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  • भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, जेलेंस्की ने अमेरिका के फैसले का किया खुलकर समर्थन

    भारत पर 100% टैरिफ का रास्ता साफ, जेलेंस्की ने अमेरिका के फैसले का किया खुलकर समर्थन


    नई दिल्ली । अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का रास्ता साफ होने के बाद भारत से जुड़ी इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Lindsey O Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया है। इस कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को दिया गया है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं। हालांकि अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू हो चुका है। कानून अमेरिकी प्रशासन को ऐसा कदम उठाने का अधिकार देता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी कदम का समर्थन किया है। न्यूयॉर्क में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात के दौरान जेलेंस्की ने रूस पर दबाव बढ़ाने वाले इस कानून को लेकर आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम युद्ध को खत्म करने और शांति तथा सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। जेलेंस्की की प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब अमेरिका रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए अलग अलग आर्थिक उपायों पर जोर दे रहा है।

    इस कानून का मुख्य निशाना रूस है। इसमें रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को मजबूत करने के साथ उसके ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े कारोबार पर दबाव बढ़ाने का प्रावधान है। कानून के तहत रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर भी टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 18 सितंबर को इस पर हस्ताक्षर किए। व्हाइट हाउस के अनुसार कानून रूस के खिलाफ वैधानिक प्रतिबंधों और टैरिफ संबंधी अधिकारों का विस्तार करता है।

    भारत के लिए इस कानून का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कई देशों से कच्चा तेल खरीदता है और रूस भी इसमें महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 में भारत का रूस से तेल आयात करीब 16.5 फीसदी घटकर लगभग 21 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। इसके बावजूद रूस भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

    अमेरिका का तर्क है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाकर मॉस्को पर यूक्रेन युद्ध को लेकर दबाव बनाया जा सकता है। वहीं भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। भारतीय पक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि ऐसे अमेरिकी कदमों का असर भारत अमेरिका संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश की ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएंगे।

    इस घटनाक्रम में अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि अमेरिकी प्रशासन कानून में मिले अधिकारों का इस्तेमाल किस तरह करता है। फिलहाल कानून लागू हो चुका है लेकिन भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। इसलिए आने वाले दिनों में अमेरिकी प्रशासन के फैसले और भारत की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। साथ ही इसका असर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ सकता है।

  • होर्मुज संकट के बीच तेल बाजार में बढ़ा तनाव, रूस-अमेरिका से आई दो बड़ी खबरों ने बढ़ाई चिंता

    होर्मुज संकट के बीच तेल बाजार में बढ़ा तनाव, रूस-अमेरिका से आई दो बड़ी खबरों ने बढ़ाई चिंता



    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे तनाव के कारण दबाव में है, और अब दो नई घटनाओं ने स्थिति और गंभीर कर दी है। एक तरफ अमेरिका ने रूस के कच्चे तेल पर दी गई अस्थायी छूट (waiver) को समाप्त कर दिया है, तो दूसरी ओर रूस के रियाज़ान शहर में यूक्रेनी ड्रोन हमले ने एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाया है।

    अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले के बाद अब रूस से तेल खरीदने पर पहले जैसी राहत कई देशों को नहीं मिलेगी। मार्च और अप्रैल में दी गई सीमित छूट केवल पहले से लदे टैंकरों तक ही सीमित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है।

    दूसरी ओर रूस के रियाज़ान में हुए ड्रोन हमले में एक बड़ी रॉसनेफ्ट रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे भीषण आग लग गई। इस घटना में कम से कम चार लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। यह रिफाइनरी सालाना करोड़ों टन कच्चा तेल प्रोसेस करती है, जिससे इसकी क्षति को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और सैटेलाइट इमेज में आग और धुएं का विशाल गुबार देखा गया, जिसने तेल बाजार को और अधिक अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत समेत कई तेल-आयातक देशों पर दबाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक सप्लाई पहले से ही सीमित और अस्थिर बनी हुई है।