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  • इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया

    इजरायल ने सीरिया के इदलिब में एयरबेस पर किए हवाई हमाले…. रनवे को उड़ाया


    नई दिल्ली। 1
    8 अगस्त 2026 की रात सीरिया (Syria) के उत्तर-पश्चिमी प्रांत इदलिब (Eastern Northwestern Province Idlib) के पूर्वी इलाके में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस (Abu al-Duhur Military Airbase) पर चार हवाई हमले हुए हैं. स्थानीय सीरियाई स्रोत, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कुछ समाचार एजेंसियों ने बताया कि हमलों का मुख्य निशाना एयरबेस का रनवे था. आकाश में रोशनी वाले फ्लेयर छोड़े जाने का भी जिक्र है, जो आमतौर पर रात के ऑपरेशन में लक्ष्य को रोशन करने या निगरानी के लिए इस्तेमाल होते हैं।

    इन हमलों को इजरायली लड़ाकू विमानों द्वारा अंजाम दिया गया बताया, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में अभी यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि हमला किसने किया. अब तक इजरायल, तुर्की या सीरिया की नई सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए ये खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से पूरी तरह पुष्ट नहीं हुई हैं।

    अबू अल-दुहुर एयरबेस सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान महत्वपूर्ण रहा है. 2012 से 2015 तक विद्रोही ताकतों ने इसे घेरे रखा था और आखिरकार कब्जा कर लिया था. बाद में असद शासन ने इसे वापस लिया, लेकिन दिसंबर 2024 में असद शासन के पतन के बाद विद्रोही समूहों ने इसे फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया.

    फिलहाल यह बेस सीरिया की नई और सीमित वायुसेना के नियंत्रण में बताया जाता है. यहां पुराने सोवियत काल के Su-22 लड़ाकू-बमवर्षक, L-39 ट्रेनर विमान और कुछ हेलीकॉप्टर रखे गए हैं. हाल के हफ्तों में इन पुराने Su-22 विमानों के प्रशिक्षण उड़ानें भरने की खबरें आई थीं, जिससे इजरायल में चिंता जताई गई थी कि नई सीरियाई वायुसेना धीरे-धीरे अपनी क्षमताएं बढ़ा रही है।


    रणनीतिक महत्व और संभावित उद्देश्य

    इदलिब क्षेत्र तुर्की के प्रभाव क्षेत्र के करीब है और सीरिया के नए प्रशासन के लिए उत्तरी हिस्से में नियंत्रण बनाए रखने के लिहाज से अहम है. रनवे को निशाना बनाना यह संकेत देता है कि हमला करने वाली ताकत एयरबेस की परिचालन क्षमता को सीमित करना चाहती थी, ताकि विमान उड़ान न भर सकें.

    इजरायल लंबे समय से सीरिया में किसी भी सैन्य क्षमता के विकास को रोकने की नीति अपनाता रहा है, खासकर असद शासन के पतन के बाद जब उसने कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, ताकि हथियार और विमान नए प्रशासन के हाथ में पूरी तरह न जा सकें. हालिया Su-22 उड़ानों के बाद इस हमले को उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में तुर्की बलों की मौजूदगी का भी जिक्र है, जिससे क्षेत्रीय जटिलताएं और बढ़ सकती हैं।


    क्षेत्रीय प्रभाव और अनिश्चितता

    यह घटना मध्य पूर्व की नाजुक सुरक्षा स्थिति को और तनावपूर्ण बना सकती है. सीरिया की नई सरकार अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने की कोशिश कर रही है, जबकि इजरायल अपनी सुरक्षा रेखा बनाए रखना चाहता है. तुर्की की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि वह इदलिब में प्रभाव रखता है.

    फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन उपलब्ध नहीं है. न ही किसी बड़े हताहत की पुष्टि हुई है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या सैटेलाइट चित्र नहीं आते, तब तक पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होगी. यह घटना दिखाती है कि असद के बाद के सीरिया में भी बाहरी शक्तियां सक्रिय रूप से सैन्य संतुलन प्रभावित कर रही हैं.

  • कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित

    कोलकाता एयरपोर्ट से हटेगी बांकड़ा मस्जिद…. रनवे से मात्र 240 मीटर पर दूरी पर है स्थित


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में शुभेंदु सरकार (Shubhendu Sarkar) आने के बाद कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कोलकाता एयरपोर्ट (Kolkata Airport) पर बनी बांकड़ा मस्जिद (Bankada Mosque) को वहां से हटाया जाएगा। यह मस्जिद एयरपोर्ट के हाई सिक्योरिटी एयरसाइड जोन के अंदर बनी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार, रनवे से कम से कम 240 मीटर की दूरी पर ही कोई निर्माण होना चाहिए। इस मस्जिद को अब वहां से हटाया जाएगा।

