों पर इन खबरों के सामने आने के बाद प्रशंसकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की ओर से मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। जहां कुछ लोग इन अफवाहों के आधार पर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेता के कई प्रशंसकों ने उनका बचाव किया है। प्रशंसकों का कहना है कि किसी भी वायरल सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकालना अनुचित है और संभव है कि यह किसी फर्जी प्रोफाइल या पुरानी जानकारी का परिणाम हो।

    गौरतलब है कि ऋतिक रोशन और सबा आजाद के बीच संबंधों की खबरें पहली बार वर्ष 2021 के अंत में सामने आई थीं। इसके बाद वर्ष 2022 की शुरुआत में दोनों को कई सार्वजनिक स्थलों और कार्यक्रमों में एक साथ देखा गया, जिसके बाद उनके रिश्ते को लेकर आधिकारिक रूप से बातें सामने आईं। दोनों कलाकारों को अक्सर विभिन्न फिल्म समारोहों, पारिवारिक आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ देखा जाता रहा है, जहां उनकी बॉन्डिंग की काफी सराहना भी की जाती थी।

    ऋतिक रोशन के व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उन्होंने वर्ष 2000 में सुजैन खान से विवाह किया था। हालांकि, वर्ष 2014 में दोनों ने आपसी सहमति से एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया था। इसके बाद से ही ऋतिक रोशन अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। वहीं दूसरी तरफ सबा आजाद भी फिल्म उद्योग का एक जाना-माना नाम हैं, जो अभिनय के साथ-साथ संगीत और रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं।

    वर्तमान में प्रसारित हो रही इन तमाम अटकलों और सोशल मीडिया दावों पर ऋतिक रोशन या सबा आजाद की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दोनों ही कलाकारों ने इस पूरे विषय पर चुप्पी साध रखी है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि सेलिब्रिटीज के व्यक्तिगत जीवन को लेकर अक्सर इस तरह की निराधार अफवाहें उड़ती रहती हैं और जब तक संबंधित पक्षों की ओर से कोई बयान नहीं आता, तब तक इन खबरों को महज एक अटकलबाजी ही माना जाना चाहिए।

  • उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा की सीक्रेट शादी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार का दावा, बॉलीवुड में मची हलचल

    उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा की सीक्रेट शादी को लेकर वरिष्ठ पत्रकार का दावा, बॉलीवुड में मची हलचल

    नई दिल्ली । हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले चर्चित फिल्म निर्माता राम गोपाल वर्मा और लोकप्रिय अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। 90 के दशक में दोनों के रिश्तों और डेटिंग को लेकर कई तरह की अफवाहें उड़ती रही हैं, लेकिन हाल ही में एक वरिष्ठ फिल्म पत्रकार के दावे ने इस पुराने मामले को फिर से तरोताजा कर दिया है।

    एक टॉक शो के दौरान वरिष्ठ पत्रकार ने दावा किया कि राम गोपाल वर्मा और उर्मिला मातोंडकर ने एक समय गुप्त रूप से विवाह रचा लिया था। उनके अनुसार, उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी दक्षिण भारतीय फिल्मों के दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी के माध्यम से मिली थी। पत्रकार ने बताया कि चिरंजीवी ने उनसे बातचीत के दौरान आंध्र प्रदेश के एक मंदिर में हुई इस गुप्त शादी का जिक्र किया था और इस बात की पुष्टि के लिए प्रमाण भी साझा किए थे।

    पत्रकार के मुताबिक, इस खबर की सच्चाई जानने के लिए उन्होंने उस दौरान अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर और निर्देशक राम गोपाल वर्मा दोनों से संपर्क किया था। हालांकि, उर्मिला ने इन बातों पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी, जबकि निर्देशक ने इस पूरे विषय पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया था। दोनों कलाकारों ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इस प्रकार के दावों को स्वीकार नहीं किया।

    इसके अलावा, रिपोर्ट में दोनों के बीच दूरियां आने का कारण भी बताया गया है। कहा गया कि अभिनेत्री इस रिश्ते को कानूनी तौर पर आधिकारिक दर्जा देना चाहती थीं, जबकि निर्देशक इसके लिए तैयार नहीं थे। इसी वैचारिक मतभेद के कारण दोनों ने आखिरकार अपने रास्ते अलग कर लिए और अपने-अपने पेशेवर करियर पर ध्यान केंद्रित किया।

    उर्मिला मातोंडकर और राम गोपाल वर्मा ने 90 के दशक में ‘रंगीला’, ‘सत्या’ और ‘कौन’ जैसी कई सुपरहिट और यादगार फिल्मों में एक साथ काम किया है। इन फिल्मों ने भारतीय सिनेमा में नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। सालों बाद सामने आए इस नए दावे ने एक बार फिर बी-टाउन के गलियारों में पुरानी यादों और चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

  • सीहोर में शांति भंग के आरोप में हिंदूवादी नेता कालू भट्ट गिरफ्तारपुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई

    सीहोर में शांति भंग के आरोप में हिंदूवादी नेता कालू भट्ट गिरफ्तारपुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई


    सीहोर । सीहोर में शनिवार को उस समय तनाव बढ़ गया जब हिंदूवादी नेता और पूर्व पार्षद कालू भट्ट को शांति भंग करने के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कालू भट्ट पर आरोप है कि वह भोपाल नाके पर तिरंगे झंडे के नीचे खड़े होकर भड़काऊ भाषण दे रहे थे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उन्हें हिरासत में ले लिया और उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए सीहोर एसडीएम कार्यालय ले जाया गया। इस दौरान एक मीडियाकर्मी को भी पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लियाहालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया।

    सीहोर में पिछले कुछ दिनों से माहौल तनावपूर्ण बना हुआ थाविशेष रूप से हरदा में करणी सेना पर हुए पथराव के बाद। इसके बाद से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पुलिस ने इस दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं मुस्लिम समाज ने भी प्रशासन से सोशल मीडिया पर माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।पुलिस प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और शनिवार को कालू भट्ट के भड़काऊ बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें और शांति बनाए रखें। सीहोर एसडीएम तन्मय वर्मासीएसपी डॉ. अभिनंदन शर्मा सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर उपस्थित थे और सुरक्षा का ध्यान रख रहे थे।
    हालांकिप्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित किया गया हैलेकिन अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और कालू भट्ट को शीघ्र ही कोर्ट में पेश किया जाएगा।