Tag: rural economy

  • जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर क्रांति: मक्का-धान छोड़ किसानों की बदलती आर्थिक तस्वीर..

    जम्मू-कश्मीर में लैवेंडर क्रांति: मक्का-धान छोड़ किसानों की बदलती आर्थिक तस्वीर..

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले का भदेरवाह क्षेत्र इन दिनों कृषि परिवर्तन की एक अनोखी कहानी लिख रहा है, जहां पारंपरिक मक्का और धान जैसी फसलों को छोड़कर किसान लैवेंडर की खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह क्षेत्र अब देशभर में “भारत की लैवेंडर राजधानी” के रूप में पहचान बना चुका है, जहां बैंगनी रंग के विशाल खेत न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहे हैं। कम पानी की आवश्यकता और अधिक लाभ देने वाली इस फसल ने किसानों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया है और कृषि को एक नई पहचान दी है।

    भदेरवाह के लेलरोट और टिपरी क्षेत्रों में इन दिनों लैवेंडर की कटाई का काम जोरों पर है। खेतों में फैले बैंगनी फूल वातावरण को सुगंधित और आकर्षक बना रहे हैं। किसान सावधानीपूर्वक फूलों की कटाई कर रहे हैं, जिन्हें आगे आवश्यक तेल, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं, जिससे न केवल किसान बल्कि ग्रामीण मजदूर भी लाभान्वित हो रहे हैं।

    इस क्षेत्र में लैवेंडर खेती की शुरुआत लगभग 2010 के आसपास एक वैज्ञानिक संस्थान की पहल से हुई थी, जब चुनिंदा किसानों को शुरुआती पौधे उपलब्ध कराए गए थे। बाद में सरकारी योजना के तहत इस पहल को व्यापक समर्थन मिला, जिसमें किसानों को प्रशिक्षण, रोपण सामग्री और आवश्यक तेल निकालने के लिए आसवन इकाइयों की सुविधा दी गई। इसी निरंतर सहयोग के परिणामस्वरूप आज भदेरवाह और आसपास के क्षेत्रों में हजारों किसान परिवार इस खेती से जुड़े हुए हैं और इसे अपनी आय का मुख्य स्रोत बना चुके हैं।

    स्थानीय किसान रोशन ने बताया कि पहले पारंपरिक खेती से परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था, लेकिन लैवेंडर ने उनकी आर्थिक स्थिति बदल दी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने शुरुआत में छोटी जमीन से खेती शुरू की थी, जो अब कई गुना बढ़ चुकी है और उनके साथ सैकड़ों किसान भी जुड़ चुके हैं। इसी तरह कुलदीप कुमार जैसे किसानों का कहना है कि जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान और कम मुनाफे के कारण पारंपरिक खेती कठिन हो गई थी, लेकिन लैवेंडर ने स्थायी आय का रास्ता खोल दिया है और साल में दो बार कटाई होने से नियमित आमदनी सुनिश्चित हो रही है।

    भदेरवाह में लैवेंडर खेती केवल एक कृषि बदलाव नहीं बल्कि ग्रामीण विकास का मॉडल बनकर उभरी है, जहां बंजर पड़ी जमीन भी अब उत्पादन का केंद्र बन रही है। सरकारी सहयोग और योजनाओं के चलते यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है। लगातार बढ़ती मांग और मूल्यवर्धित उत्पादों के बाजार ने इस फसल को और अधिक लाभकारी बना दिया है, जिससे किसानों का विश्वास इस दिशा में और मजबूत हुआ है।

    लैवेंडर खेती का यह विस्तार आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्धता बनी रही तो यह क्षेत्र देश में अरोमा आधारित कृषि का प्रमुख केंद्र बन सकता है और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है।

  • डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    डिजिटल कॉमर्स में बड़ा कदम: डिजीहाट का ‘स्वदेशी’ मार्केटप्लेस बदल सकता है खरीदारी का तरीका

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच एक नया बदलाव देखने को मिला है, जहां स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष मार्केटप्लेस की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य भारत में बने उत्पादों को एक संगठित डिजिटल मंच प्रदान करना है, ताकि छोटे कारीगरों, किसानों और स्थानीय उत्पादकों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ा जा सके।

    इस नए प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता अब बिना किसी मध्यस्थ के सीधे उन लोगों से खरीदारी कर सकेंगे, जो अपने हाथों से या स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करते हैं। इसमें रोजमर्रा की जरूरत के सामान से लेकर हस्तशिल्प, कपड़े, कृषि उत्पाद, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और कई अन्य श्रेणियां शामिल की गई हैं।

    इस पहल को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह न केवल स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच की दूरी को भी कम करता है। लंबे समय से यह समस्या देखी जा रही थी कि छोटे उत्पादक बड़े बाजारों तक अपनी पहुंच नहीं बना पाते थे, जिससे उनकी आय सीमित रह जाती थी।