    कोलकाता एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे के नजदीक बनी बांकड़ा मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना को कन्फर्म किया है। एयरपोर्ट डायरेक्टर विक्रम सिंह ने कहा कि पुरानी टर्मिनल बिल्डिंग को इस साल हज ऑपरेशन पूरा होने के बाद गिरा दिया जाएगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर मौजूद यह मस्जिद लगभग 130 सालों से भी पुरानी बताई जाती है।


    मस्जिद हटने से दिक्कतें होंगी दूर

    इस मस्जिद को वहां से हटाकर दूसरी जगह ले जाने से एयरपोर्ट पर आ रहीं तमाम ऑपरेशनल दिक्कतें दूर हो सकती हैं। बता दें कि पिछले कई दशकों में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने रनवे से मस्जिद हटाने की कई कोशिश की थी। यहां तक कि ज्योति बसु, ममता बनर्जी की सरकारों में भी इसे हटाने के प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल की।


    रनवे के काफी करीब है मस्जिद

    विमानन अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद के रनवे के करीब होने से सुरक्षा, नेविगेशन और भविष्य के विस्तार में बाधा पैदा होती है। यह मस्जिद सेकेंडरी रनवे के छोर से लगभग 165 मीटर की दूरी पर स्थित है, जबकि मानकों के अनुसार अधिक सुरक्षा दूरी होनी चाहिए। पिछले महीने राज्य में शुभेंदु सरकार बनने के बाद इसे हटाने के लिए बातचीत तेज हुई थी। मस्जिद प्रबंधन और प्रशासन के बीच भी बातचीत से सहमति बनाने की कोशिश की गई थी।

  • आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे

    आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे


    पुणे।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग (IAF fighter jet Hard Landing) के कारण आधी रात को पुणे एयरपोर्ट (Pune Airport) ही बंद करना पड़ गया। पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार की रात को इंडियन एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट की हार्ड लैंडिंग हुई. इसके कारण ही रनवे को बंद कर दिया गया। राहत की बात है कि पायलट सुरक्षित है और किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है।

    अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना का एक फाइटर जेट के हार्ड लैंडिंग से जुड़ी घटना के बाद शुक्रवार को पुणे एयरपोर्ट का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. उसने कहा कि रनवे को फिर से चालू करने के प्रयास जारी हैं।

    इंडियन एयरफोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘ भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण पुणे का रनवे अस्थायी रूप से बंद है. विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है.’ उसने कहा, ‘रनवे को फिर से चालू करने और जल्द से जल्द सामान्य परिचालन शुरू करने के प्रयास जारी हैं.’

    यह पुणे एयरपोर्ट यानी हवाई अड्डा ‘दोहरे उपयोग वाले मॉडल’ पर काम करता है. इसमें आम नागरिकों की कमर्शियल उड़ानों को एक सक्रिय वायु सेना स्टेशन के साथ जोड़ा जाता है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एक विमान की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी देने से मना कर दिया।

    पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार की रात करीब 10:25 बजे लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान का अंडरकैरिज (पहिए) खराब हो गया. इसके चलते हार्ड लैंडिंग हुई और फिर पूरा रनवे बंद हो गया. उन्होंने कहा, ‘भारतीय वायुसेना के ATC के अनुसार रनवे को साफ करने और सामान्य परिचालन बहाल करने में 4-5 घंटे लगेंगे.’


    केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा

    केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हवाई अड्डे पर रनवे का परिचालन रोके जाने की पुष्टि की. मुरलीधर मोहोल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘शुक्र है कि विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. एयरलाइंस को सूचित कर दिया गया है और रनवे पर सामान्य परिचालन बहाल करने में लगभग 5 घंटे लग सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं हवाई अड्डे के निदेशक और वायु सेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थिति जल्द से जल्द सुलझ जाए।

  • MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…

    MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने उज्जैन हवाई पट्टी (Ujjain airstrip) के विस्तार के लिए 590 करोड़ रुपये की लागत से 437 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। उड़ान योजना के तहत यहां बोइंग और एयरबस (Boeing and Airbus.) जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता किया गया है। उज्जैन एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है जहां प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) स्थित है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2,923 करोड़ रुपये के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी है जिन्हें दिवाली 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    उज्जैन हवाई पट्टी का होगा विकास
    एक अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत उज्जैन हवाई पट्टी के विकास के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता हुआ है ताकि यहां बोइंग और एयरबस 320 जैसे बड़े विमानों का संचालन हो सके। सरकारी हवाई पट्टी के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक समझौते और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।


    437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी

    अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। इसके लिए 590 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है।उज्जैन एक धार्मिक नगरी है। महाकालेश्वर मंदिर की वजह से यह पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उज्जैन में सांदीपनी आश्रम भी है।


