Tag: Russia Iran intelligence

  • रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम

    रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘थोड़ा दबाव कम करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रंप ने यह बयान एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।

    स्थिति जल्द सामान्य होगी: ट्रंप

    ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम करने के और कदम उठा सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है और अमेरिका के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह निर्णय वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी कमी को दूर करने के लिए लिया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में संकट

    खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। यह मार्ग तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात मध्य पूर्व से करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी मोहलत दी है।

    ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और भारत की सुरक्षा

    अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की मोहलत, मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाए गए अल्पकालिक उपायों का हिस्सा है।

    भारतीय अधिकारियों के अनुसार, देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है और वर्तमान में पर्याप्त एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की उपलब्धता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत को विभिन्न स्रोतों से पहले से अधिक ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संभावित बाधाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

    रूसी तेल का बढ़ता हिस्सा

    भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। 2022 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन फरवरी 2026 में यह लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया।

    ईरान पर सैन्य अभियान: ट्रंप का दावा

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के पूरे नेतृत्व का सफाया कर दिया है और इसे पृथ्वी से एक बड़े ‘कैंसर’ को हटाने जैसा बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ईरान में कुछ समय तक जारी रहेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना के 44 जहाजों, सभी विमान और अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। साथ ही मिसाइल निर्माण के क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण उनकी ड्रोन क्षमता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लगभग हर स्तर पर सफाया कर दिया गया है।

  • रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं

    रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शनिवार को उन रिपोर्टों को कम महत्व दिया, जिनमें कहा गया कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया जानकारी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ भी है, तो इससे ईरान को कोई खास लाभ नहीं हो रहा। यह टिप्पणी उन्होंने एयर फोर्स वन से मियामी के लिए रवाना होते समय की।

    अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह रिजर्व सैनिक मारे गए।

    राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस द्वारा ईरान को लक्ष्य संबंधी जानकारी देने के ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे युद्ध की दिशा पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    रूस और अमेरिका संबंधों पर सवाल टाले

    जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो अमेरिका-रूस संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि “हम भी उनके खिलाफ वैसा ही कर सकते हैं।” उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता दे रहा है ताकि वह रूस के हमलों से बच सके।

    तेल बाजार पर युद्ध का असर

    पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार Hormuz Strait से रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके आवागमन में रुकावट आई है। ईरान के जवाबी हमलों और क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिससे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

    रणनीतिक तेल भंडार पर ट्रंप का रुख

    तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार में पिछले महीने के अंत तक लगभग 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जबकि इसकी कुल क्षमता 70 करोड़ बैरल से अधिक है। ट्रंप ने कहा कि देश में पर्याप्त तेल है और बाजार में आपूर्ति जल्दी सामान्य हो सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी

    मिडिल ईस्ट तनाव में रूस की एंट्री! ईरान को दी अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस अब खुलकर ईरान के समर्थन में सामने आता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने ईरान को ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है, जिससे उसे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों, युद्धपोतों और विमानों को निशाना बनाने में मदद मिल सकती है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार, दो अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि रूस ने तेहरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और संपत्तियों से जुड़ी अहम जानकारी साझा की है। इससे ईरान को अमेरिका की सैन्य तैनाती को समझने और संभावित हमले की रणनीति बनाने में मदद मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह पहला संकेत है कि मॉस्को उस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिसे अमेरिका और इजरायल ने हाल ही में ईरान के खिलाफ शुरू किया है।

    दरअसल, रूस और ईरान के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में और मजबूत हुए हैं। यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को मिसाइलों और ड्रोन की जरूरत पड़ी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ा। वहीं ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह, हमास और हूती जैसे समूहों के समर्थन के कारण लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है, ऐसे में रूस का समर्थन उसके लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत
    इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत भी की। इस दौरान उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और हमलों में आम नागरिकों की जान जाने पर दुख जताया। युद्ध शुरू होने के बाद क्रेमलिन की ओर से ईरान को किया गया यह पहला आधिकारिक फोन कॉल था।

    पुतिन ने बातचीत में तनाव खत्म करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट से जुड़े मुद्दों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

    अमेरिका की प्रतिक्रिया
    रूस द्वारा ईरान को खुफिया जानकारी दिए जाने की खबरों पर अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इससे उनके सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन जारी रहेंगे और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल किया जाएगा।

    ईरान के लगातार हमले
    वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका और इजरायल जहां ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अब तक इजरायल समेत करीब 12 देशों में सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन, इराक, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब, साइप्रस, सीरिया और अजरबैजान शामिल हैं। इन हमलों में ईरान ने खोर्रमशहर-4, खेबर और फतेह जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। यह भी बताया जा रहा है कि इजरायल पर दागी गई कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगे थे।

    हालांकि, अब बड़ा सवाल यह है कि बढ़ते दबाव और हमलों के बीच ईरान अपने रुख में नरमी दिखाएगा या टकराव और बढ़ेगा। फिलहाल ईरान के रुख से ऐसा संकेत नहीं मिल रहा कि वह पीछे हटने को तैयार है।