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  • पति से तलाक के सालों बाद भी सिंदूर को लेकर सवालों में घिरीं रूपा गांगुली महाभारत की द्रौपदी ने साफ शब्दों में कही दिल की बात

    पति से तलाक के सालों बाद भी सिंदूर को लेकर सवालों में घिरीं रूपा गांगुली महाभारत की द्रौपदी ने साफ शब्दों में कही दिल की बात


    नई दिल्ली । बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाकर घर घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री और भाजपा विधायक रूपा गांगुली इन दिनों अपने सिंदूर लगाने को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनसे सवाल कर रहे हैं कि पति से अलग होने और वैवाहिक जीवन में बदलाव आने के बाद भी वह सिंदूर क्यों लगाती हैं। लगातार उठ रहे सवालों के बीच रूपा गांगुली ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है और इसके लिए उन्हें किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है। अभिनेत्री के इस बयान के बाद व्यक्तिगत पसंद और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है।

    सोनारपुर दक्षिण से विधायक रूपा गांगुली ने एक इंटरव्यू में सिंदूर लगाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि वह किस वजह से और किसके लिए सिंदूर लगाती हैं यह बताना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। उनका मानना है कि किसी महिला की व्यक्तिगत पसंद पर सवाल उठाकर उसे जवाब देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। रूपा ने अपने जवाब के जरिए यह स्पष्ट किया कि पहनावे और श्रृंगार से जुड़े फैसले किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी का हिस्सा हैं और दूसरे लोगों को उनके आधार पर किसी महिला के चरित्र या परिस्थितियों का आकलन नहीं करना चाहिए।

    रूपा गांगुली की निजी जिंदगी भी पहले चर्चा में रही है। उन्होंने वर्ष 1992 में मैकेनिकल इंजीनियर ध्रुव मुखोपाध्याय से शादी की थी। हालांकि समय के साथ उनके वैवाहिक रिश्ते में मुश्किलें आईं और वर्ष 2007 में दोनों का तलाक हो गया। अभिनेत्री ने पहले अपने वैवाहिक जीवन के बारे में बात करते हुए बताया था कि परिवार को संभालने के लिए उन्होंने अपने अभिनय करियर के साथ भी कई समझौते किए थे। उन्होंने शूटिंग का समय इस तरह निर्धारित करने की कोशिश की थी कि परिवार को भी पर्याप्त समय दे सकें। इसके बावजूद उनका रिश्ता कायम नहीं रह पाया।

    अभिनय की दुनिया में रूपा गांगुली को सबसे ज्यादा लोकप्रियता महाभारत में द्रौपदी की भूमिका से मिली। उनके अभिनय ने दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी और आज भी उन्हें इसी किरदार के लिए याद किया जाता है। टेलीविजन पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा। भाजपा से जुड़कर उन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालीं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। अभिनय और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उनकी पहचान ने उन्हें सार्वजनिक जीवन का चर्चित चेहरा बनाया है।

    रूपा गांगुली का मामला अकेला नहीं है जब किसी महिला के पहनावे या धार्मिक प्रतीकों को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद नुसरत जहां भी दुर्गा पूजा के दौरान सिंदूर खेला में शामिल होने को लेकर ऑनलाइन आलोचना का सामना कर चुकी हैं। पारंपरिक बंगाली साड़ी पहनने और सिंदूर लगाने के बाद उनकी धार्मिक पहचान को लेकर सवाल उठे थे। इस पर नुसरत ने कहा था कि त्योहार और परंपराएं व्यक्तिगत आस्था तथा पसंद से भी जुड़ी होती हैं और किसी को दूसरों की निजी पसंद पर अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

    रूपा गांगुली के बयान ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि किसी महिला को अपनी निजी जिंदगी और श्रृंगार के फैसलों के लिए समाज के सामने सफाई क्यों देनी चाहिए। वैवाहिक स्थिति चाहे जो भी हो किसी महिला की व्यक्तिगत पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए। सिंदूर लगाने या न लगाने का फैसला उसका अपना हो सकता है और उसे इसके लिए दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यही संदेश रूपा गांगुली के जवाब से सामने आता है।

  • मुख्यमंत्री पद पर शुभेंदु अधिकारी का नाम आगे, महिला डिप्टी सीएम के तौर पर रूपा गांगुली की संभावना

    मुख्यमंत्री पद पर शुभेंदु अधिकारी का नाम आगे, महिला डिप्टी सीएम के तौर पर रूपा गांगुली की संभावना

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव और संभावित सत्ता समीकरणों को लेकर सुर्खियों में आ गई है। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण मंथन जारी है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है, जबकि उपमुख्यमंत्री पद के लिए दो डिप्टी सीएम का फार्मूला अपनाया जा सकता है, जिसमें एक महिला और एक पुरुष उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे। महिला डिप्टी सीएम के रूप में अभिनेत्री से नेता बनीं रूपा गांगुली का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यह पूरा निर्णय संगठनात्मक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए लिया जा रहा है। उत्तर बंगाल और अन्य क्षेत्रों को भी सत्ता ढांचे में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है, ताकि राज्य के विभिन्न हिस्सों को राजनीतिक संतुलन में शामिल किया जा सके। सूत्रों के मुताबिक, संभावित मुख्यमंत्री अपने पास गृह विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय भी रख सकते हैं, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण और मजबूत किया जा सके।

    इसी बीच केंद्रीय नेतृत्व की सक्रिय भूमिका भी देखने को मिल रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा विधायक दल की बैठक में नए नेता के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी में राज्य के नए नेतृत्व की औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है। इसके बाद नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी भी तेज कर दी गई है, जो बेहद भव्य तरीके से आयोजित किए जाने की योजना में बताया जा रहा है।

    शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े नेताओं की उपस्थिति की संभावना भी राजनीतिक महत्व को और बढ़ा रही है। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि राज्य की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में शुभेंदु अधिकारी और रूपा गांगुली के नामों की चर्चा लगातार तेज बनी हुई है।

    कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल की सियासत इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है, जहां आने वाले कुछ घंटों में बड़े राजनीतिक फैसले राज्य की दिशा और दशा तय कर सकते हैं। सभी की निगाहें अब आधिकारिक घोषणा और उसके बाद बनने वाली नई सरकार की संरचना पर टिकी हुई हैं।