    महाकुंभ के कामों को पूरा करने के लिए तय की डेडलाइन

    अधिकारी ने बताया कि उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से बहुत से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। उज्जैन सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता हुआ शहर है इसलिए यहां की हवाई पट्टी को सुधारना बहुत जरूरी है। सिंहस्थ मेले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी ने तय किया है कि साल 2028 के महाकुंभ से जुड़े सभी कामों को दिवाली 2027 तक पूरा कर लिया जाए।


    9 अप्रैल से गेहूं की खरीद

    कैबिनेट ने शिक्षा, खेती, सिंचाई, प्रशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली योजनाओं के लिए 16,720 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही कैबिनेट ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं की खरीद 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से ही शुरू करने की मंजूरी दे दी है।


    विकास कार्यों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

    वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट समिति की 5वीं बैठक में कहा कि बुनियादी ढांचे के सभी काम अच्छी क्वालिटी के साथ तय समय पर पूरे होने चाहिए। समिति ने 2,923.84 करोड़ रुपये के 22 कामों को मंजूरी दी। सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सिंहस्थ 2028 के कामों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए ताकि काम की गुणवत्ता पक्की हो सके।


    100 किलोमीटर के दायरे में होगे काम

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बन रहे भवनों का निर्माण ऐसा हो कि वे बाद में भी वार्षिक कार्यक्रमों के काम आ सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि महाकाल मंदिर और अन्य तीर्थों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कें बनाई जाएं। मुख्यमंत्री ने दूर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होमस्टे, पार्किंग और जन-सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने क्षिप्रा नदी पर पैदल चलने वालों के लिए एक अलग पुल बनाने का भी आदेश दिया।

  • 400 करोड़ का आधुनिक डुमना एयरपोर्ट, लेकिन जबलपुर में उड़ानों की कमी बनी चुनौती..

    400 करोड़ का आधुनिक डुमना एयरपोर्ट, लेकिन जबलपुर में उड़ानों की कमी बनी चुनौती..


    जबलपुर :डुमना एयरपोर्ट का विस्तार और आधुनिकीकरण पर केंद्र सरकार ने करीब 400 करोड़ रुपये खर्च किए हैं उम्मीद जताई गई थी कि इससे जबलपुर को देश के बड़े शहरों से सीधी और नियमित हवाई कनेक्टिविटी मिलेगी लेकिन हालात इसके उलट हैं अत्याधुनिक टर्मिनल और लंबा रनवे होने के बावजूद उड़ानों की संख्या अपेक्षाकृत कम बनी हुई है

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 में विस्तारित एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था और यात्रियों ने इससे नई उम्मीदें लगाईं लेकिन आज भी कई अहम रूट्स पर फ्लाइट न होने के कारण लोग ट्रेन या सड़क मार्ग पर निर्भर हैं इससे रोजाना सफर करने वाले यात्रियों में नाराजगी बढ़ रही है

    क्षमता बढ़ी है लेकिन कनेक्टिविटी अभी भी कम है विस्तार से पहले डुमना एयरपोर्ट का रनवे लगभग 1998 मीटर लंबा था जिसे अब बढ़ाकर 2750 मीटर कर दिया गया है टर्मिनल की क्षमता भी 150 यात्रियों से बढ़ाकर 800 यात्रियों तक पहुंचाई गई है अब एयरबस ए-320 जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं इसके बावजूद उड़ानों की संख्या में अपेक्षित इजाफा नहीं हुआ

    दूसरे शहरों से तुलना में जबलपुर पिछड़ गया है इंदौर से जहां 20 से ज्यादा शहरों के लिए 40-50 उड़ानें संचालित हो रही हैं वहीं भोपाल से भी दर्जनों फ्लाइट्स उपलब्ध हैं लेकिन संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद जबलपुर में सीमित उड़ानें यात्रियों की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हैंभोपाल और प्रयागराज के लिए सीधी उड़ानों की चर्चाएं पिछले वर्ष से जारी हैं और इन रूट्स पर मांग काफी अधिक है लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ इससे व्यापारियों छात्रों और धार्मिक यात्रियों को नुकसान हो रहा है

    एयरपोर्ट विस्तार से पहले दिल्ली मुंबई हैदराबाद इंदौर बेंगलुरु और पुणे के लिए रोजाना चार से आठ विमानों की आवाजाही थी लेकिन अब उड़ानों की संख्या छह से बढ़कर केवल सात तक ही सीमित है फिलहाल जबलपुर से दिल्ली मुंबई हैदराबाद इंदौर बेंगलुरु बिलासपुर और जगदलपुर के लिए फ्लाइट्स संचालित हो रही हैंएयरपोर्ट डायरेक्टर राजीव रत्न पांडे का कहना है कि एयरपोर्ट में अतिरिक्त उड़ानों को संभालने की पूरी क्षमता है लेकिन नए रूट शुरू करने के लिए शासन स्तर पर निर्णय लेना जरूरी है यात्रियों की बढ़ती उम्मीदों और एयरपोर्ट की क्षमताओं के बीच यह संतुलन अभी तक नहीं बन पाया है