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  • भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह

    भारतीय बाजार में लौटा विदेशी निवेश का विश्वास, मजबूत अर्थव्यवस्था और स्थिर रुपया बने एफपीआई आकर्षण की बड़ी वजह


    नई दिल्ली । भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद, रुपए की अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति और निवेश से जुड़े नीतिगत सुधारों का असर अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर भी दिखाई देने लगा है। जुलाई के शुरुआती दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध निवेश किया है, जिससे घरेलू वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल बना है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की स्थिर आर्थिक स्थिति और सुधारवादी नीतियां वैश्विक निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत कर रही हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा डेट निवेश से जुड़े कर नियमों में किए गए बदलावों ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को अधिक आकर्षक बनाया है। इसके साथ ही रुपए में अपेक्षाकृत स्थिरता रहने से मुद्रा जोखिम कम हुआ है, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इन दोनों कारणों ने जुलाई के पहले दस दिनों में विदेशी निवेश प्रवाह को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    आंकड़ों के अनुसार विदेशी निवेशकों ने जुलाई की शुरुआत में शेयर और अन्य निवेश श्रेणियों में उल्लेखनीय निवेश किया है। इसके अलावा डेट मार्केट में भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशक केवल इक्विटी बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय ऋण बाजार में भी दीर्घकालिक संभावनाएं देख रहे हैं। इससे भारतीय वित्तीय बाजारों की मजबूती और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत मिलता है।

    आर्थिक जानकारों का कहना है कि भारत के मजबूत व्यापक आर्थिक संकेतक भी इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं। नियंत्रित महंगाई, बेहतर आर्थिक विकास दर, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने वैश्विक निवेशकों के बीच भारत की छवि को और मजबूत किया है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विदेशी निवेशक भारत को अपेक्षाकृत सुरक्षित और बेहतर निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक स्तर पर कुछ अन्य बाजारों में निवेश घटने का लाभ भी भारत को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव करते हुए ऐसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं जहां आर्थिक आधार मजबूत हो और भविष्य में बेहतर प्रतिफल की संभावना दिखाई देती हो। भारत इस समय ऐसे प्रमुख बाजारों में शामिल है, जहां विकास की संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं।

    हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी निवेशकों की चिंता का विषय बने हुए हैं। पश्चिम एशिया की परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का असर समय-समय पर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। इसके बावजूद यदि अंतरराष्ट्रीय हालात अधिक नहीं बिगड़ते हैं तो भारत में विदेशी निवेश का सकारात्मक रुख आगे भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, प्रमुख आर्थिक आंकड़े और वैश्विक घटनाक्रम निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। यदि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने रहते हैं और नीतिगत स्थिरता कायम रहती है, तो विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय पूंजी बाजार को मजबूती मिलेगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और देश की आर्थिक विकास यात्रा को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।