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  • मैक्रों का ट्रंप-नेतन्याहू पर हमला, बोले- फ्रांस की कीमत पर चला रहे सियासी अभियान; क्या है पूरा विवाद?

    मैक्रों का ट्रंप-नेतन्याहू पर हमला, बोले- फ्रांस की कीमत पर चला रहे सियासी अभियान; क्या है पूरा विवाद?


    दोहा।
    फ्रांस में हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों पर कड़ी नाराजगी जताई है। मैक्रों ने आरोप लगाया कि विदेशी नेता फ्रांस के हालात का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार फर्जी तस्वीरों के जरिए गलत सूचनाएं फैलाए जाने पर भी सवाल उठाए। दूसरी ओर, ट्रंप ने फ्रांस में हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नेतन्याहू ने इसे ‘चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण’ बताते हुए फ्रांसीसी सरकार की आलोचना की। घटनाओं के बाद फ्रांस के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है और कुछ स्थानों पर कर्फ्यू भी लगाया गया है।

    मैक्रों ने विदेशी नेताओं को क्या कहा?

    फ्रांस में हालिया हिंसा को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की टिप्पणियों के बीच मैक्रों ने विदेशी नेताओं की आलोचना की। बुधवार को कतर की राजधानी दोहा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ नेता फ्रांस की कीमत पर अपना राजनीतिक अभियान चला रहे हैं।

    मैक्रों ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि अटलांटिक के इस पार और उस पार, दोनों तरफ के नेता चुनावी अभियान की मुद्रा में हैं। उन्होंने कहा, “कुछ लोग फ्रांस की कीमत पर अपना अभियान चलाते हैं। इनमें ऐसे नेता भी हैं, जो यहां इस क्षेत्र में या अटलांटिक की दूसरी तरफ अपने राजनीतिक अभियान में जुटे हैं।”

    मैक्रों तीन दिवसीय कतर और खाड़ी क्षेत्र की यात्रा पर हैं। उनकी इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य फ्रांस में जीवनयापन की बढ़ती लागत के संकट के बीच देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करना भी है।

    ट्रंप ने फ्रांस के हालात के लिए किसे ठहराया जिम्मेदार?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के लिए आव्रजन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा। ट्रंप ने फ्रांस की सीमाएं बंद नहीं करने को लेकर मैक्रों की आलोचना भी की।

    व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, उसका संबंध स्कूलों या किसी दूसरी समस्या से नहीं, बल्कि आव्रजन से है। उन्होंने मैक्रों को अपना दोस्त बताते हुए कहा कि दुनिया भर से लोगों को फ्रांस में आने देने का फैसला गलत था।

    ट्रंप ने अमेरिकी मतदाताओं को चेतावनी देते हुए फ्रांस के हालात की तुलना अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की संभावित जीत के परिणामों से भी की। उनके इन बयानों ने फ्रांस में आव्रजन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।

    एआई से बनी फर्जी तस्वीरों पर मैक्रों ने जताई नाराजगी

    मैक्रों ने कहा कि फ्रांस में हुई घटनाओं के पीछे विदेशी हस्तक्षेप के स्पष्ट संकेत नहीं हैं, लेकिन घटनाओं के बाद गलत सूचनाएं फैलाने के लिए विदेशी स्तर पर हेरफेर किया गया। उनके मुताबिक, इसके चलते कई विदेशी नेताओं की ओर से गलत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियां सामने आईं।

    उन्होंने एआई की मदद से तैयार की गई उन तस्वीरों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें फ्रांस में ऐसी घटनाएं दिखाई गईं, जो वास्तव में हुई ही नहीं थीं। मैक्रों ने कहा कि कुछ लोगों ने फ्रांस में प्रवासियों और इस्लामवादियों की भारी भीड़ के घुस आने के दावे किए।

    जब एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि क्या उनकी टिप्पणी सीधे ट्रंप के लिए थी, तो मैक्रों ने जवाब दिया, “हां।” उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा परिस्थितियां बताती हैं कि फ्रांस से कौन प्यार करता है और कौन नहीं। उनके अनुसार, जो लोग इस समय उनके देश के बारे में बुरा बोल रहे हैं, वे फ्रांस से प्यार नहीं करते।

    नेतन्याहू ने फ्रांस पर क्या आरोप लगाए?

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को फ्रांस के हालात को ‘चरमपंथी इस्लाम का आक्रमण’ बताया। टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, फ्रेंच भाषा के समाचार चैनल आई24न्यूज को दिए साक्षात्कार में नेतन्याहू ने फ्रांसीसी अधिकारियों पर स्थिति का पहले से आकलन करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

    नेतन्याहू ने कहा, “उन्होंने समय रहते तैयारी नहीं की। उन्होंने बस हार मान ली। वे चरमपंथी इस्लाम के आक्रमण के आगे झुक गए।”

    फ्रांस को सलाह देने के सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि उसे चरमपंथियों के खिलाफ लड़ना चाहिए और तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनानी चाहिए। उनके इस बयान ने फ्रांस में सुरक्षा, आव्रजन और धार्मिक चरमपंथ को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विवाद का रूप दे दिया।

    फ्रांस में कैसे हैं हालात?

    सप्ताहांत में फ्रांस के कई इलाकों में प्रदर्शन हुए। अधिकांश मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शनिवार को लूटपाट और सुरक्षा बलों के साथ झड़पों के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और कुछ क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया।

    बोर्दो शहर में अकेले बाहर निकलने वाले नाबालिगों के लिए एक सप्ताह का रात्रिकालीन कर्फ्यू लगाया गया है। गिरोंद और नोवेल-अकितेन की प्रीफेक्ट सोफी ब्रोका ने सोमवार को इस संबंध में आदेश घोषित किया था। यह आदेश मंगलवार से 26 अक्टूबर की सुबह तक प्रभावी रहेगा।

    आदेश के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिग रात 10 बजे से सुबह सात बजे तक माता-पिता या कानूनी अभिभावक के बिना सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकेंगे।

    फ्रांस की घटनाओं को लेकर अब केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आव्रजन, धार्मिक चरमपंथ, सोशल मीडिया पर गलत सूचना और विदेशी नेताओं की राजनीतिक बयानबाजी भी विवाद के केंद्र में है। मैक्रों ने जहां फ्रांस के आंतरिक मामलों पर विदेशी नेताओं की टिप्पणियों को राजनीतिक अभियान का हिस्सा बताया है, वहीं ट्रंप और नेतन्याहू ने फ्रांसीसी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

  • Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान

    Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad ) शुक्रवार को उस वक्त खौफ और दहशत में डूब गई, जब जुमे की नमाज़ के दौरान एक शिया इमामबाड़े (Shia Imambaras) को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला (Suicide Blast) कर दिया गया। इस भीषण विस्फोट में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 170 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई घायलों की हालत गंभीर है, ऐसे में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। धमाका ठीक उसी समय हुआ, जब नमाज़ शुरू हो रही थी और इमामबाड़ा पूरी तरह भरा हुआ था।


    गेट पर रोका, गोलियाँ चलीं और फिर मौत का मंजर

    पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आत्मघाती हमलावर को इमामबाड़े के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने रोक लिया था। इसी दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने सुरक्षा कर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कुछ गार्ड घायल हो गए। इसके बाद वह लगभग 20 मीटर तक दौड़ता हुआ अंदर घुसा और नमाज़ के बीच खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। यह आतंकी वारदात इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुई। वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पलभर में इबादत की जगह मातम में बदल गई।


    “हर तरफ चीखें थीं, खून था” — आंखों देखा हाल

    एक चश्मदीद ने बताया, “हमलावर को गेट पर रोका गया था। तभी गोलियों की आवाज आई। इसके बाद वह अंदर की ओर भागा और नमाज़ के दौरान जाकर धमाका कर दिया।” वहीं, हुसैन शाह ने बताया कि वह इमामबाड़े के आंगन में नमाज़ अदा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अचानक एक बहुत ज़ोरदार धमाका हुआ। उसी पल समझ आ गया कि कोई बड़ा हमला हुआ है।” हुसैन शाह के मुताबिक, जब वे अंदर पहुंचे तो हर तरफ अफरातफरी थी। “चारों ओर चीख-पुकार मची थी, खून बिखरा हुआ था। मैंने करीब 30 शव खुद देखे, जबकि घायलों की संख्या उससे कहीं ज़्यादा थी।”


    धमाके से कांपी इमारत, आसपास के घर भी क्षतिग्रस्त

    विस्फोट की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि इमामबाड़े की तीन मंज़िला इमारत की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं। आसपास की रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों और बुज़ुर्गों समेत लगभग 200 लोग घायल हो गए। हालात इतने भयावह थे कि घायलों को स्ट्रेचर के अलावा निजी गाड़ियों और यहां तक कि कारों की डिक्की में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई लोग खून से लथपथ पड़े थे और हर कोई अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहा था।


    अस्पतालों में इमरजेंसी, मरीज रावलपिंडी भेजे गए

    हमले के तुरंत बाद इस्लामाबाद के PIMS (पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), पॉलीक्लिनिक अस्पताल और CDA अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इस्लामाबाद के डिप्टी कमिश्नर इरफान नवाज़ मेमन ने बताया कि घायलों की संख्या अधिक होने के कारण कई मरीजों को रावलपिंडी के अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।


    इलाका सील, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

    धमाके के बाद पाकिस्तान आर्मी, रेंजर्स और पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सील कर दिया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा घेरा कैसे टूटा और हमलावर इमामबाड़े के अंदर तक कैसे पहुंचा। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर इस्लामाबाद में मौजूद हैं। घटना के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।