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  • राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा

    राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा


    नई दिल्ली । 
    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय के नए सभागार में इस दस्तावेज को जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का वादा किया। संकल्प पत्र में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी सामान्य जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

    संकल्प पत्र जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों तक पहुंचने की मजबूरी कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करने को पार्टी ने अपने विकास संबंधी वादों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

    भजनलाल शर्मा ने गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों का विस्तार हुआ है और कई जगह उनका दायरा 40 से 50 किलोमीटर तक बढ़ गया है। ऐसे में शहरों के भीतर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो ग्रामीणों को 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करके शहरों तक आने की जरूरत कम होगी। इससे वे अपने गांव में रहते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    संकल्प पत्र में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता से जुड़े दूरी के मानकों पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या, उनके बीच निर्धारित दूरी तथा स्थापना की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ग्रामीण युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने पंचायत स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने की बात रखी है।

    संकल्प पत्र जारी होने से पहले कार्यक्रम के मंच पर एक अप्रत्याशित घटना भी हुई। संगठन महामंत्री अजेय कुमार का स्वागत करने के लिए पहुंचे सोशल मीडिया संयोजक हीरेन कौशिक अचानक फिसलकर नीचे गिर गए। इस घटना से मंच पर मौजूद लोग कुछ समय के लिए चौंक गए। इसके बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। घटना के बाद हीरेन कौशिक ने संगठन महामंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह प्रभारी कुलदीप चहल और कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को केंद्र में रखा गया है। इन वादों के साथ गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और शहरों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इन घोषणाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समयसीमा की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

  • Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल

    Gas Cylinder Booking: एलपीजी आपूर्ति सुधरने पर ग्रामीण ग्राहकों को राहत, शहरी उपभोक्ताओं के बराबर हुआ बुकिंग अंतराल


    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंतराल को घटाकर 25 दिन कर दिया है। नए नियम के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ता समान समय अंतराल पर अगला रिफिल बुक करा सकेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति में सुधार और लंबित रिफिल बुकिंग में कमी आने के बाद प्रतिबंधों में ढील दिए जाने की जानकारी दी। सरकार के अनुसार, मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार होने के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए पहले निर्धारित 45 दिन की अवधि को कम किया गया है।

    इससे पहले ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव के दौरान ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू थी। शहरी क्षेत्रों में घरेलू एलपीजी ग्राहक 25 दिन के अंतराल पर रिफिल बुक कर सकते थे, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में अगली बुकिंग के लिए 45 दिन का अंतराल निर्धारित किया गया था। अब यह अंतर समाप्त कर दिया गया है।

    सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के बीच घरेलू मांग पूरी करने और उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर निगरानी और नियंत्रणात्मक उपाय किए थे।

    अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग तथा आपूर्ति संबंधी व्यवधान के दौरान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा था। इसका असर एलपीजी की उपलब्धता पर भी पड़ा था। संभावित कमी को देखते हुए घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरत को प्राथमिकता देने के लिए सरकार ने रिफिल बुकिंग और आपूर्ति से जुड़े कुछ प्रतिबंध लागू किए थे।

    अब आपूर्ति व्यवस्था में सुधार आने के बाद ग्रामीण उपभोक्ताओं को भी शहरी ग्राहकों के समान 25 दिन के अंतराल पर सिलेंडर बुक करने की अनुमति मिल गई है। इससे विशेष रूप से उन ग्रामीण परिवारों को सुविधा मिलने की उम्मीद है जिनकी घरेलू एलपीजी खपत अपेक्षाकृत अधिक है और जिन्हें पहले अगली बुकिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों को संशोधित व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के लिए रिफिल बुकिंग प्रक्रिया को सामान्य करना और एलपीजी की बेहतर उपलब्धता का लाभ सीधे घरेलू ग्राहकों तक पहुंचाना है।

    सरकार ने इससे पहले वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति पर लगाए गए प्रतिबंधों में भी चरणबद्ध तरीके से राहत दी थी। जून में गैर-घरेलू पैक्ड एलपीजी की आपूर्ति को संघर्ष-पूर्व स्तरों के अनुरूप सामान्य करने के निर्देश दिए गए थे। इससे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध कराने की दिशा में राहत मिली।

    ऊर्जा संकट के दौरान व्यावसायिक गतिविधियों पर असर कम करने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को संकट से पहले की खपत के 50 प्रतिशत तक बहाल करने की अनुमति भी दी गई थी। बाद में आपूर्ति की स्थिति में सुधार के साथ प्रतिबंधों में और ढील दी गई।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के उपाय किए थे। अब ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन की रिफिल बुकिंग व्यवस्था लागू होने से देशभर में घरेलू एलपीजी ग्राहकों के लिए नियम अधिक समान हो गया है।

  • जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल

    जबलपुर के गांवों में मगरमच्छों की धूप सेंकने की घटना से मची दहशतवन विभाग की टीम की ढिलाई पर सवाल


    जबलपुर । इन दिनों जबलपुर में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने न केवल मानव जीवन को प्रभावित किया हैबल्कि वन्य प्राणियों के लिए भी समस्याएं पैदा कर दी हैं। जलचर प्राणीविशेष रूप से मगरमच्छठंड से राहत पाने के लिए धूप सेंकने की आदत बना रहे हैं। यह अद्भुत दृश्य जबलपुर जिले के परियट जलाशय से लगे गांवों में देखा जा रहा मटामरघानारिठौरीपिपरिया और आसपास की कालोनियों में मगरमच्छों का आना बढ़ गया हैजिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया है।

    परियट जलाशय मगरमच्छों के लिए एक प्राकृतिक निवास स्थान बन चुका है। इस क्षेत्र में लगभग 1000 मगरमच्छ रहते हैंऔर इनकी संख्या समय के साथ बढ़ी है। ये जलचरजो आमतौर पर जल में रहते हैंअब ठंड से बचने के लिए धूप में आराम करने निकल आते हैं। परियट नदी में मगरमच्छों की अधिकता के कारण वे शिकार की तलाश में और अपने निवास स्थान से बाहर भी भटकने लगे हैं। अब ये मगरमच्छ गांवों के नजदीक आकर मानव बस्तियों तक पहुंच रहे हैंजो लोगों के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

    इन मगरमच्छों ने पहले कुछ पालतू जानवरों पर हमले किए हैंजिनमें श्वान और मवेशी शामिल हैं। हालांकिअभी तक किसी मनुष्य पर हमला नहीं हुआ हैलेकिन स्थानीय लोग इस खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं। कई बार गांवों के सरपंचों ने वन विभाग से इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अपील की हैलेकिन वन विभाग की टीम की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वे केवल रेस्क्यू का आश्वासन देकर अपना काम निपटा लेते हैंजबकि समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

    वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे जल्द ही इस स्थिति से निपटने के लिए कदम उठाएंगेलेकिन अब तक इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। इस खतरनाक स्थिति में वन विभाग की ढिलाई पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गयातो यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

    मगरमच्छों के बढ़ते खतरे को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दखल की वजह से इनका प्राकृतिक निवास क्षेत्र घटता जा रहा हैजिसके कारण वे रहवासी इलाकों में घुसने लगे हैं। इस समस्या का समाधान वन विभाग के समुचित और तत्काल प्रयासों में हैलेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग जल्द इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाएगा