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  • गांवों के विकास से मजबूत होगा विकसित भारत का सपना, केशव मौर्य ने पंचायतों को बनाया भविष्य की प्रगति का आधार

    गांवों के विकास से मजबूत होगा विकसित भारत का सपना, केशव मौर्य ने पंचायतों को बनाया भविष्य की प्रगति का आधार

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि गांवों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है और मजबूत एवं विकसित पंचायतों के बिना विकसित भारत की कल्पना पूरी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारत, उत्तर प्रदेश और पूरे उत्तर भारत के विकास का है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

    वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित पंच सम्मेलन को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को देश की प्रगति का आधार बताया। यह सम्मेलन ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों को गांवों को आत्मनिर्भर और सुविधाओं से संपन्न बनाने की दिशा में काम करने का संदेश दिया गया।

    केशव मौर्य ने कहा कि सरकार की ग्रामीण विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना भी है। उन्होंने कहा कि विकसित पंचायतों की अवधारणा के तहत योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को गति मिल सके।

    उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन व्यवस्था, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों से बड़ी संख्या में लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की नीतियों के कारण करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकलने का अवसर मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार हुआ है।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित उत्तर प्रदेश ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति, नक्सलवाद पर नियंत्रण और अन्य बड़े फैसलों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि विकास के साथ-साथ सुरक्षा और सुशासन भी किसी भी क्षेत्र की प्रगति के लिए जरूरी है।

    सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने भी ग्रामीण विकास को देश के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि भारत की बड़ी आबादी गांवों में निवास करती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों का विकास राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विकसित पंचायतों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

    कमलेश पासवान ने कहा कि ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के प्रमुख मंत्रालयों में शामिल है और आने वाले 25 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने, ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और सरस मेलों जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

    कार्यक्रम के दौरान काशी के विकास का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, बेहतर सड़क सुविधाओं और हवाई संपर्क में सुधार के कारण यहां पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि शहरों के साथ-साथ गांवों का विकास भी समान गति से होना जरूरी है, तभी प्रदेश और देश समग्र विकास के लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।

  • मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा

    मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी की भूमि पर वर्षों से काबिज लाखों परिवारों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री कराने में सुविधा मिलेगी और उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का वैधानिक स्वामित्व दिलाना है ताकि भविष्य में वे अपनी संपत्ति का कानूनी उपयोग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर पूरी तरह माफ करने का फैसला भी लागू कर दिया है। इन सभी रियायतों का वित्तीय भार सरकार स्वयं उठाएगी। अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ेगा।

    पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उप पंजीयक कार्यालय ही नहीं बल्कि तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रदेश में मौजूद सीमित संख्या वाले उप पंजीयक कार्यालयों पर दबाव कम होगा और ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्री की सुविधा मिल जाएगी।

    सरकार का मानना है कि जब ग्रामीणों के नाम पर भूमि का विधिवत पंजीयन हो जाएगा तो उन्हें बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसका उपयोग वे मकान निर्माण छोटे व्यवसाय कृषि कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक आयुक्त कोष एवं लेखा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति समय समय पर योजना की समीक्षा करेगी दिशा निर्देश जारी करेगी और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी।

    सरकार ने योजना के प्रचार प्रसार जनजागरूकता और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े परिपत्र जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अधिकार दिया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके।

    इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त रजिस्ट्री और स्थानीय स्तर पर पंजीयन की सुविधा मिलने से लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

    English Tags:
    MadhyaPradesh, SwamitvaYojana, PropertyRights, LandRegistration, RuralDevelopment

  • मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप

    मनरेगा की जगह अब आएगा 'G Ram G'125 दिन रोजगार की गारंटी वाला नया बिल संसद में पेश होगाBJP ने जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने की योजना बनाई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम मनरेगा के स्थान पर एक नया विधेयक लाने की तैयारी हैजिसे ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण 2025’ नाम दिया गया है। इस विधेयक को संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाएगा। इस नए बिल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के लिए एक नया और अधिक मजबूत ढांचा तैयार करना हैजो गरीब और पिछड़े समुदायों के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सके।

    मनरेगा की जगह VB-G RAM G

    मनरेगा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को ग्रामीण भारत में रोजगार की स्थिरता देने वाला एक महत्वपूर्ण कानून माना जाता है। यह कानून ग्रामीण इलाकों के बेरोजगारों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया कराता है। हालांकियह योजना कई मायनों में विफल रही है और सरकार ने अब इसे बदलने का निर्णय लिया है। नए विधेयक का मकसद रोजगार की गारंटी को बढ़ाकर 125 दिनों तक करना है और इसके जरिए ग्रामीण इलाकों में नई रोजगार योजनाओं को लागू करना है।

    क्या है VB-G RAM G का उद्देश्य

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और जीवन यापन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक न केवल रोजगार की गारंटी देगाबल्कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार के विकल्प भी पैदा होंगे। इसके अलावायह योजनाएं ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार करनेग्रामीण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और महिलाओं तथा युवा वर्ग को रोजगार में अधिक शामिल करने पर भी ध्यान केंद्रित करेंगी।

    125 दिन रोजगार की गारंटी

    VB-G RAM G के तहतसरकार अब ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिन का रोजगार देने का वादा कर रही है। इससे पहले मनरेगा में 100 दिन तक रोजगार की गारंटी दी जाती थी। यह कदम सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्थिर रोजगार और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया है। इसके तहत ग्रामीण कामकाजी वर्ग को लंबे समय तक रोजगार प्राप्त होगाजिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    BJP ने जारी किया व्हिप

    सूत्रों के मुताबिककेंद्र सरकार ने अपने विधायकों और सांसदों को इस विधेयक के पक्ष में मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है। भाजपा ने सुनिश्चित किया है कि इस विधेयक के समर्थन में पूरी पार्टी एकजुट रहेताकि इसे संसद में जल्दी से पास किया जा सके। पार्टी का मानना है कि यह नया विधेयक ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।

    नए विधेयक की संभावित विशेषताएं

    125 दिन रोजगार की गारंटी: यह मनरेगा से एक कदम आगे होगाजहां ग्रामीण श्रमिकों को 125 दिन तक काम मिल सकेगा। स्वरोजगार को बढ़ावा: इस विधेयक में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाएं बनाई जाएंगी। ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार: इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करने का भी प्रस्ताव हैजिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। महिलाओं और युवाओं को प्राथमिकता: महिलाओं और युवाओं के लिए विशेष रोजगार अवसर दिए जाएंगे। नई परियोजनाओं की शुरुआत: ग्रामीण विकासजल संरक्षणशिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

    क्या होगा मनरेगा के स्थान पर

    मनरेगा को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगाबल्कि इसे नए विधेयक के तहत अपडेट किया जाएगा। जहां मनरेगा में मुख्य रूप से फिजिकल कामों पर ध्यान केंद्रित किया गया थावहीं VB-G RAM G का उद्देश्य रोजगार के अवसरों को और विस्तारित करना हैताकि अधिक से अधिक लोगों को फायदा हो सके।

    आखिरकारइस विधेयक का क्या असर होगा

    ‘VB-G RAM G’ विधेयक के लागू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिरता में सुधार होगा और श्रमिकों को अधिक काम मिलेगा। इससे न केवल गांवों में आर्थिक सुधार होगाबल्कि यह राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने के लिए उठाया गया एक बड़ा कदम हैऔर यह देश के किसानों और श्रमिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हालांकिइसे लेकर विपक्ष में विभिन्न विचार हो सकते हैंलेकिन इसे ग्रामीण विकास और रोजगार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।