    नए प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह सीधे उत्पादक और ग्राहक के बीच संबंध स्थापित करता है। इससे न केवल कीमतों में पारदर्शिता आती है, बल्कि उत्पादकों को उनके काम का उचित मूल्य भी मिल पाता है। यह व्यवस्था छोटे व्यापारियों और स्वयं सहायता समूहों के लिए भी नए अवसर पैदा कर रही है।

    इस प्रणाली से जुड़ने वाले कारीगरों और किसान समूहों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ग्रामीण भारत भी अब डिजिटल अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले जहां स्थानीय उत्पाद केवल सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंच पाते थे, अब वे देशभर के ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

    इस प्लेटफॉर्म को इस तरह तैयार किया गया है कि यह भविष्य में केवल एक खरीदारी मंच तक सीमित न रहे, बल्कि एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में विकसित हो सके। इसमें कई प्रकार की सेवाओं को जोड़ने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं को एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल से भारत की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी। छोटे उद्योगों को डिजिटल बाजार मिलने से उनकी पहुंच बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

    कुल मिलाकर, यह नया डिजिटल मार्केटप्लेस केवल एक तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि यह स्थानीय उत्पादन को सम्मान और पहचान देने का एक प्रयास है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय उत्पादों को न केवल देश में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान दिला सकती है।

  • कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और तकनीक आधारित बदलाव पर चर्चा, लखनऊ सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने बताया कृषि क्षेत्र का बदलता स्वरूप

    कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि और तकनीक आधारित बदलाव पर चर्चा, लखनऊ सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी ने बताया कृषि क्षेत्र का बदलता स्वरूप


    नई दिल्ली।लखनऊ में आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) के उद्घाटन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था में आए महत्वपूर्ण बदलावों और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है और यह परिवर्तन वैज्ञानिक तकनीकों, एग्रो क्लाइमेटिक जोन आधारित रणनीति तथा केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लैब टू लैंड की अवधारणा अब केवल एक नीति नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने वाला वास्तविक परिवर्तन बन चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि विकास दर में लगातार वृद्धि, प्रति हेक्टेयर उत्पादन में रिकॉर्ड सुधार, बहुफसली खेती का विस्तार और वैल्यू एडिशन पर बढ़ता ध्यान इस परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों का सशक्तीकरण, अंतरराष्ट्रीय कृषि संस्थानों की स्थापना और प्रगतिशील किसानों की भागीदारी ने इस बदलाव को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है और यह केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हुआ है।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि नीतियों को अलग अलग एग्रो क्लाइमेटिक जोन के अनुसार तैयार करना आवश्यक है क्योंकि हर क्षेत्र की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां अलग होती हैं। उन्होंने कहा कि जब इन क्षेत्रों में वैज्ञानिक गोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तो किसानों तक तकनीक तेजी से पहुंचती है और उत्पादन में सुधार होता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में आयोजित कृषि अभियानों के दौरान किसानों और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित हुआ है, जिससे नई तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया तेज हुई है।

    मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कृषि विज्ञान केंद्र सीमित और लगभग निष्क्रिय स्थिति में थे, लेकिन आज सभी केंद्र सक्रिय होकर नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्र सरकार के सहयोग से नए केंद्रों की स्थापना और पुराने केंद्रों के सशक्तीकरण के बाद अब वैज्ञानिक सीधे किसानों के खेतों में जाकर तकनीक का प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे अनुसंधान और व्यावहारिक खेती के बीच की दूरी काफी कम हो गई है।

    उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर लगभग आठ प्रतिशत से बढ़कर अठारह प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे मूल्य संवर्धन और उद्योग से जोड़ना आवश्यक है ताकि किसानों की आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

    मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कृषि संस्थानों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और कहा कि इनके माध्यम से नई किस्मों का विकास और तकनीकी नवाचार तेजी से हो रहा है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में उपयुक्त फसलों का चयन आसान हुआ है और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में धान का उत्पादन पहले की तुलना में लगभग दोगुना हो गया है और कुछ स्थानों पर यह सौ कुंतल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

    उन्होंने प्राकृतिक खेती, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और गुणवत्तापूर्ण बीज की समय पर उपलब्धता पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को जानकारी, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने यह भी बताया कि अब किसान तीन फसल तक उत्पादन कर रहे हैं और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभव और आधुनिक तकनीक के संयोजन से कम लागत में अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में मजबूत आधार के साथ आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में इसके परिणाम और अधिक प्रभावी रूप में दिखाई देंगे।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत


    भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर सीएम ने पीएम मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। पीएम मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया।

    सीएम डॉ. यादव ने कहा “प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के बताए मार्ग के अनुसार चार श्रेणियों किसान महिला गरीब और युवा के लिए काम कर रही है। करीब 16 विभागों को जोड़कर कृषि पशुपालन मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अच्छी पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे काम को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया है।

    नई दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने संसद भवन का भ्रमण भी किया और विभिन्न सांसदों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश के विकास केंद्र राज्य समन्वय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में विकास कार्यों को और गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।  सीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वय से प्रदेश में निवेश रोजगार और किसान कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल होंगी।

  • मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

    मप्र में खेती बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़, टमाटर कर रहा किसानों को समृद्ध

     अब यह सिर्फ जीवन-यापन का साधन नहीं रही है, राज्‍य में खेती करना मतलब किसानों की समृद्धि, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन बनना है। खासतौर पर टमाटर की खेती ने प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

    निरंतर बढ़ते रकबे, रिकॉर्ड उत्पादन, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज देश का सबसे बड़ा टमाटर उत्पादक राज्य बनकर मप्र उभरा है। दिसंबर 2025 के संदर्भ में देखें तो मध्य प्रदेश सब्जी उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर अपनी स्थिति और मजबूत कर चुका है। प्रदेश में अब लगभग 13 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सब्जियों की खेती हो रही है, जिसमें टमाटर का योगदान सबसे अधिक है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत तक टमाटर की खेती का रकबा बढ़कर करीब 1 लाख 35 हजार हेक्टेयर के आसपास पहुँच चुका था। अनुमान है कि इससे 38 से 40 लाख मीट्रिक टन तक टमाटर उत्पादन हो रहा है, जोकि देश की कुल सब्जी आपूर्ति में मध्य प्रदेश की अहम भूमिका को दर्शाता है। इसके साथ ही स्‍वभाविक तौर पर दिसम्‍बर तक उत्‍पादन का आंकड़ा ओर ऊपर गया है। पिछले पाँच वर्षों में टमाटर के रकबे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहाँ टमाटर की खेती लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर में होती थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा लगभग 25 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी के साथ नए रिकॉर्ड पर पहुँच गया है। यह विस्तार सिर्फ क्षेत्रफल तक सीमित नहीं रहा है गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार में विश्वसनीयता का भी प्रमाण है।

    उल्‍लेखनीय है कि प्रदेश के टमाटर की मांग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा दिल्ली-एनसीआर, गुजरात और पूर्वी भारत के कई बड़े मंडी केंद्रों तक है। ताजगी, बेहतर आकार, लंबी शेल्फ लाइफ और स्वाद के कारण मध्य प्रदेश का टमाटर थोक व्यापारियों और प्रोसेसिंग उद्योगों की पहली पसंद बन गया है। उत्पादकता के मामले में भी राज्‍य ने अच्‍छी प्रगति की है। दिसंबर 2025 तक टमाटर की औसत उत्पादकता लगभग 29 से 30 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई है, जोकि प्रदेश की औसत उद्यानिकी उत्पादकता से लगभग दोगुनी है। यह सफलता उन्नत बीजों, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई तथा समय पर तकनीकी मार्गदर्शन का परिणाम है।

    प्रदेश में कुल उद्यानिकी फसलों का रकबा अब लगभग 27 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गया है, जिसमें सब्जियों का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। टमाटर के साथ-साथ धनिया और लहसुन के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश दिसंबर 2025 तक देश में प्रथम स्थान बनाए हुए है। इससे राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बहुआयामी मजबूती मिली है। राज्य सरकार की योजनाओं ने इस परिवर्तन में निर्णायक भूमिका निभाई है। टमाटर के प्रमाणित बीजों पर 50 प्रतिशत तक अनुदान, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में सब्सिडी, फसल बीमा और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन ने किसानों का जोखिम कम किया है। साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के तहत टमाटर आधारित प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या भी 2025 तक तेजी से बढ़ी है।

    अनूपपुर जिला इस सफलता की जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। दिसंबर 2025 तक जिले में लगभग 16 हजार किसान टमाटर की खेती से जुड़े हैं और उत्पादन 1.5 लाख मीट्रिक टन के करीब पहुँच गया है। जैतहरी, अनूपपुर और पुष्पराजगढ़ के क्लस्टरों से टमाटर अब मध्यप्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बड़े बाजारों में भेजा जा रहा है। किसानों की आमदनी में भी बड़ा बदलाव आया है। जहाँ पहले पारंपरिक फसलों से सीमित आय होती थी, वहीं अब टमाटर की खेती से प्रति एकड़ औसतन 80 हजार से एक लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ संभव हो रहा है। महिला किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है।

    कृषि विशेषज्ञों का इस संबंध में मानना है कि यदि दिसंबर 2025 के बाद कोल्ड स्टोरेज, परिवहन, निर्यात और बड़े स्तर के प्रसंस्करण ढांचे को और सशक्त किया जाए, तो मध्य प्रदेश न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टमाटर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इस तरह देखें तो दिसंबर 2025 में टमाटर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए ‘लाल सोना’ साबित हुआ है, जिसने उनकी आय, आत्मविश्वास और भविष्य तीनों को नई दिशा दी है।